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काउंटर-IED ऑपरेशन को लेकर सेना की बड़ी तैयारी! खरीदेगी 350 एक्सप्लोसिव डिटेक्टर और 13 स्पेशल बम कंटेनमेंट व्हीकल

काउंटर-आईईडी, बम निरोधक और सीमा निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सेना ने अत्याधुनिक डिटेक्शन सिस्टम और कंटेनमेंट व्हीकल्स की शुरू की खरीद प्रक्रिया...

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📍नई दिल्ली | 2 Oct, 2026, 4:42 PM

Indian Army Counter IED: भारतीय सेना अपनी काउंटर-आईईडी, बम निरोधक और सीमा सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। सेना ने दो अलग-अलग रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (आरएफआई) जारी कर उद्योग जगत से जानकारी मांगी है। इनमें करीब 350 पोर्टेबल एक्सप्लोसिव डिटेक्टर और 13 टोटल कंटेनमेंट व्हीकल (टीसीवी) खरीदने की योजना है। दोनों सिस्टम का उद्देश्य विस्फोटक खतरों की पहचान, सुरक्षित हैंडलिंग और निपटान क्षमता को बेहतर बनाना है।

भारतीय सेना की काउंटर-आईईडी ब्रांच की तरफ से 22 सितंबर को जारी पहले डॉक्युमेंट में जहां पोर्टेबल एक्सप्लोसिव डिटेक्टर की जरूरत बताई गई है, जबकि 30 सितंबर को जारी दूसरे डॉक्युमेंट में टोटल कंटेनमेंट व्हीकल की मांग रखी गई है।

Indian Army Counter IED: 350 पोर्टेबल एक्सप्लोसिव डिटेक्टर खरीदने की योजना

22 सितंबर जारी आरएफआई के तहत भारतीय सेना करीब 350 पोर्टेबल एक्सप्लोसिव डिटेक्टर खरीदना चाहती है।
इन इक्विपमेंट्सों का इस्तेमाल एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल (ईओडी), काउंटर-आईईडी और काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन में किया जाएगा। सेना चाहती है कि संदिग्ध बैग, वाहन, पार्सल, व्यक्ति या लावारिस वस्तुओं की जांच बिना सीधे संपर्क के की जा सके।

इनका इस्तेमाल मिलिट्री स्टेशनों, सीमा चौकियों, सरकारी इमारतों, बस अड्डों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर किया जाएगा।

कैसे काम करेंगे ये डिटेक्टर?

सेना ने तकनीकी जरूरतों के मुताबिक डिटेक्टर को मिलिट्री, कॉर्मशियल और घरेलू स्तर पर बने विस्फोटकों की पहचान करने में सक्षम होना चाहिए।

इक्विपमेंट्स को विस्फोटकों के वाष्प, कण, तरल और ठोस रूपों का पता लगाना होगा। इसके साथ ही कार्बनिक और अकार्बनिक दोनों प्रकार के विस्फोटकों को पहचानने की क्षमता भी जरूरी है।

सेना ने यह भी कहा है कि गलत अलार्म की दर 5 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। मशीन का वार्म-अप समय 15 सेकंड से कम और पूरा एनलिसिस 30 सेकंड से कम समय में पूरा होना चाहिए।

सेना ने विशेष रूप से ऐसे उपकरणों को प्राथमिकता दी है, जिनमें ऑटो-कैलिब्रेशन की सुविधा हो, कैरियर गैस या बार-बार खरीदे जाने वाले कंज्यूमेबल्स की जरूरत न हो। इससे फील्ड में ऑपरेशन आसान होगा और रखरखाव लागत कम रहेगी। (Indian Army Counter IED)

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खराब मौसम में भी करें काम

सेना चाहती है कि इक्विपमेंट्स माइनस 10 डिग्री सेल्सियस से लेकर प्लस 55 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम कर सकें।

इसके अलावा 95 प्रतिशत तक नमी वाले वातावरण में भी इसकी कार्यक्षमता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सिस्टम को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस यानी विद्युत चुंबकीय शोर से भी सुरक्षित रहना होगा।

मशीन बैटरी से ऑपरेट होगी और लगातार कम से कम चार घंटे तक काम करने में सक्षम होनी चाहिए। यूएसबी और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी के जरिए डेटा ट्रांसफर और एक्सप्लोसिव लाइब्रेरी अपडेट करने की सुविधा भी मांगी गई है। (Indian Army Counter IED)

सिर्फ दो किलो के आसपास होगा वजन

सेना ने इक्विपमेंट्स को हल्का और पोर्टेबल रखने पर जोर दिया है। केस के बिना इसका वजन लगभग दो किलोग्राम होना चाहिए, ताकि एक सैनिक इसे आसानी से लेकर चल सके। इसके साथ मजबूत वाटरप्रूफ केस भी उपलब्ध कराया जाना होगा।

डिटेक्टर में एलईडी या एलसीडी टच स्क्रीन होगी जिस पर विस्फोटक का प्रकार, बैटरी की स्थिति, कैलिब्रेशन और सिस्टम की जानकारी दिखाई देगी। खतरे की स्थिति में ऑडियो और विजुअल दोनों तरह की चेतावनी मिलेगी।

विस्फोटक को सुरक्षित ढंग से ले जाने के लिए आएंगे विशेष वाहन

30 सितंबर सेना ने दूसरी आरएफआई जारी की। इसके तहत 13 टोटल कंटेनमेंट व्हीकल खरीदने की योजना है।

ये विशेष वाहन संदिग्ध आईईडी, अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस और अन्य खतरनाक विस्फोटक इक्विपमेंट्सों को सुरक्षित तरीके से ले जाने और निपटाने के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे।

इनका इस्तेमाल काउंटर-इंसर्जेंसी, काउंटर-टेररिज्म और नागरिक प्रशासन की सहायता वाले अभियानों में होगा।

क्या है टोटल कंटेनमेंट व्हीकल?

टीसीवी को आम भाषा में चलते-फिरते सुरक्षित कंटेनमेंट सिस्टम के रूप में समझा जा सकता है। यदि किसी जगह पर संदिग्ध बम मिलता है तो उसे वहीं नष्ट करना हमेशा संभव नहीं होता। ऐसे मामलों में उसे सुरक्षित तरीके से हटाकर नियंत्रित स्थान तक पहुंचाना पड़ता है।

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टीसीवी इसी काम के लिए बनाए जाते हैं। इनके भीतर विशेष कंटेनमेंट वेसल होता है जो विस्फोट को अपने अंदर रोकने की क्षमता रखता है। (Indian Army Counter IED)

8 किलो टीएनटी के बराबर धमाका झेलने की क्षमता

सेना ने मांग रखी है कि कंटेनमेंट वेसल कम से कम 8 किलोग्राम टीएनटी के बराबर विस्फोट को अपने भीतर नियंत्रित कर सके।

वेसल उच्च गुणवत्ता वाले स्टील से बना होना चाहिए और उसका वजन 7,500 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेसल बार-बार इस्तेमाल किया जा सके और अपनी प्रमाणित क्षमता के बराबर विस्फोटों को कई बार सहन कर सके। (Indian Army Counter IED)

रिमोट कंट्रोल और रोबोटिक सिस्टम की भी मांग

सेना चाहती है कि कंटेनमेंट सिस्टम का दरवाजा दूर से खोला और बंद किया जा सके। इसके लिए वायरलेस रिमोट कंट्रोल या रोबोटिक इंटरफेस की सुविधा होनी चाहिए। वाहन को ऐसे प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जा सके जो संदिग्ध वस्तु तक पहुंचकर उसे सुरक्षित रूप से कंटेनमेंट वेसल में रख सके।

इसके अलावा टीसीवी में रेडियो फ्रीक्वेंसी शील्डिंग की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी रेडियो सिग्नल के कारण रेडियो कंट्रोल आईईडी सक्रिय न हो सके।

रासायनिक और जैविक खतरों के लिए भी तैयार

सेना ने भविष्य में रासायनिक और जैविक खतरों से निपटने के लिए अपग्रेड की संभावना को भी ध्यान में रखा है।

टीसीवी में ऐसी व्यवस्था मांगी गई है जिससे तरल या वाष्प के नमूने बिना किसी बाहरी प्रदूषण के वैक्यूम सिस्टम के जरिए लिए जा सकें। (Indian Army Counter IED)

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ब्लास्ट टेस्ट रिपोर्ट अनिवार्य

निर्माता कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त या एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशालाओं की ब्लास्ट टेस्ट रिपोर्ट जमा करनी होगी। इन रिपोर्टों में यह प्रमाणित होना चाहिए कि कंटेनमेंट सिस्टम निर्धारित क्षमता के विस्फोट को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर सकता है। जहां जरूरी हो, विस्फोट के बाद स्ट्रक्चर पर पड़े असर को मापने की व्यवस्था भी उपलब्ध करानी होगी।

दोनों प्रोजेक्ट में खरीद प्रक्रिया समान होगी। कंपनियों से सिंगल स्टेज-टू बिड सिस्टम के तहत प्रस्ताव मांगे जाएंगे। तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में जमा होंगे।

तकनीकी मूल्यांकन समिति (टीईसी) सभी प्रस्तावों की जांच करेगी। योग्य पाए गए सिस्टम भारत में फील्ड इवैल्यूएशन ट्रायल से गुजरेंगे। ये ट्रायल “नो कॉस्ट नो कमिटमेंट” आधार पर होंगे। इसका मतलब है कि परीक्षण का खर्च सेना नहीं उठाएगी और ट्रायल में शामिल लेना खरीद की गारंटी नहीं होगा। (Indian Army Counter IED)

भारतीय उद्योग को प्राथमिकता

कंपनियों को अपने उत्पाद में स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत, उत्पादन क्षमता, पूर्व आपूर्ति रिकॉर्ड, गुणवत्ता प्रमाणन और भारत में मरम्मत तथा रखरखाव क्षमता की जानकारी देनी होगी।

डीएपी 2020 के तहत बाय इंडियन (आईडीडीएम), बाय इंडियन और बय एंड मेक (इंडियन) जैसी कैटेगरी को प्राथमिकता दी जाएगी। (Indian Army Counter IED)

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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