📍नई दिल्ली | 15 May, 2026, 7:35 PM
Air Chief AP Singh Drone Warfare: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का कहना है कि अब युद्ध का तरीका तेजी से बदल चुका है और ड्रोन, यूएवी तथा अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स आधुनिक युद्ध का सबसे अहम हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने साफ कहा कि यह भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि आज की वास्तविकता है। अब युद्ध केवल पारंपरिक लड़ाकू विमानों और बड़े एयर ऑपरेशन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि धीरे-धीरे डिसेंट्रलाइज्ड और “ऑटोनॉमस” मॉडल की तरफ बढ़ रहा है।
दिल्ली के सुब्रतो पार्क स्थित एयर फोर्स ऑडिटोरियम में सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज और इंडियन मिलिट्री रिव्यू की तरफ से आयोजित सेमिनार में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ड्रोन वॉरफेयर, काउंटर यूएएस सिस्टम और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बात की।
एयर चीफ ने कहा कि आज के समय में ड्रोन केवल “आंखें” नहीं रहे, बल्कि अब वे आसमान में “पंजे” बन चुके हैं। यानी अब इनका इस्तेमाल केवल निगरानी के लिए नहीं, बल्कि सीधे हमला करने, दुश्मन के एयर डिफेंस को निशाना बनाने और युद्ध के मैदान में सटीक कार्रवाई के लिए भी किया जा रहा है।
Air Chief AP Singh Drone Warfare: बदल चुका है युद्ध का मैदान
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। पहले युद्धों में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान और पारंपरिक एयर पावर का इस्तेमाल होता था। उन्होंने कहा, “यह मानने से इनकार नहीं किया जा सकता कि बैटलफील्ड बदल चुका है। हम अब कंसंट्रेटेड एयर पावर से हटकर डिसेंट्रलाइज्ड और ऑटोनॉमस सिस्टम की तरफ जा रहे हैं।” यानी अब छोटे-छोटे अनमैन्ड सिस्टम और ड्रोन भी युद्ध का रुख बदल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ड्रोन इसलिए सफल हो रहे हैं क्योंकि उनमें एयर पावर की लगभग सभी क्षमताएं मौजूद हैं।
एयर चीफ ने कहा कि ड्रोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ऑपरेशन के दौरान मानव जीवन का जोखिम कम हो जाता है। इसके अलावा इनकी लागत भी पारंपरिक फाइटर जेट या मिसाइल सिस्टम की तुलना में काफी कम होती है। यही वजह है कि दुनिया की लगभग हर सेना अब ड्रोन और काउंटर ड्रोन तकनीक पर तेजी से काम कर रही है।
भविष्य “मैन्ड और अनमैन्ड टीमिंग” का
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भविष्य “मैन्ड और अनमैन्ड टीमिंग” का है। यानी इंसान और ड्रोन दोनों मिलकर युद्ध लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इंसान को पूरी तरह सिस्टम से बाहर नहीं किया जा सकता। हो सकता है कि इंसान सीधे नियंत्रण में न हो, लेकिन निगरानी और फैसले लेने की भूमिका में जरूर रहेगा।
उन्होंने कहा कि अगर पूरी दुनिया केवल अनमैन्ड सिस्टम की तरफ जा रही होती तो बड़े देश आज भी छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने में इतना पैसा और समय नहीं लगाते। उन्होंने कहा कि सभी नए फाइटर प्रोग्राम अभी भी “मैनड” यानी पायलट वाले हैं।
काउंटर ड्रोन सिस्टम पर भी जोर
उन्होंने कहा कि ड्रोन के खिलाफ तकनीक विकसित करना भी उतना ही जरूरी है। उनके मुताबिक यह “बिल्ली और चूहे के खेल” जैसा है। यानी अगर एक तरफ नई ड्रोन तकनीक विकसित होगी तो दूसरी तरफ उसे रोकने वाली तकनीक भी साथ-साथ विकसित करनी पड़ेगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो एक पक्ष को पूरी बढ़त मिल जाएगी। तभी संतुलन बना रहता है।
इसी वजह से दुनिया भर में लेजर बेस्ड एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम और एंटी ड्रोन हथियारों पर तेजी से काम हो रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि अब केवल “फोर्स बनाम फोर्स” यानी ताकत के मुकाबले ताकत का दौर नहीं है। अब “फोर्स बनाम डिफेंस” का दौर है, जहां दुश्मन के हथियारों को रोकना भी उतना ही जरूरी हो गया है।
ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान के दौरान भारतीय सेनाओं ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया और इसकी सबसे बड़ी वजह थी बेहतर तालमेल।
उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने अच्छा काम किया और यह केवल इसलिए संभव हुआ क्योंकि सभी एजेंसियों के बीच कोऑर्डिनेशन था।”
उन्होंने बताया कि अगर उस समय कोई केंद्रीय एजेंसी पूरे ऑपरेशन को कॉर्डिनेट नहीं कर रही होती, तो इतनी बड़ी सफलता संभव नहीं होती।
एयर चीफ ने खास तौर पर इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम यानी आईएसीसीएस का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम पूरे ऑपरेशन का “नर्व सेंटर” बन गया था।
उनके मुताबिक चाहे काउंटर यूएएस ऑपरेशन हो, काउंटर वेपन सिस्टम हो या एयर डिफेंस ऑपरेशन, हर जगह आईएसीसीएस ने अलग-अलग मिलिट्री यूनिट्स के बीच तालमेल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान दुश्मन के कुछ हथियार अपने टारगेट तक पहुंच पाए, लेकिन उनके यूएएस सिस्टम टारगेट पर असर नहीं डाल सके। इसकी वजह भारतीय सेनाओं के बीच मजबूत समन्वय था।
तीनों सेनाओं के बीच तालमेल जरूरी
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि आने वाले समय में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को एक ही एयर स्पेस में काम करना होगा। ऐसे में “टोटल कोऑर्डिनेशन” बेहद जरूरी हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में अलग-अलग सैन्य शाखाओं के लिए अलग-अलग तरीके से काम करना संभव नहीं होगा। सभी सेनाओं को नेटवर्क आधारित सिस्टम और साझा कमांड ढांचे के तहत काम करना पड़ेगा।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि भारतीय सेना अब जॉइंटनेस और मल्टी डोमेन ऑपरेशन मॉडल पर तेजी से काम कर रही है। इसके तहत जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और स्पेस सभी क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई करने की क्षमता विकसित की जा रही है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यही मॉडल देखने को मिला था, जहां तीनों सेनाओं ने एक साथ मिलकर ऑपरेशन चलाया।
ड्रोन अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं
एयर चीफ ने कहा कि पहले ड्रोन को केवल “आंखें” माना जाता था, यानी उनका मुख्य काम निगरानी और जानकारी जुटाना होता था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
उन्होंने कहा, “यूएएस अब केवल आंखें नहीं हैं, बल्कि आसमान के पंजे बन चुके हैं।”
उनके मुताबिक आधुनिक ड्रोन अब दुश्मन के इलाके में जाकर हमला कर सकते हैं, हथियार गिरा सकते हैं और एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर सकते हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दुनिया को दिखा दिया है कि छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े युद्धों का रुख बदल सकते हैं।
इसी वजह से भारत भी तेजी से स्वदेशी ड्रोन, लॉयटरिंग म्यूनिशन, स्वार्म ड्रोन और एआई आधारित युद्ध प्रणाली पर काम कर रहा है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि अब युद्ध केवल हथियारों की ताकत से नहीं, बल्कि नेटवर्क, डेटा, ऑटोमेशन और बेहतर कोऑर्डिनेशन से भी जीते जाएंगे।
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