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अरिहंत क्लास की चौथी न्यूक्लियर पनडुब्बी S4 को मिल सकता है INS “अरिसुदन” नाम, ऐसे रखे जाते हैं नेवी में नाम

Arihant Class Submarine S4

Arihant Class Submarine S4: भारत की अरिहंत क्लास की चौथी और आखिरी न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन यानी एस4 के नाम का खुलासा हो गया है। इसका नाम आईएनएस अरिसुदन रखे जाने की चर्चा हो रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पनडुब्बी को पिछले साल 16 अक्टूबर को लॉन्च किया था। अब इसका औपचारिक नामकरण भारतीय नौसेना की तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

Arihant Class Submarine S4: शिप-नेमिंग कमिटी करेगी सिफारिश

सूत्रों के मुताबिक इस सबमरीन का औपचारिक नामकरण भारतीय नौसेना की शिप-नेमिंग कमिटी की सिफारिश के बाद होगा। इसके बाद रक्षा मंत्रालय की मंजूरी ली जाएगी और अंत में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद नाम को औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह पनडुब्बी साल 2027 में भारतीय नौसेना में शामिल हो सकती है। (Arihant Class Submarine S4)

Arihant Class Submarine S4: अरिधमन का आखिरी सी-ट्रायल

अरिहंत क्लास की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस अरिधमन अपने आखिरी सी-ट्रायल के दौर में है और इसके 2026 के पहले हिस्से में कमीशन होने की उम्मीद है। इसके बाद एस4 यानी आईएनएस अरिसुदन के शामिल होने के बाद भारत का एसएसबीएन बेड़ा और मजबूत हो जाएगा। यह क्लास भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का समुद्री हिस्सा है, जो जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता देता है। (Arihant Class Submarine S4)

Arihant Class Submarine S4: भारत के सीक्रेट एटीवी प्रोजेक्ट का हिस्सा

यह सबमरीन भारत के बेहद सीक्रेट और लंबे समय से चल रहे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी व्हीकल यानी एटीवी प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका मकसद भारत को समुद्र से परमाणु जवाबी हमला करने की पूरी क्षमता देना है। इस परियोजना की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत को स्वदेशी न्यूक्लियर पनडुब्बी तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना था। इन पनडुब्बियों का निर्माण विशाखापत्तनम के शिपबिल्डिंग सेंटर में किया गया है। रणनीतिक भाषा में कहें तो इसे भारत की “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” की रीढ़ माना जाता है। (Arihant Class Submarine S4)

Arihant Class Submarine S4: नौसेना में इस तरह रखे जाते हैं नाम

नौसेना में जहाजों और पनडुब्बियों के नाम रखने की परंपरा भी काफी दिलचस्प है। जहां अरिहंत क्लास यानी एसएसबीएन पनडुब्बियों के नाम हमेशा एक खास परंपरा के तहत रखा जाता है। संस्कृत में “अरि” का मतलब दुश्मन होता है और “हंत”, “घात”, “धमन” या “सुदन” जैसे शब्द दुश्मन के विनाश से जुड़े हैं। इसी वजह से इस क्लास की पहली पनडुब्बी का नाम आईएनएस अरिहंत रखा गया, जिसका अर्थ है दुश्मनों का संहार करने वाला। इसके बाद दूसरी पनडुब्बी आईएनएस अरिघात और तीसरी आईएनएस अरिधमन के नाम इसी परंपरा में रखे गए। अब एस4 के लिए “अरिसुदन” नाम भी इसी थीम के तहत चुना गया है। (Arihant Class Submarine S4)

वहीं डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन अपने पुराने डी-कमीशंड पूर्वजों के नाम पर रखी जाती हैं। कलवरी क्लास की सभी सबमरीन पुराने रूसी फॉक्सट्रॉट क्लास के नाम पर हैं। जबकि गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयरों के नाम भारतीय शहरों पर रखे जाते हैं। फ्रिगेट जहाजों के नाम नदियों और पर्वतों पर आधारित होते हैं। (Arihant Class Submarine S4)

Arihant Class Submarine S4: के-15 सागरिका मिसाइलों से लैस

इस समय भारतीय नौसेना के पास दो न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन पूरी तरह ऑपरेशनल हैं। आईएनएस अरिहंत को 2016 में कमीशन किया गया था और और उसने 2018 में अपनी पहली डिटरेंट पेट्रोल पूरी की थी। यह के-15 सागरिका मिसाइलों से लैस है, जिनकी मारक क्षमता लगभग 750 किलोमीटर है। इसके बाद आने वाली सभी पनडुब्बियां साइज में बड़ी हैं और इनमें लंबी दूरी की के-4 बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की जाएंगी। के-4 मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 3,500 किलोमीटर है और इसके ट्रायल डीआरडीओ और स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड कर रहे हैं। (Arihant Class Submarine S4)

एस4 “अरिसुदन” है सबसे पावरफुल

वहीं, तकनीकी तौर पर एस4 अरिहंत क्लास की अब तक की सबसे ताकतवर पनडुब्बी मानी जा रही है। इसका वजन करीब 7,000 टन बताया जा रहा है, जो पहली दो पनडुब्बियों से लगभग 1,000 टन ज्यादा है। इस बड़े साइज का फायदा यह है कि इसमें ज्यादा मिसाइलें और ज्यादा एडवांस सिस्टम लगाए जा सकते हैं। इसमें आठ के-4 मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। लंबी रेंज की वजह से अब भारतीय सबमरीन को दुश्मन के तट के करीब जाने की जरूरत नहीं होगी और वे सुरक्षित इलाकों से ही अपने टारगेट को तबाह कर सकती हैं। यह पनडुब्बी न्यूक्लियर रिएक्टर से चलती है, इसलिए इसकी रेंज अनलिमिटेड मानी जाती है। यानी जब तक खाने-पीने का सामान है, यह महीनों तक समुद्र में छिपकर रह सकती है। (Arihant Class Submarine S4)

Arihant Class Submarine S4: भारत की पॉलिसी ‘नो फर्स्ट यूज’

न्यूक्लियर पनडुब्बियां भारत की सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी का सबसे मजबूत हिस्सा मानी जाती हैं। भारत की न्यूक्लियर नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ पर आधारित है, यानी भारत पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। ऐसे में अगर किसी स्थिति में देश पर परमाणु हमला होता है, तो समुद्र में तैनात पनडुब्बियां सुरक्षित रहते हुए जवाबी हमला कर सकती हैं।

चीन भी भले ही “नो फर्स्ट यूज” की बात करता हो, लेकिन पाकिस्तान की नीति इससे अलग है और वह पहले इस्तेमाल की बात कहता रहा है। ऐसे में भारत के लिए मजबूत सेकंड स्ट्राइक क्षमता बेहद जरूरी हो जाती है।

अरिहंत क्लास के बाद भारत दो स्वदेशी न्यूक्लियर-पावर्ड अटैक सबमरीन यानी एसएसएन पर भी काम कर रहा है। इस परियोजना को पी-77 नाम दिया गया है, जिसे अक्टूबर 2024 में सरकार की मंजूरी मिली थी। इसके अलावा रूस से अकुला क्लास की एक न्यूक्लियर अटैक सबमरीन को लीज पर लेने की योजना भी है, जो 2028 तक भारत को मिल सकती है। खबर यह भी है कि रूस ने एक और ब्लू-वॉटर सबमरीन लीज पर देने का ऑफर दिया है। (Arihant Class Submarine S4)

LAC के मिडिल सेक्टर में भारतीय सेना ने बदली रणनीति, चीन की बढ़ती चालों से सतर्क हुआ भारत

Indian Army Middle Sector LAC
(File Photo)

Indian Army Middle Sector: वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के मध्य सेक्टर में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारतीय सेना ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव किए हैं। सीमा के इस हिस्से में चीन न केवल तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है, बल्कि चीनी सेना ने पेट्रोलिंग का तरीका भी बदला है। जिसे देखते हुए सेना अब इस सेक्टर को लेकर पहले से कहीं ज्यादा प्रोएक्टिव अप्रोच अपना रही है।

Indian Army Middle Sector: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से जुड़ा हुआ है मिडिल सेक्टर

मिडिल सेक्टर एलएसी का वह हिस्सा है, जो मुख्य रूप से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से जुड़ा हुआ है। लंबे समय तक इस सेक्टर को शांत और स्थिर माना जाता रहा है। साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प से पहले तक यह धारणा थी कि मिडिल सेक्टर में हालात नियंत्रण में हैं। लेकिन गलवान की घटना के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। इसके बाद चीन की गतिविधियों में साफ तौर पर बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ी है। (Indian Army Middle Sector)

बीते कुछ सालों में चीन ने मिडिल सेक्टर के पास तेजी से सड़कें, ट्रैक, ब्रिज और लॉजिस्टिक फैसिलिटी तैयार की हैं। इन निर्माण कार्यों की वजह से पीएलए की तैनाती तो बढ़ी ही है, साथ ही मूवमेंट भी तेजी से बढ़ा है। इससे चीन की सेना को कम समय में ज्यादा तादाद में सैनिकों और हथियारों को सीमा तक पहुंचाने में आसानी हो रही है। भारतीय सेना इसे केवल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट नहीं, बल्कि संभावित सैन्य तैयारी के तौर पर देख रही है। (Indian Army Middle Sector)

सेना अधिकारियों का कहना है कि मिडिल सेक्टर की चुनौतियां बाकी सेक्टरों से अलग हैं। यहां का इलाका बेहद दुर्गम है। ऊंचे पहाड़, घने जंगल, सीमित सड़क नेटवर्क और दूर-दूर आबादी इस इलाके की खास पहचान है। इसके साथ ही यह इलाका पर्यावरण के तौर पर भी संवेदनशील है। इन सब वजहों से यहां सैन्य तैनाती और लॉजिस्टिक सपोर्ट अपने आप में कठिन काम है। हाल के समय में इस इलाके में ग्रे-जोन एक्टिविटी भी बढ़ी है, यानी चीन ने ऐसे कदम भी उठाए हैं, जो सीधे युद्ध जैसे नहीं लगते, लेकिन तनाव बढ़ाने का काम करते हैं। (Indian Army Middle Sector)

चीन की बदलती रणनीति को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी तैयारियों को नए सिरे से मजबूत करना शुरू कर दिया है। सर्विलांस सिस्टम को बेहतर किया गया है, फॉरवर्ड पोस्ट्स पर निगरानी बढ़ाई गई है और सैनिकों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही रियल टाइम इंटेलिजेंस पर खास ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सके। (Indian Army Middle Sector)

सेना ने यह भी सुनिश्चित किया है कि हाई एल्टीट्यूड एरिया में तैनात जवानों को बेहतर लॉजिस्टिक सपोर्ट मिले। तेजी से ट्रूप रोटेशन, राशन और जरूरी सामान की सप्लाई, और मेडिकल फैसिलिटी को मजबूत किया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि लंबे समय तक कठिन हालात में तैनात रहने के बावजूद सैनिकों की ऑपरेशनल क्षमता बनी रहे। (Indian Army Middle Sector)

इन तमाम चुनौतियों के बीच भारतीय सेना अब मिलिट्री और सिविल इंटीग्रेशन पर भी जोर दे रही है। इसी के मद्देनजर भारतीय सेना 7 जनवरी को देहरादून में एक अहम सेमिनार आयोजित कर रही है, जिसका नाम है ‘फोर्टिफाइंग हिमालय – ए प्रोएक्टिव मिलिट्री-सिविल फ्यूजन स्ट्रैटेजी इन मिडिल सेक्टर’। इस सेमिनार का आयोजन भारतीय सेना की 14 इन्फैंट्री डिवीजन कर रही है। (Indian Army Middle Sector)

इस सेमिनार में मिलिट्री लीडर्स, अकादमिक एक्सपर्ट्स और रणनीतिक मामलों के जानकार हिस्सा लेंगे। इसमें इस बात पर चर्चा होगी कि कैसे उत्तराखंड जैसे संवेदनशील इलाकों में मिलिट्री और सिविल कोऑर्डिनेशन के जरिए भारत अपने फ्रंटियर डिफेंस स्ट्रक्चर को और मजबूत बना सकता है। सड़क, कम्युनिकेशन, हेल्थ और लोकल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर सिविल एडमिनिस्ट्रेशन की भूमिका को भी इसमें अहम माना जा रहा है। (Indian Army Middle Sector)

रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन सीमा के पास ड्यूल-यूज फैसिलिटी भी तैयार कर रहा है, जिनका इस्तेमाल सिविल और मिलिट्री दोनों के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा साइबर प्रोबिंग, डिजिटल सर्विलांस और बॉर्डर विलेज का तेजी से मिलिट्रीकरण भी भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

भारतीय सेना ने जवाब में अपने सर्विलांस सिस्टम को और मजबूत किया है। वहीं, सेना अब रियल-टाइम इंटेलिजेंस पर विशेष जोर दे रही है। बॉर्डर इलाकों में सर्विलांस बढ़ाई गई है और फॉरवर्ड पोस्ट्स के बीच तालमेल को बेहतर किया गया है। इसके अलावा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लॉजिस्टिक सपोर्ट और सैनिकों की आवाजाही को अधिक सुचारू बनाया गया है। (Indian Army Middle Sector)

सेना के जवान पहनेंगे Adidas के जूते, हाई-परफॉर्मेंस शूज के लिए साइन किया MoU

Indian Armed Forces Adidas Shoes

Indian Armed Forces Adidas Shoes: दुनिया की जानी-मानी कंपनी एडिडास अब भारतीय सेनाओं के लिए जूते भी बनाएगी। ट्रूप कंफर्ट्स लिमिटेड (टीसीएल) ने दुनिया की जानी-मानी स्पोर्ट्सवियर कंपनी एडिडास इंडिया के साथ एक अहम समझौता किया है। यह मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) 2 जनवरी को कानपुर स्थित टीसीएल के मुख्यालय में साइन हुआ।

Indian Armed Forces Adidas Shoes: दौड़, ड्रिल, फिजिकल एक्सरसाइज में होंगे इस्तेमाल

इस एमओयू का मकसद भारतीय नौसेना समेत पूरे डिफेंस सेक्टर के लिए हाई-परफॉर्मेंस पीटी फुटवियर यानी फिजिकल ट्रेनिंग के लिए खास जूते तैयार करना है। इन जूतों का इस्तेमाल जवान रोजाना की दौड़, ड्रिल, फिजिकल एक्सरसाइज और ट्रेनिंग के दौरान करते हैं, ऐसे में इनका मजबूत, आरामदायक और लंबे समय तक टिकाऊ होना बेहद जरूरी होता है।

एमओयू पर टीसीएल की ओर से ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री कानपुर के सीजीएम डॉ. अनिल रंगा ने दस्तखत किए। वहीं एडिडास इंडिया की ओर से विजय चौहान और विवेक त्यागी ने दस्तखत किए। इस मौके पर भारतीय नौसेना के कंट्रोलर ऑफ लॉजिस्टिक्स वाइस एडमिरल रजत कपूर, टीसीएल के सीएमडी सुनील दाते और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। (Indian Armed Forces Adidas Shoes)

टीसीएल के तहत आने वाली ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री कानपुर लंबे समय से भारतीय सेना और अन्य बलों के लिए जूते और बूट बनाती रही है। यहां पहले से हाई एंकल बूट, रबर-पीयू सोल वाले बूट और कॉम्बैट बूट तैयार किए जाते हैं। अब कंपनी अपने प्रोडक्शन को एक नए स्तर पर ले जाना चाहती है, जिसमें आधुनिक पीटी शूज का निर्माण एक नई दिशा के तौर पर देखा जा रहा है। (Indian Armed Forces Adidas Shoes)

भारतीय नौसेना की ओर से बेहतर पीटी शूज की जरूरत सामने आने के बाद टीसीएल ने ऐसे पार्टनर की तलाश की, जो स्पोर्ट्स फुटवियर की टेक्नोलॉजी में माहिर हो। इसी वजह से एडिडास इंडिया को इस सहयोग के लिए चुना गया। एडिडास पहले से ही भारतीय नौसेना के मौजूदा पीटी शूज के डिजाइन और डेवलपमेंट में शामिल रही है, इसलिए उसका अनुभव इस प्रोजेक्ट में काम आएगा। (Indian Armed Forces Adidas Shoes)

इस साझेदारी के तहत टीसीएल और एडिडास मिलकर नए पीटी शूज के सैंपल तैयार करेंगे। इन सैंपल्स का फिजिकल और टेक्निकल इवैल्यूएशन किया जाएगा, ताकि यह तय किया जा सके कि जूते सेना के सख्त मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। तय समयसीमा के अंदर यह पूरा काम किया जाएगा, ताकि जवानों को जल्द से जल्द बेहतर क्वालिटी के जूते मिल सकें। (Indian Armed Forces Adidas Shoes)

हालांकि यह पहल भारतीय नौसेना की जरूरतों से शुरू हुई है, लेकिन इसका असर सिर्फ नौसेना तक सीमित नहीं रहेगा। टीसीएल के मुताबिक, ऐसे हाई-क्वालिटी पीटी शूज की जरूरत भारतीय सेना और वायुसेना को भी है। इसके अलावा गृह मंत्रालय के तहत आने वाले बलों और राज्य पुलिस बलों में भी ऐसे जूतों की मांग रहती है। भविष्य में आम नागरिकों के लिए जिम और फिटनेस के इस्तेमाल वाले जूतों के रूप में भी यह प्रोडक्ट बाजार में आ सकता है। (Indian Armed Forces Adidas Shoes)

टीसीएल के डायरेक्टर ऑपरेशंस राजीव शर्मा ने कहा कि इस सहयोग से कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को एक नया आयाम मिलेगा। उन्होंने कहा कि एडिडास जैसी ग्लोबल कंपनी के साथ काम करके यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश के जवानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्वालिटी का इक्विपमेंट मिले।

यह समझौता आत्मनिर्भर भारत की सोच के अनुरूप भी माना जा रहा है, क्योंकि जूते भारत में ही तैयार किए जाएंगे और विदेशी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए होगा। इससे न सिर्फ डिफेंस सेक्टर को फायदा मिलेगा, बल्कि कानपुर जैसे इंडस्ट्रियल सेंटर में रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। (Indian Armed Forces Adidas Shoes)

नेबरहुड फर्स्ट से वेस्ट एशिया तक; सेना प्रमुख देंगे रक्षा सहयोग को नई धार, इस देश से आकाश सिस्टम को लेकर हो सकती है चर्चा

Army Chief UAE-Sri Lanka Visit

Army Chief UAE-Sri Lanka Visit: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी 5 से 8 जनवरी 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात और श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत अपने मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग, सैन्य संपर्क और रणनीतिक समझ को और मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है।

Army Chief UAE-Sri Lanka Visit: 5 और 6 जनवरी को यूएई में सेना प्रमुख

पीआईबी की तरफ से जारी प्रेस सूचना के मुताबिक सेना प्रमुख की यात्रा की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात से होगी, जहां वे 5 और 6 जनवरी को विभिन्न सैन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। यूएई पहुंचने पर उन्हें वहां की लैंड फोर्सेज की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद वे यूएई सिक्योरिटी फॉर्सेस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और सेना के स्ट्रक्चर, भूमिका और क्षमताओं पर विस्तार से चर्चा होगी।

यूएई दौरे के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी कई अहम सैन्य ठिकानों का दौरा करेंगे और अधिकारियों व जवानों से बातचीत करेंगे। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन मुलाकातों का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच भरोसे और समझ को और मजबूत करना है। भारत और यूएई के बीच पहले से ही संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग के कई कार्यक्रम चल रहे हैं। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

Army Chief UAE-Sri Lanka Visit: यूएई के साथ डेजर्ट साइक्लोन एक्सरसाइज

हाल ही में भारत और यूएई के बीच मिलिट्री एक्सरसाइज डेजर्ट साइक्लोन का दूसरा संस्करण भी खत्म हुआ है, जो 18 से 30 दिसंबर 2025 तक अबू धाबी के अल-हमरा ट्रेनिंग सिटी में हुआ था। इसमें भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट से 45 जवान और यूएई की ओर से 53 मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री बटालियन ने हिस्सा लिया था। इस एक्सरसाइज में दोनों सेनाओं ने बिल्डिंग क्लियरिंग, हेलीबॉर्न ऑपरेशंस, आईईडी अवेयरनेस, कैजुअल्टी इवैक्यूएशन, ड्रोन/काउंटर-ड्रोन टेक्नीक्स, जॉइंट असॉल्ट आदि का अभ्यास किया गया था। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

आकाश एयर डिफेंस पर हो सकती है चर्चा

वहीं, इस यात्रा के दौरान भारत के स्वदेशी डिफेंस इक्विपमेंट्स और सिस्टम्स में यूएई की बढ़ती रुचि पर भी चर्चा होने की संभावना है। खास तौर पर आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम को लेकर बीते एक साल से दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। अप्रैल 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत ने यूएई को आकाश एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम ऑफर किया था, जिसके बाद यूएई ने इसमें रुचि दिखाते हुए जुलाई 2025 में एलओआर यानी लेटर ऑफ रिक्वेस्ट जारी किया था। बता दें कि डिफेंस प्रोक्योरमेंट में एलओआर एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसे कोई देश दूसरे देश की सरकार को तब भेजता है, जब वह किसी रक्षा उपकरण, हथियार सिस्टम या मिलिट्री टेक्नोलॉजी को खरीदने में गंभीर रुचि दिखाता है। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

दरअसल इस समय यूएई हूती रिबेल्स से मिल रहे ड्रोन और मिसाइल खतरों से परेशान है। यूएई ड्रोन और मिसाइल खतरों से निपटने के लिए अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत करना चाहता है। ऐसे में आकाश सिस्टम को एक भरोसेमंद और किफायती विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। वहीं आकाश सिस्टम ने जिस तरह से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया था, इससे यूएई का भरोसा बढ़ा है। माना जा रहा है कि सेना प्रमुख की इस यात्रा के दौरान आकाश पर चर्चा हो सकती है।

आकाश एयर डिफेंस सिस्टम भारत का स्वदेशी मध्यम दूरी का सतह-से-हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है, जो फाइटर एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों को मार गिराने में सक्षम है। भारतीय सेना और वायुसेना में यह सिस्टम पहले से तैनात है। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

यूएई दौरे का एक अहम कार्यक्रम यूएई नेशनल डिफेंस कॉलेज की यात्रा है। यहां जनरल उपेंद्र द्विवेदी कॉलेज के अधिकारियों को संबोधित करेंगे। इस दौरान सैन्य रणनीति, आधुनिक युद्ध की चुनौतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर विचार साझा किए जाएंगे। यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच सैन्य शिक्षा और सोच के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

बता दें कि यूएई लैंड फोर्सेस के कमांडर मेजर जनरल यूसुफ मायूफ सईद अल हल्लामी का भारत दौरा इसी कड़ी का हिस्सा था। वे 27 और 28 अक्टूबर तक दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर भारत आए थे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और यूएई के बीच रक्षा सहयोग, सैन्य संवाद और आपसी समझ को आगे बढ़ाना था। दौरे के दौरान यूएई लैंड फोर्सेस के कमांडर को भारतीय सेना की ओर से ऑपरेशन सिंदूर पर विस्तृत ब्रीफिंग भी दी गई थी। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

Army Chief UAE-Sri Lanka Visit: 7 और 8 जनवरी को श्रीलंका दौरे पर

यूएई यात्रा के बाद सेना प्रमुख 7 और 8 जनवरी को श्रीलंका का दौरा करेंगे। श्रीलंका पहुंचने पर उन्हें श्रीलंका सेना की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद वे श्रीलंका की सीनियर मिलिट्री और सिविल लीडरशिप से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में श्रीलंका सेना के कमांडर, रक्षा उप मंत्री और रक्षा सचिव शामिल होंगे। इन बैठकों में श्रीलंका सेना के कमांडर, रक्षा उप मंत्री और रक्षा सचिव शामिल होंगे। बातचीत के दौरान प्रशिक्षण सहयोग, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

Army Chief UAE-Sri Lanka Visit: आईपीकेएफ वॉर मेमोरियल जाएंगे चीफ

अपने श्रीलंका दौरे के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में अधिकारियों को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वे बुट्टाला स्थित आर्मी वॉर कॉलेज भी जाएंगे, जहां वे ट्रेनी अफसरों और जवानों से बातचीत करेंगे। इसके अलावा सेना प्रमुख श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के शहीद जवानों की याद में बने आईपीकेएफ वॉर मेमोरियल पर भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से डिफेंस ट्रेनिंग और मिलिट्री एजुकेशन को लेकर सहयोग जारी है। जहां श्रीलंका के कैडेट्स यहां एनडीए, आईएमए और ओटीए में ट्रेनिंग करते हैं। श्रीलंकाई आर्मी के कैडेट्स यहां प्री-कमीशनिंग ट्रेनिंग करते हैं।

खुद श्रीलंका सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल लसांथा रोद्रिगो खुद आईएमए के पूर्व कैडेट रहे हैं और 1990 में कमीशन हुए थे। वहीं पिछले साल वे पासिंग आउट परेड में रिव्यूइंग ऑफिसर भी बने थे। बता दें कि श्रीलंका सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बीकेजीएम लसांथा रोद्रिगो पिछले साल 11 से 14 जून तक भारत दौरे पर रहे थे। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

पिछले साल हुई थी एक्सरसाइज मित्र शक्ति

पिछले साल 10 से 23 नवंबर 2025 तक कर्नाटक के बेलगावी स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में भारत और श्रीलंका की सेनाओं के बीच मित्र शक्ति एक्सरसाइज हुई थी। यह इस अभ्यास का 11वां संस्करण था। इस संस्करण में भारतीय सेना की ओर से करीब 170 जवान शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से राजपूत रेजिमेंट के सैनिक थे, जबकि भारतीय वायुसेना के 20 पर्सनल भी अभ्यास का हिस्सा बने। वहीं श्रीलंका की ओर से गजबा रेजिमेंट के 135 जवान और श्रीलंका एयर फोर्स के 10 पर्सनल ने इसमें भाग लिया। यह भारत और श्रीलंका की थल सेनाओं के बीच होने वाली प्रमुख द्विपक्षीय आर्मी एक्सरसाइज है, जो साल 2012 से लगातार हो रही है। इसका मकसद दोनों सेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ाना और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की साझा तैयारी को मजबूत करना है। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

मित्र शक्ति अभ्यास का फोकस काउंटर टेररिज्म, सब-कन्वेंशनल ऑपरेशंस, संयुक्त राष्ट्र पीसकीपिंग मिशन, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन ऑपरेशंस, और हेलीकॉप्टर ऑपरेशंस जैसे अहम क्षेत्रों पर रहता है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। भारत लगातार मित्र देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

यूएई और श्रीलंका दोनों ही भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम हैं। यूएई पश्चिम एशिया में भारत का बड़ा रक्षा और रणनीतिक साझेदार है, जबकि श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इन दोनों देशों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाना भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जाता है। (Army Chief UAE-Sri Lanka Visit)

खालिदा जिया के निधन के बाद भारत ने कैसे साधा बांग्लादेश, बदली ढाका की सियासत

India Bangladesh Relations

India Bangladesh Relations: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया के निधन के बाद भारत सरकार ने जिस तेजी के साथ कदम उठाए, उन्हें भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। भारत सरकार के उठाए कदमों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में खास संदेश दिया है। भारत ने शोक व्यक्त करने के साथ-साथ ऐसे कदम उठाए, जिनसे यह साफ हुआ कि नए हालात में भारत बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को सक्रिय और व्यापक तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।

India Bangladesh Relations: पीएम मोदी ने खालिदा जिया को किया याद

खालिदा जिया का निधन 30 दिसंबर 2025 को ढाका में लंबी बीमारी के बाद हुआ। उनके निधन की खबर सामने आते ही भारत की ओर से आधिकारिक स्तर पर प्रतिक्रिया दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक संदेश जारी किया और बांग्लादेश के लोगों तथा खालिदा जिया के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में खालिदा जिया को बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बताते हुए उनके योगदान को याद किया। (India Bangladesh Relations)

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि 2015 में ढाका यात्रा के दौरान उनकी खालिदा जिया से मुलाकात हुई थी और उस बातचीत को वे याद करते हैं। उन्होंने खालिदा जिया को बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बताते हुए उनके योगदान को याद किया और भारत-बांग्लादेश संबंधों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि खालिदा जिया की सोच और विरासत दोनों देशों के रिश्तों को दिशा देती रहेंगी।

India Bangladesh Relations: सीनियर मंत्री गए ढाका

वहीं, खालिदा जिया के निधन के बाद भारत सरकार ने यह तय किया कि अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व उच्च स्तर पर किया जाएगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर को ढाका भेजा गया। विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया कि जयशंकर भारत सरकार और भारत की जनता की ओर से शोक संदेश लेकर ढाका पहुंचे। (India Bangladesh Relations)

India Bangladesh Relations: जयशंकर की तारिक रहमान से मुलाकात

विदेश मंत्री एस. जयशंकर 31 दिसंबर 2025 को ढाका पहुंचे और खालिदा जिया के जनाजे में भारत सरकार और भारत की जनता का प्रतिनिधित्व किया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव की खबरें लगातार सामने आ रही थीं।

ढाका में जयशंकर ने बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष और खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत शोक पत्र तारिक रहमान को सौंपा। पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने खालिदा जिया के साथ 2015 में ढाका में हुई अपनी मुलाकात को याद किया और उन्हें दृढ़ संकल्प वाली नेता बताया।

विदेश मंत्री ने इस मुलाकात में यह भी कहा कि भारत को भरोसा है कि खालिदा जिया के विचार और मूल्य भारत-बांग्लादेश संबंधों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक बने रहेंगे। भारत सरकार की ओर से यह बात स्पष्ट रूप से रखी गई कि भारत बांग्लादेश के साथ भविष्य में भी साझेदारी को मजबूत करना चाहता है।

जयशंकर ने ढाका यात्रा के दौरान बांग्लादेश के विदेश मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से भी संक्षिप्त मुलाकात की। इनमें बांग्लादेश के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शामिल थे। इन बैठकों में द्विपक्षीय रिश्तों को साझा हितों, व्यावहारिकता और आपसी निर्भरता के आधार पर आगे बढ़ाने की बात कही गई।

खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान जयशंकर की मुलाकात अन्य देशों के प्रतिनिधियों से भी हुई। इस दौरान पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर से उनका औपचारिक अभिवादन भी हुआ। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कार्यालय ने इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, हालांकि भारत सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इसे किसी विशेष राजनीतिक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। (India Bangladesh Relations)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे बांग्लादेश हाई कमीशन

उधर, नई दिल्ली में भी भारत सरकार की ओर से शोक प्रकट करने के कदम उठाए गए। भारत सरकार की प्रतिक्रिया केवल विदेश मंत्रालय तक सीमित नहीं रही। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग पहुंचे और वहां शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर कर संवेदना व्यक्त की। रक्षा मंत्री ने खालिदा जिया के निधन पर दुख जताते हुए बांग्लादेश के लोगों के प्रति सहानुभूति जताई।

भारत सरकार के इन कदमों को केवल औपचारिक शोक नहीं माना गया, बल्कि इसे बांग्लादेश के प्रति भारत के व्यापक रुख के रूप में देखा गया। खास तौर पर ऐसे समय में, जब बांग्लादेश में राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं और वहां फरवरी 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं। (India Bangladesh Relations)

बांग्लादेश की राजनीति में बीएनपी बन रही ताकत

मौजूदा समय में बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखा गया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस समय भारत में रह रही हैं। उनकी पार्टी अवामी लीग पर देश में राजनीतिक प्रतिबंध लगाए गए हैं और वह आगामी चुनावों में हिस्सा नहीं ले पा रही है। ऐसे में बांग्लादेश की राजनीति में बीएनपी एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रही है।

खालिदा जिया के निधन के बाद उनके पुत्र तारिक रहमान की भूमिका और अधिक अहम हो गई है। बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे। तारिक रहमान ने अपने शुरुआती बयानों और सार्वजनिक गतिविधियों में जिस तरह की भाषा और तेवर अपनाए हैं, उसे राजनीतिक हलकों में “सॉफ्ट नीति” के तौर पर देखा जा रहा है। (India Bangladesh Relations)

India Bangladesh Relations: तारीक ने भी दिए सकारात्मक संकेत

बांग्लादेश की धरती पर कदम रखते ही तारीक ने जिस तरह के संकेत दिए उसे बंग्लादेश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। जैसे ही तारिक रहमान ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे, उन्होंने एक भावुक और सिंबॉलिक जेस्चर किया। उन्होंने अपने जूते उतारे और बांग्लादेश की मिट्टी को हाथ में उठाया।

रहमान ने ढाका में एक बड़ी रैली में अपनी पहली स्पीच में उन्होंने अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर का जिक्र किया, जिन्होंने 1963 में कहा था “आई हैव ए ड्रीम”। तारिक ने कहा, “आज मैं कहना चाहता हूं कि मेरे पास मेरे देश के लिए एक योजना है… एक सुरक्षित राज्य जिसकी लोगों ने लंबे समय से उम्मीद की है।” इस भाषण में उन्होंने बांग्लादेश के भविष्य पर विस्तार से बात की और शांति और सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने तीन बार दोहराया, “हम देश में शांति चाहते हैं।” साथ ही कहा, “शांति और सुरक्षा हर व्यक्ति के लिए सुनिश्चित की जानी चाहिए, हर उम्र, पेशे और विश्वास के लोगों के लिए।” (India Bangladesh Relations)

उन्होंने हिंसा या उकसावे को अस्वीकार करने की अपील की, चाहे वह किसी भी राजनीतिक या धार्मिक पहचान से हो। तारीक ने कहा, “यह देश पहाड़ों और मैदानों में रहने वाले लोगों का है, मुसलमानों, बौद्धों, ईसाइयों और हिंदुओं का है।” उन्होंने कहा कि देश में हर महिला, पुरुष या बच्चा सुरक्षित रूप से घर से निकल सके और वापस लौट सके। उन्होंने लोगों की आवाज और लोकतांत्रिक अधिकारों को वापस लाने की बात की। और सभी से सहयोग की अपील करते हुए कहा, “यदि इस योजना और इन कार्यों को लागू करना है, तो मुझे यहां मौजूद हर व्यक्ति के सहयोग की आवश्यकता होगी, और पूरे बांग्लादेश में लोकतांत्रिक ताकतों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी लोगों की। यदि आप हमारे साथ खड़े होंगे और हमें समर्थन देंगे, तो हम इस योजना को लागू कर सकेंगे।” (India Bangladesh Relations)

India Bangladesh Relations: नहीं की भारत विरोधी बात

वहीं खास बात यह थी कि उन्होंने अपने इस भाषण के दौरान एक बार भी भारत विरोधी बात नहीं कही। सूत्रों का कहना है कि तारीक का भाषण पूरी तरह बांग्लादेश के आंतरिक मुद्दों पर केंद्रित था, जिसमें शांति, सुरक्षा, सभी धर्मों (मुस्लिम, हिंदू, बौद्ध, ईसाई) की एकता शामिल थे। तारीक ने भारत या विदेश नीति का जिक्र न करके खुद को समावेशी, शांतिप्रिय और विकास-केंद्रित नेता के रूप में पेश किया। यह बीएनपी की पुरानी इमेज (2001-2006 के जमाने में भारत-विरोधी मानी जाने वाली) से दूरी बनाने का कोशिश है। सूत्रों का कहना है कि मां खालिदा जिया की मौत के बाद यह फरवरी में होने वाले चुनाव से पहले सहानुभूति और वोट बैंक बढ़ाने की रणनीति है। (India Bangladesh Relations)

सूत्रों के मुतााबिक, तारीक भाषण में भारत-विरोध की बात न कहकर वे भारत को आश्वासन दे रहे हैं कि बीएनपी के सत्ता में आने पर पुराने तनाव नहीं दोहराएगी। वहीं, भारत ने भी इसका जवाब दिया, जो जयशंकर के दौरे के दौरान पीएम मोदी का पत्र देना, यह दोनों तरफ से रिश्ते सुधारने की कोशिश दिखाता है। इसके अलावा भारत-विरोधी जमात-ए-इस्लामी से दूरी बनाकर तारिक खुद को ज्यादा उदारवादी भी दिखा रहे हैं। (India Bangladesh Relations)

सूत्रों यह भी कहते हैं कि तारिक रहमान जानबूझकर भारत-विरोधी नैरेटिव से दूर रह रहे हैं, ताकि बीएनपी को सत्ता के लिए ज्यादा स्वीकार्य बनाया जा सके। अगर वे सत्ता में आते हैं, तो रिश्ते “ट्रांजेक्शनल” हो सकते हैं जो न तो बहुत करीबी, न ही विरोधी। वहीं, भारत के लिए यह राहत की बात है, क्योंकि जमात जैसी ताकतों से ज्यादा खतरा बड़ा खतरा था। सूत्र हादी की हत्या को राजनीति में तारीक की सेफ एंट्री से भी जोड़ रहे हैं। (India Bangladesh Relations)

लोकतांत्रिक ताकतों के साथ खड़ी है नई दिल्ली

भारत सरकार की ओर से तारिक रहमान से सीधे संपर्क को यह संकेत माना गया कि भारत बांग्लादेश में सभी लोकतांत्रिक ताकतों के साथ संवाद बनाए रखना चाहता है। भारत की यह नीति रही है कि वह पड़ोसी देशों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्थिरता का समर्थन करे। भारत ने पहले भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह बांग्लादेश में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार है। (India Bangladesh Relations)

भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बीते वर्षों में कई स्तरों पर विकसित हुए हैं। व्यापार, ऊर्जा, सीमा प्रबंधन और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना रहा है। हालांकि, हाल के महीनों में अल्पसंख्यकों पर हमलों और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर भारत ने अपनी चिंताएं भी व्यक्त की हैं।

भारत के पूर्व राजनयिकों और नीति विशेषज्ञों ने भी इन घटनाओं पर अपनी राय रखी है। पूर्व उच्चायुक्त पिनाक रंजन चक्रवर्ती ने कहा कि खालिदा जिया के कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई बार तनाव देखने को मिला था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उस दौर में भारत को उत्तर-पूर्वी राज्यों में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। (India Bangladesh Relations)

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद भारत ने हमेशा बांग्लादेश के साथ संवाद बनाए रखा और खालिदा जिया को भारत आने का निमंत्रण भी दिया गया था। उनके अनुसार, भारत अब फरवरी 2026 के चुनावों के बाद बनने वाली लोकतांत्रिक सरकार के साथ रिश्तों का पुनर्मूल्यांकन करेगा।

पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि खालिदा जिया के अंतिम वर्षों में भारत के साथ संवाद में धीरे-धीरे बदलाव देखा गया था। उनकी 2015 की भारत-बांग्लादेश बातचीत को इसका उदाहरण माना जाता है।

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्राह्मा चेल्लानी का कहना है कि भारत इस समय बांग्लादेश से जुड़े दूसरे मुद्दों की तुलना में क्षेत्रीय स्थिरता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। उनके मुताबिक, खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री का ढाका जाना इसी सोच को साफ दिखाता है।

उन्होंने कहा कि बीएनपी नेतृत्व से सीधे संपर्क करके भारत यह संकेत दे रहा है कि वह बांग्लादेश की राजनीति में मौजूद अलग-अलग लोकतांत्रिक ताकतों के साथ काम करने के लिए तैयार है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बांग्लादेश में हालात और ज्यादा बिगड़ें नहीं और वहां धार्मिक कट्टरपंथी हिंसा को बढ़ने से रोका जा सके। (India Bangladesh Relations)

India Bangladesh Relations: क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता

भारत सरकार के सूत्रों के अनुसार, खालिदा जिया के निधन के बाद उठाए गए कदम यह दिखाते हैं कि भारत क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देता है। भारत की नीति यह रही है कि बांग्लादेश में किसी भी तरह की अस्थिरता या कट्टरपंथी प्रभाव क्षेत्रीय शांति के लिए चुनौती बन सकता है।

इन सभी घटनाओं के बीच यह भी साफ है कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रखना चाहता। भारत की कोशिश है कि वह बांग्लादेश की जनता, राजनीतिक दलों और संस्थाओं के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाए रखे। (India Bangladesh Relations)

5 जनवरी से मिलेंगे 26 जनवरी परेड और बीटिंग रिट्रीट के टिकट, जानिए पूरी डिटेल

Republic Day Parade 2026 Tickets
Republic Day Parade 2026 Tickets

Republic Day Parade 2026 Tickets: गणतंत्र दिवस 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जो लोग इस बार गणतंत्र दिवस उत्सव में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए रक्षा मंत्रालय ने टिकट बिक्री और कार्यक्रमों से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक कर दी है। हर साल की तरह इस बार भी राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड देशवासियों के लिए खास आकर्षण रहेगी। इसके साथ ही 28 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट की फुल ड्रेस रिहर्सल और 29 जनवरी को विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट का मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा। इन तीनों कार्यक्रमों के लिए टिकटों की बिक्री 5 जनवरी से शुरू होगी। (Republic Day Parade 2026 Tickets)

Republic Day Parade 2026 Tickets: गणतंत्र दिवस 2026 को लेकर तैयारियां तेज

जानकारी के मुताबिक, गणतंत्र दिवस परेड 26 जनवरी को कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर आयोजित होगी। इसके बाद 28 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट की फुल ड्रेस रिहर्सल होगी, जिसमें वही कार्यक्रम दोहराया जाएगा, जो अगले दिन मुख्य समारोह में होता है। 29 जनवरी की शाम विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट का मुख्य आयोजन होगा, जिसमें सैन्य बैंड देशभक्ति धुनों की प्रस्तुति देंगे और राष्ट्रपति की मौजूदगी में समारोह का औपचारिक समापन होगा।

Republic Day Parade 2026 Tickets: गणतंत्र दिवस 2026 के टिकट की कीमत कितनी होगी

टिकट की कीमतों की बात करें तो आम नागरिकों के लिए यह बेहद किफायती रखी गई हैं। 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड के लिए टिकट दो कैटेगरी में मिलेंगे। बेहतर विजुअल वाली सीटों के लिए टिकट की कीमत 100 रुपये रखी गई है, जबकि सामान्य श्रेणी की सीटों के लिए टिकट 20 रुपये में मिलेगा। 28 जनवरी को होने वाली बीटिंग रिट्रीट फुल ड्रेस रिहर्सल के लिए केवल 20 रुपये का टिकट होगा। वहीं 29 जनवरी को होने वाले बीटिंग रिट्रीट के मुख्य समारोह के लिए टिकट की कीमत 100 रुपये तय की गई है। (Republic Day Parade 2026 Tickets)

Republic Day Parade 2026 Tickets: टिकट बिक्री की तारीख और समय

टिकटों की बिक्री 5 जनवरी से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 तक चलेगी। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि टिकट सीमित संख्या में उपलब्ध होंगे और फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व के आधार पर दिए जाएंगे। यानी जैसे ही किसी दिन का कोटा पूरा होगा, उस दिन की टिकट बिक्री बंद कर दी जाएगी। पिछले सालों के अनुभव को देखते हुए यह माना जा रहा है कि टिकटों की मांग काफी ज्यादा होगी, इसलिए जो लोग परेड या बीटिंग रिट्रीट देखने के इच्छुक हैं, वे तुरंत टिकट बुक कर लें। (Republic Day Parade 2026 Tickets)

Republic Day Parade 2026 Tickets: ऑनलाइन टिकट कैसे खरीदें

टिकट दो तरीके से खरीदा जा सकता है। पहला तरीका ऑनलाइन है, जिसके तहत रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट http://www.aamantran.mod.gov.in पर जाकर सीधे टिकट खरीद सकते हैं। इस वेबसाइट पर पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा, उसके बाद पेमेंट करके ई-टिकट मिलेगा। यही ई-टिकट एंट्री के वक्त दिखाना होगा। कुछ मामलों में मोबाइल ऐप के जरिए भी टिकट उपलब्ध हो सकता है, जिसकी जानकारी वेबसाइट पर दी जाएगी। (Republic Day Parade 2026 Tickets)

Republic Day Parade 2026 Tickets: ऑफलाइन टिकट खरीदने का तरीका

दूसरा तरीका ऑफलाइन टिकट खरीदने का है। इसके लिए मूल फोटो पहचान पत्र दिखाना होगा। स्वीकार्य पहचान पत्रों में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट या केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा जारी कोई वैध फोटो पहचान पत्र शामिल है। यही पहचान पत्र टिकट खरीदते समय और कार्यक्रम स्थल पर एंट्री के दौरान साथ रखना जरूरी होगा। (Republic Day Parade 2026 Tickets)

दिल्ली में कहां-कहां मिलेंगे टिकट

ऑफलाइन टिकट खरीदने के लिए दिल्ली में कई काउंटर बनाए गए हैं। इनमें सेना भवन, शास्त्री भवन, जंतर मंतर, संसद भवन का रिसेप्शन एरिया, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और कश्मीर गेट मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। सेना भवन में टिकट काउंटर गेट नंबर 5 के पास, चारदीवारी के अंदर स्थित होगा। शास्त्री भवन में गेट नंबर 3 के पास, जंतर मंतर के मुख्य द्वार पर, संसद भवन के रिसेप्शन पर, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के डी ब्लॉक में गेट नंबर 3 और 4 के पास, और कश्मीर गेट मेट्रो स्टेशन के कॉन्कोर्स लेवल पर गेट नंबर 8 के पास टिकट काउंटर उपलब्ध रहेंगे। (Republic Day Parade 2026 Tickets)

इन सभी काउंटरों पर टिकट बिक्री का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक और फिर दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। टिकट बिक्री 5 जनवरी से 14 जनवरी तक इन्हीं समयों में होगी। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे पहचान पत्र के साथ समय पर काउंटर पर पहुंचें, ताकि टिकट आसानी से मिल सके।

गणतंत्र दिवस समारोह से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इस वेबसाइट पर सीटिंग प्लान, पार्किंग व्यवस्था, आने-जाने के रूट मैप, परेड में शामिल होने वाले राज्यों की झांकियों की जानकारी, फोटो और वीडियो गैलरी जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। इसके अलावा यहां राष्ट्रीय पर्व से जुड़े क्विज और काउंटडाउन जैसी चीजें भी देखी जा सकती हैं। (Republic Day Parade 2026 Tickets)

एंट्री के लिए कौन सा पहचान पत्र जरूरी

सुरक्षा के लिहाज से कार्यक्रम स्थल पर कड़े इंतजाम रहेंगे। प्रवेश के समय वही फोटो पहचान पत्र दिखाना होगा, जिससे टिकट खरीदा गया है। बैग चेकिंग, मेटल डिटेक्टर और अन्य सुरक्षा जांच की जाएगी। आमतौर पर बड़े बैग, खाने-पीने की चीजें और कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामान पर पाबंदी होती है, इसलिए दर्शकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल जरूरी सामान ही साथ लाएं।

गणतंत्र दिवस 2026 की थीम और अन्य खास आकर्षणों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार परेड में आत्मनिर्भर भारत, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता पर खास फोकस रहेगा। (Republic Day Parade 2026 Tickets)

रिपब्लिक डे परेड में एनसीसी संग शामिल होंगे 25 देशों के 210 कैडेट्स, पहली बार तलवार के साथ दिखेंगे कंटिंजेंट कमांडर

NCC Republic Day Camp 2026

NCC Republic Day Camp 2026: एनसीसी का रिपब्लिक डे कैंप-2026 राजधानी दिल्ली में शुरू हो गया है। हर साल जनवरी महीने में आयोजित होने वाला यह कैंप गणतंत्र दिवस से पहले युवाओं को राष्ट्रीय राजधानी में देश की विविध संस्कृति, परंपराओं और अनुशासन से जोड़ने का एक बड़ा मंच माना जाता है। इस साल एनसीसी रिपब्लिक डे कैंप-2026 में 2,406 कैडेट्स हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में गर्ल्स कैडेट्स भी शामिल हैं। वहीं पहली बार एनसीसी परेड कमांडर और कंटिंजेंट कमांडर तलवार के साथ परेड करेंगे।

NCC Republic Day Camp 2026: देश के 703 जिलों में पहुंची एनसीसी

मीडिया से बातचीत में डीजी एनसीसी लेंफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने बताया कि एनसीसी की पहुंच अब देश के 90 फीसदी से ज्यादा जिलों तक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि देश के 703 जिलों में 831 एनसीसी यूनिट्स हैं। उन्होंने कहा कि 1948 में जब एनसीसी की शुरुआत हुई थी, तब कैडेट्स की संख्या करीब 20 हजार थी, जो 2024 तक के डेटा के मुताबिक बढ़कर लगभग 20 लाख तक पहुंच गई है। इनमें करीब 40 फीसदी गर्ल कैडेट्स हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि एनसीसी में गर्ल्स कैडेट्स की भागीदारी बढ़ रही है। (NCC Republic Day Camp 2026)

NCC Republic Day Camp 2026
DG NCC LT Gen Virendra Vats

NCC Republic Day Camp 2026: रिपब्लिक डे परेड में 2,406 कैडेट्स

उन्होंने बताया कि इस साल रिपब्लिक डे कैंप-2026 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 2,406 कैडेट्स शामिल हो रहे हैं। जिनमें 898 गर्ल कैडेट्स शामिल हैं। डीजी एनसीसी ने बताया कि कैंप में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से 127 कैडेट्स और नॉर्थ ईस्ट रीजन से 131 कैडेट्स भी शामिल हुए हैं। इसके अलावा यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम यानी वाईईपी के तहत 25 फ्रेंडली विदेशी देशों के 210 कैडेट्स और ऑफिसर्स भी रिपब्लिक डे कैंप का हिस्सा बन रहे हैं। (NCC Republic Day Camp 2026)

डीजी एनसीसी लेफ्टिनेंट जनरल वत्स के मुताबिक इस बार एनसीसी परेड में एक नया बदलाव भी देखने को मिलेगा। पहली बार परेड कमांडर और कंटिंजेंट कमांडर तलवार के साथ परेड करेंगे। पहले ये अधिकारी खाली हाथ परेड का नेतृत्व करते थे, जबकि कैडेट्स राइफल के साथ ड्रिल करते थे। यह बदलाव सशस्त्र बलों की परंपरा से प्रेरित है और कैडेट्स पहले से ही तलवार ड्रिल का अभ्यास कर रहे हैं।

रिपब्लिक डे कैंप-2026 का समापन 28 जनवरी को प्रधानमंत्री की रैली के साथ होगा। इसी अवसर पर चयनित कैडेट्स को एनसीसी अवॉर्ड्स भी प्रदान किए जाएंगे। (NCC Republic Day Camp 2026)

NCC Republic Day Camp 2026: ऑपरेशन सिंदूर में 75000 कैडेट्स हुए शामिल

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए डीजी एनसीसी ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान, एनसीसी कैडेट्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ऑपरेशन सिंदूर में लगभग 75,000 एनसीसी कैडेट्स शामिल हुए। इन कैडेट्स ने सिविल डिफेंस ड्रिल आदि में सिविल एडमिनिस्ट्रेशन की मदद की और मेडिकल सपोर्ट के तहत स्वैच्छिक ब्लड डोनेशन जैसे कार्यों में योगदान दिया। उन्होंने बताया कि एनसीसी स्थापना दिवस के मौके पर कैडेट्स ने लोगों की जिंदगियां बचाने के लिए स्वेच्छा से 35,000 यूनिट्स ब्लड भी डोनेट किया।

उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन के लिए दो सेना मेडल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, चीफ ऑफ एनसीसी के 9 कमांडेशन कार्ड दिए गए हैं। (NCC Republic Day Camp 2026)

NCC Republic Day Camp 2026: ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग

लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स के मुताबिक एनसीसी कैडेट्स को अब नई तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है। जरूरत के समय मदद के उद्देश्य से कैडेट्स को ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके लिए चार रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन यानी आरपीटीओ बनाए गए हैं, जहां कैडेट्स को ड्रोन फ्लाइंग की बेसिक और एडवांस ट्रेनिंग दी जा रही है। (NCC Republic Day Camp 2026)

NCC Republic Day Camp 2026

NCC Republic Day Camp 2026: स्किल डेवलपमेंट पर फोकस

वहीं, कैडेट्स के स्किल डेवलपमेंट पर भी खास ध्यान दिया गया है। स्किल मंथन वर्कशॉप के तहत 3,000 से ज्यादा कैडेट्स को 37 सेक्टर स्किल काउंसिल प्रोग्राम्स से जोड़ा गया, जिससे उनकी रोजगार योग्य स्किल्स को बढ़ावा मिला। इसके साथ ही आइडिया एंड इनोवेशन कॉम्पिटिशन आयोजित किया गया, जिसमें 340 कैडेट्स ने 85 से ज्यादा स्टार्ट-अप आइडिया और नए इनोवेशन पेश किए। (NCC Republic Day Camp 2026)

NCC Republic Day Camp 2026: प्रधानमंत्री को भेंट करेंगे कलश

उन्होंने बताया कि रिपब्लिक डे कैंप-2026 के दौरान कई विशेष अभियानों का भी आयोजन किया जा रहा है। अंडमान और निकोबार के 21 निर्जन द्वीपों के चारों ओर एक स्पेशल सेलिंग एक्सपीडिशन चल रहा है, जिसे परमवीर चक्र विजेताओं को समर्पित किया गया है। इस अभियान में शामिल कैडेट्स इन द्वीपों से लाई गई मिट्टी को प्रधानमंत्री रैली के दौरान कलश में प्रधानमंत्री को भेंट करेंगे।

इसके अलावा वीर बिरसा मुंडा और पेशवा बाजीराव प्रथम की विरासत और सामाजिक सुधारों को याद करने के लिए दो साइक्लिंग एक्सपीडिशन भी आयोजित किए जा रहे हैं। युवा आपदा मित्र योजना के तहत गृह मंत्रालय और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर 315 जिलों के करीब 94,400 कैडेट्स को मार्च 2026 तक ट्रेनिंग दी जाएगी। (NCC Republic Day Camp 2026)

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मिलेंगे कैडेट्स

रिपब्लिक डे कैंप के दौरान कैडेट्स को कई जानी-मानी हस्तियों से मिलने और बातचीत करने का मौका मिलेगा। इनमें ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से भी कैडेट्स को रूबरू कराया जाएगा। इसके अलावा कैंप में देश के उपराष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, दिल्ली के मुख्यमंत्री, डिफेंस सेक्रेटरी, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और थलसेना, नौसेना और वायुसेना के प्रमुखों के दौरे भी होंगे। (NCC Republic Day Camp 2026)

लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने बताया कि एनसीसी का मुख्य उद्देश्य युवाओं में चरित्र निर्माण, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करना है। इसके लिए साल 2025 में एनसीसी ने देशभर में 1,665 एनुअल ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए। इसके अलावा 6 स्पेशल नेशनल इंटीग्रेशन कैंप और 33 एक भारत श्रेष्ठ भारत कैंप भी लगाए गए, जिनका मकसद अलग-अलग क्षेत्रों और संस्कृतियों के कैडेट्स के बीच आपसी समझ और एकता को मजबूत करना था।

उन्होंने बताया कि एनसीसी की गतिविधियां सिर्फ ड्रिल और ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रहीं। साल 2025 में एनसीसी की एक स्पेशल माउंटेनियरिंग एक्सपीडिशन माउंट एवरेस्ट तक पहुंची। इस अभियान में 10 कैडेट्स की टीम ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की, जिसमें 5 लड़के और 5 लड़कियां शामिल थीं। (NCC Republic Day Camp 2026)

NCC की बड़ी तैयारी, कैडेट्स को ड्रोन और एंटी-ड्रोन ट्रेनिंग देने के लिए बनेंगे रीजनल सेंटर, 10,000 साइबर वॉरियर्स होंगे तैयार

NCC Drone Training Initiative

NCC Drone Training Initiative: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेनाएं ड्रोन पर फोकस कर रही हैं। जहां सेना ने हर बटालियन में ड्रोन से लैस अश्नि ड्रोन प्लाटून बनाई हैं, तो वहीं राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी एनसीसी भी ड्रोन को लेकर बड़ी तैयारी कर रही है। एनसीसी का फोकस बड़ी स्तर पर कैडेट्स को ड्रोन की ट्रेनिंग देने का है। इसके लिए एनसीसी ने देश में चार से पांच रीजनल ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर बनाने का टारगेट रखा है, जहां कैडेट्स को ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की ट्रेनिंग दी जाएगी।

NCC Drone Training Initiative: रीजनल ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर बनएगी एनसीसी

राजधानी दिल्ली में एनसीसी रिपब्लिक डे कैंप-2026 के आयोजन के मौके पर एनसीसी के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने बताया कि ड्रोन ट्रेनिंग एनसीसी के मुख्य फोकस क्षेत्रों में से एक है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन के ड्रोन के बारे में खबरें आई थीं, और ड्रोन वॉरफेयर को एक उभरते हुए क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है।

उन्होंने बताया कि एनसीसी देश में चार से पांच रीजनल ड्रोन ट्रेनिंग बनाएगी, जहां कैडेट्स को ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की ट्रेनिंग दी जाएगी। लेफ्टिनेंट जनरल वत्स के मुताबिक यह ट्रेनिंग सेना के साथ मिल कर दी जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर कैडेट ड्रोन ऑपरेटरों और एंटी-ड्रोन के इस्तेमाल में सेना की मदद कर सकें।

दुनियाभर में ड्रोन को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए, एनसीसी ड्रोन, साइबर और इनफॉरमेशन वॉरफेयर पर फोकस कर रही है। लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने बताया कि एनसीसी कैडेट्स को बेसिक मिलिट्री स्किल्स दे रहा है, जिसमें खास तौर पर ड्रोन और साइबर मुद्दों से जुड़ी ट्रेनिंग शामिल है। यह फोकस ड्रोन को हथियार बनाने के ग्लोबल ट्रेंड और साइबर डिफेंस की आम अहमियत की वजह से है, जैसा कि दूसरी टेक्नोलॉजी के साथ होता है। (NCC Drone Training Initiative)

NCC Drone Training Initiative
DG NCC Lt Gen Virendra Vats

NCC Drone Training Initiative: ड्रोन टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव के तहत ट्रेनिंग

ड्रोन टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव का मकसद कैडेट्स को ड्रोन से जुड़ी आधुनिक स्किल्स सिखाना है, ताकि वे भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार हो सकें। इसके तहत कैडेट्स को ड्रोन उड़ाने के साथ-साथ उसकी असेंबली, देखभाल और अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोग की ट्रेनिंग दी जा रही है। इस ट्रेनिंग में कैडेट्स को सबसे पहले ड्रोन और यूएवी की बुनियादी जानकारी दी जाती है। इसके बाद उन्हें ड्रोन के अलग-अलग पार्ट्स, उनकी कार्यप्रणाली और असेंबली के बारे में सिखाया जाता है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ड्रोन उड़ाने से जुड़े नियम, सेफ्टी प्रोसीजर और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स भी समझाए जाते हैं। कैडेट्स को उड़ान के सिद्धांत और एयरोडायनामिक्स की बेसिक जानकारी दी जाती है, ताकि वे ड्रोन की उड़ान को बेहतर तरीके से समझ सकें। (NCC Drone Training Initiative)

ट्रेनिंग के दौरान पहले सिमुलेटर के जरिए अभ्यास कराया जाता है और फिर असली ड्रोन उड़ाने का मौका दिया जाता है। इसके साथ ही ड्रोन की मेंटेनेंस और तकनीकी दिक्कतों को दूर करने की ट्रेनिंग भी शामिल है। कैडेट्स को अलग-अलग प्रतियोगिताओं और प्रैक्टिकल एक्टिविटीज में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका आत्मविश्वास और स्किल्स दोनों बढ़ेंगे।

एनसीसी ने कैडेट्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जोड़ने की भी व्यवस्था की है, ताकि वे ड्रोन से जुड़े नियमों, रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेशन की सही जानकारी हासिल कर सकें। इस पहल का उद्देश्य ड्रोन को आपदा प्रबंधन, खोज-बचाव, निगरानी, कृषि और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में उपयोगी बनाना है।

एनसीसी का मानना है कि इस इनिशिएटिव से कैडेट्स को नए करियर विकल्प मिलेंगे और वे स्टार्टअप, सरकारी और तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ सकेंगे। यह पहल युवाओं को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने और भविष्य के भारत के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। (NCC Drone Training Initiative)

 NCC Drone Training Initiative

NCC Drone Training Initiative: 10,000 साइबर वॉरियर्स तैयार होंगे

डीजी एनसीसी ने बताया कि ड्रोन के अलावा एनसीसी साइबर पर फोकस कर रही है। उन्होंने बताया कि सभी 20 लाख कैडेट्स को साइबर मुद्दों की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग में देश भर में लैब स्थापित करना शामिल है।
उन्होंने बताया, एनसीसी कैडेट्स को साइबर ट्रेनिंग का मकसद उन्हें साइबर खतरों के खिलाफ “पहली डिफेंस लाइन” के तौर पर तैयार करना है। इसके लिए पहले साल में 10,000 साइबर वॉरियर्स तैयार किए जाएंगे। ये वॉरियर्स साइबर नेटवर्क की सुरक्षा में मदद करेंगे। एक से चार हफ्तों की विशेष साइबर ट्रेनिंग के बाद, इन साइबर वॉरियर्स को एक राष्ट्रीय डेटाबेस से जोड़ा जाएगा ताकि अगर हमारे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई खतरा होता है, जरूरत पड़ने पर वे देश के साइबर नेटवर्क की सुरक्षा कर सकें। (NCC Drone Training Initiative)

NCC Drone Training Initiative: सोशल मीडिया पर अफवाहें रोकेगी एनसीसी

इनफॉरमेशन वॉरफेयर पर बोलते हुए डीजी एनसीसी ने यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा, “हर चीज को हथियार बनाया जा रहा है,” इसमें इनफॉरमेशन भी शामिल हैं। इसमें सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें और बांटने वाले एजेंडा फैलाना शामिल है, जिसका किसी देश पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर अफवाहें रोकने में भी अब एनसीसी अपना रोल अदा करेगी। (NCC Drone Training Initiative)

Pakistan Fake Propaganda: ऑपरेशन सिंदूर के महीनों बाद पाकिस्तान का प्रोपेगैंडा, सोशल मीडिया पर शेयर कर रहा फर्जी सैटेलाइट इमेज, बेनकाब हुआ झूठ

Pakistan Fake Propaganda
Photo Credit: Damien Symon/X

Pakistan Fake Propaganda: ऑपरेशन सिंदूर के महीनों बाद पाकिस्तान एक बार फिर सोशल मीडिया पर नया प्रोपेगेंडा फैलाने में जुट गया है। पाकिस्तान आधारित कुछ सोशल मीडिया अकाउंट और उनसे जुड़े हैंडल फेक सैटेलाइट तस्वीरें शेयर कर यह दावा कर रहे हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के पंजाब में, खासतौर पर अमृतसर के आसपास, भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए थे। लेकिन पाकिस्तान के ये दावे बिना किसी ठोस सबूत के हैं।

डिफेंस सूत्रों और ओपन सोर्स एनालिस्ट्स की जांच में यह साफ हो चुका है कि इन तस्वीरों में दिखाए जा रहे इलाकों में किसी भी तरह की तबाही या नुकसान के संकेत नहीं दिखे हैं। जिन सैन्य ठिकानों का नाम लेकर दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सुरक्षित हैं और वहां पर किसी भी हमले के निशान भी नहीं हैं। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: बिना सबूत के दावे, सैटेलाइट तस्वीरों का खेल

पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स जिन सैटेलाइट इमेजेस को शेयर कर रहे हैं, उनमें न तो तस्वीर खींचे जाने की तारीख दी गई है और न ही यह बताया गया है कि वे किस सैटेलाइट से ली गई हैं। किसी भी सैटेलाइट इमेज की विश्वसनीयता के लिए टाइमस्टैम्प, सैटेलाइट सोर्स और रेजोल्यूशन जैसी जानकारियां बेहद जरूरी होती हैं, लेकिन यहां यह सब गायब हैं।

फैक्ट चेक में यह भी सामने आया है कि जिन जगहों को “टारगेट” बताया जा रहा है, वहां न तो विस्फोट के गड्ढे हैं, न मलबा, न जले हुए निशान और न ही किसी तरह का स्ट्रक्चरल डैमेज दिखाई दिया। अगर वाकई किसी सैन्य ठिकाने पर ऐसे हमले होते हैं, तो ऐसे संकेत साफ तौर पर दिखाई देते हैं। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: गलत जानकारी फैलाने की कोशिश

सैटेलाइट इमेजरी एक्सपर्ट डेमियन सिमोन कहते हैं, “सोशल मीडिया पर जानबूझकर भ्रामक तस्वीरें फैलाकर यह दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने भारत के पंजाब के अमृतसर में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। लेकिन इन तस्वीरों की स्वतंत्र जांच में साफ हो गया है कि जिन जगहों को निशाना बताए जा रहे हैं, वहां किसी भी तरह की तबाही या नुकसान के कोई निशान नहीं हैं। न तो विस्फोट के संकेत दिखते हैं और न ही किसी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। यह पूरी कोशिश गलत जानकारी फैलाने की है। ऐसे और भी कमजोर दावों वाली तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं, जिनकी पड़ताल कर उन्हें एक-एक करके बेनकाब किया जा रहा है। छुट्टियों के बावजूद यह प्रक्रिया जारी रहेगी।” (Pakistan Fake Propaganda)

सात महीने बाद अचानक क्यों सामने आईं तस्वीरें

सबसे बड़ा सवाल इन दावों के समय को लेकर उठ रहा है। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पाकिस्तान अपने दावों के समर्थन में एक भी भरोसेमंद सैटेलाइट इमेज नहीं दिखा सका था। अब करीब सात महीने बाद अचानक ऐसी तस्वीरों का सामने आना इशारा करता है कि यह सब बाद में गढ़ी गई कहानी है।

डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह “पोस्ट-फैक्टो प्रोपेगैंडा” की एक क्लासिक मिसाल है, जहां पहले बुरी तरह मार खाने के बाद डिजिटल कंटेंट के जरिए जीत की कहानी गढ़ने की कोशिश की जाती है। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: पहले भी फैल चुकी हैं ऐसी झूठी कहानियां

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया नेटवर्क ने इस तरह के बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए हों। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके तुरंत बाद भी तथाकथित “विक्ट्री रेशियो”, भारत के “स्ट्रैटेजिक सेंटर ऑफ ग्रैविटी” पर हमले और बड़े नुकसान के दावे किए गए थे। लेकिन इन सभी बातों को न तो किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने स्वीकार किया और न ही कोई स्वतंत्र जांच उन्हें सही साबित कर पाई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन दावों को गंभीरता से नहीं लिया गया, क्योंकि उनके साथ कोई भरोसेमंद डेटा या सबूत मौजूद नहीं थे। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: ओपन सोर्स एनालिस्ट्स ने बताया झूठा

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस यानी ओएसआईएनटी पर काम करने वाले कई एक्सपर्ट्स ने इन नई सैटेलाइट तस्वीरों का बारीकी से अध्ययन किया। उनके मुताबिक, तस्वीरों में जानबूझकर बहुत सीमित एंगल दिखाए गए हैं। इनमें हमले के बाद दिखने वाले आम संकेत पूरी तरह गायब हैं।

आमतौर पर किसी एयर स्ट्राइक या मिसाइल हमले के बाद गड्ढे, आसपास का मलबा, जलने के निशान, टूटी हुई इमारतें या सेकेंडरी एक्सप्लोजन के संकेत दिखते हैं। लेकिन यहां ऐसी कोई बात नजर नहीं आती। उन्हीं लोकेशंस की पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करने पर भी कोई फर्क नहीं दिखाई दिया। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: फिर भी क्यों जारी है प्रचार

पाकिस्तान की तरफ से ऐसी झूठी तस्वीरों का लगातार प्रचार किया जाना इस ओर इशारा करता है कि यह कोई सामान्य गलती या गलतफहमी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी डिसइन्फॉर्मेशन मुहिम है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की कोशिशें अक्सर घरेलू ऑडियंस को यह दिखाने के लिए किए जाते हैं कि “कुछ हासिल हुआ”, भले ही हकीकत कुछ और हो।

इसके साथ ही, अंतररष्ट्रीय स्तर पर भी भ्रम पैदा करने की कोशिश की जाती है, ताकि असल हालात पर सवाल खड़े किए जा सकें। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: राफेल से लेकर नौसेना तक, एक जैसा पैटर्न

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान का यह रवैया कोई नया नहीं है। जब भारत ने राफेल फाइटर जेट्स को वायुसेना में शामिल किया था, तब भी सोशल मीडिया पर राफेल के क्रैश, टेक्निकल फेल्योर और कमजोर होने के झूठे वीडियो फैलाए गए थे। बाद में जांच में पता चला कि वे वीडियो या तो पुराने थे, किसी और देश के थे या वीडियो गेम फुटेज थे।

अब वही तरीका नौसेना और जमीनी अभियानों को लेकर अपनाया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब पाकिस्तान को कुछ हासिल नहीं हुआ था, तो डिजिटल दुनिया में एक “विक्ट्री नैरेटिव” गढ़ने की कोशिश शुरू कर दी गई थी। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: AI डीपफेक्स का बढ़ता इस्तेमाल

हाल के सालों में इस तरह की टैक्टिक्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल भी बढ़ा है। डिफेंस सूत्र बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद कुछ वीडियो ऐसे भी सामने आए, जिनमें भारतीय सैन्य अधिकारियों को कथित तौर पर नुकसान स्वीकार करते या ऑपरेशन की आलोचना करते दिखाया गया। बाद में ये वीडियो डीपफेक साबित हुए।

पीआईबी फैक्ट चेक और अन्य फैक्ट चेकिंग एजेंसियों ने ऐसे कई वीडियो को झूठा करार दिया है। शुरुआती जांच में इनमें से कई अकाउंट्स का लिंक पाकिस्तान से जुड़े डिजिटल नेटवर्क से मिला। (Pakistan Fake Propaganda)

Pakistan Fake Propaganda: इनफॉरमेशन वॉरफेयर की स्ट्रैटेजी

डिफेंस एनालिस्ट्स मानते हैं कि यह सब किसी एक घटना से जुड़ा नहीं है, बल्कि एक लंबी रणनीति का हिस्सा है। जब कुछ हासिल नहीं होता तो झूठी इनफॉरमेशन फैला कर जीत जैसा माहौल बनाया जाता है। इसका मकसद जमीनी सच्चाई को बदलना नहीं, बल्कि लोगों की सोच को प्रभावित करना होता है।

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी मौजूदा सोशल मीडिया मुहिम भी इसी रणनीति की अगली कड़ी मानी जा रही है।

डिफेंस सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह की डिजिटल फेख खबरें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सही जानकारी, फैक्ट चेक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग की भूमिका और भी अहम हो जाती है।

कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की यह नई सोशल मीडिया मुहिम एक बार फिर यह दिखाती है कि जब जमीन पर कुछ दिखाने को नहीं होता, तो कहानियां इंटरनेट पर गढ़ी जाती है। लेकिन सच्चाई यही है कि बिना सबूतों के ऐसे दावे सिर्फ प्रोपेगेंडा बनकर रह जाते हैं, जिनकी उम्र बहुत लंबी नहीं होती। (Pakistan Fake Propaganda)

Indian Army Universal Rocket Launcher Deal: भारतीय सेना को मिलेगा यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, नाइब लिमिटेड को 292.69 करोड़ का इमरजेंसी ऑर्डर

Indian Army Universal Rocket Launcher Deal

Indian Army Universal Rocket Launcher Deal: भारतीय सेना ने अपनी आर्टिलरी क्षमता को और बढ़ाने के लिए पुणे की नाइब कंपनी को करीब 292.69 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर दिया है। यह ऑर्डर सेना ने इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट प्रावधान के तहत दिया है। इस समझौते के तहत कंपनी भारतीय सेना को लंबी दूरी तक अचूक मार करने वाले यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम उपलब्ध कराएगी। जिससे आने वाले समय में सेना की फायर पावर को नई मजबूती मिलेगी।

कंपनी ने इस सौदे की जानकारी बीएसई और एनएसई को भी दी है। कंपनी का कहना कि यह कॉन्ट्रैक्ट भारतीय सेना की इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट प्रोविजन के तहत किया गया है, जिसका मतलब है कि सिस्टम को कम समय में सेना तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मौजूदा सुरक्षा जरूरतों को तुरंत पूरा किया जा सके।

यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब सेना सीमाओं पर अपनी ऑपरेशनल तैयारियों को और मजबूत करने पर फोकस कर रही है। हाल के सालों में बदलते सुरक्षा हालात और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों की जरूरत को देखते हुए सेना आधुनिक रॉकेट लॉन्चर सिस्टम को तेजी से शामिल कर रही है।

नाइब लिमिटेड को मिला यह ऑर्डर यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर प्लेटफॉर्म के लिए है। इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अलग-अलग रेंज और कैलिबर के रॉकेट्स को एक ही लॉन्चर से दागा जा सकता है। रक्षा समाचार डॉट कॉम को मिली जानकारी के अनुसार, यह सिस्टम दो अलग-अलग दूरी वाले रॉकेट्स को सपोर्ट कर सकता है। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)

Indian Army Universal Rocket Launcher Deal: 12 महीनों में सप्लाई

नाइब लिमिटेड को इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम से जुड़े लॉन्चर, ग्राउंड इक्विपमेंट, एक्सेसरीज, एन्हांस्ड सिस्टम प्रोजेक्टाइल्स और एम्युनिशन की सप्लाई करनी है। कंपनी को यह पूरी डिलीवरी 12 महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरी करनी होगी। यानी तय समय के अंदर अलग-अलग किस्तों में सेना को यह सारा सिस्टम सौंपा जाएगा।

कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के मुताबिक, नाइब लिमिटेड को कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के 30 दिनों के भीतर कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 10 फीसदी हिस्सा परफॉर्मेंस-कम-वारंटी बैंक गारंटी के तौर पर जमा करना होगा। ताकि सप्लाई समय पर और तय क्वॉलिटी स्टैंडर्ड्स के अनुसार हो सके। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)

क्या है यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम

यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम दरअसल इजरायल की डिफेंस कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के बनाए पीयूएलएस (प्रिसाइज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक मल्टी-कैलिबर और मल्टी-रेंज प्लेटफॉर्म है।

सूत्रों का कहना है कि पीयूएलएस को भारत में “सूर्या” नाम दिया जा सकता है। पीयूएलएस यह एक मॉड्यूलर मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर (एमआरएल) है। इस सिस्टम से अलग-अलग रेंज के रॉकेट दागे जा सकते हैं। इसमें 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक मार करने वाले रॉकेट्स को इंटीग्रेट करने की क्षमता है। सेना के लिए यह इसलिए अहम है, क्योंकि अब अलग-अलग रेंज के लिए अलग-अलग लॉन्चर रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)

Indian Army Universal Rocket Launcher Deal:  एक प्लेटफॉर्म, कई रॉकेट

डिफेंस सूत्रों के मुताबिक, इस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 122 एमएम, 160 एमएम और 306 एमएम जैसे अलग-अलग कैलिबर के रॉकेट्स के साथ काम कर सकता है। रॉकेट पॉड्स की संख्या और कॉन्फिगरेशन इस्तेमाल होने वाले रॉकेट पर निर्भर करती है।

यह लॉन्चर 6×6 या 8×8 व्हीकल चैसिस पर लगाया जा सकता है, जिससे इसे अलग-अलग इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सके। पहाड़ी क्षेत्र हों, रेगिस्तानी इलाका हो या मैदानी क्षेत्र, यह सिस्टम हर मौसम और हर भूभाग में ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)

Indian Army Universal Rocket Launcher Deal: शूट एंड स्कूट क्षमता

यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की एक बड़ी खूबी इसकी “शूट एंड स्कूट” क्षमता है। यानी रॉकेट फायर करने के तुरंत बाद लॉन्चर अपनी जगह बदल सकता है। आधुनिक युद्ध में यह क्षमता बहुत जरूरी मानी जाती है, क्योंकि इससे दुश्मन की काउंटर फायर से बचा जा सकता है।

लॉन्चर के पीछे की तरफ एक रिमोटली कंट्रोल्ड और पावर्ड यूनिट लगी होती है। फायरिंग के समय वाहन के दोनों तरफ और पीछे हाइड्रॉलिक स्टेबलाइजर्स लगाए जाते हैं, जिससे लॉन्चर पूरी तरह स्थिर रहता है, इससे फायरिंग के दौरान सटीकता बनी रहती है और सिस्टम सुरक्षित रहता है। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)

मेक इन इंडिया को बढ़ावा

यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। जुलाई 2025 में नाइब लिमिटेड ने एल्बिट सिस्टम्स के साथ समझौता किया था, जिसके तहत पीयूएलएस सिस्टम का निर्माण भारत में किया जाना है। अब भारतीय सेना के लिए इस सिस्टम का ऑर्डर मिलना उसी साझेदारी का बड़ा नतीजा माना जा रहा है।

इससे देश के भीतर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी। इसके साथ ही छोटे और मझोले उद्योगों को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे सिस्टम्स के निर्यात की संभावनाएं भी खुल सकती हैं।

इस सिस्टम के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद यह पहला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम होगा, जिसे सेना ऑपरेशनल तौर पर इस्तेमाल करेगी। इससे पहले मई 2025 में भी नाइब लिमिटेड को एक इजरायली टेक्नोलॉजी कंपनी से 150.62 करोड़ रुपये का एक और ऑर्डर मिला था। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)

सेना की मारक क्षमता में इजाफा

भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल सिस्टम्स पर खास ध्यान दे रही है। पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के एडवांस वर्जन, गाइडेड रॉकेट्स और अब यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर जैसे प्लेटफॉर्म इसी रणनीति का हिस्सा हैं।

150 से 300 किलोमीटर तक मार करने वाले रॉकेट्स से लैस यह सिस्टम सेना को दुश्मन के इलाकों में गहराई तक मौजूद लक्ष्यों पर सटीक हमला करने की क्षमता देगा। इससे सीमावर्ती इलाकों में तैनात यूनिट्स को तेज प्रतिक्रिया और ज्यादा ऑपरेशनल विकल्प मिलेंगे। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)

रणनीतिक तौर पर अहम कदम

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तैयार करते हैं। एक ही सिस्टम से अलग-अलग रेंज के रॉकेट दागने की क्षमता आधुनिक युद्ध के लिहाज से बेहद अहम है। यह कॉन्ट्रैक्ट देश की रॉकेट आर्टिलरी क्षमता को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले एक साल में जब यह सिस्टम सेना के पास पूरी तरह पहुंच जाएगा, तो भारतीय सेना की फायर पावर और ऑपरेशनल तैयारी में इसका असर साफ दिखाई दे सकता है। (Indian Army Universal Rocket Launcher Deal)