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भारतीय सेना की टैंक रेजिमेंट्स में तेजी से चल रही है Shaurya Squadron की टेस्टिंग, अगले साल तक हो जाएगी ऑपरेशनल!

सेना के आधुनिकीकरण अभियान के तहत यह बदलाव किया जा रहा है। पिछले कुछ समय में सेना ने इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG), भैरव बटालियन और इन्फैंट्री के लिए अश्नि प्लाटून जैसी नई फॉर्मेशंस तैयार की हैं...

Key Highlights

  • भारतीय सेना की टैंक रेजिमेंट में ड्रोन ऑपरेशन के लिए बनाई जा रही है शौर्य स्क्वॉड्रन।
  • इसमें सर्विलांस, एफपीवी और स्वॉर्म ड्रोन के जरिए निगरानी और सटीक हमले की क्षमता होगी।
  • शौर्य स्क्वॉड्रन टैंक कमांडरों को रियल टाइम निगरानी और दुश्मन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराएगी।
  • अभ्यास अमोघ ज्वाला 2026 में टैंक, अटैक हेलिकॉप्टर और ड्रोन के संयुक्त इस्तेमाल का प्रदर्शन किया गया।

Shaurya Squadron: भारतीय सेना अपनी आर्मर्ड रेजिमेंट यानी टैंक रेजिमेंट में भी ड्रोन को शामिल करने को लेकर तेजी से काम रही है। इसके लिए हर टैंक रेजिमेंट में शौर्य स्क्वॉड्रन (Shaurya Squadron) का गठन किया जा रहा है। शौर्य स्क्वॉड्रन के तहत ड्रोन के जरिए दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना, युद्ध क्षेत्र की जानकारी जुटाना और जरूरत पड़ने पर सटीक हमला करना होगा।

अभी तक भारतीय सेना की इन्फैंट्री और आर्टिलरी में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग यूनिट और फॉर्मेशंस बनाई जा रही थीं। अब आर्मर्ड कोर में भी ड्रोन को टैंक रेजिमेंट की अपनी ऑपरेशनल व्यवस्था का हिस्सा बनाने की तैयारी है। इससे टैंक कमांडरों को युद्ध क्षेत्र की ज्यादा जानकारी मिल सकेगी और दुश्मन की स्थिति के बारे में रियल टाइम अपडेट मिलेंगे।

सेना के आधुनिकीकरण अभियान के तहत यह बदलाव किया जा रहा है। पिछले कुछ समय में सेना ने इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG), भैरव बटालियन और इन्फैंट्री के लिए अश्नि प्लाटून जैसी नई फॉर्मेशंस तैयार की हैं। इसी तरह आर्टिलरी में शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी पर काम चल रहा है।

क्या है Shaurya Squadron और कैसे होगी इसकी फॉर्मेशंस?

अभी भारतीय सेना की एक आर्मर्ड रेजिमेंट में आमतौर पर चार स्क्वॉड्रन होते हैं। इनमें तीन सेबर स्क्वॉड्रन होते हैं, जिनमें टैंक शामिल रहते हैं। इसके अलावा एक हेडक्वार्टर स्क्वॉड्रन होता है। इसी हेडक्वार्टर स्क्वॉड्रन में रेजिमेंट का रिकॉनिसेंस यानी टोही दस्ता भी शामिल होता है।

नई व्यवस्था के तहत शौर्य स्क्वॉड्रन को आर्मर्ड रेजिमेंट का पांचवां स्क्वॉड्रन बनाया जा रहा है। इसमें मौजूदा रिकॉनिसेंस स्क्वॉड को मुख्य आधार बनाया जाएगा। इसके साथ निगरानी और हमले की क्षमता वाले ड्रोन शामिल किए जाएंगे। जरूरत के अनुसार इसमें हल्के टैंक भी शामिल किए जा सकते हैं।

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सूत्रों का कहना है कि इस स्क्वॉड्रन में लगभग 20 से 30 प्रशिक्षित जवानों की टीम बनाई गई है। इन जवानों को ड्रोन ऑपरेशन के साथ-साथ काउंटर-ड्रोन गतिविधियों के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसमें सर्विलांस ड्रोन, एफपीवी ड्रोन, स्वॉर्म ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसका उद्देश्य टैंक रेजिमेंट की निगरानी क्षमता बढ़ाना है। आमतौर पर टैंक कमांडर को अपने सामने के इलाके और दुश्मन की स्थिति की जानकारी सीमित होती है। वहीं, ड्रोन की मदद से वह टैंक के आगे और आसपास के क्षेत्र की लगभग 30 किमी इलाके निगरानी कर सकेगा। इससे दुश्मन के ठिकानों की पहचान और उन पर कार्रवाई के बीच लगने वाला समय कम किया जा सकता है।

मार्च 2026 में अभ्यास अमोघ ज्वाला में हुआ प्रदर्शन

शौर्य स्क्वॉड्रन का कॉन्सैप्ट पहली बार मार्च 2026 में अभ्यास अमोघ ज्वाला के दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आया था। यह अभ्यास दक्षिणी कमांड के तहत बाबिना फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया था। उस समय दक्षिणी सेना कमांडर रहे और अब सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने ही इस नई व्यवस्था की शुरुआत की थी।

दक्षिणी कमांड के अनुसार, इस दौरान शौर्य स्क्वॉड्रन के शुरुआती स्वरूप को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में परखा गया। इसमें ड्रोन के जरिए गहरी निगरानी, सटीक हमले और नजदीकी युद्ध क्षेत्र में टोही गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया।

अभ्यास में टैंक, अटैक हेलिकॉप्टर, स्वॉर्म ड्रोन और दूसरे सैन्य संसाधनों के बीच तालमेल दिखाया गया। इसका उद्देश्य यह समझना था कि ड्रोन से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल टैंक और दूसरे लड़ाकू प्लेटफॉर्म किस तरह तेजी से कर सकते हैं।

दक्षिणी कमांड ने इस अवधारणा को ‘सीक फर्दर, स्ट्राइक डीपर एंड स्टे लॉन्गर’ यानी दूर तक निगरानी, गहराई तक हमला और लंबे समय तक ऑपरेशन करने की क्षमता से जोड़ा था।

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जुलाई 2026 में दक्षिणी कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने 31 आर्मर्ड डिवीजन का दौरा किया था। इसे व्हाइट टाइगर डिवीजन के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान उन्हें शौर्य स्क्वॉड्रन और नए अनमैन्ड सिस्टम्स की क्षमताओं के बारे में जानकारी दी गई। (Shaurya Squadron)

पांच कमांड में टेस्ट बेडिंग

सूत्रों ने बताया कि सेना में लगभग पांच से छह शौर्य स्क्वॉड्रन बनाए जा चुके है। इन्हें करीब पांच आर्मी कमांड में तैनात करके परीक्षण के जरिए परखा जा रहा है। सेना के सूत्रों के अनुसार, शौर्य स्क्वॉड्रन अभी शुरुआती फेज में है। इसे पूरी तरह नियमित मिलिट्री फॉर्मेशन का हिस्सा बनाने से पहले अलग-अलग ऑपरेशनल परिस्थितियों में परीक्षण और सुधार की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शौर्य स्क्वॉड्रन को अगले साल तक फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस मिल जाएगा।

सेना की योजना धीरे-धीरे आर्मर्ड रेजिमेंटों में इस तरह की यूनिट शामिल करने की है। भारतीय सेना में लगभग 63 से 67 आर्मर्ड रेजिमेंट हैं। हालांकि, सभी रेजिमेंट में एक साथ शौर्य स्क्वॉड्रन शामिल करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है। (Shaurya Squadron)

इन्फैंट्री और आर्टिलरी में भी बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल

शौर्य स्क्वॉड्रन सेना की व्यापक ड्रोन रणनीति का हिस्सा है। इन्फैंट्री के लिए अश्नि प्लाटून बनाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य पैदल सेना की बटालियनों को अपने स्तर पर निगरानी और हमले के लिए ड्रोन उपलब्ध कराना है।

आर्टिलरी में शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी के जरिए लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन के इस्तेमाल पर काम हो रहा है।

इसके अलावा, सेना ने पंजाब के जालंधर में 11 कोर यानी वज्र कोर के तहत अपनी पहली समर्पित ड्रोन बटालियन ‘बाज बटालियन’ भी बनाई है। इसका काम बड़े और अलग-अलग प्रकार के ड्रोन प्लेटफॉर्म का ऑपरेशन करना है। इसमें सर्चर ड्रोन और एमक्यू-9बी, हेरॉन तथा हर्मीस जैसे लंबे समय तक उड़ान भरने वाले ड्रोन सिस्टम शामिल हैं।

इस बटालियन को ड्रोन के संचालन, रखरखाव, सॉफ्टवेयर अपडेट, डेटा विश्लेषण और सैनिकों के साथ तालमेल बनाने के लिए एक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम की मदद से ड्रोन से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण करने पर भी जोर है। (Shaurya Squadron)

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टैंकों को ड्रोन हमलों से बचाने पर भी जोर

यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में हुए संघर्षों में ड्रोन का इस्तेमाल टैंकों और दूसरे सैन्य वाहनों की पहचान करने, आर्टिलरी को निशाना बताने और सीधे हमले के लिए किया गया है।

भारत ने भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर चीन के साथ सैन्य तनाव और मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के बाद ड्रोन तथा काउंटर-ड्रोन क्षमताओं पर जोर बढ़ाया है।

टैंकों की सुरक्षा के लिए कोप केज, इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर और एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जैसे उपाय किए गए हैं। इसके साथ ही छिपकर तैनाती, कैमोफ्लॉज, सैन्य वाहनों को अलग-अलग स्थानों पर रखना और तेजी से उनकी स्थिति बदलना भी आर्मर्ड यूनिटों की सुरक्षा का हिस्सा है।

अगस्त 2025 में हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ की ओर से जारी जॉइंट डॉक्ट्रिन में भी मल्टी-डोमेन ऑपरेशन पर जोर दिया गया था। इसमें सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन फीड, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और आर्टिलरी टारगेटिंग से मिलने वाली जानकारी को जोड़कर सैन्य फैसले तेजी से लेने पर जोर है। शौर्य स्क्वॉड्रन इसी व्यापक बदलाव के तहत आर्मर्ड रेजिमेंट में ड्रोन और मानव-रहित तकनीक को शामिल करने की पहल है। (Shaurya Squadron)

Author

  • Harendra Chaudhary

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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