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भारतीय नौसेना को 16 अक्टूबर को मिलेगा INS समर्थक MPV, समंदर में हथियारों, अनमैन्ड ऑपरेशंस और सेंसरों का करेगा टेस्ट

107 मीटर लंबा और 3,750 टन डिस्प्लेसमेंट वाला INS समर्थक समुद्र में स्वदेशी हथियारों व सेंसरों के परीक्षण, अनमैन्ड सिस्टम ऑपरेशन, निगरानी और आपदा राहत जैसे मिशनों में भारतीय नौसेना की मदद करेगा...

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📍नई दिल्ली | 13 Oct, 2026, 8:25 PM

INS Samarthak Commission: इस हफ्ते भारतीय नौसेना को दूसरा शिप भी मिलने जा रहा है। 16 अक्टूबर को कर्नाटक के कारवार नेवल बेस पर स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल (एमपीवी) समर्थक को कमीशन किया जाएगा। इस जहाज को लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने बनाया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार किया गया है। इसे समुद्री निगरानी, गश्त, हथियारों और सेंसरों के ट्रायल्स, मानवीय सहायता तथा आपदा राहत जैसे अलग-अलग मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इससे पहले 12 अक्टूबर को मुंबई में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस मंगरोल को नौसेना में शामिल किया गया था।

INS Samarthak Commission: 2022 में हुआ था निर्माण का समझौता

रक्षा मंत्रालय और एलएंडटी के बीच 25 मार्च 2022 को दो मल्टी-पर्पज वेसल बनाने के लिए लगभग 887 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट हुआ था। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत तैयार समर्थक का निर्माण तमिलनाडु में चेन्नई के पास स्थित कट्टुपल्ली शिपयार्ड में किया गया।

जहाज की कील 20 मार्च 2023 को रखी गई थी। इसके बाद 14 अक्टूबर 2024 को इसे लॉन्च किया गया। उस कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी मौजूद थे। निर्माण और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 अगस्त 2026 को इसे भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया।

समर्थक की सिस्टर शिप का नाम उत्कर्ष है। इसे जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था, इसके समुद्री परीक्षण जारी हैं।

107 मीटर लंबा है समर्थक

समर्थक का डिस्प्लेसमेंट लगभग 3,750 टन है। इसकी लंबाई 107 मीटर और चौड़ाई 18.6 मीटर है। जहाज की अधिकतम गति करीब 15 नॉट्स है। इसकी रेंज लगभग 4,500 नॉटिकल मील बताई गई है। इसका मतलब है कि यह समुद्र में लंबी दूरी तय करके विभिन्न मिशनों को पूरा कर सकता है।

जहाज पर लगभग 100 से 116 कर्मी रह सकते हैं, जिनमें करीब आठ अधिकारी शामिल हैं। इसमें हेलीकॉप्टर डेक भी दिया गया है, जहां एचएएल ध्रुव एमके-3 जैसे यूटिलिटी हेलीकॉप्टर ऑपरेट किए जा सकते हैं।

इसके प्रोपल्शन सिस्टम में सीओडीएडी यानी कंबाइंड डीजल एंड डीजल कॉन्फिगरेशन का इस्तेमाल किया गया है। इसमें दो कमिंस क्यूएसके95 डीजल इंजनों की मदद से जहाज को पावर देते हैं।

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जहाज में डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम भी दिया गया है। यह सिस्टम समुद्र में जहाज की स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद करता है। इससे टारगेट रिकवरी, समुद्री परीक्षण और साल्वेज जैसे उन ऑपरेशनों में मदद मिलती है, जिनमें जहाज को किसी निर्धारित स्थान के आसपास स्थिर रखना जरूरी होता है। (INS Samarthak Commission)

हथियारों और सेंसरों के परीक्षण में आएगा काम

समर्थक की सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में स्वदेशी हथियारों, रडार, सेंसर और अन्य सैन्य उपकरणों का समुद्र में परीक्षण करना शामिल है। किसी नए हथियार या सेंसर को नौसेना में इस्तेमाल करने से पहले अलग-अलग परिस्थितियों में उसकी क्षमता जांचनी होती है।

समर्थक जैसे जहाज के होने से इन परीक्षणों के लिए फ्रंटलाइन युद्धपोतों का इस्तेमाल कम करने में मदद मिल सकती है। इससे मुख्य युद्धपोत अपनी नियमित ऑपरेशनल जिम्मेदारियों पर ध्यान दे सकते हैं।

यह जहाज टारगेट डिप्लॉयमेंट और रिकवरी का काम भी कर सकता है। गनरी और एंटी-सबमरीन वारफेयर यानी पनडुब्बी रोधी युद्धाभ्यास के दौरान सतह पर, हवा में या पानी के नीचे इस्तेमाल होने वाले टारगेट्स को तैनात करने और वापस लाने के लिए विशेष सिस्टम सिस्टम की जरूरत होती है।

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समुद्र में टॉरपीडो और अन्य हथियारों के परीक्षण के दौरान भी ऐसे प्लेटफॉर्म की जरूरत होती हैं। ताकि हथियारों की कार्यक्षमता और संबंधित सिस्टमों के प्रदर्शन का आकलन किया जा सके। (INS Samarthak Commission)

अनमैन्ड सिस्टम के ऑपरेशन के लिए मदरशिप

आधुनिक नौसैनिक ऑपरेशन में अनमैन्ड सिस्टम की भूमिका बढ़ रही है। इनमें बिना चालक दल वाले हवाई ड्रोन, सतह पर चलने वाले अनमैन्ड वैसल्स और पानी के नीचे काम करने वाले ऑटोनॉमस सिस्टम शामिल हैं।

समर्थक को ऐसे सिस्टम्स के लिए मदरशिप की भूमिका निभाने के लिहाज से भी तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल इन प्लेटफॉर्मों को समुद्र में ले जाने, उनके ट्रायल और ऑपरेशन में मदद देने के लिए किया जा सकता है।

इस क्षमता का महत्व इसलिए है, क्योंकि समुद्र में हर मिशन के लिए चालक दल वाले बड़े युद्धपोत को भेजना जरूरी नहीं होता। कुछ निगरानी और परीक्षण संबंधी काम अनमैन्ड सिस्टम्स की मदद से भी किए जा सकते हैं। (INS Samarthak Commission)

निगरानी, गश्त और आपदा राहत की क्षमता

समर्थक को समुद्री निगरानी और पेट्रोलिंग के लिए भी डिजाइन किया गया है। भारत के समुद्री क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही, तटीय सुरक्षा और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखना नौसेना की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।

यह जहाज लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (एलआईएमओ) में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह के अभियानों में समुद्री सुरक्षा से जुड़े सीमित स्तर के ऑपरेशन, गश्त और अन्य गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।

इसके अलावा समर्थक को ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ यानी मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) मिशन के लिए भी तैयार किया गया है। समुद्री तूफान, बाढ़ या किसी अन्य आपदा के दौरान राहत सामग्री और जरूरी उपकरण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

जरूरत पड़ने पर इसे सीमित क्षमता वाले अस्पताल जहाज में बदला जा सकता है। इसमें चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए जरूरी सिस्टम तैयार किए जा सकते हैं। जहाज टोइंग, साल्वेज ऑपरेशन और द्वीप क्षेत्रों तक लॉजिस्टिक्स सहायता पहुंचाने में भी काम आ सकता है। (INS Samarthak Commission)

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इन हथियारों से है लैस

समर्थक पर आत्मरक्षा के लिए हथियार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें 76 मिलीमीटर की नौसैनिक तोप, 30 मिलीमीटर की ऑटोकैनन और 12.7 मिलीमीटर की मशीन गन लगाई जा सकती हैं। इसके साथ इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और कवच जैसे डिकॉय सिस्टम भी बताए गए हैं। डिकॉय सिस्टम का काम आने वाली मिसाइल को भ्रमित करने के लिए नकली टारगेट पैदा करना होता है।

जहाज में नेविगेशन रडार, सरफेस सर्च रडार और लिंक-2 टैक्टिकल डेटा लिंक जैसे सिस्टम भी हैं। सैटकॉम यानी सैटेलाइट कम्युनिकेशन की मदद से समुद्र में कम्युनिकेशन बनाए रखने में मदद मिलती है।

समर्थक के इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट में स्वदेशी सेंसर, हथियार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम शामिल किए गए हैं। इनका उद्देश्य अलग-अलग प्रणालियों से मिलने वाली जानकारी को एक साथ इस्तेमाल करने और समुद्री वातावरण में जहाज की कार्यक्षमता बढ़ाना है। (INS Samarthak Commission)

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री

समर्थक के निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। एलएंडटी के लिए यह भारतीय नौसेना का पहला युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम है।

नौसेना ने समर्थक का क्रेस्ट भी जारी किया है। इसमें समुद्र की लहरों से निकलते हाथी को दिखाया गया है। हाथी को भारतीय परंपरा में ताकत, बुद्धिमत्ता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। (INS Samarthak Commission)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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