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Gurpatwant Pannun: ट्रंप भारत के दोस्त हैं या दुश्मन? खालिस्तानी आतंकी पन्नू को शपथग्रहण में बुला कर क्या संदेश चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति?

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📍नई दिल्ली | 23 Jan, 2025, 10:00 AM

Gurpatwant Pannun: अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने भारत के राजनयिक और सुरक्षा तंत्र में हलचल मचा दी। इस हाई-प्रोफाइल आयोजन में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को देखा गया। समारोह में पन्नू ने “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वही पन्नू है जिसे भारत में आतंकवादी घोषित किया गया है और जिसकी गतिविधियां भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानी जाती हैं। हाल ही में पन्नू ने महाकुंभ में बम ब्लास्ट की धमकी भी दी थी।

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Gurpatwant Pannun: ‘लिबर्टी बॉल’ का इनवाइट

खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दावा किया कि उसे ट्रंप के एक गुट से आमंत्रण मिला था। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, पन्नू ने किसी संपर्क के माध्यम से टिकट खरीदा और इस समारोह में प्रवेश किया। यह कार्यक्रम वॉशिंगटन डीसी के कैपिटल हॉल और उसके बाद आयोजित ‘लिबर्टी बॉल’ में हुआ।

पन्नू का दावा और वीडियो का सच

20 जनवरी को ट्रंप ने 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। इस ऐतिहासिक मौके पर पन्नू को समारोह स्थल के अंदर “खालिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए देखा गया। एक वीडियो में वह भीड़ के बीच अपना मोबाइल कैमरा ऑन कर नारे लगाते हुए नजर आ रहा है।

हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार, पन्नू को इस कार्यक्रम के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया था। वह समारोह में मौजूद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से काफी दूर खड़ा था।

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सूत्रों का कहना है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता रखता है, और भारत में खालिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। उसने कई बार भारत विरोधी बयान दिए हैं और हिंसा भड़काने की कोशिश की है। पन्नू का उद्देश्य खुद को अमेरिकी प्रशासन के करीब दिखाकर वह अपनी उपयोगिता साबित करना चाहता है।

कांग्रेस ने जताई आपत्ति

वीडियो के वायरल होने के बाद भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे एक आतंकी, जिसने भारतीय राजनयिकों और एयर इंडिया की फ्लाइट्स पर बम धमाके की धमकी दी थी, उसे इस तरह के हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी गई।

हालांकि न ही अमेरिकी विदेश विभाग और न ही भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने वीडियो साझा करते हुए भारत सरकार से इस मामले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या भारत सरकार सिर्फ मूकदर्शक बनी रहेगी? क्या यह उचित है कि एक ऐसे व्यक्ति को अमेरिका में जगह दी जाए जो भारत की अखंडता के खिलाफ काम कर रहा है?”

2023 में अमेरिका ने भारत सरकार पर पन्नू पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया था। अमेरिका ने दावा किया था कि यह साजिश न्यूयॉर्क में रची गई थी, जिसमें भाड़े के शूटर का उपयोग किया जाना था। इस घटना ने भारत-अमेरिका के बीच राजनयिक संबंधों में विवाद को और बढ़ा दिया था।

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वहीं, भारत ने इस पर कहा था कि वह अमेरिका और अन्य देशों के साथ सहयोग कर रहा है ताकि खालिस्तानी आतंकवाद को रोका जा सके। भारतीय जांच एजेंसियों ने पन्नू के खिलाफ कई वारंट जारी किए हैं और उसकी संपत्तियां भी जब्त कर ली गई हैं। भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि खालिस्तानी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, यह घटना एब भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ है। वह “सिख्स फॉर जस्टिस” (SFJ) नामक संगठन का नेतृत्व करता है, जो खालिस्तान के गठन के लिए अभियान चलाता है। जुलाई 2020 में, भारत सरकार ने पन्नू को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया था।

पन्नू ने कई बार भारत के राजनयिकों और संस्थानों को धमकी दी है। उसने एयर इंडिया की उड़ानों को निशाना बनाने और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी हैं। इसके बावजूद, वह अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में स्वतंत्र रूप से घूमता है, जहां उसे इन देशों की नागरिकता प्राप्त है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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