Key Highlights
- कारगिल में पैर गंवाने वाले सूबेदार सोलैराज डी ने 7.15 मीटर की छलांग लगाकर लॉन्ग जंप में गोल्ड और एशियन रिकॉर्ड बनाया।
- माइन ब्लास्ट में पैर गंवाने वाले सूबेदार होकाटो सेमा ने शॉट पुट में ब्रॉन्ज मेडल जीता और लगातार तीसरे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में पदक हासिल किया।
- उरी और पुंछ में घायल हुए सूबेदार अजय कुमार और हवलदार कपिल कुमार ने क्रमशः 400 मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज और 400 मीटर फ्रीस्टाइल स्विमिंग में सिल्वर मेडल जीता।
- हवलदार प्रदीप कुमार और राकेश कुंडू ने डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज और सिल्वर मेडल जीते, जबकि आर्मी पैरालंपिक नोड ने खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और रिहैबिलिटेशन में अहम भूमिका निभाई।
Indian Army Para Athletes 2026: भारतीय सेना के कुछ जवानों के लिए ड्यूटी के दौरान लगी चोट जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गई। किसी ने जम्मू-कश्मीर में माइन ब्लास्ट में अपना पैर गंवाया, तो किसी को कारगिल की कड़ाके की ठंड के चलते पैर गंवाना पड़ा। एक जवान ऐसा भी है, जिसे चोट के बाद पैर में फुट ड्रॉप की समस्या हो गई। इन मुश्किलों के बावजूद इन सैनिकों ने हार नहीं मानी। उन्होंने खेल को अपनी नई पहचान बनाया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया।
जापान के आइची-नागोया में आयोजित पांचवें एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय सेना के नौ पैरा-एथलीटों ने हिस्सा लिया। इनमें से छह खिलाड़ियों ने एक गोल्ड, दो सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज मेडल जीते। इन खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए 5 नवंबर को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सभी मेडल विजेता खिलाड़ियों से मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया।
इन खिलाड़ियों में सूबेदार सोलैराज डी, सूबेदार एच होकाटो सेमा, सूबेदार अजय कुमार, हवलदार कपिल कुमार, हवलदार प्रदीप कुमार और हवलदार राकेश कुंडू शामिल हैं। इनके अलावा सेना प्रमुख ने नायक गजेंद्र की पत्नी सिमरन को भी सम्मानित किया। सिमरन ने एशियन पैरा गेम्स में 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में दो गोल्ड मेडल जीते।
Indian Army Para Athletes 2026: कारगिल की ठंड में गंवाया पैर, अब लॉन्ग जंप में एशियन रिकॉर्ड
भारतीय सेना के सूबेदार सोलैराज डी की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। वह 21 मद्रास रेजिमेंट में तैनात हैं। उन्होंने 18 सितंबर 2013 को भारतीय सेना में भर्ती होकर अपनी सेवा शुरू की थी। फरवरी 2018 में कारगिल के बटालिक क्षेत्र में ऊंचाई वाले इलाके में तैनाती के दौरान उन्हें गंभीर चोट लगी। अत्यधिक ठंड के चलते उनके बाएं पैर में खून जाना बंद हो गया, जिसके चलते घुटने के नीचे से पैर काटना पड़ा।
करीब एक साल तक इलाज और रिकवरी के बाद सोलैराज ने खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। मई 2019 में वह आर्मी पैरालंपिक नोड से जुड़े। यहां उन्हें ट्रेनिंग और कोचिंग मिली। साल 2021 में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार हिस्सा लिया और अपने शुरुआती साल में ही ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया।

सोलैराज ने 2023 में हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में लॉन्ग जंप का गोल्ड मेडल जीता था। अक्टूबर 2026 में आइची-नागोया में उन्होंने अपना खिताब बरकरार रखा। इस बार उन्होंने 7.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल हासिल किया और एशियन रिकॉर्ड भी बनाया। इससे पहले 2025 में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 7.08 मीटर की छलांग के साथ एशियन रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि, उस प्रतियोगिता में वह सातवें स्थान पर रहे थे।
मार्च 2026 में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में भी उन्होंने लॉन्ग जंप का खिताब जीता। उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें 2024 में विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। वह अब तक दो बार एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड जीत चुके हैं। (Indian Army Para Athletes 2026)
2002 में माइन ब्लास्ट में गंवाया पैर, पेरिस पैरालंपिक में भी जीता था मेडल
नागालैंड के सूबेदार एच होकाटो सेमा भारतीय सेना की 9 असम रेजिमेंट से हैं। उन्होंने 26 जून 2001 को सेना में भर्ती ली थी। 14 अक्टूबर 2002 को जम्मू-कश्मीर के चौकीबल में तैनाती के दौरान एक माइन ब्लास्ट में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे में उनका बायां पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा।
करीब छह महीने तक इलाज और रिहैबिलिटेशन के बाद उन्होंने खेल को चुना। जनवरी 2017 में वह आर्मी पैरालंपिक नोड से जुड़े और पैरा एथलेटिक्स की ट्रेनिंग शुरू की। उसी साल उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपना पहला मेडल जीता।

होकाटो सेमा ने शॉट पुट में अपनी पहचान बनाई। 2023 में हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद 2024 के पेरिस पैरालंपिक में भी उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। पेरिस में उन्होंने 14.65 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इस उपलब्धि के साथ वह पैरालंपिक में मेडल जीतने वाले नागालैंड के पहले खिलाड़ी बने।
2026 के आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स में भी उन्होंने शॉट पुट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। लगातार तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मेडल जीतने वाले होकाटो सेमा को 2024 के अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल भी मिला है। (Indian Army Para Athletes 2026)
उरी में माइन ब्लास्ट में गंवाया पैर, 400 मीटर दौड़ में जीता ब्रॉन्ज
सूबेदार अजय कुमार भारतीय सेना की 12 डोगरा रेजिमेंट से हैं। वे 17 सितंबर 2010 को सेना में भर्ती हुए थे। उनके पिता चुन्नी लाल भी इसी रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं। 14 नवंबर 2017 को जम्मू-कश्मीर के उरी में तैनाती के दौरान माइन ब्लास्ट में वह घायल हो गए। इस हादसे में उनका बायां पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा।

इलाज और रिकवरी के बाद जुलाई 2018 में वह आर्मी पैरालंपिक नोड से जुड़े। यहां उन्होंने पैरा एथलेटिक्स की ट्रेनिंग शुरू की। वर्ष 2021 में उन्होंने पहली बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और उसी साल मेडल भी जीता।
अजय कुमार ने 2023 में हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में 400 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीता था। 2026 में उन्होंने इसी स्पर्धा में 53.61 सेकंड का समय निकालकर ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्हें 2023 में जीओसी-इन-सी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। (Indian Army Para Athletes 2026)
पुंछ में लगी चोट के बाद स्विमिंग में बनाई पहचान
5 राजपूत रेजिमेंट के हवलदार कपिल कुमार को 21 दिसंबर 2020 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ में तैनाती के दौरान उन्हें युद्ध के दौरान लगी चोट का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्हें करीब छह महीने तक इलाज और रिकवरी से गुजरना पड़ा।
1 अगस्त 2021 को वह आर्मी पैरालंपिक नोड से जुड़े। यहां उन्होंने पैरा स्विमिंग की ट्रेनिंग शुरू की। मार्च 2022 में उन्होंने पहली बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और 27 मार्च 2022 को अपना पहला राष्ट्रीय मेडल जीता।

आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स 2026 में कपिल कुमार ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल स्विमिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। इस मुकाबले में उन्होंने ईरान के तैराक शाहीन इजादियार को 0.21 सेकंड के अंतर से पीछे छोड़ा। यह मुकाबला एस-10 कैटेगरी में आयोजित किया गया था। उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन से भी सम्मानित किया गया है। (Indian Army Para Athletes 2026)
माइन ब्लास्ट में पैर का हिस्सा गंवाया, डिस्कस थ्रो में बनाया पर्सनल बेस्ट
हवलदार प्रदीप कुमार भारतीय सेना की 16 राजपूताना राइफल्स में तैनात हैं। उन्होंने 23 दिसंबर 2016 को सेना में भर्ती ली थी। 18 जनवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के सुंदरबनी में माइन ब्लास्ट के कारण उनके बाएं पैर का अगला हिस्सा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद उनके पैर की चॉपार्ट एम्प्यूटेशन सर्जरी की गई।
करीब एक साल तक इलाज और रिहैबिलिटेशन के बाद फरवरी 2020 में वह आर्मी पैरालंपिक नोड से जुड़े। उन्होंने डिस्कस थ्रो में ट्रेनिंग शुरू की। दिसंबर 2023 में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला मेडल जीता।

अक्टूबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने डिस्कस थ्रो का ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसके बाद मार्च 2026 में नई दिल्ली में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री के संयुक्त डिस्कस थ्रो इवेंट में वह दूसरे स्थान पर रहे।
2026 के एशियन पैरा गेम्स में प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों मेडल अपने नाम किए। उन्हें 2025 में जीओसी-इन-सी अवॉर्ड और 2026 में वीसीओएस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। (Indian Army Para Athletes 2026)
चोट के बाद हुई फुट ड्रॉप की समस्या, डिस्कस थ्रो में जीता सिल्वर
भारतीय सेना की 629 एसएटीए बैटरी में हवलदार राकेश कुंडू ने 24 नवंबर 2016 को सेना में भर्ती ली थी। अगस्त 2018 में हैदराबाद स्थित आर्टिलरी सेंटर में उन्हें चोट लगी। सर्जरी के बाद उनके दाएं पैर में फुट ड्रॉप की समस्या हो गई। इस स्थिति में पैर के अगले हिस्से को ऊपर उठाने और उसकी गतिविधियों को नियंत्रित करने में परेशानी होती है।

करीब दो साल तक इलाज और रिकवरी के बाद सितंबर 2023 में वह आर्मी पैरालंपिक नोड से जुड़े। यहां उन्होंने डिस्कस थ्रो की ट्रेनिंग शुरू की। फरवरी 2025 में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहला मेडल जीता।
मार्च 2026 में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री के संयुक्त डिस्कस थ्रो इवेंट में उन्होंने 49.26 मीटर का थ्रो किया और प्रतियोगिता जीती। अक्टूबर 2026 में एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने 49.35 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया। इस स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों मेडल जीते। उन्हें 2025 में जीओसी-इन-सी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। (Indian Army Para Athletes 2026)
सिमरन ने जीते दो गोल्ड, कोच के रूप में पति ने निभाई भूमिका
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने नायक गजेंद्र की पत्नी सिमरन को भी सम्मानित किया। सिमरन ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में दो गोल्ड मेडल जीते। वह जन्म से समय से पहले पैदा हुई थीं और उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित है। उन्होंने टी-12 कैटेगरी में हिस्सा लिया।
उनके पति नायक गजेंद्र भारतीय सेना की आर्मी सर्विस कोर में तैनात हैं और उनके कोच भी हैं। सिमरन की उपलब्धियों ने एशियन पैरा गेम्स में भारत के कुल मेडल प्रदर्शन में योगदान दिया। (Indian Army Para Athletes 2026)
2017 में स्थापित हुआ था आर्मी पैरालंपिक नोड
भारतीय सेना के इन खिलाड़ियों की उपलब्धियों के पीछे आर्मी पैरालंपिक नोड की अहम भूमिका है। इसकी स्थापना वर्ष 2017 में पुणे के किरकी में की गई थी। यह नोड दिव्यांगता का सामना कर रहे सेवारत सैनिकों को खेलों में हिस्सा लेने के लिए ट्रेनिंग और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराता है।
आर्मी पैरालंपिक नोड, आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर और स्पाइनल कॉर्ड इंजरी सेंटर के साथ मिलकर काम करता है। इन संस्थानों के जरिए घायल सैनिकों को विशेष मेडिकल केयर, कृत्रिम अंगों की सुविधा, रिहैबिलिटेशन और खेलों के लिए व्यवस्थित ट्रेनिंग दी जाती है।
आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर पुणे में सैनिकों को कृत्रिम अंग और उनसे जुड़ी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। वहीं, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी सेंटर रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर चोटों के बाद इलाज और पुनर्वास में सहायता करता है।
इस पूरी प्रक्रिया में खिलाड़ियों के साथ कोच और सपोर्ट स्टाफ भी अहम भूमिका निभाते हैं। एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को सबेदार बिबिन देव और सबेदार मोर्तजा ने एथलेटिक्स कोच के रूप में ट्रेनिंग दी। हवलदार अविनाश ए ने स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच की जिम्मेदारी संभाली। आर्मी पैरालंपिक नोड के ऑफिसर-इन-चार्ज लेफ्टिनेंट कर्नल दलजीत सिंह भी खिलाड़ियों की तैयारी और सहयोग से जुड़े रहे।
5 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में सेना प्रमुख ने खिलाड़ियों के साथ-साथ कोच और सपोर्ट स्टाफ के योगदान को भी सराहा। कार्यक्रम में भारतीय सेना के उन प्रयासों को रेखांकित किया गया, जिनके जरिए चोटिल सैनिकों को इलाज, पुनर्वास और प्रतिस्पर्धी खेलों में भाग लेने का अवसर दिया जा रहा है। (Indian Army Para Athletes 2026)
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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।


