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एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित बने 29वें IAF चीफ; स्क्वॉड्रन की कमी, थिएटर कमांड और अग्निवीरों का रिटेंशन हैं बड़ी चुनौतियां

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित दिसंबर 1986 में भारतीय वायुसेना में कमीशन हुए थे। वह अपने बैच के ऐसे अधिकारी हैं, जो मौजूदा समय में वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व में इस स्तर तक पहुंचे हैं...

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📍नई दिल्ली | 31 Oct, 2026, 2:04 PM

IAF Chief Ashutosh Dixit: भारतीय वायुसेना को 31 अक्टूबर को नया प्रमुख मिल गया। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह वायुसेना प्रमुख का पद संभाला है। इससे पहले वह वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के पद पर तैनात थे। उनके कार्यकाल में लड़ाकू विमानों की कमी दूर करने, स्वदेशी रक्षा तकनीक को शामिल करने, एयर डिफेंस सिस्टम मजबूत करने और वायुसेना के कम्युनिकेशन नेटवर्क को अपग्रेड करने जैसी अहम जिम्मेदारियां होंगी।

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित दिसंबर 1986 में भारतीय वायुसेना में कमीशन हुए थे। वह अपने बैच के ऐसे अधिकारी हैं, जो मौजूदा समय में वायुसेना के शीर्ष नेतृत्व में इस स्तर तक पहुंचे हैं। उनके सामने एक तरफ नए लड़ाकू विमानों को शामिल करने की चुनौती होगी, तो दूसरी तरफ भविष्य की युद्ध संबंधी जरूरतों के हिसाब से वायुसेना की क्षमताओं को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी होगी।

IAF Chief Ashutosh Dixit: 31 अक्टूबर को संभाला वायुसेना प्रमुख का पद

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख है। एयर मार्शल दीक्षित का कार्यकाल दिसंबर 2028 तक रहेगा।

वायुसेना में उनके बाद वरिष्ठ अधिकारियों में एयर मार्शल सीतेपल्ली श्रीनिवास और एयर मार्शल तेजिंदर सिंह भी शामिल हैं। दोनों जून 1987 में वायुसेना में कमीशन हुए थे। एयर मार्शल तेजिंदर सिंह मई 2025 में ट्रेनिंग कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ बने थे। इसके बाद जनवरी 2026 में एयर मार्शल श्रीनिवास ने ट्रेनिंग कमांड की जिम्मेदारी संभाली।

एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया फरवरी 2026 में ईस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ नियुक्त हुए थे। वह नए वायुसेना प्रमुख के पद संभालने के बाद वाइस चीफ की जिम्मेदारी संभालेंगे।

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित हैं अनुभवी लड़ाकू विमान पायलट

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के अनुभवी लड़ाकू विमान पायलट हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन प्राप्त किया था। उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए), बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज से शिक्षा और प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वह एक एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं।

आशुतोष दीक्षित को 3,500 घंटे से ज्यादा विमान उड़ाने का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग के विभिन्न वेरिएंट, जगुआर, तेजस, हॉक, किरण, आईएल-78 और एएन-32 जैसे विमानों को उड़ाया है। उन्होंने मिराज-2000 लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन की कमान संभालने के साथ उसे नए उपकरणों से लैस करने की जिम्मेदारी भी निभाई। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में एडवंस फाइटर बेस और ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली।

अपने सैन्य करियर के दौरान दीक्षित ने कारगिल युद्ध के समय चलाए गए ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका निभाई। वह स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान कार्यक्रम से भी जुड़े रहे हैं और भारतीय वायुसेना में स्वदेशी तकनीक तथा उपकरणों को बढ़ावा देने के प्रयासों में योगदान दिया है।

उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ और चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन के अधीन चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ रह चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्होंने वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ का पद संभाला। इससे पहले उन्होंने वायुसेना मुख्यालय में परियोजनाओं, सैन्य योजनाओं और जरूरतों से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

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वायुसेना के शीर्ष स्तर पर 10 वरिष्ठ अधिकारी

इस समय भारतीय वायुसेना में एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के स्तर पर 10 अधिकारी हैं। इनमें वायुसेना प्रमुख बनने वाले अधिकारी भी शामिल हैं।

इन अधिकारियों में एयर मार्शल यल्ला उमेश टेक्निकल स्ट्रीम से हैं और वायुसेना की मेंटेनेंस कमांड का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं, एयर मार्शल संदीप थरेजा मेडिकल स्ट्रीम से हैं। वह सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं।

बाकी एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ फाइटर जेट स्ट्रीम से आते हैं। फिलहाल वायुसेना की टॉप लीडरशिप में ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट या हेलीकॉप्टर स्ट्रीम से कोई अधिकारी नहीं है। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

ज्यादातर वायुसेना प्रमुख फाइटर जेट स्ट्रीम से रहे

15 अगस्त 1947 के बाद से भारतीय वायुसेना का नेतृत्व करने वाले 29 अधिकारियों में तीन ब्रिटिश अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने मार्च 1954 तक सेवा दी थी। इन सभी में से केवल एक अधिकारी फाइटर जेट स्ट्रीम से नहीं था।

यह अपवाद एयर चीफ मार्शल फाली होमी मेजर थे। वह हेलीकॉप्टर पायलट थे और उन्होंने मार्च 2007 से मई 2009 तक वायुसेना प्रमुख के रूप में काम किया।

एयर चीफ मार्शल शशिंद्र पाल त्यागी के सेवानिवृत्त होने के समय एयर चीफ मार्शल फाली होमी मेजर सबसे वरिष्ठ एयर मार्शल थे। उस समय वह शिलांग स्थित ईस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे।

एयर चीफ मार्शल मेजर एमआई-17 हेलीकॉप्टर के पायलट रहे थे। उन्हें सियाचिन और श्रीलंका में किए गए सैन्य अभियानों का अनुभव था। उन्हें वीरता के लिए दो बार सम्मानित भी किया गया था। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

ऑपरेशन सिंदूर के बाद वायुसेना की क्षमताएं बढ़ाने पर जोर

पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता बढ़ाने से जुड़े कई कार्यक्रमों को मंजूरी दी। इनमें तेज कम्युनिकेशन नेटवर्क, अतिरिक्त सर्विलांस विमान, लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइलें, अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी यूएवी और नए लड़ाकू विमानों से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं।

इनमें से कई कार्यक्रमों की प्रशासनिक प्रक्रिया 2025 में शुरू हुई थी। इनके तहत उपकरणों और तकनीकों को वायुसेना में शामिल करने का काम आने वाले सालों में किया जाना है।

एयर मार्शल दीक्षित ऐसे समय में वायुसेना की कमान संभालेंगे, जब भारतीय वायुसेना को मौजूदा विमानों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ नए सिस्टम को अपने ऑपरेशनल नेटवर्क में शामिल करना है। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

वायुसेना के सामने लड़ाकू विमानों की कमी बड़ी चुनौती

मिग-21 विमानों की विदाई के बाद भारतीय वायुसेना के पास 29 लड़ाकू स्क्वाड्रन रह गए हैं। वायुसेना की स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन है। इस कमी के बीच वायुसेना को पाकिस्तान और चीन से जुड़ी संभावित दोहरे मोर्चे की चुनौती को ध्यान में रखकर अपनी क्षमता बनाए रखनी है। एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने अक्टूबर 2026 में कहा था कि वायुसेना को हर साल लगभग 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत है।

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इस जरूरत को पूरा करने के लिए तेजस एमके-1ए, मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट यानी एमआरएफए और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान से जुड़े कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

तेजस एमके-1ए की वायुसेना में एंट्री पर नजर

तेजस एमके-1ए स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल बना रही है। इस विमान को वायुसेना में शामिल करना नए प्रमुख की शुरुआती प्राथमिकताओं में से एक होगा।

विमान के रडार और मिसाइलों के बीच इंटीग्रेशन से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को नवंबर 2026 तक सुलझाने का लक्ष्य रखा गया था। एचएएल के पास लगभग 30 विमान एयरफ्रेम तैयार हैं। एयरफ्रेम विमान का मुख्य स्ट्रक्चर होता है, जिसमें इंजन और अन्य सिस्टम लगाए जाते हैं।

अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक से 14 एफ-404 इंजन की सप्लाई भी हो चुकी है। एचएएल को कुल 180 तेजस एमके-1ए विमान बनाने हैं। वायुसेना की उम्मीद है कि उसे हर साल लगभग 24 विमान मिल सकेंगे। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

114 राफेल विमानों की खरीद भी अहम

वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट यानी एमआरएफए कार्यक्रम भी चल रहा है। इसके तहत फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना है।

इस सौदे पर वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान दस्तखत होने की उम्मीद जताई गई थी। वहीं विमानों की डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट होने के तीन से चार साल बाद शुरू हो सकती है। इसमें हर साल लगभग 12 विमानों की डिलीवरी की जानी है।

पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरत भी वायुसेना की योजना का हिस्सा है। भारत का स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए अभी विकास के चरण में है। इस बीच रूस ने वायुसेना को सुखोई-57 लड़ाकू विमान की पेशकश की है। हालांकि, इस विमान को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त खरीद

भारतीय वायुसेना की एयर डिफेंस क्षमता में एस-400 मिसाइल सिस्टम की महत्वपूर्ण भूमिका है। रूस से 2018 में किए गए कॉन्ट्रैक्ट के तहत पांचवें और आखिरी स्क्वाड्रन की सप्लाई 2027 में होने की उम्मीद है।

इसके अलावा, रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2026 में पांच अतिरिक्त एस-400 सिस्टम की खरीद के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। वहीं रूस इसके लिए कॉमर्शियल प्रपोजल भी सौंप चुका है।

एस-400 लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है। इसका इस्तेमाल अलग-अलग प्रकार के हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए किया जाता है। अतिरिक्त सिस्टम की खरीद से जुड़ी प्रक्रिया वायुसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

यूएवी और ऑटोनॉमस सिस्टम पर भी काम

सितंबर 2026 में भारतीय वायुसेना ने घरेलू रक्षा उद्योग के सामने यूएवी और ऑटोनॉमस सिस्टम से जुड़ी अपनी जरूरतें रखीं। इसके लिए ‘अनमैन्ड एंड ऑटोनॉमस सिस्टम्स रोडमैप’ नाम का डॉक्युमेंट जारी किया गया।

इसमें ड्रोन के लिए स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम, बिना लगातार मानवीय नियंत्रण के काम करने वाले सॉफ्टवेयर और जीपीएस सिग्नल ब्लॉक होने की स्थिति में नेविगेशन की क्षमता जैसी जरूरतें शामिल हैं।

ऑटोनॉमस सिस्टम ऐसे सिस्टम होते हैं, जो तय निर्देशों के आधार पर कुछ काम खुद कर सकते हैं। सैन्य इस्तेमाल में इनकी क्षमता मिशन की प्रकृति, सेंसर, सॉफ्टवेयर और कम्युनिकेशन सिस्टम पर निर्भर करती है।

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सैटेलाइट और आईएसीसीएस नेटवर्क का अपग्रेड

वायुसेना के कम्युनिकेशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए एक समर्पित सैटेलाइट को भी मंजूरी दी जा चुकी है। इससे उद्देश्य विमानों के बीच कनेक्टिविटी और निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहतर होगी।

इसके साथ ही इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम यानी आईएसीसीएस को अपग्रेड किया जा रहा है। यह सिस्टम अलग-अलग सर्विलांस प्लेटफॉर्म से मिलने वाले रियल-टाइम डेटा को जोड़कर हवाई क्षेत्र की एक संयुक्त तस्वीर तैयार करता है।

इसमें रडार और अन्य निगरानी साधनों से मिली जानकारी को इंटीग्रेट किया जाता है। इससे कमांडरों को हवाई खतरों की स्थिति समझने और उपलब्ध हथियार प्रणालियों में से सही विकल्प चुनने में मदद मिलती है।

वायुसेना एयरबस ए321 कमर्शियल विमानों में एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाने की योजना पर भी काम कर रही है। ऐसे विमानों का इस्तेमाल दूर से हवाई गतिविधियों का पता लगाने और निगरानी के लिए किया जा सकता है। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

थिएटर कमांड और अग्निवीरों से जुड़े मुद्दे

एयर मार्शल दीक्षित के सामने प्रस्तावित थिएटर कमांड के स्ट्रक्चर पर वायुसेना का पक्ष रखने की जिम्मेदारी भी होगी। थिएटर कमांड का उद्देश्य एक निश्चित भौगोलिक इलाके में तीनों सेनाओं की क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

हालांकि, वायुसेना के भीतर लड़ाकू विमानों को अलग-अलग थिएटर कमांड में बांटने को लेकर विचार-विमर्श जारी रहा है।

बता दें कि चीफ एयर मार्शल दीक्षित पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के साथ जॉइंट मिलिट्री डॉक्ट्रिन और डिफेंस फोर्सेज विजन 2047 से भी जुड़े रहे हैं।

इसके अलावा, अग्निवीर योजना के तहत वायुसेना में भर्ती पहले बैच के 2,850 अग्निवीरों के चार साल का कार्यकाल इस साल के आखिर तक पूरा हो रहा है। अभी तक कि नीति के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है। शेष अग्निवीरों के लिए अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस में रोजगार के अवसरों पर ध्यान दिया जा रहा है।

पिछले एयर चीफ एपी सिंह ने भी संकेत दिया था कि 25 फीसदी से ज्यादा रिटेन करने की तैयारी है। एयर फोर्स चीफ दीक्षित के कार्यकाल में इस नीति की समीक्षा और सरकार से बातचीत प्रमुख मुद्दा हो सकता है।

वहीं उन्हें वायुसेना की जरूरतों के अनुसार कम संख्या में, लेकिन बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक में दक्ष जवानों की व्यवस्था बनाए रखनी होगी। साथ ही, अनुभवी जवानों और तकनीकी काम में माहिर लोगों की कमी न हो, इसका भी ध्यान रखना होगा। पहले बैच के अग्निवीरों की सेवा पूरी होने के बाद उनके अनुभव, ज्यादा अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने की मांग और ड्रोन जैसे आधुनिक युद्ध उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच संतुलन बनाना उनके लिए अहम होगा। (IAF Chief Ashutosh Dixit)

Author

  • Harendra Chaudhary

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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