📍नई दिल्ली | 12 Aug, 2026, 8:21 PM
Medium Transport Aircraft Program: भारतीय वायुसेना की पुराने होते ट्रांसपोर्ट विमानों के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत वाले 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमटीए) खरीदने के लिए औपचारिक टेंडर जारी कर दिया है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य चार दशक पुराने एएन-32 परिवहन विमानों को चरणबद्ध तरीके से बदलना और वायुसेना की सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता को मजबूत करना है।
इस प्रोग्राम की खास बात यह है कि इसमें भारतीय कंपनियां लीड रोल में रहेंगी, जबकि विदेशी कंपनियां तकनीकी साझेदार की भूमिका निभाएंगी। (Medium Transport Aircraft Program)
Medium Transport Aircraft Program: क्या है मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम?
यह प्रोजेक्ट भारतीय वायुसेना की लंबे समय से चल रही जरूरत से जुड़ी है। वायुसेना के पास मौजूद एएन-32 विमान 1980 के दशक से सेवा में हैं। इन विमानों ने सालों तक पहाड़ी इलाकों, सीमावर्ती क्षेत्रों और आपदा राहत अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन अब उनकी उम्र बढ़ने के कारण नए प्लेटफॉर्म की जरूरत महसूस की जा रही है।
मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम 18 से 30 टन पेलोड क्षमता वाले विमानों की कैटेगरी से जुड़ा है। यह कैटेगरी वायुसेना के हल्के ट्रांसपोर्ट विमान सी-295 और भारी एयरलिफ्टर सी-17 ग्लोबमास्टर के बीच मौजूद क्षमता अंतर को भरने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रक्षा मंत्रालय ने इसी जरूरत को देखते हुए पहले 2022 में आरएफआई जारी की थी। इसके बाद 2026 की शुरुआत में डिफेंस एक्विजिशन बोर्ड ने 60 विमानों की खरीद को मंजूरी दी थी। अब इसके लिए औपचारिक आरएफपी जारी कर दी गई है। (Medium Transport Aircraft Program)
किन कंपनियों के बीच है मुकाबला?
यह टेंडर भारतीय कंपनियों को जारी किया गया है, जिनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और महिंद्रा डिफेंस प्रमुख हैं।
इस प्रोजेक्ट में सबसे चर्चित दावेदार महिंद्रा डिफेंस और ब्राजील की एम्ब्रेयर की साझेदारी है। दोनों कंपनियां सी-390 मिलेनियम विमान की पेशकश कर रही हैं। यह आधुनिक ट्विन-जेट ट्रांसपोर्ट विमान है, जिसकी पेलोड क्षमता लगभग 26 टन है। इसकी अधिकतम गति करीब 870 किलोमीटर प्रति घंटा है।
दूसरी तरफ टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लॉकहीड मार्टिन मिलकर सी-130जे सुपर हरक्यूलिस को पेश कर रहे हैं। यह विमान पहले से ही भारतीय वायुसेना की सर्विस में है और विशेष अभियानों में इस्तेमाल होता है। वायुसेना के पास वर्तमान में 12 सी-130जे विमान मौजूद हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी छोटे और अस्थायी रनवे से भी ऑपरेशन करने की क्षमता है।
एचएएल भी इस प्रोजेक्ट में शामिल है। एचएएल किसी विदेशी मूल उपकरण निर्माता के साथ साझेदारी कर प्रस्ताव दे सकता है। (Medium Transport Aircraft Program)
भारत में बनेंगे अधिकांश विमान
इस प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्वदेशी निर्माण है। योजना के मुताबिक कुल 60 विमानों में से लगभग 20 फीसदी विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में सीधे सप्लाई किए जाएंगे। इसका मतलब है कि शुरुआती लगभग 12 विमान पूरी तरह तैयार अवस्था में वायुसेना को मिलेंगे।
बाकी करीब 48 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसके लिए भारतीय कंपनियां और फॉरेन ऑरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर जॉइंट वेंचर्स मॉडल पर काम करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी कंटेंट का टारगेट रखा है। इससे देश में एविएशन मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, मेंटेनेंस और रिपेयर सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा। (Medium Transport Aircraft Program)
किन मिशनों में होगा इस्तेमाल?
भारतीय वायुसेना इन विमानों का इस्तेमाल केवल सैनिकों और सामान की ढुलाई तक सीमित नहीं रखना चाहती। एमटीए प्लेटफॉर्म को बहुउद्देश्यीय भूमिका के लिए तैयार किया जाएगा।
वायुसेना चाहती है कि यह विमान जोरावर लाइट टैंक, एम-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर, ब्रह्मोस मिसाइल कैनिस्टर और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम जैसे भारी सैन्य उपकरणों को भी तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा सके।
इसके अलावा इन विमानों का इस्तेमाल सैनिकों की तुरंत तैनाती, मेडिकल इवैक्यूएशन, आपदा राहत अभियान और मानवीय सहायता मिशनों में भी किया जाएगा। (Medium Transport Aircraft Program)
लद्दाख और अरुणाचल जैसे इलाकों पर विशेष फोकस
भारतीय वायुसेना की प्रमुख जरूरतों में से एक ऊंचाई वाले इलाकों में तेज लॉजिस्टिक सपोर्ट है। लद्दाख, सियाचिन और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में सीमित रनवे और कठिन मौसम के कारण ट्रांसपोर्ट मिशन चुनौतीपूर्ण होते हैं।
इसी वजह से नए ट्रांसपोर्ट विमानों के लिए शॉर्ट रनवे और अनप्रिपेयर्ड एयरस्ट्रिप से ऑपरेशन की क्षमता को महत्वपूर्ण आवश्यकता माना गया है। ये विमान कम ऊंचाई और रात के समय भी मिशन पूरा करने में सक्षम होंगे।
एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की भी संभावना
वायुसेना इन विमानों को भविष्य में एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग प्लेटफॉर्म के रूप में भी इस्तेमाल करने की संभावना देख रही है। यदि ऐसा होता है तो यही विमान हवा में लड़ाकू विमानों को ईंधन उपलब्ध कराने का काम भी कर सकेंगे।
इससे वायुसेना को अलग से टैंकर विमान खरीदने की जरूरत कम हो सकती है और मौजूदा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा। (Medium Transport Aircraft Program)
वायुसेना के आधुनिकीकरण का हिस्सा
यह प्रोजेक्ट भारतीय वायुसेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। वायुसेना पहले ही लगभग 70 सी-295 ट्रांसपोर्ट विमान शामिल करने की प्रक्रिया में है, जिनमें अधिकांश का निर्माण भारत में किया जा रहा है।
इसके साथ ही वायुसेना 114 नए मल्टीरोल फाइटर जेट्स की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए 100 से अधिक नए ट्रेनर विमानों की जरूरत पर भी काम चल रहा है, ताकि बढ़ती फाइटर स्क्वाड्रनों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
60 नए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की यह प्रोजेक्ट भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट फ्लीट में सबसे बड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक मानी जा रही है, जिसमें स्वदेशी निर्माण, हाई पेलोड क्षमता और सामरिक एयरलिफ्ट जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया गया है। (Medium Transport Aircraft Program)
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