📍नई दिल्ली/अबू धाबी | 15 May, 2026, 8:32 PM
India-UAE Defence Partnership: भारत और यूएई अब मिलकर ड्रोन, मिसाइल, गोला-बारूद, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, साइबर डिफेंस और एडवांस मिलिट्री टेक्नोलॉजी डेवलप करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। शुक्रवार को अबू धाबी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मुलाकात के दौरान “फ्रेमवर्क फॉर स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप” को आधिकारिक रूप से अंतिम रूप दिया गया।
यह समझौता भारत और यूएई के रक्षा संबंधों में अब तक का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक कदम माना जा रहा है। इस नई साझेदारी के तहत दोनों देश रक्षा उपकरणों का संयुक्त उत्पादन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस हथियार, ड्रोन टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, स्पेशल ऑपरेशन, ट्रेनिंग और सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम्स पर भी साथ काम करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस फ्रेमवर्क में डिफेंस इंडस्ट्रियल कोलैबोरेशन, इनोवेशन, एडवांस टेक्नोलॉजी, संयुक्त सैन्य अभ्यास, ट्रेनिंग, एजुकेशन, स्पेशल ऑपरेशन, इंटरऑपरेबिलिटी, मैरीटाइम सिक्योरिटी, साइबर डिफेंस और इंफॉर्मेशन एक्सचेंज जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल हैं।
India-UAE Defence Partnership: जनवरी में शुरू हुई थी प्रक्रिया
दरअसल इस समझौते की नींव जनवरी 2026 में पड़ गई थी, जब यूएई के राष्ट्रपति भारत दौरे पर आए थे। उसी दौरान दोनों देशों ने स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप को लेकर एक लेटर ऑफ इंटेंट यानी एलओआई साइन किया था। शुक्रवार को अबू धाबी में उसी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक पिछले दो सालों में भारत और यूएई के बीच रक्षा उद्योग सहयोग को लेकर लगातार बातचीत चल रही थी। भारत-यूएई डिफेंस इंडस्ट्री कोऑपरेशन फोरम की पहली बैठक सितंबर 2024 में भारत में हुई थी। इसके बाद दूसरी बैठक 2025 में नई दिल्ली में आयोजित की गई थी।
इन बैठकों में यूएई की बड़ी डिफेंस कंपनी एज ग्रुप और भारत की सरकारी और निजी रक्षा कंपनियों ने हिस्सा लिया था। इसी दौरान संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एडवांस सैन्य सिस्टम्स पर साझेदारी को लेकर चर्चा तेज हुई।
كما شهدت هذه الزيارة إلى دولة الإمارات إبرام اتفاقيات محورية في قطاعات حيوية، مثل الطاقة والدفاع والبنية التحتية والشحن والتقنيات المتقدمة؛ مما منح دفعة جديدة للشراكة الاستراتيجية الشاملة بين الهند والإمارات. وفي تطور مهم آخر، أعلنت دولة الإمارات عن استثمارات بقيمة 5 مليارات… pic.twitter.com/RKQMFTUdY6
— Narendra Modi (@narendramodi) May 15, 2026
ड्रोन, मिसाइल और एआई पर रहेगा बड़ा फोकस
सूत्रों का कहना है कि भारत और यूएई अब संयुक्त रूप से हाई-टेक डिफेंस प्लेटफॉर्म्स बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। इनमें अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी यूएवी, एडवांस मिसाइल सिस्टम्स, प्रिसिजन म्यूनिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैन्य तकनीक और नौसैनिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
भारत का तेजी से बढ़ता रक्षा उत्पादन और यूएई की वित्तीय तथा तकनीकी क्षमता इस साझेदारी को खास बना रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात करीब 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि कुल रक्षा उत्पादन लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये रहा।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यूएई भारत के लिए केवल एक साझेदार देश नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के रक्षा बाजार तक पहुंच का बड़ा रास्ता बन सकता है।
List of outcomes (7 in total) : Official visit of PM @narendramodi to UAE ⬇️ pic.twitter.com/J1VqbjPZ8S
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) May 15, 2026
हैदराबाद में खुल चुका है जॉइंट आर्म्स कॉम्प्लेक्स
भारत और यूएई के बीच रक्षा उत्पादन सहयोग की शुरुआत पहले ही हो चुकी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैदराबाद में बना आईकॉम-काराकल स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स है।
यूएई की काराकल कंपनी और भारत की आईकॉम टेली लिमिटेड के बीच यह पहला बड़ा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इस फैसिलिटी का उद्घाटन पिछले साल 21 अप्रैल को किया गया था।
इस प्रोजेक्ट के तहत यूएई की काराकल कंपनी की पूरी हथियार रेंज अब भारत में बनाई जा रही है। इसमें पिस्टल, स्नाइपर राइफल और दूसरे छोटे हथियार शामिल हैं।
हाल ही में सीएसआर-338 स्नाइपर राइफल का कॉन्ट्रैक्ट सीआरपीएफ को मिला है और इन राइफलों का निर्माण भी हैदराबाद की इसी यूनिट में होगा।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मॉडल का बड़ा उदाहरण बन चुका है, जहां विदेशी तकनीक को भारत में लाकर स्थानीय उत्पादन किया जा रहा है।
अदाणी और एज ग्रुप के बीच भी बड़ा समझौता
भारत और यूएई के बीच रक्षा सहयोग केवल छोटे हथियारों तक सीमित नहीं है। जून 2024 में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और यूएई के एज ग्रुप के बीच भी बड़ा समझौता हुआ था।
इस साझेदारी में मिसाइल सिस्टम्स, ड्रोन, लॉयटरिंग म्यूनिशन, काउंटर ड्रोन टेक्नोलॉजी, अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और साइबर सिस्टम्स पर संयुक्त काम करने का फैसला लिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों में रिसर्च एंड डेवलपमेंट फैसिलिटी तैयार करने पर भी काम चल रहा है।
इसके अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल और एज ग्रुप के बीच भी एयरोस्पेस सेक्टर में सहयोग बढ़ रहा है। दोनों कंपनियां तेजस लड़ाकू विमान में यूएई के एयरबोर्न सिस्टम्स के इंटीग्रेशन पर चर्चा कर रही हैं।
शिप रिपेयर और नेवल सेक्टर में भी बड़ी साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी के यूएई दौरे के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक और अहम समझौता हुआ। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और यूएई की ड्राईडॉक्स वर्ल्ड कंपनी के बीच गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर डेवलप करने के लिए एमओयू साइन किया गया।
इस प्रोजेक्ट में ऑफशोर फैब्रिकेशन और समुद्री प्लेटफॉर्म्स की मरम्मत जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी।
इसके साथ ही मैरीटाइम और शिपबिल्डिंग सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट के लिए भी अलग समझौता हुआ है। इसके तहत भारतीय वर्कफोर्स को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि भारत को ग्लोबल शिप रिपेयर हब के रूप में विकसित किया जा सके।
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इसका सीधा संबंध भविष्य में नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स के जॉइंट प्रोडक्शन और मेंटेनेंस से भी जुड़ा हुआ है।
तीनों सेनाओं के बीच बढ़े सैन्य अभ्यास
पिछले कुछ वर्षों में भारत और यूएई के सैन्य संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच लगातार संयुक्त अभ्यास हो रहे हैं।
भारतीय सेना और यूएई सेना के बीच “डेजर्ट साइक्लोन” सैन्य अभ्यास आयोजित किया गया। 2024 में इसका आयोजन भारत में हुआ था, जबकि 2025 में इसका आयोजन यूएई में किया गया।
भारतीय नौसेना और यूएई नौसेना के बीच “एक्स गल्फ वेव्स” अभ्यास भी हुआ। इसके अलावा दोनों देशों के युद्धपोतों के बीच नियमित पोर्ट कॉल्स जारी हैं।
भारतीय वायुसेना ने यूएई में आयोजित “डेजर्ट फ्लैग” एयर एक्सरसाइज में अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी की थी। वहीं यूएई ने भारत के “तरंग शक्ति” अभ्यास में हिस्सा लिया था।
इसके अलावा दोनों देशों के बीच एयर चीफ, नेवी चीफ और आर्मी अधिकारियों के कई हाई लेवल दौरे भी हुए हैं।
साइबर और सुरक्षित कम्युनिकेशन पर भी जोर
नई रक्षा साझेदारी में साइबर डिफेंस और सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम्स को भी खास जगह दी गई है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्धों में साइबर हमले और डेटा सुरक्षा सबसे बड़े मुद्दों में शामिल हो चुके हैं।
इसी वजह से भारत और यूएई अब सुरक्षित इंफॉर्मेशन शेयरिंग और डिफेंस नेटवर्क्स पर भी साथ काम करेंगे।
सूत्रों का कहना है कि यह साझेदारी किसी तीसरे देश के खिलाफ सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि इसका मकसद दोनों देशों की तकनीकी और सैन्य क्षमता को मजबूत करना है।
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।



