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Explained: चीन के खिलाफ अमेरिका का बड़ा दांव? यूएस नेवी की नई मिसाइल AIM-424 Malice क्यों है खास?

एआईएम-424 मैलिस एक नई पीढ़ी की लॉन्ग रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है। अमेरिकी नौसेना इसे लॉन्ग रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (LRAAM) भी कहती है...

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📍नई दिल्ली | 24 Aug, 2026, 11:34 AM

AIM-424 Malice Missile: अमेरिकी नौसेना ने एक नई एयर-टू-एयर मिसाइल AIM-424 “मैलिस” (Malice) का खुलासा किया है। यह मिसाइल 250 नॉटिकल मील यानी 463 से 465 किलोमीटर से अधिक दूरी तक एरियल टारगेट्स को निशाना बना सकती है। यह दूरी मौजूदा अमेरिकी AIM-120 AMRAAM और कई अन्य एयर-टू-एयर मिसाइलों से काफी ज्यादा है।

अमेरिकी नौसेना ने अगस्त 2026 में नेवादा के रेनो शहर में आयोजित टेलहुक एसोसिएशन कन्वेंशन के दौरान पहली बार इस मिसाइल की जानकारी सार्वजनिक की। इसके साथ जारी तस्वीरों में F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान पर एआईएम-424 मिसाइलें लगी दिखाई दीं। एक अन्य तस्वीर में इसे एफ-35सी स्टेल्थ फाइटर के इंटरनल वेपन बे में भी देखा गया।

AIM-424 Malice Missile क्या है?

एआईएम-424 मैलिस एक नई पीढ़ी की लॉन्ग रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है। अमेरिकी नौसेना इसे लॉन्ग रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (LRAAM) भी कहती है। इसे अमेरिकी डिफेंस कंपनी रेथियॉन ने किया है, जो आरटीएक्स कॉर्पोरेशन की सहायक कंपनी है।

यह मिसाइल दुश्मन के विमानों को बहुत लंबी दूरी से मार गिराने के लिए बनाई गई है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य बेड़े की सुरक्षा मजबूत करना और एडवांस खतरों के खिलाफ हवाई बढ़त बनाए रखना है। (AIM-424 Malice Missile)

कितनी है मिसाइल की मारक क्षमता?

अमेरिकी नौसेना द्वारा जारी तकनीकी विवरण के अनुसार एआईएम-424 की रेंज 250 नॉटिकल मील से अधिक है। यह लगभग 463 किलोमीटर या 465 किलोमीटर के बराबर है।

मिसाइल की लंबाई 13.5 फीट यानी करीब 4.11 मीटर है। इसका व्यास 13.5 इंच और विंगस्पैन 26.2 इंच बताया गया है। इसका कुल वजन लगभग 1500 पाउंड यानी 680 किलोग्राम से अधिक है।

तुलना करें तो एआईएम-120 AMRAAM का वजन इससे काफी कम है। एआईएम-424 का वजन लगभग तीन गुना अधिक है। ज्यादा वजन और दो-स्टेज डिजाइन इसकी लंबी दूरी और हाई स्पीड का आधार माना जा रहा है।

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दो-स्टेज डिजाइन से बढ़ी क्षमता

रिपोर्टों के अनुसार एआईएम-424 एक टू-स्टेज मिसाइल है। इसमें सॉलिड प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर का इस्तेमाल किया गया है।

पहला चरण मिसाइल को तेज गति और ऊंचाई देता है, जबकि दूसरा चरण उसे टारगेट की ओर लंबी दूरी तक आगे बढ़ाता है। यही डिजाइन इसे पारंपरिक एयर-टू-एयर मिसाइलों की तुलना में अधिक दूरी तय करने की क्षमता देता है। वहीं इससे मिसाइल को बहुत लंबी दूरी पर भी पर्याप्त ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिलती है। (AIM-424 Malice Missile)

किन विमानों से दागी जा सकेगी?

एआईएम-424 को चौथी, पांचवीं और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए डिजाइन किया गया है।

अमेरिकी नौसेना के अनुसार इसे F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट, एफ-35सी जॉइंट स्ट्राइक फाइटर और भविष्य के F/A-XX नेक्स्ट जेनरेशन नौसैनिक लड़ाकू विमान पर तैनात किया जाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि इसका साइज ऐसा रखा गया है कि यह एफ-35सी के इंटरनल वेपन बे में भी फिट हो सके। इससे स्टेल्थ क्षमता प्रभावित नहीं होती और विमान दुश्मन के रडार से छिपकर मिशन पूरा कर सकता है।

अमेरिका को इतनी लंबी दूरी की मिसाइल की क्यों है जरूरत?

हाल के सालों में चीन ने अपनी लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल क्षमताओं को तेजी से बढ़ाया है। अमेरिकी रक्षा विभाग लंबे समय से ऐसी मिसाइल डेवलप करना चाहता था जो दुश्मन के विमान को बहुत दूर से निशाना बना सके।

भविष्य के युद्ध में अवॉक्स विमान, एयर टैंकर, कमांड एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट और अन्य हाई-वैल्यू सपोर्ट प्लेटफॉर्म प्रमुख टारगेट होंगे। ऐसे विमान सीधे लड़ाई नहीं करते, लेकिन पूरे एरियल मिशन को ऑपरेट करते हैं।

एआईएम-424 जैसी मिसाइलें ऐसे टारगेट्स को बहुत दूर से निशाना बनाने में मदद कर सकती हैं। (AIM-424 Malice Missile)

समुद्री युद्ध में भी हो सकती है अहम भूमिका

ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना के पूर्व अधिकारी और ग्रिफिथ एशिया इंस्टीट्यूट के विजिटिंग फेलो पीटर लेटन के अनुसार इस तरह की मिसाइलें नौसैनिक बेड़ों की रक्षा में भी उपयोगी हो सकती हैं।

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उन्होंने कहा कि चीन के कुछ बॉम्बर विमान लंबी दूरी की एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें लेकर उड़ान भर सकते हैं। ऐसी स्थिति में एआईएम-424 जैसी मिसाइल दुश्मन के विमान को उसके हथियार दागने से पहले ही निशाना बना सकती है।

यानी यह केवल एरियल सुपीरियरिटी के लिए नहीं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हथियार बन सकती है। (AIM-424 Malice Missile)

टारगेट तक पहुंचने की सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि 400 किलोमीटर से अधिक दूरी पर किसी विमान को मारना आसान नहीं होता। इसके लिए बेहद एडवांस सेंसर, रडार, डेटा लिंक और टारगेट की सटीक जानकारी जरूरी होती है। यदि दुश्मन का विमान समय रहते दिशा बदल ले या तेज गति से दूर जाने लगे, तो हमला कठिन हो सकता है।

यही कारण है कि ऐसी मिसाइलों के साथ नेटवर्क बेस्ड वेपन सिस्टम, सेटेलाइट, अवॉक्स विमान और अन्य सेंसर प्लेटफॉर्म भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। (AIM-424 Malice Missile)

“फर्स्ट लुक, फर्स्ट शॉट, फर्स्ट किल”

अमेरिकी नौसेना से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार एआईएम-424 मैलिस को “फर्स्ट लुक, फर्स्ट शॉट, फर्स्ट किल” क्षमता को मजबूत करने के लिए डेवलप किया जा रहा है।

इसका मतलब है कि अमेरिकी पायलट दुश्मन को पहले देख सकें, पहले मिसाइल दाग सकें और टारगेट को पहले नष्ट कर सकें।

नौसेना ने अभी इसकी ऑपरेशनल तैनाती की तारीख नहीं बताई है, लेकिन तस्वीरों और परीक्षण गतिविधियों से स्पष्ट है कि यह कार्यक्रम परीक्षण चरण में काफी आगे बढ़ चुका है।

मिसाइल में ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन वारहेड लगाया गया है, जो टारगेट के पास विस्फोट करके बड़े क्षेत्र में घातक टुकड़े फैलाता है और दुश्मन के विमान को नुकसान पहुंचाता है।

दुनिया की लॉन्ग रेंज वाली एयर-टू-एयर मिसाइलें

हवाई युद्ध में इस्तेमाल होने वाली एयर-टू-एयर मिसाइलों की रेंज लगातार बढ़ रही है। इस समय अमेरिकी नौसेना की नई एआईएम-424 मैलिस सबसे लंबी दूरी वाली मिसाइलों में शामिल हो गई है, जिसकी रेंज 450 किलोमीटर से अधिक है। इसके बाद अमेरिका की एआईएम-174 गनस्लिंगर आती है, जो 400 किलोमीटर से अधिक दूरी तक टारगेट को निशाना बना सकती है।

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चीन के पास भी लंबी दूरी की मिसाइलें हैं। उसकी पीएल-17 मिसाइल की रेंज लगभग 400 किलोमीटर बताई जाती है। वहीं पीएल-15 मिसाइल करीब 200 किलोमीटर तक मार कर सकती है।

रूस की आर-37एम मिसाइल भी दुनिया की सबसे लंबी दूरी वाली एयर-टू-एयर मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी रेंज लगभग 300 किलोमीटर है।

अमेरिका की अगली पीढ़ी की एआईएम-260 JATM मिसाइल की रेंज 200 किलोमीटर से अधिक मानी जाती है। वहीं वर्तमान में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली एआईएम-120 AMRAAM मिसाइल लगभग 160 किलोमीटर तक लक्ष्य को भेद सकती है।

यूरोप की बनाई मेटियोर मिसाइल भी लंबी दूरी की आधुनिक एयर-टू-एयर मिसाइल है, जिसकी रेंज करीब 200 किलोमीटर बताई जाती है।

वहीं, भारत की अस्त्र मिसाइल परिवार की विभिन्न मिसाइलों की रेंज लगभग 160 किलोमीटर से लेकर 350 किलोमीटर तक है। अस्त्र मार्क-1 पहले से भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुकी है। (AIM-424 Malice Missile)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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