HomeLegal Policy Newsआर्मी वेटरंस के हक में हाईकोर्ट का फैसला; मेडिकल बोर्ड की एक...

आर्मी वेटरंस के हक में हाईकोर्ट का फैसला; मेडिकल बोर्ड की एक लाइन से नहीं रोकी जा सकती पूर्व सैनिक की विकलांगता पेंशन

मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि हाई ब्लड प्रेशर पीस एरिया में सेवा के दौरान शुरू हुआ था और इसका सेना की ड्यूटी, तनाव या ऊंचाई वाले इलाकों में तैनाती से कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया...

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US

📍नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम | 4 Jun, 2026, 7:52 PM

Army Disability Pension: देश की सुरक्षा में वर्षों तक सेवा देने वाले सैनिकों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली विकलांगता पेंशन को लेकर केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि अगर किसी पूर्व सैनिक की विकलांगता पेंशन को रोकना है, तो मेडिकल बोर्ड को इसके पीछे ठोस और विस्तृत कारण बताने होंगे। केवल कुछ शब्द लिखकर या सामान्य टिप्पणी देकर पेंशन से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक पूर्व सैनिक के मामले तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसका असर उन हजारों पूर्व सैनिकों पर पड़ सकता है, जिनके विकलांगता पेंशन के दावे मेडिकल बोर्ड की संक्षिप्त टिप्पणियों के आधार पर खारिज कर दिए गए थे।

केरल हाईकोर्ट की जस्टिस के. नटराजन और जस्टिस जॉनसन जॉन वाली डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी मेडिकल बोर्ड की राय तभी स्वीकार की जा सकती है जब उसके पीछे पर्याप्त चिकित्सकीय और तथ्यात्मक आधार मौजूद हो। अगर कारण स्पष्ट नहीं हैं, तो ऐसी राय के आधार पर पेंशन रोकना उचित नहीं माना जा सकता। (Army Disability Pension)

Army Disability Pension: क्या था पूरा मामला?

यह मामला पूर्व सैनिक बालामुरली कृष्णा एम से जुड़ा है। उन्होंने नवंबर 2004 में भारतीय सेना जॉइन की थी। लगभग 17 वर्षों तक सेवा देने के बाद नवंबर 2021 में उन्हें सेवा से मुक्त किया गया।

सेना से बाहर आने से पहले उनके स्वास्थ्य की जांच रिलीज मेडिकल बोर्ड ने की। जांच में दो स्वास्थ्य समस्याएं सामने आईं। पहली प्राइमरी हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप और दूसरी मोटापा।

मेडिकल बोर्ड ने हाई ब्लड प्रेशर के लिए 30 प्रतिशत और मोटापे के लिए 5 प्रतिशत विकलांगता मानी। दोनों को मिलाकर कुल विकलांगता 33.5 प्रतिशत आंकी गई।

सामान्य तौर पर इतनी विकलांगता होने पर पूर्व सैनिक विकलांगता पेंशन का दावा कर सकता है। लेकिन यहां विवाद इस बात पर हुआ कि मेडिकल बोर्ड ने इन बीमारियों को सैन्य सेवा से जुड़ा हुआ नहीं माना।

क्या कहा था मेडिकल बोर्ड ने?

मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि हाई ब्लड प्रेशर पीस एरिया में सेवा के दौरान शुरू हुआ था और इसका सेना की ड्यूटी, तनाव या ऊंचाई वाले इलाकों में तैनाती से कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया।

यह भी पढ़ें:  डीआरडीओ बना रहा 500 किमी तक ‘हैकप्रूफ’ कम्युनिकेशन नेटवर्क, दुश्मन के साइबर अटैक होंगे फेल

मोटापे को लेकर बोर्ड ने टिप्पणी की कि यह लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या है। इसलिए दोनों बीमारियों को “न तो सेवा के कारण हुआ और न ही सेवा के कारण बढ़ा” माना गया।

इसी आधार पर पेंशन अधिकारियों ने विकलांगता पेंशन देने से इनकार कर दिया।

ट्रिब्यूनल से भी नहीं मिली राहत

पेंशन नहीं मिलने के बाद बालामुरली कृष्णा ने आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने कोच्चि स्थित बेंच में याचिका दाखिल की।

हालांकि मार्च 2024 में ट्रिब्यूनल ने उनकी याचिका खारिज कर दी। ट्रिब्यूनल ने मेडिकल बोर्ड की राय को सही माना और कहा कि सेवा और बीमारी के बीच संबंध साबित नहीं हुआ है।

इसके बाद बालामुरली कृष्णा ने केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की। (Army Disability Pension)

हाईकोर्ट ने किन बातों पर जताई आपत्ति?

हाईकोर्ट ने सबसे पहले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को ध्यान से देखा। अदालत ने पाया कि रिपोर्ट में केवल कुछ सामान्य टिप्पणियां लिखी गई थीं, लेकिन यह नहीं बताया गया था कि आखिर किस आधार पर बीमारी को सेवा से असंबंधित माना गया।

कोर्ट ने कहा कि केवल “पीस एरिया में बीमारी शुरू हुई” लिख देना पर्याप्त नहीं है।

अदालत ने टिप्पणी की कि सेना की नौकरी सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं होती। पीस एरिया में तैनात सैनिक भी लगातार अनुशासन, जिम्मेदारियों, लंबे कार्य घंटों, परिवार से दूरी और ऑपरेशनल तैयारी जैसी परिस्थितियों से गुजरते हैं। इनका स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है।

इसलिए मेडिकल बोर्ड को यह विस्तार से बताना चाहिए था कि उसने बीमारी और सैन्य सेवा के बीच संबंध क्यों नहीं माना।

“लाइफस्टाइल डिसऑर्डर” लिख देना काफी नहीं

कोर्ट ने मोटापे को लेकर मेडिकल बोर्ड की टिप्पणी पर भी सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि किसी बीमारी को केवल “लाइफस्टाइल डिसऑर्डर” बता देना पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता। मेडिकल बोर्ड को यह भी बताना चाहिए कि वह इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंचा।

यह भी पढ़ें:  रिकॉर्ड में दर्ज हुआ भारतीय सेना का ये इनोवेशन, LAC पर 16,000 फीट पर चल रहे मोनोरेल सिस्टम से दुनिया हुई हैरान

हाईकोर्ट के अनुसार किसी भी सरकारी अथॉरिटी का फैसला कारणों पर आधारित होना चाहिए। खासकर तब जब उस फैसले का असर किसी व्यक्ति के आर्थिक और सामाजिक अधिकारों पर पड़ रहा हो।

15 साल वाले नियम को भी समझाया

फैसले में अदालत ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु भी स्पष्ट किया। सरकार की ओर से कहा गया था कि 2008 के नियमों के अनुसार कुछ मामलों में दावा करने वाले व्यक्ति को खुद यह साबित करना पड़ता है कि बीमारी सेवा से जुड़ी है।

लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि यह नियम हर मामले में लागू नहीं होता। अगर कोई पूर्व सैनिक सेवा समाप्त होने के तुरंत बाद या निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा करता है, तो प्राथमिक जिम्मेदारी विभाग की होती है कि वह साबित करे कि बीमारी का सेना की सेवा से कोई संबंध नहीं है।

बालामुरली कृष्णा ने समय पर दावा किया था। इसलिए अदालत ने माना कि इस मामले में पूरा बोझ उन पर नहीं डाला जा सकता था। (Army Disability Pension)

सुप्रीम कोर्ट और दूसरे हाईकोर्ट के फैसलों का भी जिक्र

केरल हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के कई पुराने फैसलों का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि पहले भी न्यायालय यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मेडिकल बोर्ड की राय अंतिम नहीं मानी जा सकती। यदि उसके पीछे पर्याप्त वजह नहीं हैं तो अदालत उसकी जांच कर सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि विकलांगता पेंशन एक कल्याणकारी योजना है। ऐसे मामलों में नियमों की व्याख्या उदार तरीके से की जानी चाहिए ताकि पूर्व सैनिकों को न्याय मिल सके।

अदालत ने क्या आदेश दिया?

हाईकोर्ट ने आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि बालामुरली कृष्णा विकलांगता पेंशन पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित पेंशन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के भीतर पेंशन से जुड़े दस्तावेजों में आवश्यक संशोधन करें और पेंशन का लाभ प्रदान करें।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं किया गया तो बकाया राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। (Army Disability Pension)

यह भी पढ़ें:  Young Leaders Forum 2025: सेना प्रमुख बोले- युवा ही भारत की सबसे बड़ी ताकत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता से बनाएं 2047 का विकसित भारत

पूर्व सैनिकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे पूर्व सैनिक हैं, जिनकी विकलांगता पेंशन के दावे यह कहकर खारिज कर दिए जाते हैं कि बीमारी सेवा से संबंधित नहीं है। कई मामलों में मेडिकल बोर्ड केवल कुछ पंक्तियों की टिप्पणी देकर मामला खत्म कर देता है।

केरल हाईकोर्ट के इस फैसले ने साफ संदेश दिया है कि अब केवल औपचारिक टिप्पणी काफी नहीं होगी। मेडिकल बोर्ड को अपने निष्कर्ष के पीछे पूरा चिकित्सकीय और तथ्यात्मक आधार बताना होगा।

इस फैसले से उन पूर्व सैनिकों को भी राहत मिल सकती है जो लंबे समय से अपने पेंशन मामलों को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। (Army Disability Pension)

विकलांगता पेंशन क्यों महत्वपूर्ण है?

सेना में सेवा के दौरान जवानों और अधिकारियों को कई तरह की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

कई बार बीमारी या स्वास्थ्य समस्या सीधे युद्ध क्षेत्र से नहीं बल्कि लगातार तनाव, कठिन जीवनशैली, जिम्मेदारियों और कार्य परिस्थितियों के कारण भी पैदा होती है।

विकलांगता पेंशन ऐसी ही परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई गई व्यवस्था है।

इसी कारण अदालतों ने समय-समय पर कहा है कि इस तरह के मामलों को केवल तकनीकी नजरिए से नहीं बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए।

केरल हाईकोर्ट के ताजा फैसले में भी यही कहा गया है कि किसी पूर्व सैनिक के अधिकारों को केवल एक सामान्य मेडिकल टिप्पणी के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। (Army Disability Pension)

Case No: W.P.(C) No.2893/2026

Case Title: Balamurali Krishna M. v. Union of India and Ors.

Author

  • News Desk

    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

रक्षा समाचार WhatsApp Channel Follow US
News Desk
News Desk
रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

Most Popular