📍सागाइंग, म्यांमार | 14 Oct, 2026, 12:13 PM
Mount Horeb Camp Drone Attack: म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में स्थित माउंट होरेब कैंप पर 11 अक्टूबर की सुबह जबरदस्त ड्रोन हमला हुआ। स्थानीय नागा संगठन के मुताबिक, हमला रात करीब 2:30 बजे शुरू हुआ और सुबह 4:30 बजे तक जारी रहा। इस दौरान कैंप के आसपास करीब 60 बम गिराए गए। हमले में कैंप के कुछ हिस्सों को नुकसान भी हुआ है। भारत और म्यांमार की तरफ से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
Mount Horeb Camp Drone Attack: करीब दो घंटे तक जारी रहा ड्रोन हमला
नागालिम की तथाकथित प्रोविजनल गवर्नमेंट, माउंट होरेब की ओर से जारी बयान में बताया गया कि 11 अक्टूबर को तड़के कई ड्रोन के जरिए कैंप पर बम गिराए गए।
संगठन ने अपने बयान में कहा, “बमों के एक के बाद एक फटने से जमीन हिलती हुई महसूस हो रही थी। कुछ बम हवा में फटे, जबकि कुछ पेड़ों पर गिरे और कुछ सीधे कैंप के अंदर या आसपास जाकर विस्फोट हुए। हमले में हमारे कैंप के कुछ हिस्से नष्ट हो गए।”
संगठन ने करीब 60 बम विस्फोट होने का दावा किया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कितने ड्रोन हमले में शामिल थे।
संगठन के आधिकारिक बयान में किसी की मौत या घायल होने की पुष्टि नहीं की गई। वहीं, कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में तीन एनएससीएन-ईस्टर्न फ्लैंक कैडर के घायल होने की बात कही गई है।
सागाइंग इलाके में है माउंट होरेब कैंप
माउंट होरेब कैंप म्यांमार के सागाइंग इलाके के लेशी टाउनशिप में स्थित नागा सेल्फ-एडमिनिस्टर्ड जोन में है। यह इलाका भारत-म्यांमार सीमा के करीब पड़ता है और लंबे समय से विभिन्न नागा संगठनों की गतिविधियों का केंद्र रहा है।
माउंट होरेब को एनएससीएन-ईस्टर्न फ्लैंक यानी एनएससीएन-ईएफ का मुख्य ठिकाना बताया जाता है। इस संगठन ने जुलाई 2026 में ‘प्रोविजनल गवर्नमेंट ऑफ द पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ नागालिम’ के गठन का एलान किया था।
इस संगठन के अध्यक्ष के रूप में इकातो आई. चिशी स्वू का नाम सामने आया है। वह नागा संगठन एनएससीएन के सह-संस्थापक और पूर्व अध्यक्ष इसाक चिशी स्वू का उत्तराधिकारी है।
हालांकि, हमले के समय संगठन के वरिष्ठ नेता कैंप में मौजूद थे या नहीं, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
भारत पर मढ़े आरोप
हमले के बाद माउंट होरेब स्थित प्रोविजनल गवर्नमेंट ने आशंका जताई कि यह भारत की ओर से कथित प्रॉक्सी वॉर का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, संगठन ने यह भी कहा कि हमले के पीछे कौन है, इसका पता लगाने के लिए जांच जरूरी है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमला किस संगठन या सैन्य बल ने किया।
कुछ स्थानीय पर्यवेक्षकों और नागा संगठनों ने म्यांमार की पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज यानी पीडीएफ या नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट से जुड़े समूहों की संभावित भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। लेकिन इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एनएससीएन-आईएम ने माउंट होरेब कैंप पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा कि उसका इस घटना में कोई हाथ नहीं था। संगठन के मुताबिक, हमले के दिन उसके किसी कर्मी, उपकरण या हवाई संसाधन की वहां मौजूदगी नहीं थी। उसने घटना की जांच की मांग भी की।
तांगखुल नागा लॉन्ग यानी टीएनएल ने भी हमले की निंदा की और इसे बिना उकसावे की गई कार्रवाई बताया। (Mount Horeb Camp Drone Attack)
3 अक्टूबर को भी हुआ था ड्रोन हमला
माउंट होरेब की घटना से पहले 3 अक्टूबर को म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र के लांगखो गांव में भी ड्रोन हमले की खबर सामने आई थी। बताया गया कि इस हमले का निशाना एनएससीएन-के (युंग आंग) से जुड़े ब्रिगेडियर अखम कोन्याक का निवास था।
संगठन ने इस घटना में दो नागरिकों के मारे जाने या घायल होने का दावा कियाा था। इनमें एक नौ साल की बच्ची भी थी।
एनएससीएन-आईएम ने इस हमले की भी निंदा की थी। लगातार हो रहीं इन घटनाओं ने म्यांमार के नागा बहुल इलाकों में ड्रोन के इस्तेमाल और सशस्त्र गुटों के बीच सुरक्षा तनाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
भारत-म्यांमार रक्षा बैठक के चार दिन बाद घटना
माउंट होरेब पर हमला ऐसे समय हुआ, जब 7 अक्टूबर को गुवाहाटी में भारत और म्यांमार के बीच तीसरी रक्षा सहयोग बैठक आयोजित हुई थी। यह पहली बार था जब यह बैठक पूर्वोत्तर भारत में आयोजित हुई थी। भारत की ओर से रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और म्यांमार की ओर से सशस्त्र बल प्रशिक्षण प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्याए सोने लिन इस बैठक में शामिल हुए थे। बैठक में दोनों देशों ने प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आपसी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।
साथ ही, बैठक में सीमा सुरक्षा, सीमा पार चुनौतियों (जैसे उग्रवाद, नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी) और आपसी सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई।
बता दें कि भारत-म्यांमार के बीच 1,643 किमी लंबी सीमा रेखा है। (Mount Horeb Camp Drone Attack)
भारत-म्यांमार सीमा के आसपास नागा संगठनों सहित कई सशस्त्र समूहों की गतिविधियां लंबे समय से सुरक्षा से जुड़ी चुनौती रही हैं। म्यांमार में जारी संघर्ष के चलते भी इस क्षेत्र के हालात मुश्किल बने हुए हैं।
NSCN-K और NSCN-Eastern Flank को लेकर क्या हैं आरोप?
NSCN-K यानी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-खापलांग कई गुटों में बंटा हुआ है। इन गुटों की भारत सरकार के प्रति नीति एक जैसी नहीं है। एनएससीएन-के (निकी) भारत सरकार के साथ संघर्षविराम समझौते में है। हाल ही में सितंबर 2026 में इस समझौते को सितंबर 2027 तक बढ़ाया गया है। वहीं, एनएससीएन-के (आंग माई) भारत और म्यांमार, दोनों के साथ शांति वार्ता कर रहा है। इस गुट के भारत सरकार के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की बात भी सामने आई है।
इसके विपरीत, एनएससीएन-के (युंग आंग) को हार्डलाइन रुख अपनाने वाला गुट माना जाता है। इसका भारत सरकार के साथ संघर्षविराम समझौता नहीं है। यह गुट समय-समय पर सुरक्षा बलों पर हमला भी करता रहा है। (Mount Horeb Camp Drone Attack)
NSCN-Eastern Flank ने क्यों तोड़े NSCN-IM से संबंध?
एनएससीएन-ईस्टर्न फ्लैंक (एनएससीएन-ईएफ) जुलाई 2026 में एनएससीएन-आईएम से अलग होकर नया गुट बना है। यह गुट नागा राजनीतिक मुद्दे पर पूर्ण संप्रभुता, अलग झंडे और अलग संविधान की मांग करता है। इसका कहना है कि वर्ष 1997 का संघर्षविराम और वर्ष 2015 का फ्रेमवर्क एग्रीमेंट अब समाप्त हो चुके हैं। यह भारत सरकार पर नागा राजनीतिक मांगों के साथ समझौता नहीं करने का आरोप भी लगाता है।
इस गुट का आधार मुख्य रूप से म्यांमार से जुड़े इलाकों में बताया जाता है। वहीं इसका नाम मणिपुर के नागा-कुकी तनाव से जुड़ी कुछ घटनाओं में भी आया है।
साल 2026 में नागा-कुकी तनाव बढ़ने के दौरान कुछ नागा उग्रवादी गुटों पर आरोप लगाए गए। कुकी संगठनों ने एनएससीएन-आईएम और एनएससीएन-ईस्टर्न फ्लैंक के कैडरों पर हमलों में शामिल होने के आरोप लगाए हैं।
मार्च 2026 में मणिपुर के कामजोंग जिले में एनएससीएन-ईस्टर्न फ्लैंक के चार कैडर भी मारे गए थे। हालांकि इस मामले में अंदरूनी संघर्ष की आशंका जताई गई थी। (Mount Horeb Camp Drone Attack)
NSCN-IM पर भी लगे हैं आरोप
एनएससीएन-आईएम लंबे समय से नागा राजनीतिक मांगों और भारत सरकार के साथ वार्ताओं से जुड़ा रहा है। नागा-कुकी तनाव के दौरान इसके कैडरों या सहयोगियों पर कुकी गांवों पर हमले करने के आरोप भी लगे हैं। कुकी संगठनों ने कुछ घटनाओं के लिए एनएससीएन-आईएम को जिम्मेदार ठहराया है।
एनएससीएन-ईस्टर्न फ्लैंक ने भी आरोप लगाया है कि भारत सरकार नागा समुदाय के खिलाफ कुकी संगठनों का इस्तेमाल कर रही है, ताकि मणिपुर में अलग कुकी क्षेत्र की मांग को आगे बढ़ाया जा सके। (Mount Horeb Camp Drone Attack)
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रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"




