📍नई दिल्ली | 2 Nov, 2026, 12:51 PM
Indian Navy Project 28A: भारतीय नौसेना को प्रोजेक्ट 28ए के तहत आठ नए नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट मिलने का रास्ता साफ हो गया है। रक्षा मंत्रालय ने 2 नवंबर को आठ युद्धपोतों के निर्माण के लिए 53,866.50 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए। यह करार कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) के साथ किया गया है। इन नए युद्धपोतों को समुद्री निगरानी, दुश्मन के जहाजों के खिलाफ कार्रवाई, पनडुब्बियों का पता लगाने और तटीय इलाकों की सुरक्षा जैसे मिशन के लिए तैयार किया जाएगा।
इस प्रोजेक्ट के तहत कोलकाता स्थित जीआरएसई पांच युद्धपोत बनाएगा, जबकि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड को तीन युद्धपोत बनाने की जिम्मेदारी मिली है। इन जहाजों का डिजाइन भारतीय नौसेना ने तैयार किया है और इनका निर्माण भारतीय सरकारी शिपयार्ड में किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट देश में स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
Indian Navy Project 28A: 53,866 करोड़ रुपये का है पूरा प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट 28ए के तहत भारतीय नौसेना के आठ नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट बनाने की योजना को पिछले महीने 29 अक्टूबर को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) से मंजूरी मिली थी। इसके बाद चार दिन के भीतर 2 नवंबर को दोनों शिपयार्ड के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए गए।
इस प्रोजेक्ट को जून 2022 में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) से एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) मिला था। उस समय इसकी अनुमानित लागत करीब 36,000 करोड़ रुपये थी। अंतिम मंजूरी और कॉन्ट्रैक्ट के समय तक कुल कीमत बढ़कर 53,866.50 करोड़ रुपये हो गई है।
एओएन का मतलब है कि सेना या नौसेना की किसी रक्षा खरीद की जरूरत को शुरुआती मंजूरी मिल गई है। इसके बाद तकनीकी जांच, टेंडर, कीमत पर बातचीत और दूसरी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।
इस प्रोजेक्ट की एक खास बात यह है कि जहाजों का डिजाइन भारतीय नौसेना ने तैयार किया है। वहीं, निर्माण के लिए सरकारी शिपयार्ड का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए किया गया है।
🇮🇳⚓ Indian Navy’s Project 28A: ₹53,866 Crore Deal for 8 Next-Generation Corvettes!…
The Ministry of Defence has signed contracts worth ₹53,866.50 crore with GRSE and Goa Shipyard Limited (GSL) to build eight Next-Generation Corvettes for the Indian Navy.
The deal follows the Cabinet Committee on Security’s (CCS) approval on 29 October 2026 for the project, estimated to cost over ₹40,000 crore at the approval stage. Under the contracts, GRSE will build five corvettes, while GSL will construct three.
The indigenously designed warships will feature advanced weapons, missiles and sensors for air, surface and subsurface operations. The first corvette is expected to be delivered by 2030.
The project will strengthen India’s maritime combat capabilities, boost indigenous warship manufacturing and generate employment across shipyards and supporting industries.
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36,000 करोड़ से बढ़कर 53,866 करोड़ रुपये हुई कीमत
जून 2022 जब इस प्रोजेक्ट को डीएसी से एओएन मिला था तब इसकी शुरुआती अनुमानित लागत करीब 36,000 करोड़ रुपये थी। अंतिम मंजूरी के समय इसकी लागत 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई। वहीं, अब रक्षा मंत्रालय ने आठ युद्धपोतों के लिए कुल 53,866.50 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस तरह शुरुआती अनुमान की तुलना में कुल कीमत में करीब 17,866.50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। (Indian Navy Project 28A)
क्या होते हैं नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट?
कॉर्वेट एक तरह के छोटे और तेज युद्धपोत होते हैं। इनका इस्तेमाल समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा, दुश्मन के जहाजों के खिलाफ कार्रवाई और दूसरे नौसैनिक जहाजों को सुरक्षा देने जैसे कामों में किया जाता है।
कॉर्वेट का आकार आम तौर पर डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट जैसे बड़े युद्धपोतों से छोटा होता है। इसके बावजूद इनमें आधुनिक रडार, हथियार और सेंसर लगाए जा सकते हैं। इनकी मदद से समुद्र में अलग-अलग तरह के मिशन पूरे किए जा सकते हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के नए कॉर्वेट को एयर, सरफेस और सब-सरफेस यानी हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे मौजूद खतरों से जुड़े ऑपरेशन करने के लिए तैयार किया जाएगा।
इन जहाजों में आधुनिक मिसाइलों, हथियारों और सेंसर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। ये युद्धपोत बड़े फ्रिगेट और डिस्ट्रॉयर के साथ मिलकर काम कर सकेंगे। जरूरत के अनुसार इन्हें अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में स्वतंत्र मिशन के लिए भी तैनात किया जा सकता है। (Indian Navy Project 28A)
करीब 2,000 टन वजन और 30 नॉट की रफ्तार
इस प्रोजेक्ट के तहत नए कॉर्वेट का डिस्प्लेसमेंट करीब 2,000 टन, अधिकतम रफ्तार लगभग 30 नॉट और समुद्री रेंज करीब 4,000 नॉटिकल मील होगी। एक नॉट का मतलब एक समुद्री मील प्रति घंटा होता है। 30 नॉट की रफ्तार करीब 55.6 किलोमीटर प्रति घंटा के बराबर है। वहीं, 4,000 नॉटिकल मील की दूरी लगभग 7,408 किलोमीटर होती है। (Indian Navy Project 28A)
समुद्री निगरानी और पनडुब्बियों के खिलाफ ऑपरेशन
इन कॉर्वेट की एक प्रमुख भूमिका समुद्री क्षेत्र में निगरानी करना होगी। समुद्र में आने-जाने वाले जहाजों पर नजर रखना और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना नौसेना के महत्वपूर्ण कामों में शामिल है।
इसके अलावा, इन जहाजों को एंटी-सरफेस वॉरफेयर यानी समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार किया जाएगा।
एंटी-सबमरीन वॉरफेयर में पनडुब्बियों का पता लगाना, उनकी गतिविधियों पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करना है। इसके लिए सोनार जैसे सेंसर अहम होते हैं। सोनार पानी के भीतर ध्वनि तरंगों की मदद से आसपास की वस्तुओं का पता लगाने में इस्तेमाल किया जाता है।
नए कॉर्वेट में आधुनिक सेंसर और हथियारों का एकीकरण किया जाएगा। इससे जहाजों को अलग-अलग तरह के समुद्री ऑपरेशन करने के लिए तैयार किया जा सकेगा। इनकी भूमिका तटीय इलाकों की सुरक्षा, समुद्री मार्गों की निगरानी और दूसरे नौसैनिक जहाजों को सुरक्षा देने वाले एस्कॉर्ट मिशन में भी होगी। (Indian Navy Project 28A)
ब्रह्मोस मिसाइल से होंगे लैस
नए कॉर्वेट में आधुनिक मिसाइलों, हथियारों और सेंसर सिस्टम को शामिल किया जाएगा। इसमें आठ ब्रह्मोस मिसाइलें, वीएल-एसआरएसएएम एयर डिफेंस मिसाइलों और 76 एमएम नौसैनिक तोप जैसे हथियार शामिल हैं।
ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसका इस्तेमाल समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों और अन्य निर्धारित लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है।
वीएल-एसआरएसएएम एक वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम है। इसका इस्तेमाल हवाई खतरों से बचाव के लिए किया जाता है। वर्टिकल लॉन्च सिस्टम में मिसाइल को जहाज पर लगे लॉन्चर से ऊपर की ओर छोड़ा जाता है।
इन जहाजों में आधुनिक रडार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम जैसी तकनीकों की भूमिका भी अहम होगी। कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम अलग-अलग सेंसर से मिलने वाली जानकारी को एक साथ जोड़कर ऑपरेटरों को समुद्र में मौजूद जहाजों और संभावित खतरों की स्थिति समझने में मदद करता है। (Indian Navy Project 28A)
स्वदेशी शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री को मिलेगा काम
आठ कॉर्वेट का निर्माण से भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर और रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों को भी काम मिलेगा।
जीआरएसई और जीएसएल के साथ निजी शिपयार्ड, भारतीय उद्योगों और माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज यानी एमएसएमई की भी इस प्रोजेक्ट में भूमिका होगी।
युद्धपोत बनाने के लिए अलग-अलग तरह के उपकरणों, मशीनों, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, धातु के हिस्सों और दूसरे तकनीकी सामान की जरूरत होती है। इनकी सप्लाई में कई भारतीय कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अगले 10 साल में इस प्रोजेक्ट से शिपयार्ड में करीब 72 लाख पर्सन-डेज और सहायक उद्योगों तथा एमएसएमई में करीब 460 लाख पर्सन-डेज का रोजगार पैदा होने का अनुमान है। रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट में भारत में बने सामान, स्वदेशी तकनीक और भारतीय विशेषज्ञता के इस्तेमाल पर जोर दिया है। (Indian Navy Project 28A)
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