📍कानपुर | 12 Aug, 2026, 11:39 AM
Kanpur Defence Manufacturing Hub: उत्तर प्रदेश अब केवल औद्योगिक और कृषि राज्य के तौर पर ही नहीं, बल्कि देश के तेजी से उभरते डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत कानपुर में रक्षा उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। छोटे हथियारों के लिए गोलियों के निर्माण से लेकर टैंक और आर्टिलरी सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले बड़े कैलिबर के एम्युनिशन तक, कानपुर अब स्वदेशी रक्षा उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की कानपुर स्थित एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में चल रहे विस्तार और बढ़ती उत्पादन क्षमता ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है। कंपनी का कहना है कि यहां निवेश, आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर उत्पादन के जरिए भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
Kanpur Defence Manufacturing Hub: कानपुर में बढ़ रहा डिफेंस इंडस्ट्री का दायरा
कानपुर के हाथीपुर इलाके में स्थापित अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की यूनिट आज देश की प्रमुख निजी रक्षा निर्माण सुविधाओं में गिनी जा रही है। हाल ही में आयोजित एक विशेष दौरे के दौरान कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आशीष राजवंशी ने यूनिट की मौजूदा क्षमता और विस्तार योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कंपनी पहले ही कानपुर में लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है। अब यूनिट के विस्तार के लिए करीब 250 एकड़ अतिरिक्त क्षेत्र विकसित करने की तैयारी चल रही है। इस विस्तार परियोजना में लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अलावा आने वाले वर्षों में लगभग 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश करने की योजना भी बताई गई।

रोजगार के अवसरों में हो रही बढ़ोतरी
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार का असर रोजगार पर भी दिखाई दे रहा है। वर्तमान में इस यूनिट में करीब 2,000 कुशल और अकुशल कर्मचारी कार्यरत हैं। उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स, मशीन ऑपरेशन और तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत विकसित हो रही अन्य औद्योगिक गतिविधियों का लाभ भी स्थानीय स्तर पर देखने को मिल रहा है। इससे कानपुर की औद्योगिक पहचान को नया आयाम मिला है। (Kanpur Defence Manufacturing Hub)
सालाना 30 करोड़ राउंड गोलियां बनाने की तैयारी
कानपुर स्थित इस यूनिट में फिलहाल हर साल लगभग 15 करोड़ राउंड विभिन्न प्रकार की गोलियों का उत्पादन किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य इस उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 30 करोड़ राउंड सालाना तक पहुंचाना है।
यह गोलियां सेना, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न हथियारों के लिए तैयार की जाती हैं। अधिकारियों के अनुसार उत्पादन क्षमता बढ़ाने का उद्देश्य घरेलू मांग को पूरा करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। (Kanpur Defence Manufacturing Hub)

छोटे हथियारों से लेकर आर्टिलरी तक का बन रहा एम्युनिशन
इस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में कई प्रकार के एम्युनिशन का निर्माण और असेंबली की जा रही है। इसमें स्मॉल कैलिबर एम्युनिशन शामिल है, जिसका इस्तेमाल राइफल और अन्य छोटे हथियारों में होता है।
इसके साथ ही लार्ज कैलिबर एम्युनिशन का निर्माण भी किया जा रहा है, जिसका उपयोग टैंक और आर्टिलरी सिस्टम में किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि मीडियम कैलिबर एम्युनिशन के उत्पादन की तैयारी भी चल रही है। ऐसे एम्युनिशन का इस्तेमाल ऑटो कैनन और अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियों में किया जाता है।
ग्रेनेड उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोतरी
कंपनी ने ग्रेनेड निर्माण क्षमता बढ़ाने की योजना की भी जानकारी दी। इसके तहत 2027 तक सालाना 40 लाख ग्रेनेड उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रेनेड सैन्य अभियानों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों में शामिल हैं। इसलिए इनके स्वदेशी उत्पादन को रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी के अनुसार उत्पादन सुविधाओं को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। (Kanpur Defence Manufacturing Hub)

ऑपरेशन सिंदूर से मिला आत्मनिर्भरता का संदेश
सीईओ आशीष राजवंशी ने कहा कि हाल के वर्षों में हुए सैन्य अभियानों और वैश्विक परिस्थितियों ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी देश के लिए रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर होना कितना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह महसूस किया गया कि संकट की स्थिति में मित्र देश सहयोग के लिए तैयार हो सकते हैं, लेकिन उनकी अपनी रणनीतिक प्राथमिकताएं भी होती हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण सैन्य सामग्री की आपूर्ति में देरी की संभावना बनी रहती है। इसी कारण भारत में ही गोला-बारूद और रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। (Kanpur Defence Manufacturing Hub)
अभय राइफल और प्रहार एलएमजी ने खींचा ध्यान
यूनिट में कई स्वदेशी हथियार प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया गया। इनमें अभय राइफल विशेष आकर्षण का केंद्र रही। अधिकारियों के अनुसार यह राइफल 5.56 एमएम और 9 एमएम दोनों प्रकार के एम्युनिशन का उपयोग करने में सक्षम है।
इसके अलावा प्रहार लाइट मशीन गन भी प्रदर्शित की गई। कंपनी का दावा है कि इस हथियार को भारतीय सेना से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। यहां पिस्टल, राइफल और मशीन गन की कई अन्य श्रेणियों को भी दिखाया गया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हो रही गुणवत्ता जांच
डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में अब आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। कानपुर की इस यूनिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित निरीक्षण प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक केस-लाइन इंस्पेक्शन टेक्नोलॉजी की मदद से प्रत्येक एम्युनिशन केस की जांच की जाती है। यह सिस्टम निर्धारित मानकों के अनुसार उत्पाद की गुणवत्ता का मूल्यांकन करता है। इससे निरीक्षण प्रक्रिया अधिक तेज और सटीक बनती है तथा उत्पादन में एकरूपता बनाए रखने में मदद मिलती है। (Kanpur Defence Manufacturing Hub)
नाटो मानकों के अनुरूप हो रहा निर्माण
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि यहां तैयार किए जा रहे कई प्रकार के एम्युनिशन और आर्टिलरी सिस्टम नाटो मानकों के अनुरूप बनाए जा रहे हैं।
नाटो मानकों का पालन करने का मतलब है कि उत्पादों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप रखा जाता है। इससे हथियार प्रणालियों के बीच बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित होती है और प्रदर्शन में एकरूपता बनी रहती है।
अधिकारियों के अनुसार कानपुर में तैयार किए जा रहे कुछ रक्षा उत्पादों के लिए मित्र देशों की ओर से भी रुचि दिखाई गई है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत विकसित हो रही यह क्षमता राज्य को देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्रों में शामिल कर रही है, जहां गोला-बारूद, छोटे हथियार और एडवांस मिलिट्री सिस्टम्सके उत्पादन पर तेजी से काम हो रहा है। (Kanpur Defence Manufacturing Hub)
Author
हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।





