📍नई दिल्ली | 31 Oct, 2026, 12:30 PM
AMCA Fighter Jet Project: भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) के प्रोटोटाइप बनाने के लिए तीन निजी क्षेत्र की कंपनियों और उनके कंसोर्टियम ने अपनी बोलियां जमा कर दी हैं। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये है। इसके तहत पांच प्रोटोटाइप विमान और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन तैयार किया जाना है।
इन बोलियों के आधार पर रक्षा मंत्रालय की उच्चस्तरीय समीक्षा समिति डेवलपमेंट और प्रोडक्शन से जुड़े पार्टनर का चयन करेगी। चयनित कंपनी को डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर (डीसीपीपी) कहा जाएगा। यह कंपनी एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के डिजाइन और तकनीकी दिशा-निर्देशों के तहत काम करेगी।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, 30 अक्टूबर तक तीनों दावेदारों ने अपनी बोलियां जमा कर दी हैं। 31 अक्टूबर को दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके बाद तकनीकी मूल्यांकन किया जाना है।
AMCA Fighter Jet Project: किन तीन कंपनियों ने जमा की बोलियां?
एएमसीए प्रोटोटाइप निर्माण प्रोजेक्ट के लिए तीन दावेदारों को चुना गया है। इनमें लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के नेतृत्व वाला कंसोर्टियम, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज के नेतृत्व वाला कंसोर्टियम शामिल हैं।
एलएंडटी के नेतृत्व वाले समूह में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और डायनामैटिक टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। वहीं, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) ने अकेले बोली जमा की है।
तीसरे दावेदार के तौर पर पर भारत फोर्ज के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने हिस्सा लिया है। इसमें बीईएमएल लिमिटेड और डेटा पैटर्न्स शामिल हैं।
इन तीनों दावेदारों को शुरुआत में बोली लगाने वाली सात कंपनियों और समूहों में से चुना गया था। फरवरी 2026 में तकनीकी मूल्यांकन के बाद रक्षा मंत्रालय ने इन तीन दावेदारों को आगे की प्रक्रिया के लिए शॉर्टलिस्ट किया था।
अब इनकी बोलियों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद वित्तीय प्रस्तावों और कीमत से जुड़े पहलुओं पर बातचीत होगी। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, तकनीकी मूल्यांकन दिसंबर 2026 के अंत तक चल सकता है। हालांकि, अंतिम चयन की तारीख का आधिकारिक तौर एलान नहीं किया गया है।
एएमसीए के पांच प्रोटोटाइप बनाए जाएंगे
एएमसीए भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य भारतीय वायु सेना के लिए आधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस लड़ाकू विमान विकसित करना है।
इस प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में पांच प्रोटोटाइप विमान और एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन तैयार किया जाएगा। प्रोटोटाइप का इस्तेमाल विमान के डिजाइन, तकनीकी प्रणालियों और उड़ान संबंधी क्षमताओं की जांच के लिए किया जाएगा।
स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन का इस्तेमाल विमान के स्ट्रक्चर की मजबूती और भार सहने की क्षमता की जांच में किया जाएगा। लड़ाकू विमान के डेवलपमेंट में यह परीक्षण महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि विमान के स्ट्रक्चर को उड़ान के दौरान अलग-अलग तरह के दबाव और भार का सामना करना पड़ता है।
इस कार्यक्रम की डिजाइन और विकास संबंधी जिम्मेदारी एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के पास है, जो डीआरडीओ की प्रयोगशाला है और बेंगलुरु में स्थित है।
सरकार इस प्रोटोटाइप डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए वित्तीय मदद देगी। आगे चलकर विमान के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए अलग से टेंडर निकाला जा सकता है। (AMCA Fighter Jet Project)
पहली बार निजी क्षेत्र के नेतृत्व में बनेगा स्वदेशी लड़ाकू विमान
एएमसीए कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसके प्रोटोटाइप निर्माण के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा हो रही है। इससे भारत के रक्षा एयरोस्पेस क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ने का रास्ता खुला है।
अब तक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) भारत में सैन्य विमानों के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाती रही है। एचएएल तेजस जैसे लड़ाकू विमान कार्यक्रमों से जुड़ी रही है।
एएमसीए प्रोटोटाइप प्रोजेक्ट के लिए एचएएल भी शुरुआत में एक ग्रुप के साथ बोली प्रक्रिया में शामिल थी, लेकिन फरवरी 2026 में चुने गए तीन दावेदारों में उसका नाम नहीं था। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का कहना था कि एचएएल कुछ सामान्य तकनीकी शर्तों को पूरा नहीं कर पाई थी।
इस प्रोजेक्ट में निजी कंपनियों की भागीदारी का उद्देश्य लड़ाकू विमान निर्माण के लिए एक अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता तैयार करना है। इससे विमान के विकास और उत्पादन से जुड़े काम को एक से अधिक औद्योगिक संस्थानों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। (AMCA Fighter Jet Project)
विमान में होगी स्टील्थ तकनीक और आधुनिक एवियोनिक्स
एएमसीए को आधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान के रूप में डेवलप किया जा रहा है। स्टील्थ तकनीक से यह विमान रडार की पकड़ में नहीं आएगा। इस विमान इंटरनल वेपन बे, सुपरक्रूज क्षमता, आधुनिक एवियोनिक्स और सेंसर फ्यूजन शामिल हैं।
इंटरनल वेपन बे में मिसाइलों और अन्य हथियारों को विमान के अंदर रखा जा सकता है। इससे विमान के बाहरी हिस्से पर हथियार लगाने की जरूरत कम होती है और उसकी स्टील्थ खूबियों को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
सुपरक्रूज ऐसी क्षमता है, जिसमें लड़ाकू विमान आफ्टरबर्नर का लगातार इस्तेमाल किए बिना सुपरसोनिक स्पीड बनाए रख सकता है।
आधुनिक एवियोनिक्स में फ्लाइट कंट्रोल, कम्युनिकेशन, नेविगेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स शामिल होते हैं। वहीं, सेंसर फ्यूजन के जरिए अलग-अलग सेंसर से मिलने वाली जानकारी को एक साथ जोड़कर पायलट के सामने इमेज बनती है। (AMCA Fighter Jet Project)
एमके-1 में दो इंजन
एएमसीए के पहले संस्करण यानी एमके-1 में दो इंजन लगाने की योजना है। इसके लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के एफ414 इंजन पर बातचीत चल रही है।
एडीए एफ414-जीई-आईएनएस6 इंजन के लगभग 14 से 15 इंजनों की खरीद को लेकर बातचीत कर रहा है। यह प्रक्रिया तेजस एमके-2 के लिए एचएएल और जनरल इलेक्ट्रिक के बीच प्रस्तावित इंजन से अलग है।
प्रोटोटाइप कार्यक्रम के शुरुआती चरण में पहले से उपलब्ध कुछ एफ414 इंजनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
वहीं, एएमसीए के एमके-2 संस्करण के लिए स्वदेशी इंजन तैयार किए जाने की योजना है। इसके लिए डीआरडीओ की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (जीटीआरई) और फ्रांस की साफरान के बीच सहयोग की संभावना पर काम किया जा रहा है। प्रस्तावित इंजन के लिए करीब 110 किलो न्यूटन थ्रस्ट होना चाहिए। (AMCA Fighter Jet Project)
आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में बनेगा निर्माण परिसर
एएमसीए प्रोटोटाइप निर्माण के लिए चुनी जाने वाली कंपनी को आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी के पास निर्माण से जुड़ा औद्योगिक ढांचा तैयार करना होगा। इसी क्षेत्र में एएमसीए के कोर इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग कॉम्प्लेक्स की योजना है।
कोर इंटीग्रेशन के दौरान विमान के अलग-अलग हिस्सों और सिस्टम्स को जोड़कर विमान तैयार किया जाता है। इसके बाद परीक्षण के जरिए यह जांच की जाती है कि विमान के सिस्टम्स एक साथ सही ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं।
बता दें कि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड भारत में एयरबस के साथ सी-295 परिवहन विमान के निर्माण कार्यक्रम में शामिल है। इस कारण कंपनी को विमान निर्माण और असेंबली से जुड़े काम का अनुभव है।
एलएंडटी, बीईएल और डायनामैटिक टेक्नोलॉजीज का समूह इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों और औद्योगिक निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में काम करता है। भारत फोर्ज, बीईएमएल और डेटा पैटर्न्स का समूह भी निर्माण, इंजीनियरिंग और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स से संबंधित क्षमताएं रखता है। (AMCA Fighter Jet Project)
प्रोटोटाइप निर्माण के लिए तय की गई समय-सीमा
एएमसीए कार्यक्रम की समय-सीमा के तहत, पहले प्रोटोटाइप को कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने के 24 महीने के भीतर रोलआउट करने और 30 महीने के भीतर पहली उड़ान कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सभी पांच प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए 64 महीने की समय-सीमा बताई गई है। इसके बाद परीक्षण कार्यक्रम के तहत कुल 1,800 टेस्ट सॉर्टीज पूरी करने का लक्ष्य है।
रक्षा सचिव ने पहले सितंबर 2028 में पहली उड़ान का लक्ष्य बताया था। हालांकि, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कार्यक्रम की प्रगति और पार्टनर के चयन को लेकर समय-सीमा से जुड़ी चिंताएं जताई थीं।
उद्योग से जुड़े सूत्रों का अनुमान है कि यदि कॉन्ट्रैक्ट 2027 की शुरुआत में होता है, तो पहली उड़ान 2029 के आसपास हो सकती है। (AMCA Fighter Jet Project)
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