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Sukhoi 30MKI Upgrade: भारत के सुखोई जेट्स को मिलेगा मॉडर्न अपग्रेड, 2027 तक मिलेंगे बाकी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम

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📍नई दिल्ली | 27 Jun, 2025, 2:01 PM

Sukhoi 30MKI Upgrade: भारत अपने सुखोई-30 एमकेआई (Sukhoi-30 MKI) फाइटर जेट्स की पूरी फ्लीट को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करने की तैयारी में है। इस अपग्रेड में मॉडर्न एवियोनिक्स, लेटेस्ट रडार और 78 फीसदी स्वदेशी कंटेंट शामिल होगा। इस अपग्रेड पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री आंद्रे बेलोउसॉव (Andrey Belousov) के बीच शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान अहम चर्चा हुई। यह बैठक चीन के चिंगदाओ शहर में SCO डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग के मौके पर हुई, जहां दोनों नेताओं ने इंडो-रशियन डिफेंस कोऑपरेशन, क्रॉस-बॉर्डर टेररिज़्म और भू-राजनीतिक हालातों पर गहन चर्चा की।

Sukhoi 30MKI Upgrade: वायुसेना के पास 260 सुखोई-30

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के पास इस समय करीब 260 सुखोई-30 एमकेआई जेट्स हैं, जो देश की वायुसेना की रीढ़ हैं। इन जेट्स ने हाल ही में 10 मई को ऑपरेशन सिंदूर (में अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल के एयर-लॉन्च वर्जन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के कई एयर बेसों पर सटीक हमला किया गया था। इसके बाद यह साफ हो गया कि भारत को अब अपने एयरप्लेटफॉर्म्स को अपग्रेड करना होगा, ताकि वे भविष्य के युद्धों में नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक डॉमिनेशन के लिए पूरी तरह सक्षम हो सकें।

राजनाथ-बेलौसोव की मुलाकात: क्या रही चर्चा?

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार सुबह एक बयान में बताया कि दोनों मंत्रियों ने वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति (geopolitical situations), सीमा पार आतंकवाद (cross-border terrorism) और भारत-रूस रक्षा सहयोग (Indo-Russian defence cooperation) जैसे कई मुद्दों पर विस्तार से बात की। यह मुलाकात ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा जरूरतों को बढ़ाने और रक्षा उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मंत्रालय ने बताया, “चर्चा में एयर डिफेंस सिस्टम, एयर-टू-एयर मिसाइल्स, मॉडर्न टेक्नोलॉजी, और हवाई प्लेटफॉर्म्स के अपग्रेड जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल थे। इसके अलावा, एस-400 सिस्टम की सप्लाई, सुखोई-30 एमकेआई के अपग्रेड और जरूरी सैन्य हार्डवेयर की जल्द खरीद पर भी बात हुई।”

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Sukhoi 30MKI Upgrade में क्या होगा खास?

सुखोई-30 एमकेआई भारत की वायुसेना का रीढ़ माना जाता है। इस अपग्रेड प्रोग्राम के तहत इन जेट्स को कई मॉडर्न फीचर्स से लैस किया जाएगा। रूस ने चार महीने पहले, फरवरी में, अपने लेटेस्ट स्टील्थ फाइटर जेट सुखोई-57 (Sukhoi-57) में इस्तेमाल होने वाला इंजन (AL-41) सुखोई-30 एमकेआई के लिए ऑफर किया था। अभी तक Sukhoi-30MKI में AL-31F इंजन लगा है, जो कम थ्रस्ट देता है। AL-41 इंजन ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट, कम मेंटेनेंस वाला और ज्यादा पावरफुल है। रूस का प्रस्ताव है कि पुराने इंजन को AL-41 से रिप्लेस किया जाए, जो जेट की परफॉर्मेंस को कई गुना बेहतर करेगा। अगर यह बदलाव होता है, तो भारतीय सुखोई विमानों की फाइटिंग क्षमता और सुपरसोनिक परफॉर्मेंस काफी बेहतर हो जाएगी।

इससे पहले सुखोई-57 की परफॉर्मेंस को भारत ने फरवरी में बेंगलुरु में आयोजित एयरो इंडिया (Aero India) शो में देखा था, जहां इस जेट ने अपनी क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन किया। इसने भारत के रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा और अपग्रेड प्रोग्राम में इसकी टेक्नोलॉजी को शामिल करने की चर्चा तेज हुई। हालांकि भारत अभी तक AMCA प्रोजेक्ट के तहत अपने स्वदेशी फिफ्थ जनरेशन फाइटर पर काम कर रहा है, लेकिन Sukhoi-30 के अपग्रेड में Sukhoi-57 की तकनीक को शामिल करने का विचार रणनीतिक रूप से अहम है।

इस अपग्रेड में भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियर्स की भी बड़ी भूमिका होगी। डीआरडीओ (DRDO) के बनाए उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (Uttam AESA) रडार को इन जेट्स में लगाया जाएगा। यह रडार दुश्मन के टारगेट को डिटेक्ट करने और ट्रैक करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा। इसके अलावा, जेट्स में फुल डिजिटल ग्लास कॉकपिट (glass cockpit) होगा, जिसमें बड़े टचस्क्रीन डिस्प्ले होंगे। ये पायलट को बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस (situational awareness) देंगे। साथ ही, एक नया मिशन कंप्यूटर भी लगाया जाएगा, जो अपग्रेडेड एवियोनिक्स के लिए जरूरी प्रोसेसिंग पावर को हैंडल करेगा।

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स्वदेशीकरण पर जोर

इस अपग्रेड प्रोजेक्ट में भारत का फोकस 78 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट पर है। इसका मतलब है कि जेट्स में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर पार्ट्स भारत में ही बनाए जाएंगे। इससे न सिर्फ विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बूस्ट मिलेगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), जो भारत में सुखोई-30 एमकेआई का लाइसेंस के तहत प्रोडक्शन करता है, इस अपग्रेड प्रोजेक्ट के लिए वर्क-शेयर कॉन्ट्रैक्ट साइन करने जा रहा है। HAL के इंजीनियर्स और टेक्नीशियन्स इस प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभाएंगे। एचएएल अब रूस के साथ वर्क-शेयर एग्रीमेंट पर साइन करेगा, जिसमें भारत में बने उपकरणों को रूसी तकनीक के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा।

इसके अलावा भारत और रूस के रक्षा मंत्रियों की बैठक में दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिलिट्री हार्डवेयर की सप्लाई और सहयोग को लेकर भी सहमति बनी है। इस समझौते के तहत कई अत्याधुनिक रक्षा उपकरण भारत को मिलेंगे, जो देश की सैन्य शक्ति को और मजबूती देंगे। रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में स्पष्ट किया गया कि S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, एयर-टू-एयर मिसाइलों की सप्लाई पर भी रूस ने सहमति जताई है, जो भारतीय वायुसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाएंगी।

बाकी बचे S-400 की डिलीवरी जल्द

रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि 2027 तक बचे हुए एस-400 (S-400) ट्रायम्फ सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम्स की डिलीवरी पूरी हो जाएगी। 2018 में 40,000 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के तहत भारत ने पांच एस-400 स्क्वॉड्रन खरीदने का फैसला किया था। अब तक दो स्क्वॉड्रन डिलीवर हो चुके हैं, और बाकी तीन 2027 तक मिलने की उम्मीद है। हर स्क्वॉड्रन में दो मिसाइल बैटरी होती हैं, जो 120 से 380 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के जेट्स, मिसाइल्स और ड्रोन्स को नष्ट कर सकती हैं।

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एस-400 सिस्टम भारत की वायुसेना के लिए गेमचेंजर साबित हो रहा है, खासकर सीमा पर बढ़ते खतरे को देखते हुए। हाल ही में पांचवें स्क्वॉड्रन की डिलीवरी की प्रगति पर भी बात हुई। पीएम मोदी ने पिछले साल इस सिस्टम का जायजा लिया था, जो भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है। यह सौदा स्वदेशी डीआरडीओ प्रोजेक्ट के साथ भी मेल खाता है, जो 350 किलोमीटर रेंज की मिसाइलें विकसित कर रहा है।

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भारत-रूस के मजबूत रिश्ते

रूसी रक्षा मंत्री बेलौसोव ने राजनाथ सिंह के साथ मुलाकात में भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत रिश्तों की बात की। उन्होंने कहा कि ये रिश्ते समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। उन्होंने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता जताई। इस हमले को उन्होंने “कायरतापूर्ण और भयानक” करार दिया।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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