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इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर को मिल सकता है जबरदस्त बूस्ट! डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए मिल सकते हैं 13,500 करोड़ रुपये!

आईएमआरएच को भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका नेवल वर्जन डेक-बेस्ड मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (डीबीएमआरएच) होगा, जिसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर इस्तेमाल किया जाना है...

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📍नई दिल्ली | 2 Sep, 2026, 9:28 PM

HAL IMRH: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (आईएमआरएच) प्रोग्राम को बड़ा बूस्ट देने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक आईएमआरएच के डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए कॉस्टिंग कमेटी से 13,500 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, अब यह प्रस्ताव कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के सामने रखा जा सकता है। अगर यह मंजूरी मिलती है, तो 13 टन क्लास के स्वदेशी मीडियम-लिफ्ट हेलीकॉप्टर के डिजाइन डेवलपमेंट फेज को रफ्तार मिलेगी।

आईएमआरएच को भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका नेवल वर्जन डेक-बेस्ड मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (डीबीएमआरएच) होगा, जिसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर इस्तेमाल किया जाना है। वहीं इसमें नया अरावली टर्बोशाफ्ट इंजन लगाया जा सकता है।

HAL IMRH: 13 टन क्लास का होगा आईएमआरएच

आईएमआरएच को करीब 13 टन वजन कैटेगरी का ट्विन-इंजन मीडियम-लिफ्ट हेलीकॉप्टर बनाया जा रहा है। इसका इस्तेमाल सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के अलावा टैक्टिकल ट्रूप कैरिज, वीआईपी और वीवीआईपी ट्रांसपोर्ट, कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू, कैजुअल्टी इवैक्यूएशन, स्पेशल ऑपरेशन, कमांडो इंसर्शन और बाहरी कार्गो ले जाने के लिए भी इस्तेमाल होगा।

इस हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना और भारतीय सेना के मौजूदा रूसी मूल के एमआई-17 हेलीकॉप्टर बेड़े के भविष्य के रिप्लेसमेंट के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे भारतीय सशस्त्र बलों को मीडियम-लिफ्ट कैटेगरी में स्वदेशी प्लेटफॉर्म मिलेगा।

आईएमआरएच का नेवल वर्जन डीबीएमआरएच करीब 12.5 टन श्रेणी का होगा। इसमें जहाजों से ऑपरेशन के लिए जरूरी बदलाव किए जाएंगे। इसमें फोल्डिंग रोटर ब्लेड और ऐसा टेल बूम डिजाइन शामिल होगा, जिससे हेलीकॉप्टर को युद्धपोत के हैंगर में सीमित जगह के भीतर रखा जा सके। (HAL IMRH)

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डिजाइन में ऊंचाई वाले इलाकों पर भी फोकस

आईएमआरएच में पांच ब्लेड वाला आर्टिकुलेटेड मेन रोटर और चार ब्लेड वाला टेल रोटर लगाया जा सकता है। मेन रोटर का डायामीटर करीब 21.2 मीटर होगा।

इस डिजाइन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ऊंचाई वाले इलाकों में बेहतर लिफ्ट और होवर परफॉर्मेंस हासिल करना है। आईएमआरएच सियाचिन और लद्दाख जैसे हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में करीब 6,000 से 6,700 मीटर तक ऑपरेशन कर सकेगा।

समुद्र तल पर इसका पेलोड करीब 4,500 किलोग्राम तक होगा। करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर भी 1,000 से 1,500 किलोग्राम तक पेलोड ले जा सकेगा। हेलीकॉप्टर में हथियारों के लिए चार हार्डपॉइंट भी होंगे, जिन पर कुल करीब 1,600 किलोग्राम तक हथियार ले जाए जा सकते हैं। (HAL IMRH)

अरावली इंजन क्यों है सबसे अहम?

एचएएल और फ्रांस की साफरान हेलिकॉप्टर इंजिन्स ने अपनी संयुक्त कंपनी सैफहल हेलिकॉप्टर इंजिन्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए अरावली इंजन डेवलप करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है।

अरावली को 3,500 से 4,000 शाफ्ट हॉर्सपावर क्लास का टर्बोशाफ्ट इंजन बनाया जा रहा है। चूंकि आईएमआरएच ट्विन-इंजन हेलीकॉप्टर है, इसलिए दोनों इंजनों से मिलकर कुल पावर काफी अधिक होगी।

यह इंजन आईएमआरएच के साथ नौसेना के डीबीएमआरएच में भी इस्तेमाल किया जाना है। इसलिए इंजन का डिजाइन, टेस्टिंग और हेलीकॉप्टर के साथ इंटीग्रेशन दोनों प्लेटफॉर्म की परियोजनाओं से सीधे जुड़ा हुआ है।

सैफहल के अनुबंध में इंजन का पूरा प्रोडक्ट लाइफसाइकिल शामिल है। इसमें डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई और लाइफसाइकिल सपोर्ट जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं। प्रस्तावित उत्पादन तुमकुरु स्थित एचएएल सुविधा में किया जा सकता है। (HAL IMRH)

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एचएएल पहले ही लगा चुका है करीब 4,000 करोड़

आईएमआरएच प्रोग्राम में एचएएल पहले से अपने संसाधनों से करीब 4,000 करोड़ खर्च कर चुका है। अब 13,500 करोड़ का प्रस्तावित आवंटन मुख्य रूप से डिजाइन और डेवलपमेंट फेज के लिए है।

आईएमआरएच के लिए प्रोटोटाइप रोलआउट और पहली उड़ान की समयसीमा इंजन डेवलपमेंट के साथ भी जुड़ी हुई है। अरावली इंजन के पूरी तरह तैयार और प्रमाणित होने के बाद ही उसे हेलीकॉप्टर में इंटीग्रेट कर व्यापक फ्लाइट टेस्टिंग की जा सकेगी। (HAL IMRH)

नौसेना के लिए तीन तरह की भूमिका

आईएमआरएच का नेवल वर्जन डीबीएमआरएच भारतीय नौसेना के लिए अलग जरूरतों के हिसाब से विकसित किया जा रहा है। इसके लिए एंटी-सबमरीन वारफेयर यानी एएसडब्ल्यू और एंटी-सरफेस वारफेयर यानी एएसयूडब्ल्यू जैसे मिशन प्रोफाइल पर काम किया जा रहा है।

इसके अलावा स्पेशल ऑपरेशन और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग यानी एईडब्ल्यू जैसी भूमिकाओं के लिए भी अलग कॉन्फिगरेशन की जरूरत बताई गई है। शिप बेस्ड ऑपरेशन के चलते इसके डिजाइन में स्टोरेज, डेक हैंडलिंग और समुद्री वातावरण से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। (HAL IMRH)

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