📍चेन्नई/नई दिल्ली | 28 Feb, 2026, 11:30 AM
INS Anjadip: भारतीय नौसेना ने 2026 में अपने पहले शिप को कमीशन किया। डॉल्फिन हंटर के नाम से मशहूर स्वदेशी रूप से तैयार युद्धपोत आईएनएस अंजदीप को चेन्नई में आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल किया गया। यह जहाज एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जिसे खास तौर पर समुद्र में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। नौसेना प्रमुख ने इस मौके पर कहा कि यह जहाज भारत की समुद्री ताकत को और मजबूत करेगा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है।
INS Anjadip: भारत का समुद्र से पुराना रिश्ता
इस समारोह के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि चेन्नई का यह ऐतिहासिक कोरमंडल तट भारत की समुद्री विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि करीब एक हजार साल पहले चोल साम्राज्य ने इसी तट से समुद्री यात्राएं शुरू की थीं। इससे साफ होता है कि भारत का समुद्र से रिश्ता बहुत पुराना और मजबूत रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि भारत हमेशा से एक समुद्री सभ्यता रहा है और आज देश की सुरक्षा और तरक्की समुद्र से जुड़ी हुई है। (INS Anjadip)
पेट्या क्लास कॉर्वेट की जगह लेगा अंजदीप
आईएनएस अंजदीप पेट्या क्लास कॉर्वेट का आधुनिक उत्तराधिकारी है, जिसने 1972 से 2003 तक देश की सेवा की थी। यह नया जहाज उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है। इसके नाम का भी खास महत्व है, क्योंकि अंजदीप एक द्वीप का नाम है, जो 1961 में गोवा मुक्ति अभियान के दौरान नौसेना की कार्रवाई का गवाह रहा था। इसी वजह से इस जहाज के नाम में बहादुरी और देशभक्ति की भावना जुड़ी हुई है। (INS Anjadip)
हिंद महासागर क्षेत्र का बढ़ता महत्व
नौसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं सदी को समुद्री सदी माना जा रहा है और इसमें हिंद महासागर क्षेत्र की भूमिका बहुत अहम है। इस क्षेत्र में दुनिया की करीब 40 प्रतिशत आबादी रहती है और यहां से हर साल बड़ी संख्या में जहाज गुजरते हैं। दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा, कंटेनर ट्रैफिक और व्यापार इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र की सुरक्षा बहुत जरूरी हो जाती है। (INS Anjadip)
INS Anjadip, the Indian Navy’s 4th indigenously designed Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft, joins the fleet — strengthening coastal defence and under-sea warfare capability.
A clear signal of India’s growing maritime power and Aatmanirbharta in defence.#INSAnjadip…— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) February 27, 2026
रेड सी संकट और होरमुज जलडमरूमध्य का किया जिक्र
एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी बताया कि आज के समय में समुद्र से जुड़े खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। सतह, समुद्र के नीचे और हवा, तीनों क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। कई बार जमीन पर होने वाले तनाव भी समुद्र तक पहुंच जाते हैं। ऐसे माहौल में छोटी सी घटना भी बड़े असर डाल सकती है। उन्होंने रेड सी संकट और होरमुज जलडमरूमध्य की स्थिति का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक जगह पर परेशानी होने से पूरी दुनिया के व्यापार और तेल की कीमतों पर असर पड़ता है। (INS Anjadip)
नेवी ने की 400 व्यापारिक जहाजों की मदद
नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में लगातार अपनी भूमिका निभा रही है। अक्टूबर 2023 से अब तक नौसेना ने रेड सी क्षेत्र में करीब 400 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में मदद की है। इन जहाजों में करोड़ों टन तेल और सामान था, जिसकी कीमत अरबों डॉलर में है। इसके अलावा भारतीय नौसेना अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ मिलकर भी काम कर रही है, जिससे समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। (INS Anjadip)
तेजी से बढ़ रही नौसेना की ताकत
उन्होंने हाल ही में विशाखापत्तनम में हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलन एक्सरसाइज का भी जिक्र किया, जिसमें कई देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया। यह भारत की बढ़ती समुद्री साझेदारी और सहयोग का संकेत है। साथ ही, भारतीय नौसेना ने जरूरत के समय अन्य देशों की मदद भी की है, जैसे म्यांमार में भूकंप के बाद राहत पहुंचाना और श्रीलंका में चक्रवात के दौरान सहायता देना।
नौसेना प्रमुख ने बताया कि आज भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे तक अपनी मौजूदगी बनाए हुए है। नौसेना के जहाज लगातार निगरानी, एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन और संयुक्त गश्त में लगे रहते हैं। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा मजबूत होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना तेजी से अपनी ताकत बढ़ा रही है। साल 2025 में 12 युद्धपोत और एक पनडुब्बी को शामिल किया गया, जबकि 2026 में करीब 15 और जहाज शामिल करने की योजना है। यह अब तक की सबसे तेज गति से जहाजों की कमीशनिंग मानी जा रही है। खास तौर पर पनडुब्बी रोधी यानी एंटी-सबमरीन क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। आईएनएस अंजदीप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। (INS Anjadip)
आईएनएस अंजदीप की खासियतें
यह जहाज आधुनिक सोनार सिस्टम, हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट और एडवांस कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसे खास तौर पर तटीय इलाकों में तेजी और सटीकता के साथ ऑपरेशन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें शैलो वॉटर सोनार, हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट और एडवांस कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। इसे खास तौर पर तटीय इलाकों में तेजी और सटीकता से ऑपरेशन करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह जहाज दुश्मन की पनडुब्बियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है। (INS Anjadip)
आत्मनिर्भर भारत का मजबूत उदाहरण
नौसेना प्रमुख ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि अब भारत केवल “मेक इन इंडिया” तक सीमित नहीं है, बल्कि “ट्रस्ट इन इंडिया” की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस जहाज का निर्माण भारत में ही हुआ है और इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों की कंपनियों और विशेषज्ञों का योगदान रहा है। इसे कत्तुपल्ली में बनाया गया, डिजाइन कोलकाता से जुड़ा है और इसके सिस्टम गाजियाबाद में तैयार किए गए हैं। यह पूरे देश के सहयोग का उदाहरण है।
उन्होंने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और एलएंडटी जैसे संस्थानों की भी सराहना की, जिन्होंने मिलकर इस जहाज को समय पर तैयार किया। साथ ही, इस प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियरों, कर्मचारियों और नौसेना की टीमों का भी धन्यवाद किया, जिनकी मेहनत से यह जहाज तैयार हो सका।
टीम को दी बधाई
नौसेना प्रमुख एडमिरल डिनेश त्रिपाठी ने अपने संबोधन के अंत में आईएनएस अंजदीप के कमांडिंग ऑफिसर और पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि इस जहाज का आदर्श वाक्य “अद्वितीय शत्रु विध्वंसक” उन्हें हमेशा सतर्क रहने और देश की रक्षा के लिए तैयार रहने की प्रेरणा देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह जहाज भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाएगा और देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (INS Anjadip)



