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AMCA Mk2 के लिए बड़ी खबर! GE और GTRE मिलकर बनाएंगे भारत का सुपरफाइटर इंजन, चीन-पाकिस्तान के छूटेंगे पसीने

Indian AMCA Fighter Jet: Adani Defence and MTAR Technologies join hands to bid for Rs 15,000 crore AMCA project amid intense competition
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📍नई दिल्ली | 25 Feb, 2025, 7:44 PM

AMCA Mk2: एयरो इंडिया 2025 में अमेरिका की GE एयरोस्पेस ने भारत के गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) के साथ साझेदारी की इच्छा जाहिर की है। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) Mk2 के लिए एक अधिक पावरफुल इंजन डेवलप करना है। GE पहले ही AMCA Mk1 के लिए F414-GE-INS6 इंजन की सप्लाई कर रही है, लेकिन Mk2 के लिए इससे भी ज्यादा पावरफुल इंजन की जरूरत होगी।

Big Boost for AMCA Mk2! GE & GTRE to Develop India’s Superfighter Engine, A Gamechanger for Defence
AMCA Representative Image

GE का मौजूदा F414 इंजन देता है 98 kN का थ्रस्ट

GE ने पहले ही भारत को F414-GE-INS6 इंजन की सप्लाई के लिए एक समझौता किया है। यह इंजन 98 किलो न्यूटन (kN) का थ्रस्ट जेनरेट कर सकता है और इसे खासतौर पर AMCA Mk1 के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह इंजन पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की कई जरूरतों जैसे स्टील्थ टेक्नोलॉजी, सुपरसोनिक क्रूज क्षमता (बिना आफ्टरबर्नर के) और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को पूरा करता है।

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GE पहले ही भारतीय वायुसेना के लिए तेजस Mk2 के लिए 99 F414 इंजन की सप्लाई कर रही है, जिसका सौदा 2023 में 716 मिलियन डॉलर में हुआ था। इस सौदे के तहत 80 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग शामिल है।

AMCA Mk2 के लिए क्यों जरूरी है नया इंजन?

GE एयरोस्पेस के एक अधिकारी के मुताबिक, यह इंजन शुरुआती 40 AMCA Mk1 फाइटर्स के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। हालांकि, GE ने यह भी स्वीकार किया कि AMCA Mk2 और आगे के वर्जन को अधिक दमदार इंजन की जरूरत होगी। GE एयरोस्पेस अब GTRE के साथ मिलकर एक नया इंजन बनाने की योजना बना रहा है, जो AMCA Mk2 की जरूरतों को पूरा करेगा।

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AMCA Mk2 में ऐसे फीचर्स होंगे, जो इसे पांचवीं पीढ़ी से आगे का फाइटर जेट बनाने में मदद करेंगे। GE के अधिकारियों का कहना है कि नए इंजन में मौजूदा इंजन की तुलना में अधिक थ्रस्ट होगा और यह तकनीकी रूप से अधिक एडवांस होगा।

नए इंजन में 110 kN से ज्यादा थ्रस्ट

GE और GTRE के बीच संभावित साझेदारी से AMCA Mk2 के लिए एक पूरी तरह से नया कोर डिजाइन किया जाएगा। यह नया इंजन 110 kN से अधिक का थ्रस्ट पैदा कर सकेगा। बल्कि इसमें नई टेक्नोलॉजी भी शामिल होगी, जिससे इसकी कार्यक्षमता और भी बेहतर होगी। GE के अनुसार, यह नया इंजन AMCA Mk2 की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया जाएगा, जबकि इसे मौजूदा एयरक्राफ्ट डिज़ाइन में कम से कम बदलाव के साथ फिट किया जाएगा। इस रणनीति का उद्देश्य डेवलपमेंट कॉस्ट को कंट्रोल करना और समय-सीमा को बनाए रखना है।

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GE अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संभावित इंजन के मूल डिजाइन (core design) को पूरी तरह नया रूप दिया जाएगा, जिससे यह भविष्य में भी अपग्रेड हो सके। इसका मतलब यह है कि इस इंजन का इस्तेमाल न केवल AMCA Mk2 में, बल्कि आने वाले फाइटर जेट्स के लिए भी किया जा सकता है।

उठा बौद्धिक संपदा (IP) का मुद्दा

GE और GTRE के बीच इस साझेदारी को लेकर बौद्धिक संपदा (Intellectual Property-IP) का सवाल भी उठ रहा है। GE के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अगर यह नया इंजन डेवलप होता है, तो इसके IP अधिकार साझा किए जाएंगे। इसका मतलब यह होगा कि दोनों पक्षों के टेक्निकल कंट्रिब्यूशंस को मान्यता दी जाएगी और GE या GTRE में से कोई भी इसे पूरी तरह से कंट्रोल नहीं करेगा।

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2028 तक आएगा AMCA Mk1!

AMCA Mk1 को भारत का सबसे उन्नत स्वदेशी लड़ाकू विमान माना जा रहा है। इसे 2028 तक पेश किए जाने की संभावना है और इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन 2030 के दशक के मध्य तक शुरू हो सकता है। यह भारत के मेक इन इंडिया रक्षा कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, और अगर GE-GTRE साझेदारी सफल होती है, तो भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

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  • herry passport

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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