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IAF चीफ के अमेरिका दौरे के बाद PACAF कमांडर पहुंचे भारत, इंडो-पैसिफिक पर फोकस!

जनरल केविन बी. श्नाइडर अमेरिकी प्रशांत वायुसेना यानी पैसिफिक एयर फोर्स (PACAF) के कमांडर हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी वायुसेना के बड़े ऑपरेशन्स को संभालते हैं...

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📍नई दिल्ली | 23 Apr, 2026, 12:52 PM

India US defence ties: अप्रैल में भारत और अमेरिका के बीच वायुसेना स्तर पर दो अहम दौरे हुए हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी प्रशांत वायुसेना के कमांडर जनरल केविन बी. श्नाइडर भारत आए हुए हैं, तो दूसरी तरफ इस महीने की शुरुआत में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने अमेरिका का दौरा किया था। ये दोनों यात्राएं लगभग एक ही समय में हुईं और इन्हें आपसी सहयोग को मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है। खस बात यह है कि भारतीय सेना प्रमुख जनल उपेंद्र द्विवेदी भी इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं।

India US defence ties: पैसिफिक एयर फोर्स के कमांडर हैं श्नाइडर 

अप्रैल के तीसरे हफ्ते में जनरल केविन बी. श्नाइडर भारत पहुंचे हैं। वे अमेरिकी प्रशांत वायुसेना यानी पैसिफिक एयर फोर्स (PACAF) के कमांडर हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी वायुसेना के बड़े ऑपरेशन्स को संभालते हैं। उनकी इस यात्रा का मकसद भारत के साथ वायुसेना सहयोग को और मजबूत करना था।

दिल्ली में उन्होंने भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर बात की। खास तौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा हालात, संयुक्त अभ्यास, ट्रेनिंग और ऑपरेशनल तालमेल पर चर्चा हुई। इसके अलावा साइबर और स्पेस जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

भारत यात्रा के दौरान जनरल श्नाइडर ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्हें भारतीय वायुसेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

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उन्होंने भारतीय वायुसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बैठक की, जिसमें दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर बात हुई। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री संग्रहालय और गांधी स्मृति का दौरा भी किया।

अमेरिका गए थे वायुसेना प्रमुख

जनरल श्नाइडर की भारत यात्रा से पहले 6 से 9 अप्रैल तक एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह अमेरिका गए थे। उनका दौरा करीब एक हफ्ते तक चला। इस दौरान उन्होंने कई अहम सैन्य और तकनीकी संस्थानों का दौरा किया। अमेरिका पहुंचने पर जॉइंट बेस अनाकोस्टिया-बोलिंग पर उन्हें फुल ऑनर्स के साथ रिसीव किया गया।

पेंटागन में हुई अहम बैठकें

दौरे के दौरान एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने पेंटागन में अमेरिकी वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। इसमें यूएस एयर फोर्स के सचिव ट्रॉय मेइंक और वायुसेना प्रमुख जनरल केनेथ विल्सबैक शामिल रहे। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक साथ काम करने की क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई।

इसके अलावा संयुक्त अभ्यास, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और वायुसेना के आधुनिकीकरण जैसे मुद्दों पर भी बात हुई। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की साझा रणनीतिक प्राथमिकताओं पर भी चर्चा का फोकस रहा।

अपने दौरे के दौरान एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कोलोराडो स्थित पीटरसन स्पेस फोर्स बेस का दौरा किया। यहां उन्हें नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड यानी नोराड के कामकाज के बारे में जानकारी दी गई। इसमें एयरस्पेस मॉनिटरिंग, चेतावनी सिस्टम और कंट्रोल से जुड़े पहलुओं के बारे में समझाया गया। इसके बाद उन्होंने नेवादा के नेलिस एयर फोर्स बेस का दौरा किया। यहां यूएस एयर फोर्स वॉरफेयर सेंटर में उन्हें ऑपरेशनल तैयारियों पर ब्रीफिंग दी गई।

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India US defence ties

उड़ाया था एफ-15 फाइटर जेट

इस दौरे का एक खास हिस्सा वह रहा, जब एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने एफ-15ईएक्स ईगल-2 फाइटर जेट में उड़ान भरी। इसे फैमिलियराइजेशन सॉर्टी कहा जाता है, जिसमें किसी वरिष्ठ अधिकारी को विमान की क्षमता समझने का मौका दिया जाता है।

इस उड़ान के दौरान उन्होंने इस एडवांस्ड फाइटर जेट के सिस्टम और ऑपरेशन को करीब से देखा। एफ-15ईएक्स एक मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो अपनी 2.5 मैक रफ्तार और आधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर फोकस

इन दिनों दोनों देशों का ध्यान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर है। यह इलाका समुद्री रास्तों, सुरक्षा संतुलन और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से काफी अहम माना जाता है, इसलिए इस पर लगातार चर्चा हो रही है।

दोनों देश क्वाड, मालाबार और ‘कोप इंडिया’ जैसे संयुक्त अभ्यास भी करते हैं। इन सबका मकसद भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुरक्षित, खुला और संतुलित बनाए रखने पर काम कर रहे हैं। जनरल श्नाइडर की यह यात्रा भी इसी दिशा में एक कदम मानी जा रही है, जो अमेरिका की “फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक” सोच को आगे बढ़ाती है।

रक्षा मामलों से जुड़े जानकारों का कहना है कि ऐसे दौरे नई बात नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से चल रहे सैन्य सहयोग का हिस्सा होते हैं। इनके जरिए दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के अनुभवों को समझती हैं और सहयोग के नए तरीके तलाशती हैं। इसी दौरान जॉइंट ट्रेनिंग, ऑपरेशन प्लानिंग और नई टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होती है।

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