📍नई दिल्ली | 22 Aug, 2026, 5:24 PM
Strait of Hormuz Maritime Security: दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य, अदन की खाड़ी, बाब-अल-मंदब और लाल सागर में सुरक्षा हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। भारतीय नौसेना के इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) की तरफ से जारी मेरीटाइम सिक्योरिटी एडवाइजरी में इन इलाकों को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। चेतावनी में कहा गया है कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ मेरीटाइम एम्बार्गो घोषित किया हुआ है और मौजूदा हालात को बेहद अस्थिर बताया है।
Strait of Hormuz Maritime Security: हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार हुए हमले
रिपोर्ट के मुताबिक अनुसार 2 जुलाई से 23 जुलाई के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कुल 12 व्यापारी जहाजों पर हमले हुए। इनमें छह हमले प्रोजेक्टाइल, पांच मिसाइल और एक ड्रोन से हुआ।
7 जुलाई को मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले जहाज अल रेकय्यात पर ओमान के लिमाह क्षेत्र के पास प्रोजेक्टाइल हमला हुआ। उसी दिन सऊदी अरब के वेडयान और लाइबेरिया के साइप्रस प्रॉस्पेरिटी को भी निशाना बनाया गया। साइप्रस प्रॉस्पेरिटी पर ड्रोन हमला हुआ था।
इसके बाद 12 जुलाई को जीएफएस गैलेक्सी, 14 जुलाई को स्टोल्ट मैग्नीशियम, मोम्बासा बी और अल बहयाह पर हमले हुए। 15 जुलाई को कुरासाओ के झंडे वाले बेल्मा पर मिसाइल हमला दर्ज किया गया। 20 और 21 जुलाई को भी कई जहाजों को निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट बताती है कि हमले उत्तरी और दक्षिणी दोनों समुद्री मार्गों पर हुए। दक्षिणी मार्ग ओमान और यूएई के तट के साथ चलता है, जबकि उत्तरी मार्ग ईरान के तट के नजदीक है। यही कारण है कि आईएफसी-आईओआर ने इस पूरे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा खतरे को “क्रिटिकल” स्तर पर रखा है।
क्यों अहम है हॉर्मुज जलडमरूमध्य?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। तेल टैंकर, गैस कैरियर और कंटेनर जहाज हर दिन इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।
ऐसे में किसी भी प्रकार का हमला ग्लोबल सप्लाई चेन और एनर्जी मार्केट पर भी असर डाल सकता है। इसी वजह से इस क्षेत्र में होने वाली हर गतिविधि पर दुनिया भर की नौसेनाओं और शिपिंग कंपनियों की नजर रहती है। (Strait of Hormuz Maritime Security)
हूती विद्रोहियों का मेरीटाइम एम्बार्गो का एलान
20 जुलाई को यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब-अल-मंदब क्षेत्र में सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ मेरीटाइम एम्बार्गो की घोषणा कर दी। हूतियों ने कहा कि सऊदी बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से आने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग नहीं मिलेगा।
इस घोषणा के बाद कम से कम 13 जहाजों ने अपना निर्धारित मार्ग बदल दिया। इनमें टैंकर, कंटेनर जहाज और बड़े कार्गो पोत शामिल थे।
सऊदी अरब का एनसीसी दानाह जहाज यानबू जा रहा था, लेकिन रास्ते से लौट गया। लाइबेरिया के मिका और रोडोस जैसे जहाजों ने भी अपनी दिशा बदल दी। सिंगापुर के शिन लॉन्ग यांग नामक वीएलसीसी टैंकर ने चीन के लिए सऊदी कच्चा तेल लोड किया था, लेकिन बाद में उसने भी अपना मार्ग बदल दिया।
23 जुलाई को हूती एम्बार्गो के बाद पहला हमला भी दर्ज किया गया। सऊदी अरब से जुड़े टैंकर एनसेलिया पर लाल सागर में जजान के पूर्व लगभग 67 समुद्री मील दूर प्रोजेक्टाइल हमला किया गया।
तेल बाजार पर भी दिखा असर
रिपोर्ट के अनुसार समुद्री खतरे बढ़ने के बाद सऊदी कच्चे तेल की लोडिंग में लगभग 36 फीसदी की कमी दर्ज की गई। इसी दौरान लंदन आईसीई एक्सचेंज में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो मई 2026 के बाद पहली बार हुआ।
शिपिंग कंपनियों और जहाज मालिकों को सलाह दी गई है कि सऊदी बंदरगाहों की यात्रा से पहले जोखिम का आकलन करें और वैकल्पिक मार्गों पर विचार करें। (Strait of Hormuz Maritime Security)
अदन की खाड़ी में फिर लौटे समुद्री डाकू
रिपोर्ट में अदन की खाड़ी और यमन तट के पास समुद्री डकैती की वापसी को भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया है।
5 जुलाई को पलाऊ के झंडे वाले बल्क कैरियर लेडी नाएमा का पीछा एक आर्मर्ड बोट ने किया। जहाज पर मौजूद सुरक्षा गार्डों ने जवाबी फायरिंग की, जिसके बाद हमलावर पीछे हट गए।
13 जुलाई को अदन के दक्षिण में एक टैंकर का पीछा पांच छोटी नावों ने किया। चेतावनी फायरिंग के बाद वे भी लौट गईं।
सबसे गंभीर घटना 17 जुलाई को हुई, जब तंजानिया के झंडे वाले टैंकर असाना को यमन के अल मुकल्ला से लगभग 65 समुद्री मील दक्षिण में हाईजैक कर लिया गया। बाद में जहाज को सोमालिया के पुंटलैंड तट की ओर ले जाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र में फिलहाल दो सक्रिय समुद्री डकैती समूहों की गतिविधियां देखी जा रही हैं। इसी वजह से अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती और सशस्त्र लूट का खतरा “हाई” कैटेगरी में रखा गया है। (Strait of Hormuz Maritime Security)
जहाजों के लिए दी ये सलाह
आईएफसी-आईओआर ने अपनी एडवाइजरी में जहाज मालिकों, ऑपरेटरों और कप्तानों को कई सावधानियां अपनाने की सलाह दी है। इसमें यात्रा से पहले खतरे का आकलन करना, युद्ध जोखिम बीमा की समीक्षा करना, एआईएस और रडार चालू रखना तथा वीएचएफ चैनल-16 समेत वैकल्पिक नेविगेशन साधनों का इस्तेमाल करने को कहा है।
साथ ही, रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल जीपीएस पर निर्भर रहना सही नहीं है। जीपीएस जैमिंग या एआईएस में दखल की आशंका को देखते हुए वैकल्पिक पोजिशनिंग सिस्टम भी तैयार रखने चाहिए। साथ ही, जहाज के चालक दल को संभावित खतरों के बारे में पहले से जानकारी दी जाए, नियमित मॉक ड्रिल कराई जाए और आपात स्थिति में इंजन बंद करने, जहाज को कंट्रोल करने तथा सिटाडेल से कम्युनिकेशन सिस्टम की जांच पहले से कर ली जाए।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में गैर-जरूरी यात्राओं पर पुनर्विचार करने की सलाह दी गई है। वहीं अदन की खाड़ी, बाब-अल-मंदब और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को अतिरिक्त निगरानी, सुरक्षा उपाय और सशस्त्र सुरक्षा टीमों पर विचार करने को कहा गया है। आईएफसी-आईओआर ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि सोमालिया और यमन के तटों के पास हाल के दिनों में समुद्री डकैती की घटनाएं सामने आई हैं। इसलिए इन क्षेत्रों से गुजरते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने, जहाज की गति बढ़ाने और अतिरिक्त निगरानी कर्मियों को तैनात करने की सलाह दी गई है। (Strait of Hormuz Maritime Security)
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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





