📍नई दिल्ली | 14 Oct, 2026, 12:55 PM
India-ASEAN Defence Forum 2026: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत ऐसा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र चाहता है, जहां छोटे और बड़े सभी देशों को अपने फैसले खुद लेने, अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और शांति के साथ विकास करने की आजादी हो। उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए देशों के बीच भरोसा, आपसी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान जरूरी है।
राजनाथ सिंह बुधवार को नई दिल्ली स्थित मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (एमपी-आईडीएसए) में आयोजित पहले आसियान-भारत डिफेंस थिंक टैंक फोरम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने समुद्री सुरक्षा, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भारत तथा आसियान देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
यह दो दिवसीय फोरम 14 और 15 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत को मजबूत करना और संयुक्त परियोजनाओं के लिए व्यावहारिक रास्ते तलाशना है।
India-ASEAN Defence Forum 2026: इंडो-पैसिफिक में किसी देश पर दबाव नहीं होना चाहिए
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और आसियान देशों का साझा हित क्षेत्र में शांति, स्थिरता, समृद्धि और खुले इंडो-पैसिफिक को बनाए रखने में है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और विकास का रास्ता चुनने के लिए दबाव में नहीं आना चाहिए।
उन्होंने कहा, “भारत ऐसा इंडो-पैसिफिक चाहता है, जहां सभी देश, चाहे वे बड़े हों या छोटे, अपनी पसंद के फैसले ले सकें, अपने हितों की रक्षा कर सकें और शांति से विकास कर सकें।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। समुद्र में गतिविधियों के कारण भी कई बार दबाव और अनिश्चितता पैदा होती है। इसके साथ ही आतंकवाद, साइबर अपराध, समुद्री डकैती, मानव तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और जरूरी सप्लाई चेन में रुकावट जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान कोई एक देश अकेले नहीं कर सकता। इसके लिए क्षेत्रीय देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना होगा और मतभेदों को विवाद बनने से पहले बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश करनी होगी।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी, सागर और महासागर पर जोर
राजनाथ सिंह ने भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और सागर तथा महासागर की अवधारणाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग को मजबूत करना है।
सागर का पूरा नाम ‘सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन’ है। इसका मतलब है कि क्षेत्र के सभी देशों की सुरक्षा और विकास को महत्व दिया जाए। वहीं, महासागर का अर्थ ‘म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन’ है। यह अलग-अलग क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए साझा प्रयासों पर जोर देता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ लंबे समय तक चलने वाली साझेदारी का हिस्सा है। भारत और आसियान के बीच संबंध केवल रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सदियों पुराना इतिहास, व्यापार, संस्कृति और विचारों का आदान-प्रदान भी है।
उन्होंने कहा कि भारत और आसियान को क्षेत्रीय मंचों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के बजाय एक-दूसरे के प्रयासों को मजबूत करना चाहिए। भारत क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आसियान के नेतृत्व वाली व्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण मानता है। (India-ASEAN Defence Forum 2026)

समुद्री सुरक्षा में बढ़ेगा सहयोग
भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए हिंद महासागर तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण हैं। इन समुद्री रास्तों से व्यापार, ऊर्जा, जरूरी सामान और लोगों की आवाजाही होती है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस यानी समुद्री क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों की जानकारी जुटाने और साझा करने की क्षमता को मजबूत करना जरूरी है।
इसके साथ ही भारतीय नौसेना, आसियान देशों की नौसेनाओं और कोस्ट गार्ड के बीच तालमेल बढ़ाने की जरूरत है। अंडरवॉटर यानी पानी के नीचे होने वाली गतिविधियों की निगरानी और समुद्री सूचनाओं को साझा करना भी इस सहयोग का अहम हिस्सा होगा।
वर्ष 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने इसे साझा हितों को जमीन पर उतारने का अवसर बताया।
उन्होंने कहा कि समुद्री डकैती, तस्करी और अवैध मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों से निपटने के लिए देशों को साथ काम करना चाहिए। समुद्र में किसी आपात स्थिति के दौरान संयुक्त रूप से प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी विकसित की जानी चाहिए। यह सभी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप होनी चाहिए। (India-ASEAN Defence Forum 2026)
सस्ते ड्रोन से लेकर साइबर सुरक्षा तक पर चर्चा
रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, साइबर तकनीक और अंतरिक्ष आधारित सिस्टम की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। हाल के संघर्षों ने दिखाया है कि कम लागत वाले ड्रोन भी महंगे रक्षा सिस्टम के लिए चुनौती बन सकते हैं।
ऐसे में भारत और आसियान देशों को कम लागत वाले, उपयोगी और जरूरत के हिसाब से बदले जा सकने वाले डिफेंस सॉल्युशन डेवलप करने पर काम करना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करने का काम केवल बड़ी कंपनियों या संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्टार्टअप, विश्वविद्यालय, रिसर्च संस्थान और छोटी कंपनियां भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने भारत की इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आई-डीईएक्स) और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (टीडीएफ) योजनाओं का उल्लेख किया। इन पहलों के जरिए रक्षा जरूरतों के लिए नई तकनीक विकसित करने वाले उद्यमियों और संस्थानों के साथ काम किया जाता है।
उन्होंने भारत और आसियान के शोधकर्ताओं के बीच संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट, तकनीक के परीक्षण के लिए साझा सुविधाएं और युवा वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की बात कही। काउंटर-ड्रोन सिस्टम, साइबर डिफेंस, समुद्री निगरानी और आपदा के समय राहत पहुंचाने जैसे क्षेत्रों में संयुक्त काम किया जा सकता है।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि रक्षा तकनीक साझा करते समय संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकारों और जिम्मेदारी से तकनीक के इस्तेमाल का ध्यान रखना जरूरी है। (India-ASEAN Defence Forum 2026)
भारत में संयुक्त रक्षा उत्पादन की संभावनाएं
राजनाथ सिंह ने रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत आसियान देशों की जरूरतों के अनुसार पेट्रोल वेसल, रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और दूसरी रक्षा तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग तलाशने के लिए तैयार है।
भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल का उद्देश्य घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करना है। हालांकि, आत्मनिर्भरता का मतलब दूसरे देशों से अलग होकर काम करना नहीं है। भारत भरोसेमंद साझेदारों के साथ मिलकर रक्षा उपकरणों का डिजाइन, उत्पादन, रखरखाव और अपग्रेड करने के अवसर तलाश सकता है।
रक्षा मंत्री ने को-डेवलपमेंट यानी संयुक्त विकास और को-प्रोडक्शन यानी संयुक्त उत्पादन के महत्व को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उपकरणों की मरम्मत, रखरखाव, ओवरहॉल, प्रशिक्षण और लंबे समय तक तकनीकी मदद भी रक्षा साझेदारी का हिस्सा होनी चाहिए।
ऐसी व्यवस्था से स्थानीय कंपनियों को काम मिल सकता है, कुशल कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिल सकता है और रक्षा उपकरणों की सप्लाई चेन अधिक भरोसेमंद बन सकती है। उन्होंने कहा कि साझेदारी में जिम्मेदारियों, तकनीक की सुरक्षा और लाभों का उचित बंटवारा भी जरूरी है। (India-ASEAN Defence Forum 2026)
प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में भी साथ काम करने की जरूरत
रक्षा मंत्री ने मानवीय सहायता और आपदा राहत यानी ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) को भी रक्षा संवाद का नियमित हिस्सा बनाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि चक्रवात, बाढ़, समुद्र के बढ़ते जलस्तर और खराब मौसम जैसी घटनाएं बंदरगाहों, व्यापारिक रास्तों और लोगों की आजीविका को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में समय पर राहत पहुंचाने के लिए पहले से तैयारी और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल जरूरी है।
भारत और आसियान देश आपदा प्रबंधन के अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। संयुक्त अभ्यास और बेहतर समन्वय से आपात स्थिति में राहत कार्यों को प्रभावी बनाया जा सकता है। (India-ASEAN Defence Forum 2026)
थिंक टैंक फोरम में रिसर्च और संयुक्त परियोजनाओं पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकारों को नीतियां बनाने के लिए भरोसेमंद विश्लेषण के साथ ऐसे सुझाव भी चाहिए, जिन्हें व्यवहार में लागू किया जा सके।
उन्होंने भारत और आसियान के बीच समुद्री सुरक्षा, साइबर खतरे, नई तकनीक, आपदा राहत और रक्षा उद्योग सहयोग पर संयुक्त रिसर्च एजेंडा बनाने का सुझाव दिया। इसके साथ ही युवा शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान, संयुक्त प्रकाशनों और विशेषज्ञों के नियमित संवाद को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने समुद्री आपदा से निपटने के लिए टेबलटॉप अभ्यास, काउंटर-ड्रोन तकनीक पर संयुक्त अध्ययन और सुरक्षित समुद्री सूचना साझा करने जैसी परियोजनाओं पर काम करने का सुझाव भी दिया। (India-ASEAN Defence Forum 2026)
बैठक में 11 सदस्य देश
फोरम के स्वागत भाषण में एमपी-आईडीएसए के महानिदेशक और पूर्व राजनयिक सुजन आर. चिनॉय ने कहा कि इस बैठक में भारत और आसियान के सभी 11 सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के रक्षा और सुरक्षा संबंधों को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस फोरम की घोषणा राजनाथ सिंह ने 31 अक्टूबर 2025 को कुआलालंपुर में आयोजित दूसरे आसियान-भारत रक्षा मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक के दौरान की थी। यह बैठक 12वें एडीएमएम-प्लस के मौके पर हुई थी। मौजूदा फोरम में क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री गतिविधियों, नई सैन्य तकनीक और रक्षा उद्योग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। (India-ASEAN Defence Forum 2026)
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