📍नई | 5 Oct, 2026, 9:08 PM
Astra Mk-3 Gandeev Missile: भारत की स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) इस समय अस्त्र मिसाइल परिवार के कई एडवांस वर्जन पर काम कर रहा है। भारतीय वायुसेना में पहले से शामिल अस्त्र मार्क-1 के बाद अब अस्त्र मार्क-2 के परीक्षण और इंटीग्रेशन का काम जारी है। वहीं सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना अस्त्र मार्क-3, जिसे “प्रोजेक्ट गांडीव” भी कहा जाता है, तेजी से आगे बढ़ रही है।
इस नई मिसाइल की मारक दूरी 300 किलोमीटर से अधिक है। जिसके बाद भारत लंबी दूरी की बियॉन्ड विजुअल रेंज यानी बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल तकनीक में दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा।
Astra Mk-3 Gandeev Missile: आधुनिक हवाई युद्ध में जरूरी है बीवीआर मिसाइल
बीवीआर यानी “बियॉन्ड विजुअल रेंज” मिसाइल ऐसी एयर-टू-एयर मिसाइल होती है जिसे पायलट टारगेट को अपनी आंखों से देखे बिना भी दाग सकता है। आधुनिक हवाई युद्ध में यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि लड़ाकू विमान कई बार सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के विमान को निशाना बना सकते हैं।
अस्त्र मिसाइल इसी कैटेगरी का हथियार है। यह एक्टिव रडार सीकर, डेटा लिंक और एडवांस गाइडेंस सिस्टम की मदद से टारगेट का पीछा करती है। मिसाइल को फायर करने के बाद भी लड़ाकू विमान या अवॉक्स (एडब्ल्यूएसीएस) प्लेटफॉर्म से उसे लगातार अपडेट मिल सकते हैं।
अस्त्र मार्क-1 पहले से है शामिल
अस्त्र मार्क-1 भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुकी है। इसकी ऑपरेशनल रेंज लगभग 100 से 110 किलोमीटर तक है। डीआरडीओ अब इसके परफॉरमेंस को और बेहतर बनाने पर काम कर रहा है।
जानकारी के अनुसार सॉफ्टवेयर, गाइडेंस सिस्टम और प्रोपेलेंट ऑप्टिमाइजेशन के जरिए इसकी रेंज को लगभग 160 किलोमीटर तक बढ़ाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए पूरी मिसाइल को नए सिरे से डिजाइन करने की जरूरत नहीं होगी।
अस्त्र मार्क-1 का सफल परीक्षण सुखोई-30 एमकेआई और स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान से किया जा चुका है। भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी रेडियो फ्रीक्वेंसी सीकर के साथ भी इसके परीक्षण पूरे किए हैं।
अस्त्र मार्क-2 में मिलेगा बड़ा सुधार
अस्त्र मार्क-2 डीआरडीओ की अगली पीढ़ी की बीवीआर मिसाइल है। इसकी अनुमानित रेंज 160 से 200 किलोमीटर से अधिक है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खूबी इसका डुअल-पल्स रॉकेट मोटर सिस्टम है। सामान्य रॉकेट मोटर एक बार जलने के बाद खत्म हो जाती है, लेकिन डुअल-पल्स तकनीक में दूसरा थ्रस्ट स्टेज भी मौजूद रहता है।
इससे मिसाइल आखिरी चरण में भी पर्याप्त ऊर्जा बनाए रखती है और तेजी से दिशा बदलने वाले टारगेट के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इसमें एडवांस डेटा लिंक, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटर मेजर्स और आधुनिक सीकर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अस्त्र मार्क-2 का परीक्षण जारी है और इसे भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों के साथ इंटीग्रेट करने का काम भी चल रहा है।
वायुसेना प्रमुख ने कही बड़ी बात
हाल ही में 94वें वायुसेना दिवस पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा था कि भारत की बीवीआर मिसाइल क्षमता लगातार मजबूत हो रही है।
उन्होंने कहा कि अस्त्र कार्यक्रम एक सफलता की कहानी है और वायुसेना अस्त्र मार्क-2 के शामिल होने का इंतजार कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रमुख प्लेटफॉर्मों पर अस्त्र मार्क-2 के इंटीग्रेशन की दिशा में पहले से काम चल रहा है।
उनके अनुसार लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल क्षमता के मामले में भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। (Astra Mk-3 Gandeev Missile)
प्रोजेक्ट गांडीव क्यों है खास?
अस्त्र मार्क-3 या प्रोजेक्ट गांडीव को डीआरडीओ की सबसे महत्वाकांक्षी एयर-टू-एयर मिसाइल प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है।
मार्च 2025 के आसपास इस प्रोजेक्ट को आधिकारिक तौर पर “गांडीव” नाम दिया गया था। महाभारत में अर्जुन के प्रसिद्ध धनुष के नाम पर रखी गई यह मिसाइल भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता को नए स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है।
गांडीव की सबसे बड़ी विशेषता इसका सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट यानी एसएफडीआर प्रोपल्शन सिस्टम है।
एसएफडीआर तकनीक कैसे काम करती है?
सामान्य रॉकेट मोटर अपने साथ ईंधन और ऑक्सीडाइजर दोनों लेकर चलती है। एक बार ईंधन समाप्त होने के बाद मिसाइल केवल अपनी रफ्तार के सहारे आगे बढ़ती है।
लेकिन एसएफडीआर टेक्नोलॉजी तकनीक में मिसाइल वातावरण से ऑक्सीजन का इस्तेमाल करती है। इससे उसे अधिक समय तक थ्रस्ट मिलता रहता है और वह लंबी दूरी तक तेज रफ्तार बनाए रख सकती है।
इसी कारण अस्त्र मार्क-3 की अनुमानित रेंज 300 से 350 किलोमीटर तक बताई जा रही है। कम ऊंचाई पर यह दूरी लगभग 190 किलोमीटर के आसपास रह सकती है जबकि अधिक ऊंचाई पर इसकी मारक क्षमता काफी बढ़ जाती है।
इस मिसाइल की रफ्तार मैक 4.5 तक है। (Astra Mk-3 Gandeev Missile)
डीआरडीओ ने पूरे किए अहम परीक्षण
डीआरडीओ पहले ही एसएफडीआर तकनीक के कई महत्वपूर्ण परीक्षण कर चुका है। ओडिशा के चांदीपुर परीक्षण केंद्र से ग्राउंड और फ्लाइट टेस्ट किए गए हैं।
इन परीक्षणों में नोजल-लेस बूस्टर, रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोल सिस्टम जैसी प्रमुख तकनीकों को परखा गया। दिसंबर 2024 और फरवरी 2026 के परीक्षणों को इस कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। हालांकि फुल एयरबोर्न फायरिंग ट्रायल और अंतिम उत्पादन मंजूरी की प्रक्रिया अभी बाकी है। (Astra Mk-3 Gandeev Missile)
हाई-वैल्यू टारगेट्स पर भी नजर
गांडीव को केवल लड़ाकू विमानों के खिलाफ ही नहीं बल्कि हाई-वैल्यू एरियल टारगेट्स के खिलाफ भी विकसित किया जा रहा है। इनमें अवॉक्स (एडब्ल्यूएसीएस) विमान, एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग टैंकर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्लेटफॉर्म और लंबी दूरी के स्ट्राइक एयरक्राफ्ट शामिल हैं।
आधुनिक हवाई युद्ध में ऐसे प्लेटफॉर्म दुश्मन के पूरे वायु अभियान क्षमता को ऑपरेट करते हैं। इसलिए उन्हें लंबी दूरी से निशाना बनाने की क्षमता रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। (Astra Mk-3 Gandeev Missile)
आत्मनिर्भर भारत को मिल रही मजबूती
अस्त्र कार्यक्रम ने भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल किया है जो स्वदेशी बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल विकसित और उत्पादन कर सकते हैं। अस्त्र मार्क-1 ने आयातित मिसाइलों पर निर्भरता कम की है। अस्त्र मार्क-2 लंबी दूरी और बेहतर मारक क्षमता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वहीं प्रोजेक्ट गांडीव एडवांस रैमजेट तकनीक के जरिए भारतीय मिसाइल विकास कार्यक्रम का सबसे एडवांस फेज माना जा रहा है।
सुखोई-30 एमकेआई और तेजस जैसे प्लेटफॉर्मों के साथ सफल इंटीग्रेशन के बाद अस्त्र परिवार भारतीय वायुसेना की एयर कॉम्बैट क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। (Astra Mk-3 Gandeev Missile)
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