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भारतीय सेना बना रही है खास CEMA प्लाटून! निशाने पर होंगे दुश्मन के ड्रोन, रडार और नेटवर्क

अमेरिका, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसी सेनाएं कई सालों से सीईएमए प्लाटून जैसी युनिट्स टैक्टिकल स्तर पर काम कर रही हैं, जहां साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर टीमें मिलकर ऑपरेशन को सपोर्ट करती हैं...

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📍नई दिल्ली | 9 Sep, 2026, 1:08 PM

Indian Army CEMA Platoons: दुश्मन के कम्युनिकेशन नेटवर्क को जाम करना, ड्रोन को निष्क्रिय करना, रडार सिस्टम को ब्लाइंड करना और कंप्यूटर नेटवर्क पर साइबर अटैक करना मॉडर्न वॉरफेयर का अहम हिस्सा हैं। दुनिया की प्रमुख सेनाएं अब साइबर वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को एक साथ जोड़कर नई युद्ध रणनीतियां तैयार कर रही हैं।

वहीं, भारतीय सेना भी इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए साइबर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एक्टिविटीज (सीईएमए) प्लाटून बनाने की तैयारी कर रही है, जिससे भविष्य के मल्टी-डोमेन बैटलफील्ड में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक दोनों मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई की जा सके।

हालांकि सेना में साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़ी विशेष यूनिट्स पहले ही ऑपरेशनल की जा चुकी हैं। लेकिन अब इन क्षमताओं को ब्रिगेड और कमांड स्तर पर और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है, ताकि भविष्य के मल्टी-डोमेन युद्ध में भारत को बढ़त मिल सके।

Indian Army CEMA Platoons: क्या है CEMA और क्यों है जरूरी?

सीईएमए का मतलब है साइबर ऑपरेशंस और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम ऑपरेशंस को एक साथ जोड़ना। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम में रेडियो, रडार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ड्रोन कंट्रोल लिंक और मिलिट्री डेटा नेटवर्क शामिल होते हैं।

अगर किसी सेना के पास मजबूत सीईएमए क्षमता है तो वह दुश्मन की कम्युनिकेशन लाइन बाधित कर सकती है, उसके ड्रोन को जाम कर सकती है, रडार को ब्लाइंड कर सकती है और साथ ही साइबर माध्यम से नेटवर्क में घुसपैठ भी कर सकती है।

अमेरिका, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसी सेनाएं कई सालों से सीईएमए प्लाटून जैसी युनिट्स टैक्टिकल स्तर पर काम कर रही हैं, जहां साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर टीमें मिलकर ऑपरेशन को सपोर्ट करती हैं। भारतीय सेना भी अब इसी दिशा में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही है और मुख्य रूप से ब्रिगेड, कोर और कमांड स्तर पर तथा विशेष साइबर और ईडब्ल्यू यूनिट्स के माध्यम से विकसित की जा रही हैं।

एमसीटीई में हुई थी खास सेमिनार

अप्रैल 2026 में मध्य प्रदेश के महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (एमसीटीई) में काउंटर-यूएएस और सीईएमए (साइबर एंड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एक्टिविटीज) पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित की गई थी।

इस दौरान आधुनिक युद्धक्षेत्र में साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक डोमिनेंस की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। सेमिनार में ड्रोन खतरों से निपटने, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं को मजबूत करने, संचार नेटवर्क की सुरक्षा और साइबर स्पेस में सैन्य बढ़त हासिल करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के युद्धों में केवल पारंपरिक हथियार ही नहीं, बल्कि साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम पर नियंत्रण भी जीत और हार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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सेना ने बताई हाइब्रिड वॉरफेयर की तैयारियां

मार्च 2026 में संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति के सामने भारतीय सेना ने अपनी तैयारियों के बारे में बताया था। सेना ने बताया था कि आधुनिक हाइब्रिड वॉरफेयर में केवल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई ही काफी नहीं होती, बल्कि साइबर, इलेक्ट्रॉनिक, सूचना और स्पेस बेस्ड एक्टिविटीज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

सेना के अनुसार सभी सक्रिय सीमाओं पर उच्च स्तर की ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखी गई है। इसके लिए नियमित ट्रेनिंग, रियलिस्टक फील्ड एक्सरसाइज, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और नई तकनीकों को शामिल किया गया है। (Indian Army CEMA Platoons)

साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट्स हुईं ऑपरेशनल

भारतीय सेना ने पहली बार आधिकारिक रूप से पुष्टि करते हुए मार्च 2026 में संसदीय समिति को बताया कि डेडिकेटेड साइबर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट्स को ऑपरेशनल किया जा चुका है। इन यूनिट्स का मुख्य काम मिलिट्री नेटवर्क की सुरक्षा, साइबर हमलों से बचाव, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और स्पेक्ट्रम मैनेजमेंट है।

सिक्योर कम्युनिकेशन नेटवर्क भी डेवलप किए गए हैं ताकि युद्ध के दौरान दुश्मन की साइबर या इलेक्ट्रॉनिक कार्रवाई से कमांड और कंट्रोल सिस्टम प्रभावित न हो।

सेना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और स्वदेशी तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रही है ताकि युद्धक्षेत्र की स्थिति का तेजी से विश्लेषण किया जा सके और कमांडरों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिल सके। (Indian Army CEMA Platoons)

चीन और पाकिस्तान सीमा पर बनेंगी खास ब्रिगेड्स

जून 2026 में भारतीय सेना ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर डेडिकेटेड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ब्रिगेड्स स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इन ब्रिगेड्स का काम दुश्मन की रेडियो कम्युनिकेशन, रडार नेटवर्क, ड्रोन लिंक और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की निगरानी करना है। ये रुद्र ब्रिगेड्स का हिस्सा हैं।

जरूरत पड़ने पर ये ये ब्रिगेड्स दुश्मन की कम्युनिकेशन, रडार नेटवर्क और यूएवी को इंटरसेप्ट, ट्रैक और जाम करेंगी। अब तक ऐसे कामों की जिम्मेदारी भारतीय सेना की सिग्नल्स यूनिट्स संभालती रही हैं। लेकिन नए सिस्टम में इन्हें एक डेडिकेटेड ऑफेंसिव इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर फोर्स के रूप में तैयार किया जा रहा है।

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कमांड स्तर पर बने साइबर ऑपरेशन विंग

भारतीय सेना ने विभिन्न कमांड मुख्यालयों में कमांड साइबर ऑपरेशन्स एंड सपोर्ट विंग्स (CCOSW) भी बनाए गए हैं। ये विंग साइबर सर्विलांस, नेटवर्क सुरक्षा और डिजिटल खतरों की निगरानी करते हैं।

इसके साथ ही इंफॉर्मेशन वॉरफेयर ऑर्गनाइजेशन का भी विस्तार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य डिजिटल स्पेस में गलत सूचना, साइबर खतरों और सूचना आधारित अभियानों का मुकाबला करना है। (Indian Army CEMA Platoons)

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा फोकस

बता दें कि 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर और दुनिया के कई देशों में चल रहे विभिन्न संघर्षों से मिले अनुभवों से भारतीय सेना ने यह सीख ली है कि भविष्य के युद्ध में ड्रोन, साइबर हमले और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

इसी वजह से सेना अब जमीन, हवा, साइबर, सूचना और अंतरिक्ष सभी क्षेत्रों को जोड़कर मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स पर जोर दे रही है।

उद्देश्य केवल दुश्मन को शारीरिक नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि उसकी कमांड क्षमता और निर्णय प्रक्रिया को भी प्रभावित करना है। (Indian Army CEMA Platoons)

धाराशक्ति सिस्टम पर 5,150 करोड़ रुपये का निवेश

अक्टूबर 2025 में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने स्वदेशी धाराशक्ति इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के अपग्रेडेशन के लिए 5,150 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। डीआरडीओ के बनाए इस सिस्टम में यह सिस्टम के निर्माण में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा एलएंडटी जैसी कंपनियां शामिल हैं।

सितंबर 2025 में हुए जॉइंट आर्मी-एयरफोर्स एक्सरसाइज के दौरान धाराशक्ति सिस्टम ने लगभग 150 किलोमीटर दूरी तक दुश्मन के यूएवी खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता का प्रदर्शन किया था।
साथ ही यह सिस्टम रियल-टाइम थ्रेट एनालिसिस भी उपलब्ध कराता है, जिससे कमांडरों को तुरंत फैसले लेने में मदद मिलती है। (Indian Army CEMA Platoons)

मोबाइल EW सिस्टम भी सेना में शामिल

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ 1,476 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट भी किया गया है। इस समझौते के तहत सेना को पांच एडवांस्ड मोबाइल ग्राउंड-बेस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम मिलेंगे।

इनका इस्तेमाल फ्रंटलाइन और ऊंचाई वाले इलाकों में किया जाएगा, जहां दुश्मन की कम्युनिकेशन और ड्रोन गतिविधियों पर निगरानी रखना महत्वपूर्ण होता है।

इसके अलावा सेना पहले से ही सम्युक्त और हिमशक्ति जैसे स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है।

काउंटर-ड्रोन ग्रिड पर भी फोकस

दुनिया भर में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए भारतीय सेना ने इंटीग्रेटेड काउंटर-ड्रोन ग्रिड्स और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर सिस्टम की तैनाती भी बढ़ाई है। इन सिस्टम्स की मदद से संदिग्ध ड्रोन की पहचान, ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से उन्हें निष्क्रिय किया जा सकता है। साथ ही, सेना स्वदेशी उद्योग और डिफेंस रिसर्च आर्गेनाइजेशंस के साथ मिलकर नई तकनीकों के विकास पर भी काम कर रही है। (Indian Army CEMA Platoons)

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नई फॉरमेशंस में भी शामिल हो रही CEMA क्षमता

2025 में सेना ने बड़े स्तर पर बदलाव किए थे। जिसमें रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अश्नि ड्रोन प्लाटून और शक्तिमान रेजिमेंट जैसी नई फॉरमेशंस बनाई गईं थीं।

रुद्र ब्रिगेड में इन्फैंट्री, आर्मर्ड, आर्टिलरी, इंजीनियर्स, सिग्नल्स, एयर डिफेंस, ड्रोन और लॉजिस्टिक्स को इंटीग्रेट किया किया गया है।

साथ ही इन नई फॉरमेशंस में साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं को भी शामिल किया जा रहा है ताकि बैटलफील्ड में रियल-टाइम इनफॉरमेशन, ड्रोन ऑपरेशन और इलेक्ट्रॉनिक डोमिनेंस हासिल किया जा सके। (Indian Army CEMA Platoons)

मल्टी-डोमेन युद्ध की ओर बढ़ रही सेना

भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना अब जॉइंट ऑपरेशन पर विशेष ध्यान दे रही हैं। सभी तीनों सेनाएं जॉइंट ऑपरेशनल प्लानिंग, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, इंटेलिजेंस रिसोर्सेज के बेहतर इस्तेमाल और जॉइंट मिलिट्री डॉक्टराइंस पर काम कर रही हैं।

आकाशतीर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम को भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़कर बैटलफील्ड की इंटीग्रेटेड पिक्चर तैयार की जा रही है।

इसी व्यापक बदलाव के बीच साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को जोड़ने वाली सीईएमए क्षमता भारतीय सेना की नई युद्ध तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जहां फोकस केवल दुश्मन से लड़ना नहीं बल्कि उसके पूरे डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक इकोसिस्टम को चुनौती देना है। (Indian Army CEMA Platoons)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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