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IPRD 2026: समुद्री रास्तों को हथियार बना रहे कुछ देश, राजनाथ सिंह ने जताई चिंता; सप्लाई चेन और क्षेत्रीय सहयोग पर दिया जोर

IPRD 2026 में रक्षा मंत्री ने कहा- समुद्री व्यापार में रुकावट और अहम समुद्री रास्तों के इस्तेमाल को हथियार बनाने की कोशिशें बढ़ रहीं; भारत ने क्षेत्रीय सहयोग, नई टेक्नोलॉजी और समुद्री सुरक्षा मजबूत करने पर दिया जोर...

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📍नई दिल्ली | 4 Nov, 2026, 7:34 PM

IPRD 2026: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और व्यापार को मजबूत बनाने के लिए सप्लाई चेन में विविधता लाने और क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक सुरक्षा माहौल में समुद्री व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में देशों को एक-दूसरे पर निर्भरता कम करने के बजाय उसे अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में काम करना होगा।

IPRD 2026: समुद्री व्यापार में रुकावट और अहम रास्तों का इस्तेमाल हथियार की तरह

रक्षा मंत्री ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (आईपीआरडी)-2026 में कहा कि दुनिया के देश समुद्र के रास्ते व्यापार, संसाधनों और जरूरी सामानों के आदान-प्रदान पर निर्भर हैं। ऐसे में समुद्री रास्तों में किसी भी तरह की रुकावट का असर केवल एक देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ देश और ताकतें समुद्र के महत्व का इस्तेमाल अपने सीमित हितों को पूरा करने के लिए कर रही हैं। वैश्विक समुद्री सुरक्षा का माहौल जानबूझकर पैदा की जा रही व्यापारिक रुकावटों से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता को चुनौती दिए जाने और संकरे समुद्री रास्तों को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने पर चिंता जताई।

रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्र देशों और सभ्यताओं को जोड़ने का काम करते हैं। इनके जरिए सामान, ज्ञान और संस्कृति का आदान-प्रदान होता है। दुनिया के करोड़ों लोगों की आजीविका भी समुद्र से जुड़ी हुई है। इसलिए समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना सभी देशों के साझा हित में है।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवधान के बाद वैश्वीकरण को छोड़ देना या समुद्री रास्तों को बंद कर देना इसका समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि देश आपसी निर्भरता को अधिक सुरक्षित बनाएं, ताकि संकट के समय भी जरूरी सामान और व्यापार प्रभावित न हों। (IPRD 2026)

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सप्लाई चेन में विविधता और भरोसेमंद समुद्री ढांचे पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए सप्लाई चेन में विविधता लाना जरूरी है। इसके साथ भरोसेमंद समुद्री बुनियादी ढांचे, समुद्र में होने वाली गतिविधियों की बेहतर जानकारी और क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग को बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा कि देशों के पास ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे वे किसी संकट का पहले से अनुमान लगा सकें और उसके प्रभाव को कम कर सकें। इसके अलावा संकट आने पर उससे निपटने और सामान्य स्थिति बहाल करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।

राजनाथ सिंह के अनुसार, समुद्री सुरक्षा का मतलब केवल नौसेना की सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं है। समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध मछली पकड़ना, साइबर हमले और प्राकृतिक आपदाएं भी समुद्री क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। इसलिए समुद्री सुरक्षा की रणनीति में इन सभी खतरों को शामिल करना जरूरी है। (IPRD 2026)

एआई और ऑटोनॉमस सिस्टम से बदल रही समुद्री निगरानी

राजनाथ सिंह ने समुद्री सुरक्षा में नई टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए आंकड़ों का विश्लेषण करने का तरीका बदल रहा है। वहीं, ऑटोनॉमस सिस्टम समुद्र में निगरानी और सैन्य अभियानों की नई संभावनाएं खोल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि नए सेंसर की मदद से समुद्र में होने वाली गतिविधियों पर पहले से बेहतर नजर रखी जा सकती है। इसके अलावा मटेरियल साइंस, बायोटेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स में हो रही प्रगति से समुद्री शोध और सुरक्षा के नए रास्ते खुल रहे हैं।

हालांकि, रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि केवल नई टेक्नोलॉजी हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है। असली सवाल यह है कि उसका इस्तेमाल समुद्री क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए कैसे किया जाता है।

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उन्होंने आगाह किया कि टेक्नोलॉजी कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के पास आधुनिक शोध संस्थान और तकनीकी संसाधन हैं, जबकि कुछ देश अभी अपनी बुनियादी क्षमता विकसित कर रहे हैं। अगर नई टेक्नोलॉजी का लाभ केवल कुछ देशों को मिलता है, तो पूरे क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा मजबूत नहीं हो पाएगी। (IPRD 2026)

विकसित भारत 2047 में समुद्री क्षेत्र की अहम भूमिका

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में समुद्री क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। केंद्र सरकार बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे, समुद्री संपर्क और तटीय आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने सागरमाला कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ समुद्री उद्योगों को मजबूत करने और बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने मैरीटाइम अमृत काल विजन-2047 को भारत के समुद्री क्षेत्र के विकास का प्रमुख रोडमैप बताया। इसमें टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च, शिक्षा और कौशल विकास को महत्व दिया गया है।

उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र केवल व्यापार और परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास से भी जुड़ा हुआ है। (IPRD 2026)

पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी

राजनाथ सिंह ने समुद्री विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्र को संसाधनों का असीमित भंडार नहीं माना जा सकता। समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।

उन्होंने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के हितों को विकास योजनाओं के केंद्र में रखने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

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रक्षा मंत्री ने भारत के महासागर विजन (म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन) का भी उल्लेख किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से वर्ष 2019 में घोषित इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव का भी जिक्र किया। यह पहल समुद्री सहयोग के सात आपस में जुड़े क्षेत्रों पर काम करने का ढांचा उपलब्ध कराती है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समुद्री भविष्य कोई एक देश अकेले तय नहीं कर सकता। इसके लिए सभी देशों के बीच भरोसा, सहयोग और साझा प्रयास जरूरी हैं। (IPRD 2026)

नौसेना प्रमुख ने समुद्री रिसर्च और डेटा साझा करने पर दिया जोर

कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच वैज्ञानिक जानकारी, शोध सुविधाओं और तकनीकी क्षमताओं का समान वितरण नहीं है।

उन्होंने कहा कि समुद्री सहयोग केवल उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं होना चाहिए। देशों को ऐसी क्षमता विकसित करनी चाहिए, जिससे वे तकनीक का संचालन, रखरखाव और जरूरत के अनुसार उसमें बदलाव कर सकें।

नौसेना प्रमुख ने समुद्री विज्ञान और रिसर्च में साझा निवेश बढ़ाने, वैज्ञानिक आंकड़ों के आदान-प्रदान और संयुक्त शोध अभियानों की जरूरत बताई। उन्होंने समुद्री संस्थानों के बीच भरोसा, पारदर्शिता और सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया। (IPRD 2026)

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  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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