HomeLegal Policy News31 साल बाद पूर्व सैनिक को मिला इंसाफ! हाईकोर्ट ने दिलाई डिसेबिलिटी...

31 साल बाद पूर्व सैनिक को मिला इंसाफ! हाईकोर्ट ने दिलाई डिसेबिलिटी पेंशन, नहीं मानी सरकार की दलील

सेना की ओर से उन्हें "अनडिजायरेबल सोल्जर" यानी अवांछनीय सैनिक बताते हुए सेवा से हटाया गया था। हालांकि बाद में अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों से पता चला कि उनकी सैन्य सेवा के दौरान उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ा था...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍जयपुर/नई दिल्ली | 10 Jun, 2026, 6:43 PM

Ex Army Disability Pension: देश की सुरक्षा में वर्षों तक सेवा देने वाले एक पूर्व सैनिक को आखिरकार लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राहत मिल गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने भारतीय सेना के पूर्व सिपाही ओम प्रकाश के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा है कि दिव्यांगता और इनवैलिड पेंशन जैसी योजनाओं को संकीर्ण नजरिये से नहीं बल्कि सैनिकों के हित में उदार दृष्टिकोण के साथ देखा जाना चाहिए।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी पेंशन योजनाओं का उद्देश्य उन सैनिकों को सहारा देना है, जिन्होंने देश की सेवा करते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना किया और बाद में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण सेवा से बाहर हो गए।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पूर्व सैनिक को सेना से रिटायर हुए 31 साल से अधिक समय बीत चुके हैं और उन्होंने अपने अधिकारों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।

Ex Army Disability Pension: क्या है पूरा मामला?

यह मामला भारतीय सेना के पूर्व सिपाही ओम प्रकाश से जुड़ा है। उन्होंने 13 जून 1984 को आर्मी सर्विस कोर में भर्ती होकर सेना की सेवा शुरू की थी। लगभग 11 वर्षों तक सेना में रहने के बाद उन्हें 1 जून 1995 को सेवा से मुक्त कर दिया गया।

सेना की ओर से उन्हें “अनडिजायरेबल सोल्जर” यानी अवांछनीय सैनिक बताते हुए सेवा से हटाया गया था। हालांकि बाद में अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों से पता चला कि उनकी सैन्य सेवा के दौरान उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ा था। इसी बात को लेकर बाद में विवाद खड़ा हुआ और मामला अदालत तक पहुंचा।

सेवा के दौरान हुई थी गंभीर बीमारी

अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक ओम प्रकाश अपनी सेवा के दौरान एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी से प्रभावित हुए थे। उन्हें “रेडियल नर्व पाल्सी” नाम की बीमारी हुई थी।

यह ऐसी बीमारी है जिसमें हाथ या कलाई की नसें प्रभावित हो जाती हैं। इसके कारण हाथों की ताकत कम हो सकती है और सामान्य गतिविधियों में परेशानी आने लगती है।

रिकॉर्ड से पता चला कि नवंबर 1993 में उन्हें सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां लगभग एक सप्ताह तक इलाज चला और डॉक्टरों ने इसी बीमारी की पुष्टि की थी।

इसके बाद दिसंबर 1993 से जनवरी 1994 के बीच उन्हें फिर से सैन्य अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इस दौरान भी उनका इलाज इसी समस्या के लिए किया गया।

यह भी पढ़ें:  800 किलोमीटर तक वार करेगी सुपरसोनिक ब्रह्मोस! सेना देने जा रही बड़ा ऑर्डर

अदालत के सामने पेश दस्तावेजों से यह भी सामने आया कि सेवा समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले भी उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

मेडिकल रिकॉर्ड पर उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा सवाल मेडिकल प्रक्रिया को लेकर उठा। पूर्व सैनिक की ओर से अदालत को बताया गया कि जब उन्हें सेवा से हटाया गया तब उनकी मेडिकल स्थिति का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया गया।

सामान्य तौर पर जब कोई सैनिक बीमारी या चोट की स्थिति में सेवा से बाहर होता है, तो उसके लिए रिलीज मेडिकल बोर्ड बनाया जाता है। यह बोर्ड सैनिक की स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करता है और यह तय करता है कि बीमारी का संबंध सैन्य सेवा से है या नहीं।

लेकिन ओम प्रकाश के मामले में ऐसा नहीं किया गया।

अदालत के सामने यह तर्क रखा गया कि उन्हें बिना रिलीज मेडिकल बोर्ड के सीधे सेवा से बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं, डिस्चार्ज दस्तावेजों में उनकी मेडिकल कैटेगरी वाले कॉलम को भी खाली छोड़ दिया गया।

याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि ऐसा उनकी बीमारी को छिपाने के लिए किया गया था। (Ex Army Disability Pension)

14 साल बाद अदालत पहुंचे पूर्व सैनिक

सेना से बाहर होने के कई वर्षों बाद ओम प्रकाश ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने वर्ष 2009 में राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की। बाद में यह मामला आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल को भेज दिया गया।

ट्रिब्यूनल ने अगस्त 2022 में उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने फिर हाईकोर्ट का रुख किया।

केंद्र सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि याचिका बहुत देर से दायर की गई है और इतने वर्षों बाद इस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। (Ex Army Disability Pension)

पेंशन को लेकर अदालत की अहम टिप्पणी

न्यायमूर्ति सुदेश बंसल और न्यायमूर्ति रवि चिरानिया की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि दिव्यांगता पेंशन और इनवैलिड पेंशन जैसी योजनाएं सैनिकों को मुश्किल समय में राहत देने के लिए बनाई गई हैं।

अदालत ने कहा कि देश की सेवा करने वाले सैनिकों के मामलों में तकनीकी आधार पर राहत से इनकार नहीं किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में नियमों की व्याख्या उदार दृष्टिकोण से की जानी चाहिए ताकि सैनिकों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।

यह भी पढ़ें:  भारतीय सेना को मिले 500 से ज्यादा ये खास ड्रोन, बिना जीपीएस भी करेंगे काम

रेड इंक एंट्री को लेकर भी अदालत की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सैनिक को सेवा के दौरान पांच “रेड इंक एंट्री” मिली थीं। सेना में रेड इंक एंट्री अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी होती है और इसे गंभीर माना जाता है।

केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि बार-बार अनुशासनहीनता के कारण उन्हें सेवा से हटाया गया था। लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने कहा कि चार या उससे अधिक रेड इंक एंट्री मिलना अपने आप में सेवा से हटाने का अनिवार्य आधार नहीं माना जा सकता।

पीठ ने यह भी कहा कि जब सैनिक एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहा था, तब अधिकारियों को अधिक संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था। (Ex Army Disability Pension)

ट्रिब्यूनल की गलती पर भी सवाल

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की कार्यवाही पर भी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने मामले को गलत नजरिये से देखा।

ट्रिब्यूनल ने यह जांचने पर जोर दिया कि सैनिक नियमित सेवा पेंशन के लिए पात्र है या नहीं। नियमित पेंशन के लिए सामान्य तौर पर 15 वर्ष की सेवा आवश्यक होती है।

लेकिन ओम प्रकाश की मांग नियमित पेंशन नहीं बल्कि इनवैलिड पेंशन की थी। इनवैलिड पेंशन के लिए अलग नियम लागू होते हैं और इसमें 10 वर्ष की सेवा पर्याप्त मानी जाती है।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता 10 साल से अधिक सेवा कर चुका था, इसलिए पात्रता की शर्त पूरी हो चुकी थी। (Ex Army Disability Pension)

मेडिकल बोर्ड बनाने की मांग क्यों ठुकराई गई?

पूर्व सैनिक की ओर से अदालत से यह भी अनुरोध किया गया था कि उनकी वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए। लेकिन अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की।

हाईकोर्ट ने कहा कि सैनिक को सेवा से बाहर हुए तीन दशक से अधिक समय बीत चुका है। ऐसी स्थिति में नया मेडिकल बोर्ड बनाकर 1995 की स्वास्थ्य स्थिति का सही आकलन करना व्यावहारिक नहीं होगा।

इसलिए अदालत ने उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल के दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले का निर्णय किया।

सेना अस्पताल के रिकॉर्ड बने अहम सबूत

सुनवाई के दौरान सेना अस्पताल के रिकॉर्ड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन दस्तावेजों से यह साबित हुआ कि सैनिक को सेवा के दौरान बीमारी हुई थी और उसका इलाज भी सेना के अस्पतालों में हुआ था।

यह भी पढ़ें:  Indian Army Ram Mandir flag: सेना की मदद से राम मंदिर के शिखर पर फहराया जाएगा ध्वज, 25 नवंबर को पीएम रहेंगे मौजूद

अदालत ने पाया कि बीमारी का उल्लेख अस्पताल के रिकॉर्ड में मौजूद था। इसके बावजूद डिस्चार्ज के समय उचित मेडिकल प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसी वजह से अदालत ने सैनिक के दावे को गंभीरता से लिया। (Ex Army Disability Pension)

पूर्व सैनिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?

देश में बड़ी संख्या में ऐसे पूर्व सैनिक हैं जिन्हें सेवा के दौरान चोट या बीमारी हुई लेकिन बाद में पेंशन लाभ को लेकर विवाद पैदा हो गया।

कई मामलों में मेडिकल बोर्ड बीमारी को सैन्य सेवा से जुड़ा नहीं मानता, जबकि सैनिकों का दावा होता है कि बीमारी सेवा के दौरान ही विकसित हुई।

यह फैसला ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि सैनिकों के हितों से जुड़े मामलों में लाभकारी योजनाओं की व्याख्या उदार तरीके से की जानी चाहिए।

अदालत ने यह भी माना कि पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि सैनिक की सेवा का सम्मान भी है। (Ex Army Disability Pension)

दिव्यांगता और इनवैलिड पेंशन में क्या अंतर है?

भारतीय सेनाओं में दिव्यांगता पेंशन उन सैनिकों को दी जाती है जो सेवा के दौरान चोट या बीमारी के कारण प्रभावित होते हैं।

वहीं इनवैलिड पेंशन उन मामलों में दी जाती है जहां सैनिक स्वास्थ्य कारणों से आगे सेवा करने में सक्षम नहीं रहता और उसे समय से पहले सेवा छोड़नी पड़ती है।

दोनों योजनाओं का उद्देश्य सैनिक और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देना है। इसी कारण अदालतों ने समय-समय पर कहा है कि इन योजनाओं को केवल तकनीकी आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।

राजस्थान हाईकोर्ट ने भी अपने हालिया फैसले में इसी सिद्धांत को दोहराते हुए पूर्व सैनिक ओम प्रकाश के मामले में राहत प्रदान की और पेंशन से जुड़े लाभों पर विचार करने का रास्ता साफ किया। (Ex Army Disability Pension)

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular