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राजनाथ सिंह बोले- आईआईटी कानपुर में बनेगा मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी हब, सेना और डीआरडीओ मिलकर बनाएंगे स्वदेशी तकनीक

नई दिल्ली में आईआईटी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ फंडरेजिंग कैंपेन के शुभारंभ में राजनाथ सिंह ने जोर दिया कि भारत के लिए स्वदेशी तकनीक का विकास केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा रणनीतिक विषय भी है...

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📍नई दिल्ली | 14 Oct, 2026, 9:33 PM

IIT Kanpur military drone hub: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बदलते युद्ध के दौर में भारत को अपनी सैन्य तकनीक मजबूत करने के लिए सशस्त्र बलों, डीआरडीओ, आईआईटी, डिफेंस सेक्टर की सरकारी कंपनियों और निजी उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनाना होगा। इसमें डिफेंस स्टार्टअप्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोनॉमस सिस्टम, अनमैन्ड प्लेटफॉर्म, एडवांस सेंसर, साइबर सिक्योरिटी और स्पेस बेस्ड टेक्नोलॉजी युद्ध लड़ने के तरीकों को तेजी से बदल रही हैं।

नई दिल्ली में आईआईटी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ फंडरेजिंग कैंपेन के शुभारंभ में राजनाथ सिंह ने जोर दिया कि भारत के लिए स्वदेशी तकनीक का विकास केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा रणनीतिक विषय भी है।

IIT Kanpur military drone hub: बदलते युद्ध में स्वदेशी तकनीक क्यों जरूरी?

रक्षा मंत्री के मुताबिक, आधुनिक युद्ध में केवल सैनिकों और हथियारों की संख्या से किसी देश की सैन्य ताकत तय नहीं होती। तकनीक, सेंसर, डेटा, साइबर सुरक्षा और ऑटोनॉमस सिस्टम भी सैन्य क्षमता को प्रभावित करते हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि इन क्षेत्रों में भारत की अपनी तकनीकी क्षमता मजबूत करना जरूरी है, ताकि देश केवल विदेशी तकनीक का इस्तेमाल करने वाला न रहे, बल्कि नई तकनीक बनाने और उसके विकास में भी योगदान दे।

सेना, डीआरडीओ और आईआईटी के बीच सहयोग पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि डिफेंस सेक्टर में रिसर्च तभी ज्यादा उपयोगी बन सकती है, जब उसे सेना की वास्तविक जरूरतों और उद्योग की उत्पादन क्षमता से जोड़ा जाए। इसके लिए सशस्त्र बलों, डीआरडीओ, उच्च शिक्षण संस्थानों, रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियों और निजी उद्योगों के बीच करीबी सहयोग जरूरी है।

आईआईटी जैसे संस्थान वैज्ञानिक शोध, इंजीनियरिंग और नई तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दूसरी तरफ, सशस्त्र बलों के पास ऑपरेशनल अनुभव होता है। वे बता सकते हैं कि युद्ध के मैदान में किस तरह की तकनीक की जरूरत है और मौजूदा उपकरणों में किन सुधारों की आवश्यकता है।

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डिफेंस कंपनियां और स्टार्टअप्स इस शोध को वास्तविक उत्पाद में बदलने, उसका परीक्षण करने और बड़े स्तर पर उत्पादन करने में मदद कर सकते हैं।

रक्षा मंत्री के अनुसार, इस तरह के सहयोग से स्वदेशी तकनीक के विकास, सैन्य इस्तेमाल और लगातार अपग्रेड करने की प्रक्रिया को गति मिल सकती है। (IIT Kanpur military drone hub)

आईआईटी के स्टार्टअप और पेटेंट इकोसिस्टम का जिक्र

राजनाथ सिंह ने देश में तकनीकी शिक्षा और रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आईआईटी इकोसिस्टम के सहयोग से अब तक 6,000 से अधिक स्टार्टअप्स को सपोर्ट मिला है। इसके अलावा, इस इकोसिस्टम से जुड़े 56 यूनिकॉर्न और करीब 5,000 पेटेंट भी शामिल हैं।

यूनिकॉर्न उन स्टार्टअप्स को कहा जाता है जिनकी वैल्यूएशन एक अरब डॉलर या उससे अधिक हो जाती है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आईआईटी अब केवल शिक्षा देने वाले संस्थान नहीं रह गए हैं, बल्कि इनोवेशन, उद्यमिता और नई तकनीक विकसित करने के केंद्र भी बन रहे हैं।

उन्होंने आईआईटी कानपुर की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक विकसित करने और समाज की जरूरतों के लिए समाधान तैयार करने में योगदान दे रहा है।

आईआईटी कानपुर में बनेगा डिफेंस टेक्नोलॉजी स्कूल

राजनाथ सिंह ने आईआईटी कानपुर में चल रही डिफेंस सेक्टर से जुड़ी पहलों का विशेष रूप से उल्लेख किया। इनमें डीआरडीओ-इंडस्ट्री-एकेडेमिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शामिल है। उन्होंने संस्थान में स्कूल ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी स्थापित करने के प्रस्ताव का भी स्वागत किया।

इस तरह के संस्थान में रक्षा तकनीक से संबंधित रिसर्च, इंजीनियरिंग और औद्योगिक जरूरतों को एक साथ जोड़ने पर काम किया जा सकता है।

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रक्षा मंत्री ने आईआईटी कानपुर में नेशनल मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी हब स्थापित करने की योजना की भी जानकारी दी। यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय और आईआईटी कानपुर के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस हब से जुड़ी मंजूरी की प्रक्रिया अंतिम चरण के करीब पहुंच चुकी है। इसका उद्देश्य स्वदेशी ड्रोन तकनीक के विकास और उत्पादन को गति देना तथा सैन्य जरूरतों के लिए नए समाधान तैयार करना है।

ड्रोन तकनीक का महत्व आधुनिक सैन्य अभियानों में लगातार बढ़ रहा है। निगरानी, टारगेट की पहचान और विभिन्न ऑपरेशनल जरूरतों के लिए मानवरहित प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में देश के भीतर ड्रोन और उनसे जुड़े सिस्टम विकसित करने की क्षमता रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। (IIT Kanpur military drone hub)

साइबर सिक्योरिटी और नई तकनीकों पर भी फोकस

राजनाथ सिंह ने आईआईटी कानपुर के सी3आई साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब का भी उल्लेख किया। साइबर सिक्योरिटी का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि सैन्य और नागरिक क्षेत्रों में डिजिटल नेटवर्क, डेटा और कंप्यूटर आधारित सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

साइबर अटैक्स कम्युनिकेशन नेटवर्क, डेटा और महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए सुरक्षित नेटवर्क और साइबर सुरक्षा तकनीकों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है।

रक्षा मंत्री ने एडवांस मटीरियल, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और पर्यावरण से जुड़ी तकनीकों में रिसर्च को भी महत्वपूर्ण बताया। एडवांस मटीरियल का इस्तेमाल हल्के और मजबूत सैन्य उपकरण बनाने में हो सकता है। सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेंसर का अहम हिस्सा हैं, जबकि क्वांटम टेक्नोलॉजी में संचार, कंप्यूटिंग और सेंसिंग से जुड़े नए प्रयोग किए जा रहे हैं।

रिसर्च और इनोवेशन के लिए एक लाख करोड़ रुपये की योजना

राजनाथ सिंह ने केंद्र सरकार की एक लाख करोड़ रुपये की रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन स्कीम का भी जिक्र किया। इस योजना का उद्देश्य रिसर्च और एडवांस टेक्नोलॉजी में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करना है।

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उन्होंने कहा कि नई तकनीक के विकास के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों और उद्योगों को अपनी-अपनी भूमिका निभानी होगी। सरकार नीतिगत समर्थन और अनुकूल माहौल तैयार कर सकती है, शिक्षण संस्थान प्रतिभा और नए विचार विकसित कर सकते हैं, जबकि उद्योग इन विचारों को व्यावहारिक उत्पादों में बदलने और बड़े स्तर पर उत्पादन करने में मदद कर सकता है। (IIT Kanpur military drone hub)

आईआईटी कानपुर का लक्ष्य 2029 तक जुटाना है एक अरब डॉलर

आईआईटी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ कैंपेन का लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर जुटाना है। संस्थान के अनुसार, यह किसी भी आईआईटी की ओर से शुरू किया गया अब तक का सबसे बड़ा फंडरेजिंग अभियान है।

इस अभियान के तहत पूर्व छात्रों, दानदाताओं, कॉरपोरेट पार्टनर्स और सरकार की ओर से 4,155 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई जा चुकी है। यह कुल लक्ष्य का लगभग आधा हिस्सा है।

इस फंड का इस्तेमाल रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, प्रतिभाशाली छात्रों को अवसर देने और स्वदेशी तकनीक के विकास तथा उसे व्यावसायिक स्तर पर पहुंचाने के लिए किया जाना है। (IIT Kanpur military drone hub)

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