📍नई दिल्ली | 14 Oct, 2026, 4:00 PM
China-Pakistan Karakoram-2026 Military Exercise: पाकिस्तान में चीनी नागरिकों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) से जुड़ी परियोजनाओं पर लगातार हो रहे हमलों ने बीजिंग की चिंता बढ़ा दी है। चीनी नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच चीन और पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारी मजबूत करने में जुटे हैं। दोनों देशों की सेनाएं अक्टूबर 2026 के मध्य से आखिर तक शिनजियांग के कोरला में संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘काराकोरम-2026’ करेंगी। इस बार अभ्यास में ड्रोन ऑपरेशन, काउंटर-ड्रोन तकनीक और ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों पर खास जोर रहेगा।
China-Pakistan Karakoram-2026 Military Exercise: चीन के रक्षा मंत्रालय ने क्या बताया?
चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सीनियर कर्नल चेन शी ने 10 अक्टूबर को प्रेस ब्रीफिंग में काराकोरम-2026 की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अभ्यास शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र के कोरला में मलान एयर बेस के नजदीक आयोजित किया जाएगा।
चीनी रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, “यह प्रशिक्षण उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियानों पर केंद्रित होगा।
कोरला में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का 11वां कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेनिंग बेस स्थित है। यहां होने वाली ट्रेनिंग हाई एल्टीट्यूड वाले इलाकों में सैन्य गतिविधियों और संयुक्त अभियानों की तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। (China-Pakistan Karakoram-2026 Military Exercise)
पाकिस्तान में ड्रोन हमले क्यों बने चिंता?
इस अभ्यास की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान में बढ़ती आतंकी हिंसा और चीनी नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के तहत सड़क, ऊर्जा, परिवहन और दूसरे बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई प्रोजेक्ट चलाए गए हैं। इन परियोजनाओं में काम करने वाले चीनी इंजीनियरों और कर्मचारियों पर पहले भी हमले हो चुके हैं।
बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठन पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और चीन से जुड़ी परियोजनाओं का विरोध करते रहे हैं। इसके अलावा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) भी पाकिस्तान के के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मार्च 2024 में खैबर पख्तूनख्वा के बिशम इलाके में हुए आत्मघाती हमले में पांच चीनी नागरिकों की मौत हुई थी। ये कर्मचारी दासू जलविद्युत परियोजना से जुड़े थे। इस घटना ने पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
सितंबर 2026 के लिए उपलब्ध कराए गए आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट (एसीएलईडी) के आंकड़ों में एक सप्ताह के दौरान पाकिस्तान में 318 हिंसक घटनाएं और 273 मौतें हुईं।
ऐसे में चीन के लिए यह जरूरी है कि पाकिस्तान में उसके नागरिकों, निर्माण स्थलों और रणनीतिक परियोजनाओं की सुरक्षा बेहतर हो। (China-Pakistan Karakoram-2026 Military Exercise)
काउंटर-ड्रोन सिस्टम पर है जोर
पाकिस्तानी सेना में चीनी और तुर्किये के सिस्टम हैं। जिनमें एचक्यू-17एई एयर डिफेंस सिस्टम, तुर्किये की कोरकुट एंटी-एयरक्राफ्ट गन और शाहिन काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी हैं। माना जा रहा है कि काराकोरम-2026 में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
काराकोरम-2026 में जॉइंड कमांड का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच सूचना साझा करने और फैसले लेने की प्रक्रिया में तालमेल बनाना है। अगर एक ड्रोन की पहचान करता है, तो उसकी जानकारी दूसरे तक समय पर पहुंचना जरूरी होता है। इसमें संचार उपकरणों, निगरानी प्रणालियों और कमांड सेंटर की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
पाकिस्तान की ओर से फोर्स कमांड नॉर्दर्न एरियाज (एफसीएनए) से जुड़ी एक बटालियन इसमें हिस्सा ले रही है। यह कमान स्कर्दू क्षेत्र से जुड़ी है। खास बात यह है कि पहली बार पाक आर्मी उइगर इलाके में एक्सरसाइज करेगी, जो चीन में मुसलमानों पर अत्याचार के लिए जाना जाता है। (China-Pakistan Karakoram-2026 Military Exercise)
चीन को क्यों है पाकिस्तान के अनुभव की जरूरत?
पाकिस्तान में चीनी नागरिकों और आर्थिक परियोजनाओं पर हुए हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोली है। ऐसे में चीन को यह समझने में मदद मिल सकती है कि आतंकवादी समूह छोटे ड्रोन, निगरानी उपकरण और अन्य साधनों का इस्तेमाल किस तरह करते हैं तथा सुरक्षा बलों को किस प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
चीन के लिए पाकिस्तान में अपने नागरिकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। सीपीईसी परियोजनाओं में बड़ी आर्थिक हिस्सेदारी होने के कारण वहां काम करने वाले कर्मचारियों और निर्माण स्थलों की सुरक्षा का सीधा संबंध दोनों देशों के आर्थिक सहयोग से है। (China-Pakistan Karakoram-2026 Military Exercise)
क्या पाकिस्तान में अपनी सेना तैनात करना चाहता है चीन?
पाकिस्तान ने कई बार स्पष्ट किया है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) और उससे जुड़ी परियोजनाओं की सुरक्षा करना उसकी अपनी जिम्मेदारी है। पाकिस्तानी सेना, स्पेशल सिक्योरिटी डिवीजन (एसएसडी) और पुलिस चीनी नागरिकों, इंजीनियरों और परियोजनाओं की सुरक्षा करती हैं। चीन ने कई बार इन सुरक्षा इंतजामों को और मजबूत करने की मांग की है, लेकिन पाकिस्तान ने अपनी जमीन पर चीनी सेना के नियमित सैनिकों की स्थायी तैनाती को मंजूरी नहीं दी है।
चीनी नागरिकों और परियोजनाओं पर हमलों की घटनाओं के बीच चीन प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियों (पीएससी) के जरिए सुरक्षा व्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। 2025 और 2026 के दौरान सिंध की बिजली परियोजनाओं पर चीनी प्राइवेट सिक्योरिटी कर्मियों की मौजूदगी दिखी है।
वहीं, ग्वादर में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का सैन्य अड्डा बनाने की भी खबरें हैं, लेकिन पाकिस्तान इनकार करता रहा है।
इस अभ्यास का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पाकिस्तानी सैनिकों को ऐसे अभियानों के लिए तैयार करना भी है, जिनमें दुर्गम इलाकों में आतंकवादियों से निपटना और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना शामिल है। बेहतर प्रशिक्षण से पाकिस्तान की सेना को चीनी नागरिकों और चीन की आर्थिक परियोजनाओं की सुरक्षा करने में मदद मिल सकती है। (China-Pakistan Karakoram-2026 Military Exercise)
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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





