HomeIndian Air ForceAMCA प्रोजेक्ट में बड़ा अपडेट! ADA ने इंडस्ट्री पार्टनर्स के लिए बदले...

AMCA प्रोजेक्ट में बड़ा अपडेट! ADA ने इंडस्ट्री पार्टनर्स के लिए बदले कई नियम, स्टेल्थ फाइटर प्रोग्राम में जुड़ी नई टेस्टिंग शर्तें

एडीए एएमसीए के लिए कॉम्प्रिहेंसिव ग्राउंड टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करवाना चाहती है ताकि फ्लाइट ट्रायल्स शुरू होने से पहले सभी प्रमुख सिस्टम का सर्टिफिकेशन किया जा सके...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली | 19 Aug, 2026, 4:30 PM

AMCA RFP Changes: भारत के सबसे महत्वाकांक्षी फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने कई जरूरी संशोधन किए हैं। एडीए ने एएमसीए के आरएफपी में कई टेक्निकल और कमर्शियल बदलावों को शामिल किया है। हालांकि प्रोजेक्ट पूरा होने की समयसीमा, पांच फ्लाइंग प्रोटोटाइप और 1800 फ्लाइट सॉर्टी वाले ट्रायल प्रोग्राम्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

एएमसीए भारत का पहला स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ लड़ाकू विमान होगा। इसे एडीए ने डिजाइन किया है जबकि इंडस्ट्री पार्टनर्स इसके निर्माण, इंटीग्रेशन, परीक्षण और सर्टिफिकेशन सपोर्ट में शामिल लेंगे। बता दें कि मई 2026 में रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट के लिए आरएफपी जारी किया था।

AMCA RFP Changes: पहला बड़ा बदलाव: जोड़ा गया लाइटनिंग टेस्ट रिग

इसमें सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव लाइटनिंग टेस्ट रिग को शामिल करना है। ऑरिजनल आरएफपी में 24वें महीने तक तैयार होने वाली टेस्टिंग फैसिलिटीज में केवल मोबाइल ईएमआई/ईएमसी रिग शामिल था। अब नए संशोधन में मोबाइल ईएमआई/ईएमसी रिग के साथ लाइटनिंग टेस्ट रिग भी जोड़ा गया है।

आधुनिक लड़ाकू विमानों में बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगे होते हैं। इनमें मिशन कंप्यूटर, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, एईएसए रडार, डेटा लिंक, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम शामिल हैं। यदि उड़ान के दौरान विमान पर बिजली गिरती है तो इन सिस्टम्स पर गंभीर असर पड़ सकता है।

लाइटनिंग टेस्ट रिग का इस्तेमाल यह जांचने के लिए किया जाता है कि विमान का स्ट्रक्चर और उसके इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बिजली गिरने जैसी स्थिति में कितने सुरक्षित रहते हैं। यह परीक्षण विशेष रूप से स्टेल्थ विमानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उनमें बड़े पैमाने पर कंपोजिट मटेरियल और कॉम्प्लैक्स इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क का इस्तेमाल होता है।

एएमसीए में रडार एब्जॉर्बिंग मटेरियल, डिजिटल एवियोनिक्स और कॉम्प्रिहेंसिव कंपोजिट स्ट्रक्चर होने के चलते यह टेस्ट सर्टिफिकेशन प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है। (AMCA RFP Changes)

यह भी पढ़ें:  रक्षा मंत्री ने किया 'समुद्र प्रदक्षिणा' का स्वागत, 314 दिन में चार महासागर पार कर मुंबई लौटीं नौ महिला अधिकारी

डिलिवरेबल्स लिस्ट में भी हुआ बदलाव

नए संशोधन में डिलिवरेबल्स सेक्शन को भी अपडेट किया गया है। ऑरिजनल आरएफपी में कुछ टूलिंग और जिग्स की एंट्री दोहराई गई थी। विशेष रूप से वर्टिकल टेल असेंबली और सब-असेंबली जिग्स से जुड़ी एंट्री को सिस्टेमेटिक किया गया है।

संशोधन में उन सभी टेस्टिंग फैसिलिटीज की लिस्ट स्पष्ट रूप से दी गई है जिन्हें इंडस्ट्री पार्टनर को डेवलप करना होगा।

इनमें डायनामोमीटर, ईसीएस रिग, फ्यूल रिग, आईफास्ट, मोबाइल ईएमआई/ईएमसी रिग, लाइटनिंग टेस्ट रिग, एएचएमआई रिग, यूएटीएस, हाफ विंग टेस्ट रिग और रेन वाटर टेस्ट रिग शामिल हैं।

सूत्रों का कहना है कि एडीए एएमसीए के लिए कॉम्प्रिहेंसिव ग्राउंड टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करवाना चाहती है ताकि फ्लाइट ट्रायल्स शुरू होने से पहले सभी प्रमुख सिस्टम का सर्टिफिकेशन किया जा सके।

फ्री इश्यू मैटेरियल के बदले नियम

तीसरा बड़ा बदलाव फ्री इश्यू मैटेरियल यानी एफआईएम से जुड़ा है। एफआईएम वह मैटेरियल होती है जो एडीए इंडस्ट्री पार्टनर को उपलब्ध कराती है। ऑरिजनल आरएफपी में इन मैटेरियल्स के लिए कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस कवर का प्रावधान था। यानी मैटेरियल के नुकसान की स्थिति में बीमा कवरेज मिलता।

लेकिन संशोधित नियमों में इसमें बदलाव किया गया है। अब एडीए केवल ट्रांजिट के दौरान एफआईएम का बीमा कवर करेगी। जिसके बाद मैटेरियल के एडीए से इंडस्ट्री पार्टनर तक पहुंचने तक ही बीमा कवर मिलेगा।

इसके बाद मैटेरियल की सेफ्टी, स्टोरेज, मैंटेनेंस और इस्तेमाल की जिम्मेदारी इंडस्ट्री पार्टनर की होगी।

यदि किसी मैटेरियल को गलत हैंडलिंग, अनुचित स्टोरेज या मैंटेनेंस की कमी के कारण नुकसान होता है तो उसकी मरम्मत या रिप्लेसमेंट कॉस्ट इंडस्ट्री पार्टनर को चुकानी पड़ सकती है। (AMCA RFP Changes)

यह भी पढ़ें:  ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर 88 घंटे तक बिना रुके दौड़ेगी वायुसेना, 88 घंटे की जंग को इस तरह करेगी याद

पेमेंट सिस्टम में भी बदलाव

नए संशोधन में माइलस्टोन बेस्ड पेमेंट सिस्टम में भी बदलाव किए गए हैं। पहले कुछ कार्यों को एक ही पेमेंट कैटेगरी में रखा गया था, लेकिन अब उन्हें अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है।

उदाहरण के तौर पर 24वें महीने तक पूरे होने वाले कई कामों का भुगतान प्रतिशत अलग-अलग निर्धारित किया गया हैं। इससे इंडस्ट्री पार्टनर्स के लिए कैश फ्लो मैनेजमेंट अधिक सिस्टेमेटिक हो सकेगा।

इसके अलावा परफॉर्मेंस कम वारंटी बैंक गारंटी से जुड़े प्रावधानों को भी संशोधित किया गया है।

ऑरिजनल आरएफपी के तहत पूरी प्रोजेक्ट अवधि के दौरान पांच फीसदी बैंक गारंटी बनाए रखनी थी। संशोधित नियमों में कहा गया है कि प्रोजेक्ट पूरा होने के दो महीने बाद बैंक गारंटी को वारंटी हिस्से के अनुपात तक कम किया जा सकेगा। इससे इंडस्ट्री पार्टनर्स पर वित्तीय बोझ कुछ हद तक कम होगा। (AMCA RFP Changes)

साथ ही, संशोधन में एक और महत्वपूर्ण बदलाव प्राइस एडजस्टमेंट से जुड़ा है।

पहले लागत वृद्धि की गणना कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स के आधार पर की जानी थी। अब इसे होलसेल प्राइस इंडेक्स बेस्ड सिस्टम में बदला गया है। इसी तरह प्रोटोटाइप मैंटेनेंस कॉस्ट से जुड़े प्रावधानों में भी संशोधन किया गया है। (AMCA RFP Changes)

क्या है एएमसीए प्रोजेक्ट?

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एक ट्विन इंजन, मल्टी रोल और लो ऑब्जर्वेबल स्टेल्थ फाइटर जेट है। इसे भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डेवलप किया जा रहा है। विमान में स्टेल्थ डिजाइन, इंटरनल वेपन बे, एडवांस्ड एईएसए रडार, सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और आधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम शामिल होंगे। एएमसीए मार्क1 में जीई एफ414 इंजन इस्तेमाल किए जाने की योजना है।

एएमसीए में एडवांस्ड एईएसए रडार, इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, सुरक्षित डेटा लिंक और सेंसर फ्यूजन तकनीक शामिल होगी।

यह भी पढ़ें:  DRDO Pralay Missile Test: एक ही लॉन्चर से दो मिसाइलों का साल्वो लॉन्च सफल, भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी प्रलय

विमान के डिजिटल कॉकपिट में बड़े पैनोरमिक डिस्प्ले, हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले और आधुनिक मिशन कंप्यूटर लगाए जाएंगे। फ्लाई-बाय-वायर तकनीक और एआई बेस्ड असिस्टेंस सिस्टम भी इसका हिस्सा होगी।

आरएफपी के अनुसार विमान पर लगभग 1800 फ्लाइट सॉर्टी परीक्षण किए जाएंगे। इसके लिए ग्राउंड टेस्ट रिग्स, स्ट्रक्चरल टेस्ट फैसिलिटी, ईएमआई-ईएमसी परीक्षण व्यवस्था और टेलीमेट्री सिस्टम विकसित किए जाएंगे।

आरएफपी के अनुसार इंडस्ट्री पार्टनर को पांच फ्लाइंग प्रोटोटाइप और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन तैयार करना होगा। इसके अलावा कई ग्राउंड टेस्ट रिग, जिग्स, फिक्स्चर और टेस्टिंग फैसिलिटीज भी डेवलप करनी होंगी। प्रोजेक्ट की कुल अवधि 84 महीने निर्धारित की गई है। (AMCA RFP Changes)

समयसीमा में कोई बदलाव नहीं

नए संशोधन में प्रोजेक्ट की मूल समयसीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। योजना के अनुसार पहले प्रोटोटाइप की पहली उड़ान 30वें महीने में, दूसरे की 37वें महीने में, तीसरे की 46वें महीने में, चौथे की 52वें महीने में और पांचवें की 64वें महीने में प्रस्तावित है। इसी तरह 300, 600, 900, 1200, 1500 और 1800 फ्लाइट सॉर्टी तक का परीक्षण कार्यक्रम भी वैसे ही रखा गया है। (AMCA RFP Changes)

Author

  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

Most Popular

Recent Comments