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भारतीय सेना का नया प्लान, 1,000 किमी दूर तक हमला करने वाले स्वदेशी ड्रोन होंगे शामिल, बिना GPS करेंगे काम

यह पूरा प्रोजेक्ट लॉन्ग रेंज लॉइटर म्यूनिशन (एलआरएलएम) प्रोग्रााम के तहत शुरू किया गया है। इसे डिफेंस प्रोक्योरमेंट पॉलिसी में मेक-2 कैटेगरी में आगे बढ़ाया जा रहा है...

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📍नई दिल्ली | 13 Jul, 2026, 1:02 PM

Indian Army Long Range Attack Drone: भारतीय सेना अब लंबी दूरी तक हमला करने वाले स्वदेशी वन-वे अटैक ड्रोन खरीदने की तैयारी कर रही है। सेना ने ऐसे देश में बने ड्रोन तैयार करने शुरू कर दिए हैं, जो करीब 1,000 किलोमीटर दूर मौजूद टारगेट को निशाना बना सकते है। इन ड्रोन की खास बात यह होगी कि ये जीपीएस सिग्नल न होने पर भी अपना मिशन पूरा करेंगे। साथ ही ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड टारगेट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम से भी लैस होंगे, जिससे यह अपने टारगेट को पहचानकर हमला कर सकेंगे।

यह पूरा प्रोजेक्ट लॉन्ग रेंज लॉइटर म्यूनिशन (एलआरएलएम) प्रोग्रााम के तहत शुरू किया गया है। इसे डिफेंस प्रोक्योरमेंट पॉलिसी में मेक-2 कैटेगरी में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस व्यवस्था में डिफेंस कंपनियां अपने खर्च पर रिसर्च और डेवलपमेंट करेंगी। यदि तैयार सिस्टम सेना की सभी तकनीकी जरूरतों पर खरा उतरता है, तो सेना उसे खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।

Indian Army Long Range Attack Drone: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली सोच

पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई संघर्षों ने यह दिखाया है कि छोटे और कम लागत वाले ड्रोन भी बड़े हथियारों जितने असरदार साबित हो सकते हैं। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध में वन-वे अटैक ड्रोन ने टैंक, तोप, कमांड पोस्ट और हथियार डिपो जैसे कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन अनुभवों को देखते हुए भारतीय सेना भी लंबी दूरी तक हमला करने वाले ऐसे ड्रोन अपने बेड़े में शामिल करना चाहती है।

सूत्रों का कहना है कि सेना अब केवल निगरानी करने वाले ड्रोन तक सीमित नहीं रहना चाहती। उसका टारगेट ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जो जरूरत पड़ने पर लंबी दूरी तय करके सीधे टारगेट पर हमला कर सकें।

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क्या होते हैं वन-वे अटैक ड्रोन

वन-वे अटैक ड्रोन को लॉइटर म्यूनिशन भी कहा जाता है। यह सामान्य ड्रोन की तरह केवल तस्वीरें या वीडियो नहीं भेजते। इन्हें किसी तय इलाके तक भेजा जाता है, जहां यह कुछ समय तक उड़ान भरते हुए टारगेट की तलाश करते हैं। जैसे ही टारगेट की पुष्टि होती है, यह उसी पर टकराकर विस्फोट कर देते हैं। इस वजह से इन्हें एक बार इस्तेमाल होने वाला हमला करने वाला ड्रोन माना जाता है।

इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये कम लागत में दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बना सकते हैं और कई मामलों में महंगी मिसाइलों का विकल्प भी बन जाते हैं। (Indian Army Long Range Attack Drone)

सेना ने रखीं कई अहम तकनीकी शर्तें

सूत्रों के मुताबिक, सेना ने कंपनियों के सामने कई तकनीकी शर्तें रखी हैं। ड्रोन की मारक दूरी करीब 1,000 किलोमीटर होनी चाहिए। इसमें लगभग 25 किलोग्राम का वारहेड लगाने की क्षमता हो, जिससे करीब 50 मीटर के दायरे में प्रभावी नुकसान पहुंचाया जा सके।

सेना चाहती है कि यह ड्रोन 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई तक उड़ सके और इसकी रफ्तार कम से कम 400 किलोमीटर प्रति घंटा हो। इसके अलावा यह मैदान, रेगिस्तान, जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों जैसे अलग-अलग इलाकों में समान क्षमता के साथ काम कर सके।

जीपीएस बंद होने पर भी पूरा करेगा मिशन

आधुनिक युद्ध में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि दुश्मन अक्सर जीपीएस सिग्नल को जाम करने की कोशिश करता है। ऐसे में सामान्य ड्रोन रास्ता भटक सकते हैं।

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इसी वजह से सेना ने ऐसे सिस्टम की मांग की है, जो जीपीएस न होने की स्थिति में भी अपना रास्ता खुद तय कर सके। इसके लिए ड्रोन में आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और एआई बेस्ड टारगेट पहचान तकनीक होगी। इससे इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग की स्थिति में भी मिशन जारी रखा जा सकेगा। (Indian Army Long Range Attack Drone)

अलग-अलग तरह के वारहेड लगाने की होगी क्षमता

सेना चाहती है कि इन ड्रोन में अलग-अलग प्रकार के वारहेड लगाए जा सकें। इनमें सामान्य विस्फोटक के अलावा थर्मोबारिक वारहेड और गहराई तक प्रवेश करने वाले वारहेड भी शामिल होंगे।

थर्मोबारिक वारहेड बंद जगहों, बंकरों और मजबूत इमारतों को ध्वस्त करने में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं गहराई तक जाने वाला वारहेड कंक्रीट से बने ठिकानों और भूमिगत संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

जमीन के बेहद करीब उड़कर भी कर सकेंगे हमला

सूत्रों के अनुसार, सेना चाहती है कि यह ड्रोन अलग-अलग तरह की उड़ान प्रोफाइल में काम कर सके। जरूरत पड़ने पर यह ऊंचाई से सीधे नीचे हमला कर सके, तिरछे कोण से हमला कर सके और जमीन के बेहद करीब उड़ते हुए भी टारगेट तक पहुंच सके। इस तरह की उड़ान से दुश्मन के रडार से बचने की संभावना बढ़ जाती है।

वहीं, सेना इसके साथ पूरा ऑपरेशन सिस्टम तैयार करना चाहती है। एक सेट में 15 लॉन्च व्हीकल, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन, प्रशिक्षण के लिए सिम्युलेटर और 15 ड्रोन शामिल होंगे। इससे ऑपरेटरों को प्रशिक्षण देने से लेकर वास्तविक अभियान चलाने तक की पूरी व्यवस्था एक साथ उपलब्ध होगी। (Indian Army Long Range Attack Drone)

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स्वदेशी तकनीक पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर

सूत्रों के मुताबिक, सेना हर प्रस्ताव में यह भी जांच करेगी कि इंजन, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पेलोड, एवियोनिक्स, एयरफ्रेम, वारहेड और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जे देश में बने हैं या विदेश से आयात किए गए हैं।

यदि किसी सिस्टम में विदेश से आए उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं तो कंपनियों को यह भी बताना होगा कि भविष्य में उन्हें किस तरह स्वदेशी बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत में ऐसी उत्पादन क्षमता विकसित करना है, जिसे जरूरत पड़ने पर तेजी से बढ़ाया जा सके। (Indian Army Long Range Attack Drone)

आर्टिलरी कर रही है पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व

इस पूरी खरीद प्रक्रिया को भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी आगे बढ़ा रही है। आर्टिलरी में पहले से ही कम दूरी वाले वन-वे अटैक ड्रोन भी शामिल कर रही है।

हाल ही में 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हमला करने वाले 850 वन-वे अटैक ड्रोन की खरीद प्रक्रिया में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और नाइब डिफेंस जैसी कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। अब नए प्रोजेक्ट के जरिए सेना इससे कहीं अधिक दूरी तक हमला करने वाले स्वदेशी ड्रोन तैयार करना चाहती है। (Indian Army Long Range Attack Drone)

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