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पाकिस्तान की डिप्लोमेसी में सेना का बढ़ रहा है दबदबा! 9 रिटायर्ड मिलिट्री अफसरों को बनाया राजदूत

पाकिस्तान के सीनेटर मुहम्मद तलहा महमूद ने विदेश मंत्रालय से गैर-करियर राजदूतों के नाम, उनके प्रोफेशनल एक्सपीरियंस, मूल निवास और नियुक्ति की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी थी...

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📍इस्लामाबाद | 23 Oct, 2026, 12:30 PM

Pakistan diplomatic appointments: पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने 21 अक्टूबर को सीनेट में बताया कि विदेशों में तैनात 17 गैर-करियर राजदूतों और हाई कमिश्नरों में से नौ रिटायर्ड वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं। इनमें सेना, वायुसेना और नौसेना के पूर्व अधिकारी शामिल हैं। इन नियुक्तियों के बाद पाकिस्तान की विदेश नीति में सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के बढ़ते दखल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

Pakistan diplomatic appointments: सीनेट में पूछे गए सवाल से सामने आई जानकारी

पाकिस्तान के सीनेटर मुहम्मद तलहा महमूद ने विदेश मंत्रालय से गैर-करियर राजदूतों के नाम, उनके प्रोफेशनल एक्सपीरियंस, मूल निवास और नियुक्ति की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में विदेश मंत्री इशाक डार ने लिखित ये जानकारी दी।

इस जानकारी के मुताबिक, 17 गैर-करियर राजदूतों और हाई कमिश्नरों में नौ मिलिट्री बैकग्राउंड से आते हैं। उनकी तैनाती मध्य पूर्व, अफ्रीका, यूरोप और एशिया के अलग-अलग देशों में की गई है।

गैर-करियर राजदूत वे होते हैं, जो मूल विदेश सेवा से नहीं होते हैं और किसी अन्य पेशे या क्षेत्र से कूटनीतिक पद पर नियुक्त किए जाते हैं। ऐसे पदों पर सैन्य अधिकारियों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी नियुक्त किया जा सकता है।

किन देशों में तैनात किए गए हैं पूर्व सैन्य अधिकारी?

पाकिस्तान की ओर से सामने आई जानकारी में मेजर जनरल (रिटायर्ड) कामरान तबरेज सवेरा का नाम शामिल है, जिन्हें नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में हाई कमिश्नर-डिजाइनेट बनाया गया है। मेजर जनरल (रिटायर्ड) खुर्रम सरफराज खान जॉर्डन की राजधानी अम्मान में तैनात हैं, जबकि मेजर जनरल (रिटायर्ड) नय्यर नसीर को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में जिम्मेदारी दी गई है।

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एयर मार्शल (रिटायर्ड) मुहम्मद मुगीस अफजल को सीरिया की राजधानी दमिश्क में और लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद आमेर को कतर की राजधानी दोहा में नियुक्त किया गया है। मेजर जनरल (रिटायर्ड) कनवर अदनान अहमद खान यूक्रेन की राजधानी कीव में तैनात हैं।

वाइस एडमिरल (रिटायर्ड) फैसल रसूल लोधी को मालदीव की राजधानी माले, मेजर जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद इरफान को बोस्निया की राजधानी साराजेवो और मेजर जनरल (रिटायर्ड) मुमताज हुसैन को लीबिया की राजधानी त्रिपोली में राजदूत-डिजाइनेट बनाया गया है।

इन नियुक्तियों में सेना, वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का शामिल होना बताता है कि किस तरह से पाकिस्तानी सेना अब कूटनीति में भी घुसपैठ कर रही है। (Pakistan diplomatic appointments)

आठ अन्य गैर-करियर राजदूत भी नियुक्त

सीनेट में दिए गए विवरण में आठ ऐसे गैर-करियर राजनयिकों के नाम भी शामिल हैं, जिनकी पृष्ठभूमि सैन्य सेवा से जुड़ी नहीं है।

इनमें डॉ. यूसुफ जुनैद को तुर्किये की राजधानी अंकारा, डॉ. फरयाल लेगहारी को तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात और कोहदयार मर्री को वियतनाम की राजधानी हनोई में नियुक्त किया गया है।

मुहम्मद इरफान तरार को नाइजर की राजधानी नियामे, जहीरुद्दीन बाबर तहीम को कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह, आकिल गिलानी को मोरक्को की राजधानी रबात और डॉ. नजीब सामी को ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनिस में जिम्मेदारी दी गई है। मुहम्मद सामी-उर-रहमान को पोलैंड की राजधानी वारसॉ में नियुक्त किया गया है। (Pakistan diplomatic appointments)

अप्रैल 2026 में भी हुई थीं ऐसी नियुक्तियां

पाकिस्तान में गैर-करियर राजदूतों की नियुक्ति कोई नई नहीं है। अप्रैल 2026 में भी सरकार ने 15 गैर-करियर राजदूतों को कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किया था। उनमें से अधिकांश मिलिट्री बैकग्राउंड वाले थे।

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इनमें लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद आमेर भी शामिल थे, जो पहले गुजरांवाला कोर कमांडर रह चुके हैं और कतर में नियुक्त किए गए। मेजर जनरल (रिटायर्ड) खुर्रम सरफराज खान ने भी सेना में लगभग 35 साल सेवा दी। उन्होंने इन्फैंट्री बटालियन, ब्रिगेड और डिवीजन स्तर पर कमान संभाली थी। इसके अलावा उन्होंने रक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और सेना मुख्यालय में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।

खुर्रम सरफराज खान ने क्वेटा स्थित कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से भी शिक्षा प्राप्त की है। उन्हें हिलाल-ए-इम्तियाज (मिलिट्री) से सम्मानित किया जा चुका है। (Pakistan diplomatic appointments)

पाकिस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका

पाकिस्तान में सेना लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। वर्ष 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ के सैन्य तख्तापलट के बाद भी कई रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों को विदेशों में कूटनीतिक जिम्मेदारियां दी गई थीं। वहीं सीडीएफ जनरल आसिम मुनीर अक्सर प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के साथ प्रमुख कूटनीतिक दौरों पर जाते हैं और कभी-कभी नेतृत्व भी करते हैं।

हालांकि, राजदूतों के रूप में सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति और विदेश नीति से जुड़े मामलों में सेना की व्यापक भूमिका दो अलग-अलग विषय हैं। किसी पूर्व सैन्य अधिकारी को राजदूत बनाने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि वह विदेश सेवा के नियमित अधिकारियों की सभी जिम्मेदारियां संभाल रहा है। लेकिन ऐसी ज्यादा नियुक्तियों से चयन प्रक्रिया और प्रोफेशनल डिप्लोमेट्स के करियर पर नकारात्मक असर पड़ता है।

बता दें कि पाकिस्तान के विदेशों में लगभग 90 देशों में राजनयिक मिशन हैं। इनमें अधिकांश पद नियमित विदेश सेवा के अधिकारी संभालते हैं। (Pakistan diplomatic appointments)

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