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Ex Trishul-Poorvi Prachand Prahar: टू फ्रंट वॉर की तैयारी! पूर्वी मोर्चे पर ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ और पश्चिम में ‘त्रिशूल’, दो मोर्चों से भारत ने दिया बड़ा संदेश

भारत के इन दोनों सैन्य अभ्यासों ‘त्रिशूल’ और ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ को एक साथ आयोजित करने का साफ मतलब है कि भारत अब दो फ्रंट वॉर की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है...

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📍नई दिल्ली | 5 Nov, 2025, 3:05 PM

Ex Trishul-Poorvi Prachand Prahar: भारतीय सेनाएं एक बार फिर अपनी जॉइंटनेस का प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। अरुणाचल प्रदेश के मेचुका क्षेत्र में 11 नवंबर से तीनों सेनाओं का एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ शुरू हो रहा है। यह अभ्यास 15 नवंबर तक चलेगा और इसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना एक साथ हिस्सा ले रहे रही हैं।

Exercise Poorvi Prachand Prahar: अरुणाचल प्रदेश में चीन से सटी सीमा पर तीनों सेनाएं करेंगी एक्सरसाइज, मेचुका की पहाड़ियों में ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ शुरू

यह कवायद ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिमी सीमा पर राजस्थान और गुजरात के इलाकों में ट्राई सर्विस एक्सरसइज ‘त्रिशूल’ जारी है। इसमें भी तीनों सेनाएं एक साथ हिस्सा ले रही हैं। इन दोनों अभ्यासों का उद्देश्य भारत की मिलिट्री ‘थिएटर कमांड’ के कॉन्सेप्ट को जमीन पर उतारना और दोनों मोर्चों चीन और पाकिस्तान को एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश देना है कि भारत अब किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। ये अभ्यास ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना की इंटीग्रेटेड ट्राई सर्विस क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उठाए गए हैं।

एक्सरसाइज पूर्वी प्रचंड प्रहार: चीन को ललकार

अरुणाचल प्रदेश का मेचुका इलाका जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से मात्र 30 किलोमीटर दूर है, हमेशा से चीन की नजरों में रहा है। बीजिंग द्वारा ‘दक्षिण तिब्बत’ का दावा करने वाले इस क्षेत्र में आसापिला, लोंगजू, बिसा, मझा, तुलुंग-ला और यांग्त्से जैसे छह विवादित क्षेत्र हैं, जबकि फिशटेल 1 और 2, थाग ला और डिचू जैसे चार बेहद संवेदनशील जोन हैं। 1962 की जंग के बाद से यह इलाका रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। चीन इस पूरे राज्य अरुणाचल प्रदेश को अपना इलाका बताता है और इसे “दक्षिणी तिब्बत यानी जांगनान कहता है।

इस इलाके में ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ एक्सरसाइज शुरू होने जा रही है जो 11-15 नवंबर तक चलेगी। इस अभ्यास में भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना एक साथ मिलकर ऊंचाई वाले इलाकों में लॉजिस्टिक चेन, सिचुएशनल अवेयरनेस और नेटवर्क्ड कमांड एंड कंट्रोल का परीक्षण करेंगे। अभ्यास में लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम रिकॉनिसेंस एयरक्राफ्ट, आर्म्ड हेलीकॉप्टर, यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स), लॉयटरिंग म्यूनिशंस और स्पेस-बेस्ड एसेट्स का इस्तेमाल किया जाएगा। यह अभ्यास 2023 के ‘भाला प्रहार’ और 2024 के ‘पूर्वी प्रहार’ का विस्तार है।

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ईस्टर्न कमांड के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत के अनुसार, यह अभ्यास भारत की तीनों सेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल, मल्टी-डोमेन वॉरफेयर और इंटीग्रेटेड ज्वॉइंट ऑपरेशन की क्षमता को परखने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास का मुख्य फोकस जमीन, हवा और समुद्र तीनों क्षेत्रों में एक साथ काम करने की तैयारियों को जांचना है।

रावत के अनुसार, इस अभ्यास में स्पेशल फोर्सेज, मार्कोस, अनमैन्ड प्लेटफॉर्म्स, प्रिसिजन वेपन्स और नेटवर्क्ड ऑपरेशन सेंटर्स का इस्तेमाल किया जाएगा। यह सब कुछ हाई एल्टीट्यूड वाले कठिन इलाकों में किया जाएगा, ताकि वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में सेनाओं की क्षमता की परख हो सके।

चीन सीमा पर भारत की तैयारी

‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ को भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत चीन सीमा पर सर्विलांस, मोबिलिटी और डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

हाल के महीनों में चीन ने एलएसी के पार ल्हुंजे एयरबेस में 36 एयरक्राफ्ट शेल्टर्स, नए प्रशासनिक ब्लॉक्स और रनवे डेवलप किए हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय हैं। पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ (सेवानिवृत्त) ने कहा था कि इन निर्माणों से साफ है कि चीन भविष्य के किसी भी टकराव में अपने लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर वहीं से ऑपरेट करेगा।

एक्सरसाइज त्रिशूल: पाकिस्तान को चेतावनी

पूर्वी मोर्चे के साथ-साथ, भारतीय सेनाओं ने पश्चिमी सीमा पर ‘त्रिशूल’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत की है। ‘त्रिशूल 2025’ अभ्यास 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक राजस्थान और गुजरात की सीमाओं पर चल रहा है। नौसेना की अगुवाई में थलसेना और वायुसेना के साथ मिलकर यह अभ्यास सर क्रीक क्षेत्र के पास हो रहा है, जहां पाकिस्तान ने हाल ही में तेल-गैस भंडारों की खोज के दावों के साथ गतिविधियां बढ़ाई हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में सर क्रीक में किसी भी साहसिक कदम के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी थी, और यह अभ्यास उसी का परिणाम है।

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इस अभ्यास में टी-90 बैटल टैंक्स, ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल सिस्टम्स, प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर, राफेल जेट्स, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29के और आर्टिलरी यूनिट्स शामिल हैं। 28,000 फीट ऊंचे कॉरिडोर में ‘शूट-एंड-स्कूट’ स्ट्राइक्स का अभ्यास हो रहा है, जो पाकिस्तानी रडार की नजर में है।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह अभ्यास तीनों सेनाओं के बीच ऑपरेशनल प्रोसीजर, कमांड एंड कंट्रोल, और नेटवर्क इंटीग्रेशन को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। इस दौरान सेनाएं लाइव फायरिंग ड्रिल्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम्स और संयुक्त संचार प्रणालियों का परीक्षण कर रही हैं।

नौसेना संचालन महानिदेशक वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने बताया कि त्रिशूल अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच इंटर-सर्विस कोऑर्डिनेशन और टेक्नोलॉजिकल इंटीग्रेशन को मजबूत करना है। उन्होंने इसे एक मल्टी-डोमेन ऑपरेशन बताया, जिसमें साइबर और स्पेस वारफेयर भी शामिल है।

वहीं, पाकिस्तान ने भी अरब सागर में फायरिंग ड्रिल्स के लिए नोटाम और नेवेरिया चेतावनियां जारी की हैं, जो आंशिक रूप से ‘त्रिशूल’ से ओवरलैप करती हैं।

थिएटर कमांड का ट्रायल!

‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ थिएटर कमांड व्यवस्था को लागू करने की दिशा में एक अहम अभ्यास माना जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत, एक ही कमांड के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के यूनिट्स एक साथ किसी विशेष क्षेत्र या ऑपरेशन में काम करेंगे।

इस अभ्यास के जरिए यह जांचा जा रहा है कि तीनों सेनाएं एक साथ कितनी सहजता और सटीकता से संयुक्त कार्रवाई कर सकती हैं। इसमें कमांड और कंट्रोल स्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन नेटवर्क, और हथियार प्रणालियों की कार्यक्षमता की भी समीक्षा होगी। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभ्यास भारत की सेनाओं की ‘जॉइंटनेस’ और इंटरऑपरेबिलिटी को और मजबूत करेगा।

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दो मोर्चों पर रणनीतिक संदेश

‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ और ‘त्रिशूल’ दोनों ही अभ्यास ऑपरेशन सिंदूर के बाद आयोजित किए जा रहे हैं। इस साल मई में भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पीओके में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए थे। उस ऑपरेशन ने भारतीय सेनाओं ने दुनिया के सामने साबित किया और यह दिखाया कि भारत किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए अब देर नहीं करता। अब ये दोनों अभ्यास उस तैयारी का विस्तार हैं, एक पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान के खिलाफ और दूसरा पूर्वी मोर्चे पर चीन के खिलाफ।

भारत के इन दोनों सैन्य अभ्यासों ‘त्रिशूल’ और ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ को एक साथ आयोजित करने का साफ मतलब है कि भारत अब दो फ्रंट वॉर की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। पूर्व में चीन के बढ़ते सैन्य निर्माण और पश्चिम में पाकिस्तान की गतिविधियों को देखते हुए यह तैयारी भारत की रणनीतिक सोच का हिस्सा है। भारतीय सेनाओं का यह संयुक्त अभ्यास न केवल पड़ोसी देशों को संदेश देता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत की सैन्य नीति अब “रिएक्टिव” नहीं, बल्कि “प्रोएक्टिव” हो चुकी है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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