📍नई दिल्ली | 2 Oct, 2026, 7:22 PM
Indian Army HMV 8×8 Trucks: पूर्वी लद्दाख से लेकर सियाचिन ग्लेशियर और राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों तक सेना की रसद क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय सेना ने 120 नए हेवी मोबिलिटी व्हीकल (एचएमवी) 8×8 ट्रकों की खरीद प्रक्रिया शुरू की है, जो कठिन पहाड़ी, बर्फीले और रेतीले इलाकों में भारी सैन्य सामग्री पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे। सेना में पहले से सेवा दे रहे टाट्रा बेस्ड इस प्लेटफॉर्म को हाई एल्टीट्यूड किट के साथ शामिल किया जाएगा, जिससे यह कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा। यह खरीद ऐसे समय में हो रही है जब उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर तेज और भरोसेमंद लॉजिस्टिक सपोर्ट को सैन्य तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
सेना मुख्यालय की मास्टर जनरल ऑफ सस्टेनेंस शाखा की ओर से जारी इस आरएफपी में बीईएमएल-टाट्रा टी-815 सीरीज के 120 वाहनों की मांग की गई है। वहीं, यह खरीद बीईएमएल लिमिटेड से की जाएगी।
Indian Army HMV 8×8 Trucks: HMV 8X क्यों है खास?
एचएमवी 8X8 एक हेवी मोबिलिटी ट्रक है। 8X8 का मतलब है कि वाहन में कुल आठ पहिए होते हैं और सभी आठ पहियों को इंजन से पावर मिलती है। यही वजह है कि यह वाहन सामान्य ट्रकों की तुलना में बेहद खराब इलाकों में भी आसानी से चल सकता है।
यह ट्रक कीचड़, बर्फ, रेत, पहाड़ी रास्तों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी सामान लेकर चलने के लिए बनाया गया है। भारतीय सेना लंबे समय से लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, सियाचिन और राजस्थान जैसे इलाकों में इसी फैमिली के व्हीकल्स का इस्तेमाल कर रही है।
बीईएमएल-टाट्रा टी-815 प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खूबी इसका ट्यूबलर चेसिस डिजाइन और इंडिपेंडेंट सस्पेंशन सिस्टम है। यदि किसी एक पहिए के नीचे गड्ढा या रुकावट आती है, तब भी बाकी पहिए जमीन से संपर्क बनाए रखते हैं। इससे कठिन इलाकों में व्हीकल की मोबलिटी बनी रहती है। (Indian Army HMV 8×8 Trucks)
कौन सा मॉडल खरीदेगी सेना?
आरएफपी के अनुसार भारतीय सेना बीईएमएल टाट्रा टी-815 29पीटी आर/50टी मॉडल खरीदना चाहती है। इस वाहन में स्पेयर व्हील, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) और हाई एल्टीट्यूड किट अनिवार्य रूप से शामिल होंगे। यह जनरल सर्विस यानी जीएस वर्जन है। इसका मतलब है कि इसे किसी मिसाइल या वेपन सिस्टम के लिए नहीं, बल्कि सामान्य मिलिट्री ट्रांसपोर्ट और रसद कार्यों के लिए खरीदा जा रहा है।
आरएफपी के मुताबिक कॉन्ट्रैक्ट प्रभावी होने के 12 महीने के भीतर सभी 120 वाहन सेना को सौंपने होंगे। डिलीवरी दो चरणों में होगी। पहले छह महीनों में 60 वाहन और अगले छह महीनों में शेष 60 वाहन सप्लाई किए जाएंगे। समयसीमा को लेकर सेना ने सख्त शर्तें रखी हैं। देरी होने पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म भी किया जा सकता है। साथ ही, लिक्विडेटेड डैमेज भी लगाया जा सकता है। (Indian Army HMV 8×8 Trucks)
देशभर के सात डिपो में भेजे जाएंगे वाहन
इन वाहनों की सप्लाई देश के विभिन्न सैन्य डिपो में की जाएगी। उधमपुर स्थित एनसीवीडी को 15 वाहन मिलेंगे। गुवाहाटी की 41 व्हीकल कंपनी को 5 वाहन दिए जाएंगे। पानागढ़ व्हीकल डिपो को 10 वाहन मिलेंगे। दिल्ली कैंट स्थित सीवीडी को सबसे अधिक 35 वाहन मिलेंगे। देहू रोड स्थित सीओडी को 20 वाहन दिए जाएंगे। प्रयागराज स्थित ऑर्डनेंस डिपो को 30 वाहन मिलेंगे, जबकि अवाडी को 5 वाहन भेजे जाएंगे।
यह आरएफपी सीधे बीईएमएल को ही जारी किया गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि ये व्हीकल्स पहले से भारतीय सेना में मौजूद है। आरएफपी में साफ कहा गया है कि एचएमवी 8X8 (जीएस) इन-सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसलिए इसके लिए अलग से मेंटेनेंस इवैल्यूएशन ट्रायल की आवश्यकता नहीं है। सेना ने इन वाहनों के लिए 36 महीने या 24,000 किलोमीटर की वारंटी तय की है।
बता दें कि बीईएमएल पिछले कई दशकों से टाट्रा डिजाइन आधारित भारी सैन्य ट्रकों का निर्माण कर रही है। सेना के पास इस परिवार के हजारों वाहन पहले से मौजूद हैं। ऐसे में नए वाहन खरीदने पर स्पेयर पार्ट्स, प्रशिक्षण, मरम्मत सुविधाएं और तकनीकी सहायता पहले से उपलब्ध रहती हैं। (Indian Army HMV 8×8 Trucks)
क्या इन ट्रकों पर हथियार लगाए जाएंगे?
120 एचएमवी 8X8 व्हीकल्स जनरल सर्विस के लिए हैं। इनका इस्तेमाल रसद, गोला-बारूद, उपकरण और सैन्य सामग्री के परिवहन के लिए किया जाएगा। हालांकि, बीईएमएल-टाट्रा 8X8 फैमिली के दूसरे वर्जन का इस्तेमाल कई मिलिट्री रोल्स में किया जाता रहा है। मूल चेसिस एक जैसा होता है, लेकिन उसके ऊपर लगाया गया स्ट्रक्चर और उपकरण मिशन के अनुसार बदल दिया जाता है।
इसी फैमिली के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर पृथ्वी मिसाइल के ट्रांसपोर्टर-कम-लॉन्चर, मिसाइल ट्रांसपोर्टर, ऑक्सीडाइजर कैरियर, फ्यूल कैरियर और वॉरहेड कैरियर जैसे सिस्टम लगाए गए हैं।
इसी तरह पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के पुराने संस्करण 8X8 हाई मोबिलिटी चेसिस पर आधारित रहे हैं। नए पिनाका सिस्टम में भी 8X8 प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल होता है, हालांकि हाल के सालों में कई लॉन्चर टाटा चेसिस पर बनाए गए हैं। इन वाहनों पर रॉकेट लॉन्चर लगाया जाता है और फायरिंग के बाद वे तुरंत अपनी स्थिति बदल सकते हैं।
बीईएमएल-टाट्रा 8X8 का इस्तेमाल सरवत्र ब्रिज सिस्टम में भी किया गया है। लगभग 15 मीटर लंबे इस मोबाइल ब्रिज को सेना के इंजीनियरिंग कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इसके अलावा यही प्लेटफॉर्म पोंटून ट्रक, गोला-बारूद लोडर, ट्रक-माउंटेड क्रेन, रडार कैरियर और संचार उपकरण ढोने वाले व्हीकल्स के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
वहीं, ध्यान देने वाली बात यह है कि हर मिसाइल सिस्टम इसी 8X8 प्लेटफॉर्म पर नहीं होता। उदाहरण के लिए ब्रह्मोस का मौजूदा ट्रांसपोर्टर-इरेक्टर-लॉन्चर टाटा 12X12 प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है। वहीं आकाश और बराक जैसे कई एयर डिफेंस सिस्टम भी टाटा के 8X8 या 10X10 वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। (Indian Army HMV 8×8 Trucks)
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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





