📍विशाखापत्तनम | 6 Oct, 2026, 6:48 PM
INS Surya Fleet Support Ship: भारतीय नौसेना की समुद्र में लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने की क्षमता को बड़ी ताकत मिली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) में देश के पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-1) ‘आईएनएस सूर्य’ को लॉन्च किया। इसी कार्यक्रम में पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप (एफएसएस-5) की कील भी रखी गई और शिपयार्ड के एडवांस स्लिपवे-4 तथा 300 टन क्षमता वाले गोलियाथ क्रेन का उद्घाटन किया गया।
INS Surya Fleet Support Ship: राजनाथ सिंह ने बताया तीन उपलब्धियों का महत्व
इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस दिन हुई तीनों उपलब्धियों का अपना अलग महत्व है। उन्होंने कहा, “एफएसएस-1 की लॉन्चिंग उपलब्धि का प्रतीक है, एफएसएस-5 की कील रखना हमारे संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे हमारी बढ़ती क्षमता का प्रतीक है।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि एचएसएल केवल जहाज नहीं बना रहा, बल्कि भारत की समुद्री शक्ति की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। उन्होंने 1948 में स्वतंत्र भारत में बने पहले जहाज ‘जल उषा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का समुद्र से संबंध हजारों साल पुराना है और देश की समुद्री विरासत हमेशा मजबूत रही है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि रक्षा मंत्रालय के अधीन आने के बाद एचएसएल को वर्ष 2025 में मिनीरत्न कैटेगरी-1 का दर्जा मिला, जो उसके लगातार सुधार और बेहतर प्रदर्शन का प्रमाण है।
विशाखापत्तनम को समुद्री औद्योगिक हब बनाने पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि विशाखापत्तनम के पास पूर्वी नौसैनिक कमान, नेवल डॉकयार्ड, हिंदुस्तान शिपयार्ड और प्रमुख बंदरगाह जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि इन सभी क्षमताओं को जोड़कर विशाखापत्तनम को देश का प्रमुख मैरीटाइम इंडस्ट्रियल हब बनाया जा सकता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश के एमएसएमई, विश्वविद्यालय, स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी कंपनियां इस मिशन में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने एक ऐसा समुद्री इकोसिस्टम विकसित करने की बात कही जिसमें रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक्स, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस तकनीक शामिल हों। (INS Surya Fleet Support Ship)
आत्मनिर्भरता से आगे वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर फोकस
राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण है, लेकिन अब भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय शिपयार्ड को गुणवत्ता, लागत, तकनीक, समय पर डिलीवरी और विश्वसनीयता के मामले में दुनिया के अग्रणी शिपयार्ड के बराबर खड़ा होना चाहिए।
रक्षा मंत्री ने एचएसएल को समय पर डिलीवरी, स्वदेशी डिजाइन क्षमता, मजबूत सप्लाई चेन, कुशल मानव संसाधन और बेहतर उत्पादकता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। (INS Surya Fleet Support Ship)
क्या है फ्लीट सपोर्ट शिप और क्यों है जरूरी?
फ्लीट सपोर्ट शिप किसी भी आधुनिक नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म माना जाता है। इसका मुख्य काम समुद्र में तैनात युद्धपोतों को ईंधन, गोला-बारूद, खाद्य सामग्री, स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना होता है।
जब नौसेना के युद्धपोत लंबे समय तक समुद्र में ऑपरेशन करते हैं, तो उन्हें बार-बार बंदरगाह लौटने की जरूरत नहीं पड़ती। फ्लीट सपोर्ट शिप समुद्र में ही रीफ्यूलिंग और री-सप्लाई की सुविधा देता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए ऐसे जहाज नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता और एंड्योरेंस को काफी मजबूत करेंगे। (INS Surya Fleet Support Ship)

‘आईएनएस सूर्य’ की खासियतें
एफएसएस-1 को आधिकारिक रूप से ‘आईएनएस सूर्य’ नाम दिया गया है। इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण के साथ तैयार किया है। यह विशाल जहाज बंगाल की खाड़ी में ऑपरेशन करेगा।
आईएनएस सूर्य में बड़ी मात्रा में कार्गो और फ्लूइड स्टोरेज क्षमता दी गई है। जहाज में ऑनबोर्ड फर्स्ट-लाइन मेंटेनेंस वर्कशॉप मौजूद हैं, जिससे समुद्र में ही कई तकनीकी मरम्मत कार्य किए जा सकेंगे।
इसमें मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर ऑपरेशन के लिए हेलीकॉप्टर डेक बनाया गया है। साथ ही जहाज में आत्मरक्षा के लिए आधुनिक सेल्फ-डिफेंस सिस्टम भी लगाए गए हैं। (INS Surya Fleet Support Ship)
भारतीय नौसेना को मिलेगा बड़ा लॉजिस्टिक सपोर्ट
आधुनिक नौसैनिक अभियानों में केवल युद्धपोतों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उन्हें लगातार सपोर्ट देने वाली लॉजिस्टिक क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है।
फ्लीट सपोर्ट शिप युद्धपोतों, डेस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और एयरक्राफ्ट कैरियर को लंबे समय तक समुद्र में सक्रिय बनाए रखने में मदद करते हैं। इससे नौसेना की पहुंच दूरदराज के समुद्री क्षेत्रों तक बनी रहती है।
भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। ऐसे में आईएनएस सूर्य जैसे प्लेटफॉर्म नौसेना को लंबे समय तक मिशन जारी रखने में मदद देंगे। (INS Surya Fleet Support Ship)
एचएसएल में बढ़ी जहाज निर्माण क्षमता
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने एडवांस स्लिपवे-4 और 300 टन क्षमता वाले गोलियाथ क्रेन का भी उद्घाटन किया।
स्लिपवे-4 को और मजबूत और बविस्तारित किया गया है ताकि एचएसएल अब 45,000 डेडवेट टन (डीडब्ल्यूटी) तक के बड़े जहाजों का निर्माण और लॉन्च कर सके।
वहीं नया 300 टन गोलियाथ क्रेन एलएंडटी जियोस्ट्रक्चर और कोनेक्रेन्स ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार किया है।
यह क्रेन पीएलसी कंट्रोल, वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव, टैंडम लिफ्टिंग, रिमोट डायग्नोस्टिक्स और कंडीशन मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस है। इसकी मदद से बड़े और भारी मॉड्यूल्स को तेजी और सटीकता के साथ उठाया जा सकेगा। (INS Surya Fleet Support Ship)
आधुनिक ब्लॉक कंस्ट्रक्शन तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
दुनिया के प्रमुख शिपयार्ड अब मॉड्यूलर या ब्लॉक कंस्ट्रक्शन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसमें जहाज के अलग-अलग हिस्से पहले से तैयार किए जाते हैं और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा जहाज बनाया जाता है।
नई क्रेन और स्लिपवे की मदद से एचएसएल भी इसी आधुनिक निर्माण प्रक्रिया को और तेज गति से लागू कर सकेगा। इससे निर्माण समय कम होगा और बड़े जहाजों के उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी। (INS Surya Fleet Support Ship)
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