📍नई दिल्ली | 13 Jul, 2026, 11:05 AM
Indian Army Organic Pulses: भारतीय सेना अपने जवानों के भोजन को और अधिक पौष्टिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। पहली बार सेना ने अपने 12.5 लाख से अधिक जवानों के लिए जैविक यानी ऑर्गेनिक दालों की सप्लाई का अनुरोध किया है। इसके लिए उपभोक्ता मामलों के विभाग के साथ प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पायलट परियोजना के तहत सरकार की सहकारी संस्थाएं नेफेड और एनसीसीएफ जैविक दालों की खरीद और आपूर्ति की व्यवस्था तैयार कर रही हैं। इसका उद्देश्य सैनिकों को बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना है।
सेना को देश के अलग-अलग इलाकों में बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ऊंचे पहाड़ों, रेगिस्तान, जंगल और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के लिए संतुलित भोजन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से सेना अब भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है।
Indian Army Organic Pulses: किसान संगठनों से होगी खरीद
मिली जानकारी के अनुसार नेफेड और एनसीसीएफ ने जैविक दालों का उत्पादन करने वाले किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी संस्थाओं और किसानों से बातचीत शुरू कर दी है। कोशिश है कि खेत से लेकर सेना तक पूरा सप्लाई सिस्टम तैयार किया जाए, ताकि अच्छी गुणवत्ता की जैविक दालें समय पर पहुंच सकें।
अधिकारियों का कहना है कि जैविक दालों की भंडारण अवधि सामान्य दालों की तुलना में कम हो सकती है। इसलिए खेत से गोदाम और वहां से सेना तक मजबूत सप्लाई चेन बनाना इस योजना का सबसे अहम हिस्सा है।
जवानों के भोजन का अहम हिस्सा हैं दालें
भारतीय सेना के राशन में दालें लंबे समय से प्रमुख स्थान रखती हैं। अरहर, मूंग, मसूर, उड़द और चना जैसी दालें प्रोटीन का बड़ा स्रोत हैं। कठिन प्रशिक्षण और लगातार ड्यूटी करने वाले सैनिकों के लिए यह भोजन का जरूरी हिस्सा होती हैं।
जैविक दालों की खेती में रासायनिक उर्वरकों और सिंथेटिक कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसी वजह से इनमें रासायनिक अवशेष नहीं होते और इन्हें स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।
दालों में प्रोटीन के साथ फाइबर, आयरन, फोलेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। नियमित रूप से इनका सेवन करने से मांसपेशियों की मजबूती, शरीर की रिकवरी और ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिलती है।
जैविक दालें हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती हैं। इनमें मौजूद घुलनशील फाइबर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करता है। साथ ही इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने के कारण रक्त में शुगर का स्तर भी संतुलित रहता है। इससे लंबे समय तक ऊर्जा बनी रहती है और जल्दी थकान महसूस नहीं होती।
सेना पहले भी बदल चुकी है राशन व्यवस्था
भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से जवानों के भोजन में बदलाव कर रही है। वर्ष 2023 में सेना ने अपने राशन में मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार और रागी को भी शामिल किया था। अब जैविक दालों को शामिल करने की पहल उसी दिशा में अगला कदम मानी जा रही है।
सेना का मानना है कि बेहतर भोजन केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि जवानों की कार्यक्षमता और शारीरिक क्षमता को भी मजबूत बनाता है।
सप्लाई सिस्टम सबसे बड़ी चुनौती
जैविक दालों की सप्लाई सामान्य दालों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। इनके भंडारण और परिवहन के दौरान विशेष सावधानी रखनी पड़ती है। सेना के कई ठिकाने दूर-दराज और दुर्गम इलाकों में हैं, जहां तक राशन पहुंचाना पहले से ही कठिन काम होता है।
इसी वजह से सरकार पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस व्यवस्था को लागू कर रही है। यदि सप्लाई चेन सफल रहती है तो इसे बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
किसानों को भी मिलेगा फायदा
इस पहल से जैविक खेती करने वाले किसानों को भी बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है। सेना जैसी बड़ी संस्था की मांग बढ़ने से किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी संस्थाओं के जरिए सीधे खरीद बढ़ सकती है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने का स्थायी माध्यम मिलेगा और जैविक खेती को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
पोषण और आत्मनिर्भरता दोनों पर जोर
सरकार पहले से ही देश में दालों के उत्पादन और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। सेना की यह पहल भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। एक ओर इससे जवानों को बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर देश में जैविक कृषि और सहकारी संस्थाओं को भी मजबूती मिलेगी।
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