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चुपके से ब्लूटूथ हेडफोन से यूजर्स को ट्रैक कर रहा था AliExpress! गुपचुप बना रहा था डिजिटल फिंगरप्रिंट

ब्रेव के मुताबिक एक यूजर मल्टीपॉइंट ब्लूटूथ हेडफोन का इस्तेमाल कर रहा था। इस तकनीक की मदद से हेडफोन को एक साथ कंप्यूटर और मोबाइल फोन से कनेक्ट कर सकते हैं...

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📍नई दिल्ली | 24 Aug, 2026, 10:19 AM

AliExpress Spying: ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अलीएक्सप्रेस पर जासूसी का आरोप लगा है। प्राइवेसी पर फोकस करने वाले ब्रेव ब्राउजर ने दावा किया है कि अलीबाबा समूह के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीएक्सप्रेस पर यूजर्स को ट्रैक करने के लिए एक खास ऑडियो सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह तरीका पारंपरिक कुकीज से अलग था और इसके जरिए यूजर्स के डिवाइस का एक यूनिक डिजिटल फिंगरप्रिंट तैयार किया जा सकता था।

यह मामला इसी महीने अगस्त का है, जब एक यूजर ने अपने ब्लूटूथ हेडफोन में एक अजीब समस्या नोटिस की। इसी जांच के दौरान वेबसाइट पर चल रही ऐसी तकनीक का पता चला, जिसने यूजर के होश उड़ा दिए।

AliExpress Spying: ब्लूटूथ हेडफोन की समस्या से हुआ खुलासा

प्राइवेसी पर फोकस रखने वाले ब्राउजर ब्रेव ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। ब्रेव के मुताबिक एक यूजर मल्टीपॉइंट ब्लूटूथ हेडफोन का इस्तेमाल कर रहा था। इस तकनीक की मदद से हेडफोन को एक साथ कंप्यूटर और मोबाइल फोन से कनेक्ट कर सकते हैं।

आमतौर पर जब कंप्यूटर पर कोई ऑडियो नहीं चलता, तो हेडफोन अपने आप मोबाइल फोन से आने वाला म्यूजिक या ऑडियो चलाने लगता है। लेकिन यूजर ने पाया कि जैसे ही वह फायरफॉक्स या क्रोम ब्राउजर में अलीएक्सप्रेस का होमपेज खोलता था, मोबाइल फोन का म्यूजिक बंद हो जाता था।

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि वेबसाइट पर कोई वीडियो, गाना या ऑडियो दिखाई नहीं दे रहा था। यहां तक कि ब्राउजर टैब को म्यूट करने के बाद भी समस्या खत्म नहीं हुई। जैसे ही अलीएक्सप्रेस का टैब बंद किया जाता, हेडफोन फिर सामान्य रूप से काम करने लगता।

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जांच में मिला छिपा हुआ ऑडियो सिस्टम

इस असामान्य व्यवहार की जांच के दौरान पता चला कि अलीएक्सप्रेस वेबसाइट बैकग्राउंड में वेब ऑडियो एपीआई का इस्तेमाल कर रही थी। यह एक ऐसी तकनीक है जो ब्राउजर के अंदर ऑडियो प्रोसेसिंग की सुविधा देती है।

जांच में दो स्क्रिप्ट्स सामने आईं, जिनके नाम “कोलिना डॉट जेएस” और “फायरआईजेएस डॉट जेएस” हैं। ये दोनों स्क्रिप्ट्स अलीबाबा के सिक्योरिटी और एंटी-फ्रॉड सिस्टम का हिस्सा मानी जाती हैं।

विशेषज्ञों ने पाया कि ये स्क्रिप्ट्स एक ऐसी साउंड वेव बनाती थीं, जिसकी आवाज शून्य वॉल्यूम पर सेट रहती थी। यानी यूजर को कोई आवाज सुनाई नहीं देती थी, लेकिन सिस्टम लगातार ऑडियो प्रोसेसिंग करता रहता था।

इसी वजह से ब्लूटूथ ऑडियो चैनल एक्टिव बना रहता था और हेडफोन दूसरे डिवाइस पर आसानी से स्विच नहीं कर पाते थे।

क्या है ऑडियो फिंगरप्रिंटिंग?

ऑडियो फिंगरप्रिंटिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसमें हर डिवाइस के ऑडियो हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की खास खूबियों को मापा जाता है।

जब एक निश्चित साउंड वेव तैयार की जाती है और फिर उसके प्रोसेस होने के तरीके का विश्लेषण किया जाता है, तो हर डिवाइस थोड़ा अलग रिजल्ट देती है। यह अंतर प्रोसेसर, साउंड कार्ड, ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर और ड्राइवर जैसी चीजों की वजह से आता है।

इन छोटे-छोटे अंतर को मिलाकर वेबसाइट किसी डिवाइस की एक अनोखी पहचान तैयार कर सकती है। यही पहचान डिजिटल फिंगरप्रिंट कहलाती है।

यह तरीका कुकीज से अलग है क्योंकि कुकीज को यूजर डिलीट कर सकता है, जबकि हार्डवेयर और सिस्टम आधारित फिंगरप्रिंट को बदलना काफी कठिन होता है।

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जुटाई जा रही थी कई तरह की जानकारियां

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वेबपेज पर कैनवास रेंडरिंग, वेबजीएल जानकारी, स्क्रीन रेजोल्यूशन, डिवाइस मेमोरी, प्रोसेसर क्षमता, इंस्टॉल प्लगइन्स, वेबआरटीसी बिहेवियर, सपोर्टिव ऑडियो-वीडियो फॉर्मेट, माउस मूवमेंट, टच इनपुट और स्क्रॉलिंग पैटर्न जैसी कई जानकारियां भी जुटाई जा रही थीं।

इन सभी सूचनाओं को मिलाकर एक अधिक सटीक डिवाइस फिंगरप्रिंट तैयार किया जा सकता है।

टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह का डेटा संग्रह किसी यूजर की ऑनलाइन गतिविधियों को लंबे समय तक पहचानने और ट्रैक करने में मदद कर सकता है।

अलीबाबा के सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ा बताया गया मामला

मामले की जांच करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि संबंधित स्क्रिप्ट्स अलीबाबा के सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा दिखाई देती हैं।

ऐसी तकनीकों का उपयोग आमतौर पर फर्जी अकाउंट, बॉट ट्रैफिक, पेमेंट फ्रॉड, कूपन मिसयूज और ऑटोमेटेड खरीदारी जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए किया जाता है।

हालांकि प्राइवेसी विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि यूजर को बिना जानकारी दिए और बिना स्पष्ट सहमति के इस तरह का डेटा एकत्र किया जाता है, तो यह प्राइवेसी से जुड़े सवाल खड़े करता है।

ब्रेव ब्राउजर ने क्या कहा?

ब्रेव ब्राउजर ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि उसका ब्राउजर कई सालों से ऑडियो फिंगरप्रिंटिंग जैसी तकनीकों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर रहा है।

अलीएक्सप्रेस जैसे प्लेटफॉर्म करोड़ों लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में प्राइवेसी का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो जाता है। कंपनियां सुरक्षा के नाम पर डेटा इकट्ठा करती हैं, लेकिन पारदर्शिता की कमी रहती है। यूजर्स को पता होना चाहिए कि उनकी जानकारी कैसे इस्तेमाल हो रही है। (AliExpress Spying)

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