📍नई दिल्ली | 6 Oct, 2026, 9:49 PM
Indian Army Mission Autonomy Lab: भारतीय सेना तेजी से टेक्नोलॉजी आधारित युद्ध क्षमता की ओर बढ़ रही है। हाल ही में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने नई दिल्ली स्थित डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (डीजीआईएस) मुख्यालय में दो नई अत्याधुनिक लैब्स का उद्घाटन किया। इनका नाम मिशन ऑटोनॉमी लैब और सेंसर-शूटर इंटीग्रेशन लैब है।
सेना के अनुसार इन दोनों लैब्स का उद्देश्य नई तकनीकों को युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए तैयार करना है। इन सुविधाओं के जरिए भारतीय सेना ऑटोनॉमस सिस्टम, डेटा बेस्ड ऑपरेशंस और सेंसर से वेपन तक सूचना पहुंचाने वाली पूरी चेन को मजबूत करेगी।
Indian Army Mission Autonomy Lab: डीजीआईएस मुख्यालय में बनी हैं दोनों लैब्स
उद्घाटन के दौरान जनरल धीरज सेठ ने कहा कि इनोवेशन, इंटीग्रेशन और आत्मनिर्भरता भविष्य की सेना की सबसे बड़ी जरूरत हैं। उन्होंने सेना के विजन “विजय” को दोहराते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित और फ्यूचर-रेडी फोर्स तैयार करना भारतीय सेना की प्राथमिकता है।
मिशन ऑटोनॉमी लैब और सेंसर-शूटर इंटीग्रेशन लैब डीजीआईएस मुख्यालय में बनाई गई हैं।
डीजीआईएस यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स भारतीय सेना का वह संगठन है जो सेना को पारंपरिक प्लेटफॉर्म बेस्ड कॉम्बैट सिस्टम से नेटवर्क और डेटा बेस्ड कॉम्बैट सिस्टम की ओर ले जाने का काम करता है।
इस मुख्यालय की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी ताकि सेना की विभिन्न इनफॉरमेशन सिस्टम्स युनिट्स को एक ही कैंपस में लाया जा सके। (Indian Army Mission Autonomy Lab)

क्या है मिशन ऑटोनॉमी लैब?
भारतीय सेना पहले से स्वार्म ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन और कॉर्डिनेटेड स्ट्राइक क्षमता पर काम कर रही है। मिशन ऑटोनॉमी लैब का मुख्य फोकस ऐसे सिस्टम विकसित और परीक्षण करना है जो कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ अपने मिशन पूरे कर सकें।
सामान्य रूप से ऑटोनॉमी को दो हिस्सों में बांटा जाता है। पहला, प्लेटफॉर्म ऑटोनॉमी और दूसरा, मिशन ऑटोनॉमी है।
प्लेटफॉर्म ऑटोनॉमी में कोई ड्रोन, रोबोट या अनमैन्ड व्हीकल खुद रास्ता खोज सकता है, बाधाओं से बच सकता है और कम्युनिकेशन लिंक टूटने की स्थिति में सुरक्षित लौट सकता है।
मिशन ऑटोनॉमी इससे एक कदम आगे है। इसमें कई ड्रोन, सेंसर और अनमैन्ड प्लेटफॉर्म एक टीम की तरह काम करते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सिस्टम टारगेट की पहचान करते हैं, मिशन का वर्क डिविजन करते हैं और बदलती परिस्थितियों के मुताबिक अपनी योजना को अपडेट करते हैं।
नई लैब में ऐसे ही सिस्टम का परीक्षण किया जाएगा। यहां यह देखा जाएगा कि विभिन्न ड्रोन, अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल और सेंसर नोड्स आपस में कितनी प्रभावी तरीके से कम्युनिकेट कर सकते हैं।
इसके अलावा यह भी जांचा जाएगा कि कम्युनिकेशन नेटवर्क बाधित होने पर सिस्टम किस तरह प्रतिक्रिया देता है और किन परिस्थितियों में अंतिम फैसला ह्यूमन ऑपरेटर के पास बना रहता है। (Indian Army Mission Autonomy Lab)
बैटल फील्ड में क्या होगा फायदा?
आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलती परिस्थितियों में फैसले लेने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
यदि किसी क्षेत्र में कई ड्रोन एक साथ निगरानी कर रहे हों और उनमें से किसी एक को टारगेट दिखाई दे जाए तो मिशन ऑटोनॉमी सिस्टम बाकी प्लेटफॉर्म को स्वतः नई भूमिका सौंप सकता है।
इससे कम समय में ज्यादा क्षेत्र की निगरानी और अधिक प्रभावी ऑपरेशन संभव हो सकते हैं।
भारतीय सेना के लिए यह क्षमता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य के युद्धों में ड्रोन, रोबोटिक प्लेटफॉर्म और एआई बेस्ड सिस्टम की भूमिका लगातार बढ़ रही है। (Indian Army Mission Autonomy Lab)

सेंसर-शूटर इंटीग्रेशन लैब क्या करेगी?
दूसरी नई फैसिलिटी सेंसर-शूटर इंटीग्रेशन लैब है। आधुनिक युद्ध में किसी भी टारगेट को नष्ट करने से पहले उसकी सही पहचान और लोकेशन का पता होना जरूरी होता है।
यह प्रक्रिया सेंसर से शुरू होती है। सेंसर में ड्रोन कैमरे, रडार, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरण, सैटेलाइट इमेज और अन्य सर्विलांस सिस्टम शामिल होते हैं।
जब टारगेट की जानकारी मिल हो जाती है तो यह डेटा कमांड सिस्टम तक पहुंचता है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित वेपन सिस्टम जैसे तोप, रॉकेट, मिसाइल, लोइटरिंग म्यूनिशन या आर्मर्ड ड्रोन टारगेट पर हमला करते हैं।
इसी पूरी प्रक्रिया को सेंसर-टू-शूटर चेन कहा जाता है। नई लैब का काम इस चेन को तेज और अधिक सटीक बनाना है। (Indian Army Mission Autonomy Lab)
अलग-अलग सिस्टम को जोड़ेगी एक नेटवर्क में
भारतीय सेना के पास कई तरह के सेंसर और हथियार प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। इनमें से कई अलग-अलग कंपनियों और संस्थानों ने बनाए हैं।
ऐसी स्थिति में डेटा फॉर्मेट और कम्युनिकेशन सिस्टम अलग होने से जानकारी साझा करने में समय लग सकता है।
सेंसर-शूटर इंटीग्रेशन लैब इन सभी सिस्टम को एक शेयर्ड नेटवर्क और डेटा आर्किटेक्चर पर जांचेगी।
इससे यह पता लगाया जाएगा कि कौन सा सिस्टम दूसरे सिस्टम के साथ कितनी आसानी से काम कर सकता है।
ताकि किसी भी टारगेट की जानकारी कम से कम समय में सही हथियार प्लेटफॉर्म तक पहुंचे और प्रतिक्रिया समय घटाया जा सके। (Indian Army Mission Autonomy Lab)
डेटा-सेंट्रिक युद्ध क्षमता पर जोर
भारतीय सेना ने वर्ष 2026 को “ईयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी” घोषित किया है। इसका मतलब है कि भविष्य में युद्धक्षेत्र में केवल हथियारों की संख्या नहीं बल्कि सूचना की गुणवत्ता और उसकी रफ्तार भी जीत-हार तय करेगी।
डेटा-सेंट्रिक ऑपरेशन में सभी प्लेटफॉर्म एक साझा डिजिटल तस्वीर देखते हैं। इससे कमांडर को रियलटाइम में स्थिति की जानकारी मिलती है और फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होती है। नई लैब्स इसी कॉन्सैप्ट को आगे बढ़ाने के लिए स्थापित की गई हैं। (Indian Army Mission Autonomy Lab)
विजन “विजय” से जुड़ा है पूरा कार्यक्रम
इस साल 1 जुलाई को सेना प्रमुख का पद संभालने के बाद जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के लिए “विजय” रोडमैप पेश किया था। इसमें “वी” का अर्थ विजिलेंस, “आई” का अर्थ इनोवेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन, “जे” का अर्थ जॉइंटनेस, “ए” का अर्थ आत्मनिर्भरता और “वाई” का अर्थ यूथ एंड सोल्जर वेलफेयर है।
नई लैब्स को इसी व्यापक परिवर्तन कार्यक्रम का हिस्सा माना जा रहा है। सेना का फोकस केवल नई तकनीक खरीदने पर नहीं बल्कि उन्हें भारतीय जरूरतों के अनुसार इंटीग्रेट करने और बैटलफील्ड के लिए तैयार करने पर है। (Indian Army Mission Autonomy Lab)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





