📍नई दिल्ली | 19 Nov, 2025, 4:56 PM
Indian Army New Combat Coat: भारतीय सेना को जल्द ही नए कॉम्बैट कोट मिलेंगे। इनका डिजाइन अब आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना के पास सुरक्षित हो गया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सेना ने नए डिजिटल प्रिंट कॉम्बैट कोट के डिजाइन को बौद्धिक संपदा अधिकार (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स) के तहत रजिस्टर करा लिया है। यह अधिकार कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिजाइंस एंड ट्रेडमार्क्स, कोलकाता में इस साल 27 फरवरी को दाखिल हुआ और 7 अक्टूबर को आधिकारिक जर्नल में प्रकाशित किया गया।
नए डिजिटल प्रिंट वाले कॉम्बैट कोट को जनवरी 2025 में पेश किया गया था। इसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), नई दिल्ली ने आर्मी डिजाइन ब्यूरो के साथ मिल कर तैयार किया है।
नए कॉम्बैट कोट को तीन लेयर में बनाया गया है। इसमें एडवांस्ड टेक्निकल टेक्सटाइल का इस्तेमाल किया गया है ताकि सैनिकों को अलग-अलग मौसम, ऊंचाई और कठिन इलाकों में आराम, गर्माहट, सुरक्षा और बेहतर मूवमेंट मिल सके। पहला लेयर बाहरी हिस्सा है, जिस पर डिजिटल प्रिंट कैमोफ्लाज है। यह कोट सैनिकों को दुश्मन की नजरों से बचाने और कठिन हालात में टिकाऊ बनने के लिए बनाया गया है। इसके अंदर दूसरा लेयर एक हल्का, सांस लेने वाला इंसुलेटेड जैकेट है, जो बिना भार बढ़ाए गर्मी बनाए रखता है। तीसरा लेयर थर्मल बेस लेयर है, जो ठंडे मौसम में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद करता है।
डिजाइन रजिस्ट्रेशन के बाद यह पूरा अधिकार भारतीय सेना के पास है। इसका मतलब है कि कोई भी निजी कंपनी या अन्य संस्था सेना की अनुमति के बिना इस डिजाइन या कैमोफ्लाज पैटर्न का निर्माण, कॉपी या व्यापार नहीं कर सकती। ऐसा करने पर डिजाइंस एक्ट 2000, डिजाइन रूल्स 2001 और पेटेंट एक्ट 1970 के तहत कानूनी कार्रवाई होगी। यह सेना के यूनिफॉर्म सिस्टम को सुरक्षित रखने और उसकी मौलिकता की सुरक्षा के लिए है।
यह सेना के उस बड़े बदलाव का हिस्सा है जिसे डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन (2023–2032) और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। भारतीय सेना लगातार अपने उपकरण, कपड़े और तकनीक को स्वदेशी बनाने और स्वदेश में बने सिस्टम पर निर्भर रहने की दिशा में काम कर रही है।
सेना का कहना है कि यह नया कॉम्बैट कोट सैनिकों की सुविधा, सुरक्षा और कार्यक्षमता को पहले से बेहतर बनाएगा। यह आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन और भारतीय मौसम व भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस रजिस्ट्रेशन से यह भी स्पष्ट हो गया है कि अब सेना के इस डिजाइन का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा और इसका पूरा नियंत्रण भारतीय सेना के पास ही रहेगा।
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