📍लेह, लद्दाख | 6 Dec, 2025, 3:38 PM
BRO Projects: रविवार का दिन भारत की सीमा सुरक्षा और रणनीतिक तैयारियों के लिए बेहद अहम होने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 7 दिसंबर को सुबह 11 बजे लद्दाख की श्योक टनल से 150 सामरिक महत्व की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। इनमें बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन द्वारा तैयार की गई 125 परियोजनाएं भी शामिल हैं, जबकि बाकी परियोजनाएं डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अन्य सरकारी एजेंसियों ने पूरी की हैं। इससे पहले 2023 में बीआरओ ने 125 प्रोजेक्ट्स का रिकॉर्ड बनाया था।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश की सीमा पर तैनात सैनिकों की आवाजाही को किसी भी मौसम में सुरक्षित बनाना है। यह आयोजन लद्दाख में बने कट-एंड-कवर श्योक टनल से किया जाएगा। यह टनल 920 मीटर लंबी है जो लद्दाख की एक बेहद महत्वपूर्ण सामरिक सड़क पर बनाई गई है। यह इलाका अक्सर भारी बर्फबारी, लैंडस्लाइड और एवलांच की वजह से बंद हो जाता है। ऐसे में यह टनल सैनिकों और स्थानीय लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जा रही है।
रविवार को उद्घाटित होने वाली परियोजनाओं में 28 सड़कें, 93 पुल और 4 स्ट्रेटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। ये परियोजनाएं देश के 7 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में फैली हुई हैं, जिनमें लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम हैं। बीआरओ ने इन कठिन इलाकों में काम करके यह दिखाया है कि चाहे ऊंचाई कितनी भी ज्यादा हो, चाहे मौसम कितना भी सख्त, इंफ्रास्ट्रक्चर को समय पर पूरा करना उसकी प्राथमिकता है।
वहीं, सड़क प्रोजेक्ट्स में जम्मू और कश्मीर में 02, लद्दाख में 08, राजस्थान में 04, अरुणाचल प्रदेश में 10, सिक्किम में 02, पश्चिम बंगाल में 01 और मिजोरम में 01 शामिल हैं, जिससे देश के कुछ सबसे मुश्किल इलाकों में कनेक्टिविटी में काफी सुधार होगा। पुलों में जम्मू और कश्मीर में 20, लद्दाख में 28, उत्तराखंड में 07, हिमाचल प्रदेश में 07, अरुणाचल प्रदेश में 20, सिक्किम में 08, पश्चिम बंगाल में 01 और मिजोरम में 02 शामिल हैं।
उत्तर और पूर्वी सीमाओं पर भारत की ऑपरेशनल ताकत बढ़ाने के लिए बीआरओ ने अरुणाचल प्रदेश में कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। सेला-चाबरेला-बीजेजी रोड, शंगेस्तर-सुलूला रोड, और कई बड़ी पुल परियोजनाएं अब तवांग और आसपास के फॉरवर्ड इलाकों को बेहतर और वैकल्पिक कनेक्टिविटी देती हैं। इन इलाकों में मौसम अक्सर खराब रहता है, इसलिए मजबूत सड़कें सेना की तेसी से तैनाती के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
सिक्किम में कालेप-गाइगोंग रोड, रबम चू ब्रिज और संकलंग ब्रिज जैसे प्रोजेक्ट आपदा के बाद भी इलाके में संपर्क बनाए रखते हैं। मिजोरम में लौंगटलाई–दिलतलांग–परवा गलियारे में बने नए पुलों और सड़कों ने बांग्लादेश और म्यांमार की सीमा के नजदीकी गांवों को बेहतर संपर्क दिया है।
राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में कई रेगिस्तानी, बर्फीले और पहाड़ी इलाकों में बीआरओ ने महत्वपूर्ण पुल और सड़कें पूरी की हैं, जिनसे फॉरवर्ड पोस्टों तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हुआ है।
रक्षा मंत्री के रविवार के इस बड़े कार्यक्रम की एक और खास बात यह होगी कि चंडीगढ़ में तैयार किया गया थ्री-डी प्रिंटेड एचएडी कॉम्प्लेक्स भी राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। यह आधुनिक रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक का उदाहरण है, जो भविष्य में फास्ट-ट्रैक निर्माण क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा।
रक्षा मंत्री ने पहले ही बीआरओ के काम की सराहना की है। उन्होंने कहा है कि भारत की सीमा सुरक्षा का आधार मजबूत और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर है, और बीआरओ ने इसे अपनी प्राथमिकता बनाकर लगातार देश को नई उपलब्धियां दी हैं। पिछले दो सालों में बीआरओ कुल 356 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स राष्ट्र को समर्पित कर चुका है। सरकार ने बीआरओ का बजट भी बढ़ाकर 7,146 करोड़ रुपये कर दिया है, ताकि हिमालयी, रेगिस्तानी और कठिन इलाकों में निर्माण कार्य और तेज हो सके।
बीआरओ के निदेशक जनरल लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन का कहना है कि संगठन अब देश की सबसे कठिन और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा करने वाला प्रमुख संस्थान बन गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इन कामों में अधिकारियों, इंजीनियरों, सुपरवाइजरों और हजारों मजदूरों की अथक मेहनत लगी है, जिन्होंने मौसम और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद काम को समय पर पूरा किया।
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