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Trump Presidency 2.0: क्या ट्रंप 2.0 में ड्रग्स तस्करी की पाकिस्तानी साजिशों पर लगेगी लगाम? पाक सेना और ड्रग्स कार्टेल के राज खोलेगी ये किताब

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📍नई दिल्ली | 28 Dec, 2024, 4:43 PM

Trump Presidency 2.0: भले ही आज तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ है और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अपने लड़ाकुओं को पाक-अफगान सीमा पर भेज रहा है। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब दोनों नशे के कारोबार में पूरी तरह से डूबे हुए थे और पूरी दुनिया को नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे थे। जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप 2.0 शुरू होने से पहले, एक नई किताब ने अफगानिस्तान से नशीले पदार्थों की तस्करी पर अमेरिकी कार्रवाई और पाकिस्तानी सेना की साजिशों का पर्दाफाश किया है। इस किताब का नाम है ‘द न्यूक्स, द जिहाद, द हवाला और क्रिस्टल मेथ’ (‘The Nukes, the Jihad, the Hawalas and Crystal Meth’), जिसे लेखक इकबाल चंद मल्होत्रा ने लिखा है। किताब में खुलासा किया गया है कि कैसे पाकिस्तानी सेना ने तालिबान के साथ मिलकर क्रिस्टल मेथ की अवैध लैब को बचाने की साजिश रची, जबकि ट्रंप प्रशासन ने इन लैब्स को नष्ट करने का आदेश दिया था।

Trump Presidency 2.0: Will Pakistani Drug Nexus Be Exposed?
“The Nukes, the Jihad, the Hawalas and Crystal Meth” Writer Iqbal Chand Malhotra

Trump Presidency 2.0: अमेरिकी सेना का मिशन और पाकिस्तानी सेना की चालाकी

मल्होत्रा ने किताब में पेज संख्या 150 पर इस विषय पर एक चैप्टर भी लिखा है। ‘ऑपरेशन टेम्पेस्ट एंड द ट्रेचरी अराउंड नारकोटिक्स’ इसमें लिखा है कि पाकिस्तानी सेना ने क्रिस्टल मेथ लैब्स की सुरक्षा के लिए तालिबान को बचाने की कोशिश की, ताकि नशीले पदार्थों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार जारी रहे। इस दौरान, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी वायुसेना (USAF) को इन लैब्स को नष्ट करने का आदेश दिया था। डायरेक्टोरेट एस की रणनीति यह थी कि तालिबान शहरों और उनके आसपास के इलाकों में अपनी गतिविधियों को तेज करे। इस रणनीति का उद्देश्य सुरक्षा बलों को ग्रामीण इलाकों से हटाकर शहरी इलाकों में केंद्रित करना था। ताकि तालिबान राजमार्गों पर कब्जा कर सके और शहरों को अलग-थलग कर सके। ताकि जनता में भय पैदा हो। लेकिन इस रणनीति की सफलता में एकमात्र बड़ा बाधा अमेरिकी वायुसेना (USAF) थी।”

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मल्होत्रा लिखते हैं कि ट्रंप ने अमेरिकी वायुसेना (USAF) को अफगानिस्तान के मादक पदार्थ उद्योग को निशाना बनाने का आदेश दिया था। “6 मई 2019 को, USAF ने “स्मार्ट म्यूनिशन” का इस्तेमाल करते हुए 68 मेथ लैब्स को बमबारी करके नष्ट कर दिया। ये सभी लैब्स फराह प्रांत के बक्वा जिले में स्थित थीं।”

Trump Presidency 2.0: एफेड्रा की खेती और नशीले पदार्थों का उत्पादन

किताब के अनुसार, 2018 से ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) ने देखा कि फराह और हेलमंद से व्यापारी पहाड़ियों के पास फसल खरीदने पहुंचते थे। “एपेड्रा की बढ़ती मांग ने इसके दाम 2017 से 2018 के बीच तीन गुना कर दिए। किसान एक दिन में 70 किलो एफेड्रा तक काट सकते थे, और गधों की मदद से वे प्रतिदिन $125 तक कमा सकते थे।”

किताब में यह भी कहा गया है कि एफेड्रा अफगानिस्तान के वारदक, गोर, हेलमंद, उरुज़गन और गजनी प्रांतों की पहाड़ियों में जंगली तौर पर उगता है। “गजनी के 15 गांवों से एक सीजन में लगभग 2,500 मीट्रिक टन फसल काटी जा सकती थी, जिससे 8 से 25 मीट्रिक टन मेथामफेटामिन तैयार किया जा सकता था।”

अमेरिकी कार्रवाई का असर और पाकिस्तानी सेना की चिंता

मल्होत्रा ने लिखा कि अमेरिकी वायुसेना के हमले के बाद नशीले पदार्थों का व्यापार अंडरग्राउंड हो गया। व्यापारियों ने खुले बाजार की जगह अपने घरों से कारोबार करना शुरू कर दिया। 2018 में बकवा बाजार में 450 ग्राम एफेड्रा की कीमत $284 थी। इस एफेड्रा से लगभग 12 किलो एफेड्रिन तैयार किया जा सकता था। इसके बाद एफेड्रिन को मेथ में बदलने के लिए केवल सामान्य रसायनों का उपयोग किया जाता है।

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किताब में यह भी बताया गया है कि 2019 में अमेरिका में 1 किलो मेथ की कीमत $40,000 थी। “बकवा बाजार में तैयार 8 किलो मेथ की कीमत लगभग $2,500 थी, लेकिन अमेरिकी बाजार में इसकी कीमत $320,000 थी।”

मल्होत्रा बताते हैं कि 2019 तक अफगानिस्तान में मेथामफेटामिन की जब्ती 650 किलो तक पहुंच गई थी। “बक्वा जिले का अब्दुल वदूद बाज़ार एफेड्रा व्यापार का केंद्र था। 2018 में, 450 ग्राम एफेड्रा की कीमत $284 थी। इससे 12 किलो एफेड्रीन तैयार किया जा सकता था, जो 8 किलो 95% शुद्ध क्रिस्टल मेथ में बदल सकता था।”

डायरेक्टोरेट एस और नशीले पदार्थों का व्यापार

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के डायरेक्टरेट एस ने इस व्यापार को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। यह व्यापार तालिबान और मैक्सिकन ड्रग कार्टेल्स जैसे सिनालोआ और सीजेजीएनजी के लिए बेहद महत्वपूर्ण था।

किताब में दावा किया गया है कि अमेरिकी हमलों के बावजूद नशीले पदार्थों का यह व्यापार जारी रहा। 2010 में जब पहली बार मेथ जब्त की गई, तो यह मात्रा केवल कुछ किलो थी। लेकिन 2018 तक यह बढ़कर 180 किलो हो गई। 2019 के पहले छह महीनों में यह मात्रा रिकॉर्ड 650 किलो तक पहुंच गई।

पाकिस्तानी सेना की साजिश

मल्होत्रा ने लिखा कि पाकिस्तानी सेना ने इस व्यापार को जारी रखने के लिए तालिबान और स्थानीय व्यापारियों को सुरक्षा मुहैया कराई। उन्होंने यह भी दावा किया कि आईएसआई ने नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए। उन्होंने कहा कि “डायरेक्टरेट एस के लिए नशीले पदार्थों के व्यापार को बचाना इतना महत्वपूर्ण था कि इसने अपने पूरे नेटवर्क का इस्तेमाल किया।”

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अफगानिस्तान का क्रिस्टल मेथ व्यापार और अमेरिकी रणनीति

मल्होत्रा ने यह भी बताया कि अफगानिस्तान में नशीले पदार्थों का व्यापार अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। ट्रंप प्रशासन ने इसे रोकने के लिए कई कदम उठाए, लेकिन पाकिस्तानी सेना और तालिबान की साजिशों के कारण इसमें पूरी सफलता नहीं मिली।

ट्रंप 2.0 में नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई का वादा

डोनाल्ड ट्रंप ने 2024 के चुनाव प्रचार में एक बार फिर से नशीले पदार्थों के व्यापार को खत्म करने का वादा किया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी दूसरी पारी में इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई होती है। ‘द न्यूक्स, द जिहाद, द हवाला और क्रिस्टल मेथ’ नामक इस किताब ने पाकिस्तान की साजिशों और अमेरिकी रणनीतियों के बीच चल रहे Tug of War को बेहतरीन तरीके से उजागर किया है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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