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जापान क्यों बांट रहा है पुराने युद्धपोत? चीन की बढ़ती ताकत को जवाब देने के लिए अपनाई यह रणनीति

जापान की यह नीति उसके व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत वह क्षेत्र में ऐसा सुरक्षा वातावरण बनाना चाहता है जिसे टोक्यो "डिजायरेबल सिक्योरिटी एनवायरनमेंट" कहता है...

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📍टोक्यो | 2 Sep, 2026, 7:03 PM

Japan Warship Transfer: जापान ने अपने पुराने लेकिन अभी भी उपयोगी युद्धपोतों को मित्र देशों को देने की रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस कदम का मकसद केवल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सुरक्षा साझेदारियों को मजबूत करना है। जापान फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों को अपने पुराने युद्धपोत देने की योजना बना रहा है। ताकिचीन के बढ़ते प्रभाव के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में अपनी भूमिका मजबूत किया जा सके।

जापान की यह नीति उसके व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत वह क्षेत्र में ऐसा सुरक्षा वातावरण बनाना चाहता है जिसे टोक्यो “डिजायरेबल सिक्योरिटी एनवायरनमेंट” कहता है। जिसका मतलब है कि जापान केवल अपनी रक्षा तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र के सिक्योरिटी स्ट्रक्चर को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाए।

Japan Warship Transfer: फिलीपींस को मिलेंगे अबुकुमा क्लास युद्धपोत

जापान और फिलीपींस के बीच चल रही चर्चाओं के तहत फिलीपींस को पांच अबुकुमा-क्लास डिस्ट्रॉयर एस्कॉर्ट जहाज मिलने की उम्मीद है। अगले दो से तीन सालों में इन जहाजों का ट्रांसफर किया जा सकता है।

अबुकुमा-क्लास जहाज जापान मैरिटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स के ऐसे युद्धपोत हैं जिन्हें समुद्री गश्त, एंटी-सबमरीन ऑपरेशन और तटीय सुरक्षा के लिए बनाया गया था। हालांकि ये आधुनिकतम युद्धपोतों की श्रेणी में नहीं आते, लेकिन फिलीपींस जैसी नौसेनाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षमता वृद्धि साबित हो सकते हैं।

फिलीपींस पहले से ही दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ समुद्री विवादों का सामना कर रहा है। ऐसे में जापानी युद्धपोत वहां की समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं। (Japan Warship Transfer)

इंडोनेशिया के साथ भी चल रही बातचीत

फिलीपींस के अलावा जापान इंडोनेशिया को भी पुराने युद्धपोतों देने पर चर्चा कर रहा है। यह बातचीत असागिरी-क्लास डिस्ट्रॉयर को लेकर हो रही है। इस श्रेणी का पहला जहाज मार्च 2026 में 38 सालों की सेवा के बाद रिटायर किया गया था।

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असागिरी-क्लास जहाजों को जापान ने 1980 के दशक के अंत में अपनी नौसैनिक शक्ति बढ़ाने के लिए शामिल किया था। इन जहाजों में एंटी-सबमरीन और एंटी-सरफेस युद्ध क्षमताएं मौजूद हैं। इंडोनेशिया की नौसेना के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म समुद्री निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों में उपयोगी हो सकते हैं।

जहाज के साथ तकनीकी सहयोग भी शामिल

जापान अपने युद्धपोतों के साथ प्रशिक्षण, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स सपोर्ट और तकनीकी सहयोग भी देगा। इससे जापान और संबंधित देशों के बीच लंबे समय तक रक्षा सहयोग बना रहेगा। जहाजों की सर्विस लाइफ के दौरान जापानी विशेषज्ञों और संस्थानों की भूमिका बनी रहेगी। यही कारण है कि इस नीति को जापान के लिए एक कूटनीतिक और रणनीतिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है।

फिलीपींस के मामले में जापान पहले ही प्रशिक्षण और मेंटेनेंस सहयोग पर चर्चा कर रहा है। इससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की क्षमता भी बढ़ेगी। (Japan Warship Transfer)

चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर

जापानी विशेषज्ञों का मानना है कि फिलीपींस की समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने से जापान को भी सुरक्षा लाभ मिलेगा।

हाल के सालों में चीन की नौसेना ने ताइवान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से, बाशी चैनल और फिलीपीन सागर के आसपास अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। कई चीनी युद्धपोत और नौसैनिक समूह बाद में प्रशांत महासागर और जापान के द्वीपों के आसपास भी दिखाई दिए हैं।

ऐसे में फिलीपींस की नौसेना यदि इन गतिविधियों की बेहतर निगरानी कर सके तो उससे जापान को भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इस कारण टोक्यो फिलीपींस को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार के रूप में देखता है।

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पुराने युद्धपोत क्यों दे रहा है जापान?

जापान के रक्षा मंत्रालय से जुड़े नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज (एनआईडीएस) ने 25 अगस्त को प्रकाशित एक विश्लेषण में कहा कि किसी सैन्य प्लेटफॉर्म का नया या पुराना होना सबसे महत्वपूर्ण सवाल नहीं है।

विश्लेषण के अनुसार मुख्य प्रश्न यह है कि क्या जापान उस प्लेटफॉर्म को स्थानांतरित करने के बाद भी अपनी आवश्यक रक्षा क्षमता बनाए रख सकता है।

जापान वर्तमान में अधिक एडवांस, ऑटोमेटेड और अनमैन्ड सिस्टम्स को शामिल कर रहा है। ऐसे में कई पुराने जहाज अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी होने से पहले ही कम महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इससे ऐसे प्लेटफॉर्म मित्र देशों को देने का विकल्प बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ हिरोहितो ओगी का कहना है कि कुछ पुराने जहाजों की एयर डिफेंस क्षमता सीमित है और वे उच्च तीव्रता वाले आधुनिक युद्ध में अधिक समय तक टिक नहीं पाएंगे। इसलिए जापान के लिए उन्हें समय से पहले रिटायर कर नई क्षमताएं शामिल करना और पुराने जहाज साझेदार देशों को देना व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। (Japan Warship Transfer)

बजट 2 अरब येन से बढ़कर 18.1 अरब हुआ

जापान ने 2023 में ऑफिशियल सिक्योरिटी असिस्टेंस (ओएसए) कार्यक्रम शुरू किया था। यह अनुदान आधारित सैन्य सहायता कार्यक्रम है, जिसके जरिए मित्र देशों को उपकरण और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद दी जाती है।

इस कार्यक्रम का बजट तेजी से बढ़ा है। 2023 वित्तीय वर्ष में इसका बजट 2 अरब येन था, जो अब बढ़कर 18.1 अरब येन तक पहुंच चुका है।

इस योजना के तहत जापान तटीय रडार, गश्ती नौकाएं, निगरानी प्रणाली, ड्रोन और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा रहा है। फिलीपींस और इंडोनेशिया दोनों इस कार्यक्रम के लाभार्थी देशों में शामिल हैं। (Japan Warship Transfer)

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इंडोनेशिया के साथ अलग तरह के संबंध

इंडोनेशिया का मामला फिलीपींस से कुछ अलग है। जकार्ता अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखने की नीति पर चलता है और किसी सैन्य गुट का हिस्सा बनने से बचता है।

इसके बावजूद जापान और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जापान इंडोनेशिया से यह अपेक्षा नहीं करता कि वह चीन के खिलाफ खुलकर किसी पक्ष में खड़ा हो।

टोक्यो की रणनीति “इन्फ्लुएंस विदआउट डिमांडिंग अलाइनमेंट” यानी बिना किसी राजनीतिक या सैन्य प्रतिबद्धता की मांग किए प्रभाव बढ़ाने की मानी जा रही है। इसी वजह से प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, रखरखाव सहायता और रक्षा संस्थानों के बीच संपर्क को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जापान लंबे समय तक एशिया में आर्थिक सहयोग और निवेश के लिए जाना जाता था। अब वह धीरे-धीरे सुरक्षा क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।

रक्षा सहयोग, सैन्य उपकरणों के हस्तांतरण, प्रशिक्षण और सुरक्षा सहायता कार्यक्रमों के जरिए जापान क्षेत्र में नया डिफेंस नेटवर्क तैयार कर रहा है। फिलीपींस और इंडोनेशिया को पुराने युद्धपोतों का प्रस्ताव इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सैन्य हार्डवेयर के साथ-साथ दीर्घकालिक सुरक्षा सहयोग को भी महत्व दिया जा रहा है। (Japan Warship Transfer)

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