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IPRD-2026: नई दिल्ली में जुटेंगे 18 देशों के नेवल एक्सपर्ट, समुद्री सुरक्षा और टेक्नोलॉजी पर होगा मंथन

इस साल की थीम समुद्र से जुड़े विज्ञान और तकनीक के साथ शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर है। इसका मकसद समुद्री चुनौतियों को समझने के लिए उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी और तकनीकी क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करना है...

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📍नई दिल्ली | 23 Oct, 2026, 8:16 PM

IPRD-2026: भारतीय नौसेना 3 से 5 नवंबर तक नई दिल्ली में इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (आईपीआरडी-2026) का आयोजन करेगी। तीन दिन का यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मानेकशॉ सेंटर में आयोजित होगा। इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के 18 देशों के नौसैनिक विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति निर्माता और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अधिकारी हिस्सा लेंगे। इस साल सम्मेलन का मुख्य विषय ‘इंडो-पैसिफिक में साइंस, टेक्नोलॉजी और एकेडमिक सहयोग’ रखा गया है।

सम्मेलन के दूसरे दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशेष संबोधन देंगे। वहीं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह भी विशेष संबोधन करेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय नौसेना, नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (एनएमएफ) के सहयोग से कर रही है। बता दें कि एनएमएफ इस सम्मेलन का प्रमुख आयोजन सहयोगी और नौसेना का नॉलेज पार्टनर है।

IPRD-2026: क्या है इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग?

इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग भारतीय नौसेना का वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग देशों के बीच चर्चा के लिए मंच उपलब्ध कराना है। इसमें समुद्र से जुड़े रणनीतिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता है।

इस सम्मेलन के जरिए भारत विभिन्न देशों के साथ समुद्री मामलों में सहयोग बढ़ाने और साझा चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर देता है। आईपीआरडी-2026 में जॉइंट रिसर्च, तकनीक के विकास, वैज्ञानिक डेटा साझा करने और संस्थानों के बीच सहयोग के ठोस तरीकों पर ध्यान दिया जाएगा।

इस साल की थीम समुद्र से जुड़े विज्ञान और तकनीक के साथ शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर है। इसका मकसद समुद्री चुनौतियों को समझने के लिए उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी और तकनीकी क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करना है। (IPRD-2026)

भारत की समुद्री नीति से जुड़ा है सम्मेलन

आईपीआरडी का संबंध भारत की व्यापक समुद्री सोच से भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित 14वें ईस्ट एशिया समिट के दौरान इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (आईपीओआई) की घोषणा की थी।

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आईपीओआई का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके तहत समुद्री सुरक्षा, समुद्री संसाधनों, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण और अन्य संबंधित क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार किया गया है।

यह पहल भारत के ‘महासागर’ विजन से भी जुड़ी है। महासागर का पूरा नाम ‘म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन’ है। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को साझा सहयोग के जरिए आगे बढ़ाना है।

आईपीआरडी का काम इन व्यापक नीतियों को व्यावहारिक सुझावों में बदलना है। सम्मेलन में सामने आने वाले प्रस्तावों को द्विपक्षीय, त्रिपक्षीय और कई देशों के बीच होने वाली बातचीत के माध्यम से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। (IPRD-2026)

समुद्र से जुड़े विज्ञान और तकनीक पर रहेगा फोकस

इंडो-पैसिफिक रीजन के समुद्र एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन समुद्र को समझने और उसकी सुरक्षा करने के लिए जरूरी वैज्ञानिक जानकारी, तकनीक और संस्थागत क्षमता सभी देशों के पास समान रूप से उपलब्ध नहीं है। आईपीआरडी-2026 में इस अंतर को कम करने के तरीकों पर चर्चा होगी।

सम्मेलन में विज्ञान का अर्थ केवल इंजीनियरिंग और तकनीक तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें लाइफ साइंस यानी जीवन विज्ञान और सोशल साइंस यानी सामाजिक विज्ञान को भी शामिल किया गया है।

जलवायु परिवर्तन, समुद्री व्यापार, सप्लाई चेन की सुरक्षा, समुद्री संसाधनों पर बढ़ता दबाव और महत्वपूर्ण समुद्री ढांचे की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा होंगे। समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन में किसी तरह की बाधा कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। इसी तरह बंदरगाहों और समुद्र के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा भी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है।

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इन समस्याओं से निपटने के लिए देशों के बीच जानकारी साझा करना, वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाना और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना भी महत्वपूर्ण है। (IPRD-2026)

पांच प्रमुख सत्रों में होगी चर्चा

तीन दिवसीय सम्मेलन में पांच प्रमुख विषयों पर सेशन आयोजित किए जाएंगे। इनमें अकादमिक नेटवर्क, रिसर्च और मानव संसाधन विकास पर चर्चा शामिल है। इस सत्र में विश्वविद्यालयों, रिसर्च संस्थानों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया जाएगा।

दूसरा प्रमुख विषय समुद्री गतिविधियों की निगरानी और महत्वपूर्ण समुद्री ढांचे की सुरक्षा होगा। इसमें समुद्र में होने वाली गतिविधियों की जानकारी जुटाने, उनका आकलन करने और जरूरी बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखने से जुड़े मुद्दे शामिल होंगे।

तीसरे सत्र में समुद्र विज्ञान और जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता पर चर्चा होगी। समुद्री मौसम, महासागरीय परिस्थितियों और जलवायु से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी समुद्री अभियानों तथा तटीय क्षेत्रों की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।

चौथा सत्र समुद्री शासन और समुद्री क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयासों पर केंद्रित होगा। इसमें देशों के बीच सहयोग और समुद्री संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल जैसे मुद्दे शामिल होंगे।

पांचवें सत्र में नई समुद्री तकनीकों और उनके दोहरे इस्तेमाल पर चर्चा की जाएगी। दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीकें वे होती हैं, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य, दोनों क्षेत्रों में किया जा सकता है। इस सत्र में ऐसी तकनीकों के इस्तेमाल और उनसे जुड़े प्रभावों पर विचार किया जाएगा। (IPRD-2026)

पूर्व नौसेना प्रमुख भी साझा करेंगे अनुभव

आईपीआरडी-2026 में दो विशेष सत्र भी आयोजित होंगे। पहले सत्र का नाम ‘पर्सपेक्टिव्स फ्रॉम द फ्लैग ब्रिज’ है। इसमें भारत और श्रीलंका के पूर्व नौसेना प्रमुख हिस्सा लेंगे।

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इस सत्र में इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (आईओएनएस) के जरिए समुद्री विज्ञान, तकनीक और अकादमिक सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होगी। आईओएनएस हिंद महासागर क्षेत्र की नौसेनाओं के बीच संवाद और सहयोग का मंच है।

विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में वैज्ञानिक सहयोग और संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। इस सत्र में पूर्व नौसेना प्रमुख अपने अनुभवों के आधार पर समुद्री सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार रखेंगे।

दूसरा विशेष सत्र ‘सहयोग का संवाद’ होगा। इसमें राजनयिकों के बीच बातचीत के जरिए क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। (IPRD-2026)

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