📍नई दिल्ली | 12 Dec, 2025, 10:16 PM
Indian Army Pinaka 120 km: भारतीय सेना ने 120 किमी की रेंज वाले पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के नए गाइडेड रॉकेट्स खरीदने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा है। यह प्रस्ताव ऑपरेशन सिंदूर के बाद लॉन्ग-रेंज आर्टिलरी क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसकी अनुमानित लागत लगभग 2,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार इस परियोजना का नेतृत्व डीआरडीओ करेगा और जल्द ही इसके ट्रायल शुरू किए जाएंगे।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्ताव में कहा गया है कि नया 120 किमी रेंज वाला रॉकेट मौजूदा पिनाका लॉन्चरों से ही दागा जा सकेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स में आसानी होगी और अतिरिक्त प्लेटफॉर्म की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस प्रोजेक्ट में डीआरडीओ की लैब्स आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एआरडीई), हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) और हैदराबाद की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) गाइडेंस सिस्टम और नेविगेशन किट डेवलप करेंगे।
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सूत्रों का कहना है कि पहले परीक्षण अगले वित्तीय वर्ष में होने की योजना है और उसके बाद डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर्स (डीसीपीपी) चुने जाएंगे, जिनके साथ प्रोडक्शन और बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग शुरू की जाएगी।
सेना की यह पहल आर्टिलरी मॉडर्नाइजेशन योजना का हिस्सा है। पिनाका सिस्टम 40 किमी और इसका गाइडेड वेरिएंट 75 किमी से ज्यादा मार कर सकता है। जबकि नया वेरिएंट 120 किमी तक मार कर सकेगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि नए रॉकेट में जीपीएस-आधारित गाइडेंस और कंट्रोल किट लगाया जाएगा ताकि सटीकता बढ़े और सर्कुलर एरर प्रोबबल (सीईपी) घट कर 10 से 20 मीटर के बीच रहे। पेलोड के तौर पर 250 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव प्री-फ्रैगमेंटेड वॉरहेड या एरिया-डिनायल म्यूनिशन (एडीएम) इस्तेमाल किया जाएगा।
इस साल पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम से जुड़े कई कॉन्ट्रैक्ट भी हुए हैं। साल की शुरुआत में रक्षा मंत्रालय ने इकनॉमिक एक्सप्लोजिव लिमिटेड टाइप-1 और म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड के साथ एरिया डिनायल म्यूनिशन और हाई एक्सप्लोसिव प्री फ्रैगमेंटेड (एचईपीएफ) रॉकेट्स के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट भी किये गए थे। जिसकी कुल लागत 10,147 करोड़ रुपये थी। इसके साथ ही भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ शक्ति नामक सॉफ्टवेयर के अपग्रेड के लिए भी समझौता हुआ है। रक्षा सचिव की मौजूदगी में इन समझौतों पर दस्तखत किये गये थे।
पिनाका एमएलआरएस (मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम) डीआरडीओ के प्रमुख प्रोजेक्ट्स में से एक रहा है और इससे भारतीय सेना की तुरंत प्रतिक्रिया और बड़े पैमाने पर सैल्वो फायरिंग क्षमता मिलती है। वहीं, पिनाका को एक्सपोर्ट भी किया जा चुका है और आर्मेनिया जैसे देशों ने यह सिस्टम खरीदा है। जबकि फ्रांस, आसियान, अफ्रीकी देशों समेत कई यूरोपियन देश इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पहले ही साफ कह चुके हैं कि पिनाका का नया लॉन्ग-रेंज वेरिएंट के डेवलप होते ही सेना दूसरे हथियारों पर की गई योजनाओं पर पुनर्विचार कर सकती है।
प्रस्ताव के हिसाब से डीआरडीओ पहले प्रोटोटाइप और वैलिडेशन ट्रायल करेगा, फिर बिड प्रोसेस के जरिये डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर्स चुने जाएंगे। रक्षा सूत्रों ने कहा कि प्रस्ताव को जल्द ही डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) के पास मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है।
पिनाका का नया 120 किमी वेरिएंट मौजूदा लॉन्चरों से दागा जा सकेगा और इससे तैनाती व ऑपरेशन में आसानी होगी। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख है कि डेवलपमेंट और प्रोडक्शन में कई सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र की कंपनियां सहयोग करेंगी। इनमें सोलर इंडस्ट्रीज, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लार्सन एंड टूब्रो शामिल हैं।
पिनाका के एक बड़े ट्रक पर 8 या 12 ट्यूब लगे होते हैं, और ये सिर्फ 40-44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग देता है। इसी वजह से इसे सेना में “आग का तूफान” भी कहा जाता है। एक पूरी बैटरी में 6 लॉन्चर होते हैं, जो 1 मिनट में 72 रॉकेट दाग कर तकरीबन 1 वर्ग किलोमीटर के इलाके को पूरी तरह से तबाह कर सकता है।
पिनाका का पूरा “फायर साइकिल” बेहद तेज होता है। सबसे पहले दुश्मन का लोकेशन ड्रोन, आर्टिलरी रडार, सैटेलाइट या फॉरवर्ड ऑब्जर्वर से मिलता है। वहीं, टारगेट का जीपीएस को-ऑर्डिनेट सीधे कमांड पोस्ट व्हीकल में भेज दिया जाता है। कमांड पोस्ट में लगा शक्ति सॉफ्टवेयर हवा, ऊंचाई, तापमान आदि को देखकर बैलिस्टिक कैलकुलेशन करता है। उसके बाद सिर्फ 2 मिनट में सभी लॉन्चरों को फायरिंग ऑर्डर भेज दिया जाता है।
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