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भारतीय सेना ने दिया 225 स्वदेशी एफपीवी ड्रोन का ऑर्डर, 17,500 फीट की ऊंचाई पर किए सफल ट्रायल

लद्दाख और स्पीति में मुश्किल ट्रायल्स के बाद सेना ने स्वदेशी एफपीवी ड्रोन को दी मंजूरी, निगरानी और स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस को मिलेगी मजबूती...

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📍नई दिल्ली | 8 Oct, 2026, 4:55 PM

Indian Army FPV Drones: भारतीय सेना ने स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देते हुए 225 फर्स्ट पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन का ऑर्डर दिया है। खास बात यह है कि इन ड्रोन का फील्ड ट्रायल 17,500 फीट तक की ऊंचाई पर किया गया, जो भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण ऑपरेशनल वातावरण माना जाता है। जिसके बाद ऑर्डर देने का फैसला लिया गया।

यह खरीद ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर की सेनाएं छोटे, तेज, सस्ते और तेजी से तैनात होने वाले ड्रोन प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। भारतीय सेना भी पिछले कुछ सालों में हाई-एल्टीट्यूड इलाकों में ड्रोन बेस्ड सर्विलांस, लॉजिस्टिक्स और स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है।

Indian Army FPV Drones: लद्दाख और स्पीति में हुए कठिन परीक्षण

सेना ने ये ट्रायल मुख्य रूप से लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के स्पीति क्षेत्र जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में आयोजित किए थे। इन इलाकों को इसलिए चुना गया क्योंकि यहां का वातावरण वास्तविक सैन्य परिस्थितियों के काफी करीब माना जाता है।

ट्रायल के दौरान ड्रोन की उड़ान अवधि, सटीकता, रफ्तार, नियंत्रण क्षमता और कठिन मौसम में काम करने की क्षमता को परखा गया। सेना ने यह भी देखा कि ड्रोन कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में कितनी प्रभावी तरह से काम कर सकते हैं।

ऊंचाई पर ड्रोन उड़ाना क्यों मुश्किल है?

17,500 फीट की ऊंचाई पर ऑपरेशन करना किसी भी ड्रोन के लिए बड़ी चुनौती होती है। लगभग 15,000 फीट से ऊपर वायुमंडल में ऑक्सीजन और हवा का घनत्व काफी कम हो जाता है। जिससे मोटरों को पर्याप्त लिफ्ट और थ्रस्ट पैदा करने में मुश्किल होती है। इसका असर ड्रोन के प्रोपेलर, मोटर और बैटरी पर पड़ता है। इसके अलावा तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है, जिसका सीधा असर बैटरियों की क्षमता पर पड़ता है।

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इसके अलावा पहाड़ और घाटियां रेडियो सिग्नल को बाधित कर सकती हैं। कई बार ड्रोन और कंट्रोल स्टेशन के बीच वीडियो लिंक या कंट्रोल सिग्नल अचानक कमजोर पड़ जाते हैं। इसी कारण सेना हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल को बेहद महत्वपूर्ण मानती है। (Indian Army FPV Drones)

क्या होते हैं एफपीवी ड्रोन?

एफपीवी यानी फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन ऐसे सिस्टम होते हैं, जिनमें ऑपरेटर को ड्रोन के कैमरे से रियल टाइम वीडियो फीड मिलता है। इससे ड्रोन उड़ाने वाला व्यक्ति उसी तरह दृश्य देख सकता है जैसे वह खुद ड्रोन में बैठा हो।

इन ड्रोन का इस्तेामाल निगरानी, लक्ष्य पहचान, टोही मिशन और सामरिक अभियानों में किया जाता है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में एफपीवी ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है क्योंकि वे कम लागत में दुश्मन को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं।

हाल के सालों में विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में एफपीवी ड्रोन ने सैन्य रणनीतियों को काफी प्रभावित किया है। इनके जरिए सैनिक दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं और कठिन इलाकों में बिना मानव जोखिम के जानकारी जुटा सकते हैं। (Indian Army FPV Drones)

बता दें कि गुरुग्राम स्थित एयरोड्रोन रोबोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, इनोविजन लिमिटेड की युनिट है। कंपनी ड्रोन डिजाइन, निर्माण, प्रशिक्षण, रखरखाव और तकनीकी मदद मुहैया कराती है।

कंपनी का दावा है कि उसके मिलिट्री ड्रोन प्लेटफॉर्म मिलिट्री-हार्डेंड हैं और उनका सॉफ्टवेयर इन-हाउस बनाया जाता है। कंपनी कई तरह के एफपीवी ड्रोन बनाती करती है। इसके 5 इंच, 7 इंच और 10 इंच कैटेगरी के ड्रोन अलग-अलग पेलोड ले जा सकते हैं।

कुछ मॉडलों की टॉप स्पीड लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक है। कंपनी हाई-एल्टीट्यूड सर्विलांस ड्रोन जैसे “विक्राल” और “सर्वनेत्र” प्लेटफॉर्म भी बना रही है। (Indian Army FPV Drones)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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