📍नई दिल्ली/ओडिशा | 29 Apr, 2026, 8:32 PM
DRDO NASM-SR Missile Test: भारत ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बंगाल की खाड़ी में स्वदेशी एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने मिलकर नौसेना एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज (NASM-SR) का पहला सल्वो लॉन्च सफलतापूर्वक किया। यह परीक्षण ओडिशा के तट के पास किया गया, जहां नौसेना के हेलीकॉप्टर से एक साथ दो मिसाइलें दागी गईं।
इस टेस्ट में एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलें तेजी से दागी गईं। यह भारत का पहला ऐसा परीक्षण है जिसमें एयर-लॉन्च्ड एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम को सल्वो मोड में इस्तेमाल किया गया। दोनों ने अपने लक्ष्य को सटीक तरीके से हिट किया।
DRDO NASM-SR Missile Test: क्या है NASM-SR
NASM-SR एक शॉर्ट रेंज एंटी-शिप मिसाइल है, जिसे खास तौर पर दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे हेलीकॉप्टर से लॉन्च किया जा सकता है।
इसका मतलब है कि नौसेना को अब समुद्र में किसी जहाज के पास जाकर सीधे हमला करने की जरूरत नहीं होगी। हेलीकॉप्टर हवा में रहते हुए ही दूर से मिसाइल दाग सकता है और टारगेट को हिट कर सकता है।
यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और इसे डीआरडीओ की अलग-अलग लैब्स और भारतीय इंडस्ट्री के सहयोग से डेवलप किया गया है। (DRDO NASM-SR Missile Test)
क्या होता है सल्वो लॉन्च और क्यों जरूरी है
इस परीक्षण का सबसे अहम हिस्सा सल्वो लॉन्च था। आसान भाषा में समझें तो सल्वो लॉन्च का मतलब है कि एक ही प्लेटफॉर्म से बहुत कम समय के अंतराल में एक से ज्यादा मिसाइलें दागना।
इसका फायदा यह होता है कि दुश्मन के पास प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम रह जाता है। अगर एक मिसाइल को इंटरसेप्ट भी कर लिया जाए, तो दूसरी मिसाइल टारगेट तक पहुंच सकती है।
इस टेस्ट में दो मिसाइलें एक ही हेलीकॉप्टर से लगातार दागी गईं। यानी कि भारत अब इस तरह के मल्टी-शॉट अटैक करने में सक्षम है। (DRDO NASM-SR Missile Test)
🚨 BIG BOOST TO INDIA’S NAVAL FIREPOWER 🚨
DRDO and the Indian Navy have successfully conducted the maiden salvo launch of the Naval Anti-Ship Missile – Short Range (NASM-SR) from a naval helicopter off the Odisha coast in the Bay of Bengal.
In a first-of-its-kind trial, two… pic.twitter.com/PmcvR8aBuW— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) April 29, 2026
परीक्षण में हासिल किए गए सभी लक्ष्य
डीआरडीओ के मुतबिक इस परीक्षण के दौरान तय किए गए सभी टारगेट पूरे हुए। परीक्षण के दौरान मिसाइलों की ट्रैकिंग के लिए अलग-अलग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इनमें रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और टेलीमेट्री जैसे उपकरण शामिल थे, जिन्हें चांदीपुर की इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में तैनात किया गया था। इन सिस्टम्स के जरिए मिसाइल की दिशा, रफ्तार और टाारगेट पर हमले की पुष्टि की गई।
इस टेस्ट के दौरान मिसाइलों ने पानी की सतह के पास यानी वाटरलाइन पर टारगेट को हिट करने की क्षमता भी दिखाई। यह क्षमता समुद्री युद्ध में काफी अहम मानी जाती है क्योंकि इससे जहाज को ज्यादा नुकसान पहुंचता है और उसके डूबने की संभावना बढ़ जाती है। (DRDO NASM-SR Missile Test)
हेलीकॉप्टर से लॉन्च होने वाली मिसाइल
NASM-SR एक ऐसी मिसाइल है जिसे खास तौर पर हेलीकॉप्टर से लॉन्च करने के लिए तैयार किया गया है। इसे हवा में उड़ रहे हेलीकॉप्टर से दुश्मन के जहाजों पर दागा जा सकता है।
इस तरह के सिस्टम से नौसेना को ज्यादा फायदा मिलता है क्योंकि हेलीकॉप्टर तेजी से किसी भी दिशा में जाकर हमला कर सकता है। इससे समुद्र में निगरानी और हमला दोनों आसान हो जाते हैं।
कैसे काम करती है मिसाइल
NASM-SR में सॉलिड प्रोपल्शन बूस्टर और लॉन्ग बर्न सस्टेनर इंजन लगाया गया है। लॉन्च के समय बूस्टर मिसाइल को तेजी से आगे बढ़ाता है और उसके बाद सस्टेनर इंजन इसे लगातार रफ्तार देता रहता है।
मिसाइल के अंदर एडवांस नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें फाइबर ऑप्टिक जाइरोस्कोप आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और रेडियो अल्टीमीटर का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह अपनी ऊंचाई और दिशा को सही बनाए रखती है।
इसके साथ ही इसमें हाई-बैंडविड्थ टू-वे डेटा लिंक दिया गया है, जिससे मिसाइल और हेलीकॉप्टर के बीच जानकारी का आदान-प्रदान होता रहता है। (DRDO NASM-SR Missile Test)
पूरी तरह स्वदेशी तकनीक
इस मिसाइल के सभी महत्वपूर्ण सिस्टम भारत में ही विकसित किए गए हैं। डीआरडीओ की अलग-अलग लैब्स और भारतीय इंडस्ट्री ने मिलकर इसे तैयार किया है। इसमें रिसर्च सेंटर इमारत, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी, हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी और टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी शामिल हैं।
इसके अलावा भारतीय इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। प्रोडक्शन के लिए डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर्स के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। (DRDO NASM-SR Missile Test)

