📍नई दिल्ली/बीजिंग | 25 Aug, 2026, 7:36 PM
India-China Border Talks 2026: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री और सीमा मुद्दे पर चीन के विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ भारत-चीन विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में हिस्सा लिया। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में लगातार बातचीत कर रहे हैं। वहीं, चीन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि 26वें दौर की विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता 2027 में भारत में आयोजित की जाएगी।
बैठक की शुरुआत में एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि वह 25वें दौर की वार्ता में शामिल होकर खुश हैं। उन्होंने कहा कि यह बातचीत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर स्पष्ट और सकारात्मक दिशा दी है, जिसके आधार पर दोनों पक्ष काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में भारत और चीन के संबंध धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहे हैं।
India-China Border Talks 2026: वांग यी ने नेताओं की बैठकों का किया उल्लेख
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे के महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं। दोनों देश दुनिया की बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और वैश्विक दक्षिण के प्रमुख प्रतिनिधि माने जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर और सकारात्मक संबंध दोनों देशों के लोगों के हित में हैं। साथ ही यह अन्य विकासशील देशों की अपेक्षाओं के अनुरूप भी है।
वांग यी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कजान और तियानजिन में महत्वपूर्ण मुलाकातें हुईं। इन बैठकों में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनाई थीं। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ संवाद बढ़ाने, आपसी समझ मजबूत करने और मतभेदों को बेहतर तरीके से संभालने के लिए तैयार है।
सीमा मुद्दे को संबंधों पर हावी नहीं होने देना चाहिए
वांग यी ने कहा कि दोनों देशों ने विशेष प्रतिनिधि वार्ता तंत्र के जरिए कई सहमतियों को लागू किया है। दोनों देशों के बीच संस्थागत संवाद और सहयोग भी धीरे-धीरे फिर से शुरू हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सीमा विवाद को भारत-चीन संबंधों के व्यापक ढांचे में देखा जाना चाहिए। दोनों पक्षों को आगे बढ़ने की सोच रखनी चाहिए और बातचीत, शांति, परामर्श तथा सहयोग को प्राथमिकता देनी चाहिए।
एलएसी पर बचे हुए मुद्दों पर रही नजर
बीजिंग में हुई यह वार्ता मुख्य रूप से एलएसी पर अब भी लंबित मुद्दों पर केंद्रित रही। दोनों देशों के बीच मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में शुरू हुए सैन्य गतिरोध के बाद कई चरणों में सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई है।
एनएसए डोभाल ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के मार्गदर्शन में भारत-चीन संबंध फिर से सामान्य दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सीमा क्षेत्रों में शांति बनी हुई है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग भी आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत रणनीतिक संवाद को मजबूत करने, आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने के लिए चीन के साथ काम करने को तैयार है।
बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने, सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने और सीमा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की।
दोनों देशों ने 2005 में तय राजनीतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों का फिर से उल्लेख किया और कहा कि आपसी सम्मान और समझ के आधार पर सीमा विवाद का ऐसा समाधान खोजा जाएगा जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो।
अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में गतिरोध समाप्त करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद नवंबर 2024 से इन इलाकों में पेट्रोलिंग भी फिर शुरू हो गई। हालांकि गलवान, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग त्सो के उत्तर तथा दक्षिणी किनारों पर बने बफर जोन पर अब भी चर्चा होनी है।
🇮🇳🇨🇳 Chinese FM Wang Yi Highlights Positive Momentum in India-China Relations
During the 25th round of India-China Special Representatives’ Talks in Beijing, Chinese Foreign Minister Wang Yi said that the meetings between President Xi Jinping and Prime Minister Narendra Modi in… https://t.co/sJNo8yf4qs— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 25, 2026
भारतीय पक्ष लगातार यह कहता रहा है कि इन क्षेत्रों में सैनिकों की तैनाती धीरे-धीरे मई 2020 से पहले की स्थिति तक लौटनी चाहिए। दूसरी ओर दोनों देशों के अधिकारी मानते हैं कि इसके लिए विश्वास निर्माण और तनाव कम करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जरूरी है।
बफर जोन का मुद्दा बना प्रमुख विषय
सूत्रों के अनुसार इस बैठक में बफर जोन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रहा। बफर जोन ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट चुकी हैं और फिलहाल नियमित गश्त नहीं करतीं।
भारत का मानना है कि इन क्षेत्रों में पहले जैसी स्थिति बहाल होना जरूरी है ताकि सैनिकों की सामान्य गतिविधियां फिर शुरू हो सकें। यही कारण है कि बीजिंग वार्ता में इस विषय पर विशेष ध्यान दिया गया। (India-China Border Talks 2026)
अगली बैठक 2027 में होगी
बैठक के दौरान भारत और चीन ने सहमति जताई कि सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की 26वीं बैठक वर्ष 2027 में भारत में आयोजित की जाएगी। भारत और चीन ने सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए विशेष प्रतिनिधि तंत्र की स्थापना वर्ष 2003 में की थी। यह दोनों देशों के बीच सीमा मामलों पर सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय संवाद मंच माना जाता है।
इसके अलावा दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय महत्व के कई अन्य मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
सैन्य और कूटनीतिक चैनलों से जारी है बातचीत
भारत और चीन के बीच केवल विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता ही नहीं चल रही है, बल्कि कई अन्य मैकेनिज्म भी सक्रिय हैं। सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए गठित वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन यानी डब्ल्यूएमसीसी की अब तक 36 बैठकें हो चुकी हैं।
हाल ही में 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में इसकी बैठक आयोजित की गई थी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में पूर्वी एशिया मामलों के संयुक्त सचिव सुजीत घोष ने किया था, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व सीमा और समुद्री मामलों की महानिदेशक होउ यानकी ने किया।
बैठक में दोनों देशों ने सीमा पर गलतफहमी से बचने और संवाद बनाए रखने पर सहमति जताई थी। (India-China Border Talks 2026)

चीन के उपराष्ट्रपति से भी मिले डोभाल
विशेष प्रतिनिधि वार्ता से पहले एनएसए अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। भारतीय दूतावास के अनुसार दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की।
इसके साथ ही आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के विषय पर भी बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
चीन के भारत में राजदूत शू फेहोंग ने भी कहा कि पिछले दो सालों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो महत्वपूर्ण मुलाकातों ने संबंधों को सुधारने में अहम भूमिका निभाई है। (India-China Border Talks 2026)
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले अहम मानी जा रही बैठक
बीजिंग में हुई यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अगले महीने 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होना है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि दोनों देशों की सरकारों ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
ऐसे में सीमा मुद्दे पर बातचीत को दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। (India-China Border Talks 2026)
संतुलन बनाए रखने के लिए सीमा प्रबंधन अहम
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर ने इस वार्ता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चीन सीमा भारत की सबसे महत्वपूर्ण सीमाओं में से एक है, जबकि पाकिस्तान सीमा सबसे अधिक संवेदनशील और अस्थिर मानी जाती है।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के संबंधों में संतुलन बनाए रखने के लिए सीमा प्रबंधन बेहद अहम है। अकबर के अनुसार अजीत डोभाल ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी ईमानदारी और स्पष्टवादिता का चीन भी सम्मान करता है।
उन्होंने कहा कि 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चीन यात्रा के बाद दोनों देशों ने एक ऐसा दृष्टिकोण अपनाया था जिसमें सीमा विवाद का अंतिम समाधान न होने के बावजूद संबंधों को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसी सोच के आधार पर दोनों देशों ने संवाद जारी रखा है। (India-China Border Talks 2026)
2020 के बाद संबंधों में आया बदलाव
विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी हाल ही में कह चुके हैं कि 2020 से 2024 के बीच का समय भारत-चीन संबंधों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने कहा था कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की सबसे बड़ी शर्त है।
बता दें कि अजीत डोभाल सोमवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर दो दिन के दौरे के लिए बीजिंग पहुंचे थे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पिछले कुछ समय से भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की प्रक्रिया जारी है।
पिछले वर्ष तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन और उससे पहले अक्टूबर 2024 में कजान में हुई मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों में आई सकारात्मक प्रगति का स्वागत किया था।
दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया था कि भारत और चीन प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि विकास साझेदार हैं और दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। (India-China Border Talks 2026)
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