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500 करोड़ के डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट में रिश्वत का आरोप, म्यूनिशंस इंडिया के अधिकारी समेत 3 गिरफ्तार

सीबीआई ने 12 अक्टूबर को इस मामले में केस दर्ज किया था। इसके बाद जांच और तलाशी की कार्रवाई की गई। एजेंसी के अनुसार, मामले में सरकारी अधिकारी और निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच कथित संपर्कों की भी जांच की जा रही है...

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📍नई दिल्ली/पुणे | 15 Oct, 2026, 10:22 AM

Munitions India bribery case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डिफेंस सेक्टर से जुड़े कथित रिश्वत मामले में म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार और निजी कंपनी एसएमपीपी लिमिटेड के सीईओ को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अनिल कुमार के भाई बी. हर्षवर्धन को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, मामला करीब 500 करोड़ रुपये के गोला-बारूद सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है।

आरोप है कि इस कॉन्ट्रैक्ट के बदले सरकारी अधिकारी को रिश्वत दी गई और रक्षा उत्पादन तथा खरीद से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा की गईं। सीबीआई ने आरोपियों के ठिकानों से करीब 2.23 करोड़ रुपये नकद और कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं।

Munitions India bribery case: 500 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट की जांच

सीबीआई के मुताबिक, यह मामला म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड को गोला-बारूद की सप्लाई से जुड़े एक कॉन्ट्रैक्ट की जांच के दौरान सामने आया। एसएमपीपी लिमिटेड को एक साल के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि एमआईएल में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर तैनात अनिल कुमार ने निजी ठेकेदारों और वेंडर्स के साथ मिलकर कथित तौर पर रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार किया। इसके बदले सरकारी कामकाज में फायदा पहुंचाने तथा विभाग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी देने का आरोप है।

सीबीआई ने 12 अक्टूबर को इस मामले में केस दर्ज किया था। इसके बाद जांच और तलाशी की कार्रवाई की गई। एजेंसी के अनुसार, मामले में सरकारी अधिकारी और निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच कथित संपर्कों की भी जांच की जा रही है। (Munitions India bribery case)

2.23 करोड़ रुपये की नकदी बरामद

सीबीआई ने अनिल कुमार के साथ उनके भाई बी. हर्षवर्धन और एसएमपीपी लिमिटेड के सीईओ आशीष कंसल को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान पुणे में अनिल कुमार से जुड़े ठिकाने से 1.73 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए।

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इसके अलावा मैसूरु, बेंगलुरु और दिल्ली में आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई। इन जगहों से करीब 50 लाख रुपये नकद और जांच से संबंधित दस्तावेज बरामद होने की जानकारी दी गई है। इस तरह कुल नकद बरामदगी लगभग 2.23 करोड़ रुपये बताई गई है।

सीबीआई का आरोप है कि रिश्वत से मिली रकम को छिपाने के लिए अनिल कुमार ने अपने परिवार के सदस्यों के जरिए पैसे को अलग-अलग जगह रखने की व्यवस्था की थी। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित अवैध रकम किसके पास पहुंची और उसे कहां रखा गया।

एसएमपीपी लिमिटेड के सीईओ और प्रमोटर-डायरेक्टर आशीष कंसल पर आरोप है कि वह कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े मामलों में अनिल कुमार के नियमित संपर्क में थे। सीबीआई के अनुसार, एसएमपीपी के कर्मचारी रवित कुमार तेवतिया का भी अनिल कुमार से संपर्क था।

जांच एजेंसी इन संपर्कों और कथित लेन-देन के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच का हिस्सा हैं। अदालत में दोष साबित होने से पहले किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता।

एसएमपीपी की ओर से मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड की ओर से भी तत्काल कोई बयान सामने नहीं आया था। (Munitions India bribery case)

रक्षा उत्पादन की संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप

इस मामले में केवल रिश्वत का आरोप ही नहीं है, बल्कि रक्षा उत्पादन और खरीद से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप भी लगाया गया है।

सीबीआई के अनुसार, कथित तौर पर दी गई जानकारी में रक्षा उत्पादन, खरीद प्रक्रिया और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड की रणनीतिक गतिविधियों से जुड़े विवरण शामिल हो सकते हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि ऐसी जानकारियां देश के रणनीतिक और सुरक्षा हितों को प्रभावित कर सकती हैं।

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डिफेंस सेक्टर में गोला-बारूद की खरीद और उत्पादन से जुड़ी जानकारी संवेदनशील मानी जाती है। इसमें उत्पादन क्षमता, सप्लाई व्यवस्था और खरीद प्रक्रिया से संबंधित विवरण शामिल हो सकते हैं।

बता दें म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाली सरकारी डिफेंस कंपनी है। इसकी स्थापना वर्ष 2021 में पुराने ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कॉरपोरेटाइजेशन के बाद हुई थी। इसका कॉरपोरेट कार्यालय पुणे में है।

कंपनी भारतीय सेनाओं और अर्धसैनिक बलों के लिए गोला-बारूद, विस्फोटक और उनसे जुड़े उत्पाद बनाती है। देश में इसकी कई प्रोडक्शन युनिट्स हैं। सेना की ऑपरेशनल जरूरतों के लिए गोला-बारूद की नियमित सप्लाई बेहद जरूरी होती है। (Munitions India bribery case)

कानूनी प्रावधानों के तहत दर्ज हुआ केस

सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के संशोधित प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी कथित रिश्वत, कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े फैसलों और रकम के लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है। (Munitions India bribery case)

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