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LCA Tejas Mk-1A: अगले साल 31 मार्च तक भारतीय वायुसेना को मिल जाएगा पहला स्वदेशी फाइटर जेट, संसदीय समिति देरी पर जता चुकी है चिंता

HAL Tejas Mk1A Engine Delivery: HAL receives fourth GE-F404-IN20 engine, moves closer to IAF handover
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LCA Tejas Mk-1A: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अगले साल जनवरी से अपने नए तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA Mk-1A) के जरूरी ट्रायल्स शुरू करने जा रहा है। इनमें स्वदेशी बियोंड विजुअल रेंज मिसाइल स्वदेशी Astra, देश में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और इजरायली एल्टा रडार का परीक्षण शामिल होगा। एचएएल ने 31 मार्च 2025 तक भारतीय वायुसेना को पहला विमान सौंपने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए जरूरी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को पूरी किया जाना बाकी है।

LCA Tejas Mk-1A: IAF to Get First Indigenous Fighter Jet by March 31, 2025
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LCA Tejas Mk-1A: GE इंजन आपूर्ति में देरी

तेजस Mk-1A के लिए F404 इंजन की आपूर्ति को लेकर एचएएल और अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस के बीच बातचीत चल रही है। भारतीय अधिकारियों ने हाल ही में अमेरिका का दौरा किया और बोस्टन के पास स्थित F404 प्रोडक्शन लाइन का निरीक्षण किया। GE ने संकेत दिया है कि उत्पादन संबंधी समस्याएं हल हो गई हैं, और मार्च 2025 तक इंजन की आपूर्ति शुरू हो सकती है। हालांकि, अभी तक सप्लाई को लेकर कोई तारीख फइनल नहीं हुई है।

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बता दें कि पहला विमान भारतीय वायुसेना (IAF) को 31 मार्च 2024 तक डिलीवरी होनी थी, लेकिन यह समय सीमा पूरी नहीं हो पाई। इसके पीछे कई कारण थे, जिनमें कुछ जरूरी सर्टिफकेशन में देरी और GE की तरफ से समय पर इंजन सप्लाई न किया जाना था। अमेरिकी कंपनी GE को वित्तीय वर्ष 2023-24 में HAL को छह इंजन सप्लाई करने थे।

सूत्रों ने बताया कि GE ने कुछ साल पहले मैसाचुसेट्स के लिन में F404 इंजन की प्रोडक्शन लाइन को बंद कर दिया था। जब उन्होंने इस प्रोडक्शन लाइन को फिर से शुरू किया, तो पुर्जों और कंपोनेंट्स के सर्टिफिकेशन से संबंधित कुछ दिक्कतें सामने आईं। अब उन सभी समस्याओं का समाधान कर लिया गया है। HAL के अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में GE के प्रमुख विक्रेताओं के साथ भी बातचीत की है, और अब चीजें सही दिशा में बढ़ रही हैं।

पहला LCA Tejas Mk-1A मार्च 2025 तक

एचएएल सूत्रों ने बताया कि पहला LCA Mk-1A विमान भारतीय वायुसेना को जरूरी कॉन्फिगरेशन के साथ 31 मार्च 2025 तक सौंप दिया जाएगा। शुरुआती कुछ विमान रिजर्व इंजनों के साथ डिलीवर किए जाएंगे, जिन्हें GE के इंजन आने के बाद बदला जाएगा। HAL द्वारा बनाए गए पहले LCA Mk-1A को टेंपरेरी इंजन (कैटेगरी B) के साथ IAF को दिया जाएगा।

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भारतीय वायुसेना ने फरवरी 2021 में 83 Mk-1A लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया था, जिनकी कीमत 48,000 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त, 97 और Mk-1A विमानों को करीब 67,000 करोड़ रुपये की लागत से खरीदने की योजना है। वायुसेना के मुताबिक, नए विमानों की देरी से उनकी सामरिक क्षमता पर असर पड़ सकता है।

तेजस Mk-1A अपने पुराने वर्जन Mk-1 के मुकाबले ज्यादा एडवांस है और इसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, उन्नत रडार और लंबी दूरी की मिसाइलों के साथ तैयार किया गया है। यह विमान वायुसेना की भविष्य की युद्धक क्षमताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

एचएएल ने नासिक में एक नई प्रोडक्शन लाइन स्थापित की है। इससे तेजस Mk-1A विमानों का प्रोडक्शन बढ़ाकर 24 विमानों प्रति वर्ष तक किया जा सकेगा। अभी बेंगलुरु 16 विमान सालाना बनाए जा सकते हैं।

LCA Tejas Mk-1A: इंजन उत्पादन के लिए साझेदारी

एचएएल और GE एयरोस्पेस ने F414 इंजन के संयुक्त उत्पादन के लिए समझौता किया है। ये इंजन तेजस Mk-2 कार्यक्रम के लिए बनाए जाएंगे। इस समझौते के तहत GE भारत में 80% तकनीकी हस्तांतरण (ToT) करेगा। यह साझेदारी भारत को स्वदेशी बड़े जेट इंजनों के विकास में मदद करेगी और निर्यात के लिए भी रास्ते खोलेगी।

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तेजस Mk-1A भारतीय वायुसेना के मॉर्डनाइजेशन के रोडमैप के बेहद महत्वपू्र्ण है। यह विमान लेटेस्ट तकनीक और आधुनिक हथियारों से लैस है, जो वायुसेना की युद्धक क्षमताओं को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। वायुसेना की योजना है कि आने वाले दशक में लगभग 350 तेजस विमानों (Mk-1, Mk-1A और भविष्य के Mk-2) को सेवा में शामिल किया जाए।

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अक्टूबर 2024 में एचएएल को हर साल 24 विमान बनाने के अपने वादे पर कायम रहने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि इस परियोजना से मिले सबक भविष्य की परियोजनाओं जैसे कि LCA Mk-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) में भी लागू किए जाने चाहिए।

संसदीय समिति ने तेजस के प्रोडक्शन में देरी पर जताई चिंता

बता दें कि भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत बढ़ाने और स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने के लिए, संसद की रक्षा पर स्थायी समिति ने इसी शीत कालीन सत्र में रक्षा मंत्रालय (MoD) को निर्देश दिया है कि वह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तेजस लड़ाकू विमानों के उत्पादन में तेजी लाने के लिए कहे। यह बात समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता में संसद में पेश की गई रिपोर्ट में कही गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान और चीन के साथ संभावित दो-फ्रंट युद्ध की तैयारी के लिए 42 फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत है। हालांकि, वर्तमान में वायुसेना के पास केवल 31 सक्रिय स्क्वाड्रन हैं, जिनमें प्रत्येक में 16-18 लड़ाकू विमान होते हैं। समिति ने तेजस विमानों की देरी से डिलीवरी को लेकर भी चिंता जताई। HAL को 83 तेजस मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दिया गया था, जिसकी कुल लागत 48,000 करोड़ रुपये है। मार्च 2024 से इनकी डिलीवरी शुरू होनी थी, लेकिन अभी तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं सौंपा गया है।

HAL को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। रक्षा मंत्रालय, जो HAL का प्रमुख हिस्सेदार है, ने समिति को आश्वस्त किया है कि इस मामले में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि वायुसेना ने 97 अतिरिक्त तेजस मार्क-1ए विमानों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने इन विमानों की खरीद को प्रारंभिक मंजूरी दे दी है और इसके लिए औपचारिक प्रस्ताव मांगे गए हैं।

 

China military exercises: बातचीत के बावजूद पूर्वी लद्दाख में एक्सरसाइज कर रही चीनी सेना, सैन्य गतिविधियां जारी रख कर बीजिंग दे रहा यह संदेश

China Military Exercises: Despite Talks, Beijing Signals Strength with Ongoing Drills in Ladakh

China Military Exercises: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयासों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 18 दिसंबर 2024 को बीजिंग का दौरा किया था। यह पांच वर्षों में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच पहली औपचारिक बातचीत थी, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी। लेकिन इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर भी सामने आई कि वार्ता के बावजूद चीन ने लद्दाख से सटे शिनजियांग में चीनी सेना ने सैन्य अभ्यास किया। इस अभ्यास में चीनी सेना की रॉकेट आर्टिलरी रेजिमेंट ने पूर्वी लद्दाख के पास लाइव-फायर अभ्यास किया।

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China Military Exercises: लद्दाख में सैन्य अभ्यास जारी

डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच वार्ता के अगले ही दिन चीन के सरकारी समाचार पत्र पीएलए डेली ने शिंजियांग में रॉकेट आर्टिलरी रेजिमेंट के लाइव-फायर अभ्यास की खबर प्रकाशित की। यह अभ्यास पूर्वी लद्दाख के पास किया गया था।

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पीएलए डेली के मुताबिक, इस अभ्यास में सैनिकों ने वास्तविक युद्ध परिस्थितियों के माहौल में सूचनाओं का आदान-प्रदान, खुफिया जानकारी, कमांड और नियंत्रण जैसी ड्रिल्स कीं। खास बात यह रही कि इस दौरान 122 मिमी के पीएचएल-11 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम का उपयोग किया गय। PHL-11 चीनी ट्रक-माउंटेड रॉकेट सिस्टम है, जिसमें 40 लॉन्च ट्यूब हैं। यह 30 सेकंड में 40 रॉकेट दागने की क्षमता रखता है और 50 किलोमीटर तक मार कर सकता है।

China Military Exercises: Despite Talks, Beijing Signals Strength with Ongoing Drills in Ladakh

पीएचएल-11 की खूबियां

  • पीएचएल-11 में 40 लॉन्च ट्यूब होते हैं, जिनमें से प्रत्येक 20 रॉकेट फायर कर सकता है। यह 30 सेकंड में 40 रॉकेट दाग सकता है।
  • मानक 122 मिमी रॉकेट की सीमा 20 से 40 किलोमीटर है। गोला-बारूद के साथ यह 50 किलोमीटर तक मार कर सकता है।
  • इसे 6×6 शानक्सी SX2190KA ट्रक चेसिस पर लगाया गया है, जो मुश्किल इलाकों में भी आसानी से चल सकता है। PHL-11 को 206 kW के वेचाई WD615-77A डीजल इंजन से पावर मिलती है, यह 80 किमी/घंटा की अधिकतम रफ्तार पकड़ सकता है।
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China Military Exercises: बातचीत के बावजूद चीनी इरादे साफ

ताइवान प्लस न्यूज में रिपोर्टर और चीनी सेना की गतिविधियों पर बारीकी से निगाह रखने वाले आदिल बरार कहते हैं,

“पीएलए डेली और शिन्हुआ में इस अभ्यास की खबर प्रकाशित करना चीन की ओर से भारत को स्पष्ट संकेत है कि वह लद्दाख में अपनी गतिविधियां जारी रखेगा। यह दिखाता है कि बातचीत के बावजूद, चीन की मंशा अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और दावे को मजबूत करना है। वह कहते हैं कि यह स्पष्ट है कि चीन का इरादा तनाव कम करने के बजाय अपने क्षेत्रीय दावों को मजबूत करना है।”

वह आगे कहते हैं कि बीजिंग नई दिल्ली पर दबाव बनाए रखना चाहता है क्योंकि उसका मानना है कि इस समय भारत के पास सीमित विकल्प हैं। बदलते भू-राजनीतिक माहौल ने नई दिल्ली को बातचीत के लिए मजबूर किया है, लेकिन बीजिंग इस मौके का फायदा अपने दावों को मजबूत करने के लिए करेगा।

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वह कहते हैं कि भले ही चीन ने अपनी सेनाओं डिसएंगेजमेंट पॉइंट से पीछे अपनी सेना को तैनात कर दिया है, लेकिन क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने की वह लगातार कोशिशें कर रहा है। हाल ही में चीन ने पिछले आठ वर्षों में भूटान के क्षेत्र में 22 नए गांव और बस्तियां बनाई हैं। यह निर्माण चीन की रणनीति का हिस्सा है, जिससे वह क्षेत्रीय दावों को मजबूती दे रहा है।

2014-16 के दौरान बीजिंग में भारत के राजदूत रहे और इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज के मानद फेलो अशोक कंठा के अनुसार, भूटान की सीमा के भीतर चीन का गांव बनाना यह 1998 में भूटान और चीन के बीच हुए शांति समझौते का उल्लंघन है। उन्होंने चीन के इन कदमों को “जबरदस्ती की कूटनीति” करार दिया गया है।

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सीमा सुरक्षा पर शी जिनपिंग का फोकस

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में हुई एक बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। यह दर्शाता है कि चीन अपने सीमावर्ती क्षेत्रों को अपनी राजनीतिक और सामरिक योजनाओं में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। 9 दिसंबर को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति ने सीमा प्रबंधन और सुरक्षा पर एक विशेष सत्र आयोजित किया। इस सत्र में शी जिनपिंग ने सीमा क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। शी के बयान से स्पष्ट है कि चीन न केवल सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि अपनी कूटनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा।

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शी जिनपिंग के पोलितब्यूरो स्टडी सेशन में दिए गए बयान से यह संकेत मिलता है कि नई दिल्ली के साथ बातचीत के बावजूद चीन गांवों के निर्माण को जारी रखेगा। बैठक के दौरान, चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के सदस्य और चाइनीज एकेडमी ऑफ हिस्ट्री के उपाध्यक्ष कॉमरेड ली गुओकिआंग ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। ली की रिपोर्ट और शी के बयान यह दर्शाते हैं कि चीन अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए सीमा क्षेत्रों के इतिहास को फिर से लिखने के प्रयासों को तेज करेगा।

चीन की रणनीति और भारत पर प्रभाव

आदिल के मुताबिक चीन की रणनीति स्पष्ट रूप से भारत पर दबाव बनाए रखने की है। वह बातचीत की मेज पर रहते हुए अपने दावों को जमीन पर मजबूत कर रहा है। वहीं, भारत के लिए चिंता का विषय यह है कि इन वार्ताओं के दौरान चीन का रुख लद्दाख के तनाव को एक व्यापक “पैकेज डील” का हिस्सा बनाकर पीछे धकेलने का है।

हालांकि, भारत ने वार्ता के दौरान 2005 के सीमा प्रबंधन समझौते का जिक्र किया, लेकिन चीन की इस पर जोर देने की कोशिश से भारत ने दूरी बनाए रखी। एनएसए अजीत डोभाल की चीन यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने 2005 के सीमा प्रबंधन समझौते का जिक्र किया। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस समझौते को लेकर चीन के रुख से दूरी बनाते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक निष्पक्ष और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में काम करेंगे।

चीन की ‘पैकेज डील’ रणनीति

चीन का उद्देश्य आर्थिक संबंधों को फिर से स्थापित करना है। वह भारत को कैलाश मानसरोवर यात्रा और व्यापारिक संबंधों में बहाली की राहत देकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत में चीन की गतिविधियों में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। लद्दाख में चीन के सैन्य अभ्यास और गांवों के निर्माण के साथ-साथ उसकी बयानबाजी यह संकेत देती है कि वह अपने दावों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। जो दिखाता है कि बीजिंग मौजूदा तनाव को हल करने के बजाय, इसे दीर्घकालिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखता है।

फिंगर-4 के आगे जारी है निर्माण कार्य

पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील के इलाके में चीन की तरफ निर्माण गतिविधियों के जारी रहने की नई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। चीन ने 21 अक्तूबर को हुए डिसइंगेजमेंट और कई दौर की वार्ताओं के बावजूद बफर ज़ोन से आगे के इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इन तस्वीरों से पता चलता है कि फिंगर-4 (फॉक्सहोल पॉइंट) से आगे के क्षेत्रों में, जो अब एक बफर ज़ोन के अंतर्गत आते हैं, चीन ने बड़ी निर्माण गतिविधियां शुरू कर दी हैं। इसमें सिरिजाप और रिमुचांग जैसे क्षेत्रों में पेट्रोल बोट बेस का विस्तार करते हुए देखा गया है।

14 दिसंबर 2024 को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता चलता है कि चीन सिरिजाप और रिमुचांग पेट्रोल बोट बेस के पास नए निर्माण कार्य कर रहा है। सिरिजाप क्षेत्र में कई नई इमारतें निर्माणाधीन हैं और झील के किनारे पर नए निर्माण की संभावना दिखाई दे रही है। रिमुचांग बेस पर भी नए निर्माण कार्य की तस्वीर साफ तौर पर दिखाई दे रही है।

इसके अलावा, खुरनाक फोर्ट के पास एक पुराने निर्माण स्थल को बड़े हेलीपैड में बदलने की पुष्टि हुई है। पैंगोंग ब्रिज, जो झील के उत्तर और दक्षिण किनारों को जोड़ता है, के पास भी चीन की गतिविधियां बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं।

देपसांग बुल्ज़ में चीनी सेना ने बनाईं नई पोस्ट

12 दिसंबर, 2024 की हालिया सैटेलाइट इमेजरी से यह संकेत मिलता है कि चीन ने 21 अक्टूबर 2024 में अपने तीन पोस्ट्स को हटाकर देपसांग बुल्ज़ में नए स्थानों पर तैनाती की है। चीनी सेना करीब 20 किमी पीछे हटी है। देपसांग के वाई-जंक्शन 1 और 2 पर मौजूद चीनी सेना ने अपनी आउट पोस्टों को हटा लिया है और चीनी सेना पीछे हट गई है। इनमें से दो पोस्टों को चीनी सेना ने अक्टूबर 2024 में भारत-चीन डिसइंगेजमेंट समझौते के बाद हटा दिया था। जिसके चलते भारतीय सेना पीपी-10 से पीपी-12 तक अपनी पेट्रोलिंग नहीं कर पा रही थी। हालांकि चीन ने जो तीसरी पोस्ट बनाई है वह पीपी-13 से कुछ दूर बनाई है। वहीं, चीन ने जो नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है वह अस्थाई है औऱ प्री-फैब यूनिट्स से बनाया है।

नवंबर में जो सैटेलाइट इमेज सामने आईं थीं, उनके अनुसार, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपनी कुछ अस्थायी चौकियों और इंफ्रास्ट्रक्चर को राकी नाला, वाई-जंक्शन 1 और वाई-जंक्शन 2 के पास से हटाया था। उसने राकी नाला के स्रोत के पास और बुर्त्सा नाला के ऊपरी हिस्से में दो नई अस्थायी चौकियां बनाई थीं। इन नई पोस्ट्स को ऑपरेशनल ट्रैक्स से जोड़ा गया है, जिससे चीनी सेना की मोबिलिटी बनी रहे। हालांकि यह नई स्थिति भारतीय सेना के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है क्योंकि यह इन इलाकों के पारंपरिक पेट्रोलिंग रूट्स को प्रभावित कर सकती है।

KZF Jagjeet Singh: दादा, पिता और भाई रहे भारतीय सेना में, लेकिन बेटा बना खालिस्तानी आतंकी, जानें कौन है ब्रिटिश सेना का जगजीत सिंह?

KZF Jagjeet Singh: From Indian Army Legacy to Khalistani Terrorist

KZF Jagjeet Singh: आमतौर पर जब विदेश में बसे किसी भारत वंशी को उस देश में कोई सम्मानित पद हासिल होता है, तो पूरे भारत के लिए गर्व की बात होती है। ब्रिटिश सेना के सिख सैनिक जगजीत सिंह ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। हाल ही में पंजाब में पुलिस ठिकानों पर ग्रेनेड हमलों की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पंजाब पुलिस ने खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) के रंजीत सिंह नीटा मॉड्यूल से जुड़े एक ब्रिटिश सेना के सिख सैनिक जगजीत सिंह को इन हमलों के पीछे होने का संदेह जताया है। यह सिख सैनिक अफगानिस्तान में अपनी सेवा दे चुका है और अब भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

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KZF Jagjeet Singh: दादा, पिता और भाई भारतीय सेना में रहे

पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में इस सिख सैनिक की पहचान जगजीत सिंह के रूप में की, जो ब्रिटेन में फतेह सिंह ‘बागी’ के नाम से जाना जाता है। पुलिस के अनुसार, जगजीत सिंह का संबंध पंजाब के तरनतारन जिले के एक सैन्य परिवार से है। उनके दादा, पिता और भाई भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं।

Sheikh Hasina Extradition: क्या भारत शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजेगा? दोस्ती और कानून के बीच फंसा मामला

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जगजीत सिंह करीब 10 साल पहले स्टूडेंट वीजा पर ब्रिटेन गया था, जहां उसने ईस्ट लंदन यूनिवर्सिटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वह ब्रिटिश सेना में शामिल हो गया। पुलिस का कहना है कि उसने ब्रिटिश सेना की इंफेंट्री रेजिमेंट चौथी बटालियन, द राइफल्स, में सेवा दी और अफगानिस्तान में एक मिशन पर तैनात रहा। राइफल्स रेजिमेंट इराक, अफगानिस्तान, कोसोवो और सिएरा लियोन में कई ऑपरेशनों में शामिल रह चुका है।

KZF Jagjeet Singh: आतंकवाद में शामिल होने का आरोप

पंजाब पुलिस ने दावा किया है कि यह पहली बार है जब किसी व्यक्ति, जिसने ब्रिटिश सेना में सेवा दी है, को भारत के खिलाफ आतंकवादी मॉड्यूल का नेतृत्व करते हुए पाया गया है। पुलिस ने ब्रिटिश एजेंसियों के माध्यम से मामले की जांच शुरू कर दी है।

सूत्रों के मुताबिक, यह भी जांच की जा रही है कि क्या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने जगजीत को खालिस्तानी आतंकवाद के लिए भर्ती किया था। आईएसआई अक्सर ब्रिटेन और कनाडा की सेनाओं में मौजूद सिख सैनिकों पर नजर रखती है ताकि खालिस्तान आंदोलन के लिए समर्थन जुटाया जा सके।

पंजाब में KZF मॉड्यूल का खुलासा

पंजाब पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि पिलीभीत में मारे गए तीन संदिग्ध आतंकियों का संबंध KZF के जगजीत सिंह-नीटा मॉड्यूल से था। इस मॉड्यूल का उद्देश्य पुलिस थानों और सरकारी संस्थानों पर ग्रेनेड हमले करना था।

पुलिस के मुताबिक, इस मॉड्यूल में भर्ती किए गए लोग खालिस्तान विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध नहीं थे। मॉड्यूल में ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जो मामूली अपराधों में शामिल थे।

आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर

जगजीत सिंह की कथित भूमिका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। पुलिस ने कहा कि यह ब्रिटिश सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जांच करे कि क्या उनके सरकारी संस्थानों में और भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।

पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में ब्रिटिश सरकार से सहयोग प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अक्सर विदेशी एजेंसियां ऐसे मामलों में अपनी नागरिकता वाले किसी व्यक्ति की संलिप्तता से इनकार करती हैं। पंजाब पुलिस ने कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रही है और मॉड्यूल की गहराई तक जांच कर रही है।

जगजीत सिंह का परिवार सैन्य पृष्ठभूमि का है। उनके दादा भारतीय सेना में थे, पिता सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए और भाई सिख रेजिमेंट में सेवा दे चुके हैं। ऐसी पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, जगजीत का आतंक की राह पर जाना कई सवाल खड़े करता है।

Republic Day 2025: 15 राज्यों और 11 मंत्रालयों की झांकियां होंगी आकर्षण का केंद्र, इस बार ये होगी थीम

Republic Day 2025: 15 States, 11 Ministries to Showcase 'Swarnim Bharat' Theme

Republic Day 2025: गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर ‘कर्तव्य पथ’ पर भारत की सांस्कृतिक धरोहर और विकास को प्रदर्शित करने के लिए 15 राज्यों और 11 केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां शामिल होंगी। रक्षा मंत्रालय ने इस बार झांकियों की थीम ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ (Golden India: Heritage and Development) रखी है।

Republic Day 2025: 15 States, 11 Ministries to Showcase 'Swarnim Bharat' Theme

Republic Day 2025: भारत पर्व 26 जनवरी से 31 जनवरी तक 

रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां इस साल कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इसके अलावा, 11 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की झांकियां भी परेड का हिस्सा होंगी।

गणतंत्र दिवस परेड में शामिल न हो पाने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘भारत पर्व’ में अपनी झांकियां प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन 26 जनवरी से 31 जनवरी 2025 तक लाल किले में आयोजित किया जाएगा।

Republic Day 2025: ‘स्वर्णिम भारत’ थीम पर झांकियां

इस वर्ष की थीम का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और विकास यात्रा को प्रदर्शित करना है। इस थीम के तहत झांकियां न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करेंगी, बल्कि आधुनिक भारत की विकास यात्रा को भी दर्शाएंगी।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि झांकियों के चयन की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता आधारित रही। चयन समिति में कला, संस्कृति, संगीत, वास्तुकला और कोरियोग्राफी के विशेषज्ञ शामिल थे। झांकियों के चयन में मौलिकता, रचनात्मकता, सौंदर्य और ‘विरासत और विकास’ के बीच संतुलन पर जोर दिया गया।

चयन प्रक्रिया और नई पहल

इस वर्ष झांकियों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने पहले से ही एक सुसंगठित प्रक्रिया अपनाई। अप्रैल 2024 में आयोजित एक वरिष्ठ स्तर की बैठक में झांकियों को और बेहतर बनाने के सुझाव दिए गए थे, जिन्हें इस प्रक्रिया में शामिल किया गया।

सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों से झांकियों के प्रस्ताव मांगे गए थे। चयन प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों की समिति ने झांकियों को उनकी मूल संरचना, संदेश की स्पष्टता और कलात्मक प्रस्तुति के आधार पर चुना।

Delhi Republic Day Tableau: गणतंत्र दिवस परेड में दिल्ली के झांकी विवाद पर रक्षा मंत्रालय ने दिया जवाब, बताया- ये है सच्चाई

इस बार की झांकियों में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कलाओं का मिश्रण होगा। हर झांकी को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह न केवल देखने में सुंदर हो, बल्कि संदेशप्रद भी हो।

झांकियां: भारत की विविधता और विकास का प्रतीक

कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित होने वाली झांकियां भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध इतिहास को दर्शाएंगी। उदाहरण के तौर पर:

  • गुजरात की झांकी में भारत की प्राचीन वास्तुकला और पर्यावरण संरक्षण को प्रदर्शित किया जा सकता है।
  • कर्नाटक की झांकी में ‘होयसला मंदिर समूह’, जो हाल ही में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ है, को दर्शाया जा सकता है।
  • उत्तर प्रदेश अपनी झांकी में काशी विश्वनाथ धाम और राम मंदिर अयोध्या जैसे आधुनिक विकास परियोजनाओं को शामिल कर सकता है।

केंद्रीय मंत्रालयों की झांकियां विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को दर्शाएंगी। उदाहरण के लिए, ‘स्वच्छ भारत मिशन’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।

‘भारत पर्व’ का आयोजन

गणतंत्र दिवस परेड में शामिल न होने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ‘भारत पर्व’ एक विशेष अवसर है। यह आयोजन लाल किले पर 26 जनवरी से 31 जनवरी तक होगा। इसमें राज्यों की झांकियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, हस्तशिल्प, और पारंपरिक व्यंजन शामिल होंगे।

‘भारत पर्व’ का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को देशभर के नागरिकों और विदेशी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करना है। यह आयोजन न केवल एक उत्सव है, बल्कि भारत के विकास और प्रगति का भी प्रतीक है।

15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का चयन

कर्तव्य पथ पर झांकियों की संख्या सीमित होने के कारण केवल 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रदर्शनी के लिए चुना गया है। ये राज्य और यूटी हैं:

  1. आंध्र प्रदेश
  2. बिहार
  3. चंडीगढ़
  4. दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
  5. गोवा
  6. गुजरात
  7. हरियाणा
  8. झारखंड
  9. कर्नाटक
  10. मध्य प्रदेश
  11. पंजाब
  12. त्रिपुरा
  13. उत्तराखंड
  14. उत्तर प्रदेश
  15. पश्चिम बंगाल

11 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की भागीदारी

इन राज्यों के अलावा, 11 केंद्रीय मंत्रालय और विभाग भी झांकियों के माध्यम से अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को प्रस्तुत करेंगे।

Sheikh Hasina Extradition: क्या भारत शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजेगा? दोस्ती और कानून के बीच फंसा मामला

Sheikh Hasina Extradition: Will India Send Her Back to Bangladesh?

Sheikh Hasina Extradition: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत को एक डिप्लोमैटिक नोट भेजकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने का अनुरोध किया है। 77 वर्षीय अवामी लीग की नेता शेख हसीना, जो अपने 16 साल लंबे शासन के बाद बड़े विरोध प्रदर्शनों के चलते 5 अगस्त को भारत आई थीं, लेकिन अब प्रत्यर्पण की मांग ने भारत और बांग्लादेश के बीच एक नया कूटनीतिक और कानूनी मोर्चा खोल दिया है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजने के लिए प्रत्यार्पण प्रक्रिया शुरू करेगा या पुरानी दोस्त के लिए बांग्लादेश की मांग को नजरअंदाज करेगा?

Sheikh Hasina Extradition: Will India Send Her Back to Bangladesh?

Sheikh Hasina Extradition:  शेख हसीना के खिलाफ आरोप और अंतर्राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल

ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) ने शेख हसीना और उनके मंत्रियों, सलाहकारों, पूर्व सैन्य और सिविल अधिकारियों के खिलाफ “मानवता के खिलाफ अपराध” और “नरसंहार” के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा, “हमने भारत को नोट वर्बेल (राजनयिक संदेश) भेजकर अनुरोध किया है कि शेख हसीना को वापस भेजा जाए ताकि उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो सके।”

Sheikh Hasina: शेख हसीना को वापस भेजें ढाका, बांग्लादेश ने की भारत से मांग

इस बीच, बांग्लादेश के गृह सलाहकार जहांगिर आलम ने बताया कि उनके कार्यालय ने भारतीय विदेश मंत्रालय को एक पत्र भेजा है, जिसमें शेख हसीना की प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करने की मांग की गई है।

भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि, 2013 और भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962

शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मामला दो प्रमुख कानूनों पर आधारित है:

  1. भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि, 2013: इस संधि के अनुच्छेद 1 और 2 के अनुसार, प्रत्यर्पण का अनुरोध तभी किया जा सकता है जब संबंधित व्यक्ति के खिलाफ औपचारिक आरोप लगाए गए हों। शेख हसीना के मामले में, अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
  2. भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962: इस अधिनियम के सेक्शन 31 में स्पष्ट किया गया है कि “किसी भी राजनीतिक कारण से अपराध के आरोपी व्यक्ति को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता।” इसी के तहत, भारत यह तर्क दे सकता है कि शेख हसीना पर लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रकृति के हैं।

Sheikh Hasina Extradition: क्या हैं भारत के पास विकल्प

भारत-बांग्लादेश संधि और भारत के प्रत्यर्पण अधिनियम के तहत, भारत को शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने का कोई कानूनी दायित्व नहीं है, खासकर जब आरोप राजनीतिक प्रकृति के माने जा सकते हैं।

संधि के अनुच्छेद 6 (1) के तहत, यदि अपराध राजनीतिक चरित्र का हो, तो भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 8 (3) के तहत यह साबित करना आवश्यक है कि आरोप “न्याय के हित में” और “सद्भावना” के तहत लगाए गए हैं।

शेख हसीना ने युनुस को बताया तानाशाह

शेख हसीना ने अंतरिम सरकार और उनके प्रमुख, नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद युनुस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शेख हसीना ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर “तानाशाही” का आरोप लगाया है। उन्होंने एक वर्चुअल संबोधन में कहा कि युनुस उनके शासन को गिराने के पीछे “मुख्य साजिशकर्ता” हैं और “बांग्लादेश अब एक तानाशाही शासन के कब्जे में है, जहाँ लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार समाप्त कर दिए गए हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों और धार्मिक स्थलों पर हमले बढ़ गए हैं, जिससे बांग्लादेश का लोकतांत्रिक ढांचा खतरे में है। इन परिस्थितियों में, भारत के लिए यह तय करना कठिन हो जाता है कि वह शेख हसीना को प्रत्यर्पित करे या नहीं।

हसीना ने आरोप लगाया कि उनके शासन के दौरान गरीबी उन्मूलन और आधारभूत ढांचे के विकास के क्षेत्र में हुई प्रगति को मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली सरकार ने नुकसान पहुँचाया है।

भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती

भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत ने अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन मौजूदा हालात से दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। हाल ही में, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ढाका का दौरा किया और अंतरिम सरकार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर अपनी चिंता व्यक्त की।

मिसरी ने कहा, “हमने इस संबंध में ईमानदारी और रचनात्मकता के साथ चर्चा की।” हालांकि, इस बैठक में शेख हसीना के भारत में ठहरने का मुद्दा भी उठा, जिससे मामला और जटिल हो गया।

प्रत्यर्पण का संभावित परिणाम

विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी दृष्टिकोण से देखा दजाए तो भारत के पास शेख हसीना को प्रत्यर्पित करने के लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जााए तो यह मामला भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य से देखा जाए तो, भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके फैसले से उसकी निष्पक्षता और पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंध प्रभावित न हों।

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा,

“बांग्लादेश जानता है कि भारत ऐसा नहीं करेगा। यह एक राजनीतिक चाल है। राजनीतिक प्रत्यर्पण भारत-बांग्लादेश प्रत्यर्पण संधि के दायरे में नहीं आता। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इस अव्यवस्थित कदम से भारत को राजनीतिक रूप से चुनौती देने पर तुली हुई लगती है। इससे दोनों देशों के संबंधों में लगातार समस्याएं पैदा होंगी। यूनुस सरकार को उन ताकतों से समर्थन मिल रहा है जिन्होंने बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन का समर्थन किया था, और अब वह भारत का सामना करने के लिए प्रोत्साहित महसूस कर रही है। यह घटना विदेश सचिव मिसरी की सौहार्दपूर्ण बांग्लादेश यात्रा के बाद हुई है, जो दिखाती है कि वहां के इस्लामवादी भारत के साथ संबंधों को सुधारने के लिए तैयार नहीं हैं और संबंधों को पीछे ले जाने पर आमादा हैं।”

विदेश मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने बांग्लादेश का तमाशा करार दिया है। उन्होंने मौजूदा युनुस सरकार के लिए कहा,

“एक ऐसा शासन, जिसे न तो संवैधानिक वैधता प्राप्त है और न ही जनादेश, जो भीड़ हिंसा के बल पर सत्ता में आई है, ने भारत को एक नोट वर्बेल भेजकर निष्कासित प्रधानमंत्री की वापसी का अनुरोध किया है, जिन्हें सेना ने उनके इस्तीफा देने से पहले ही भारत भेज दिया।”

क्या कहता है भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम 1962?

भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962, प्रत्यर्पण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान करता है। इसमें कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता यदि:

  • अपराध राजनीतिक प्रकृति का हो।
  • आरोप न्याय और सद्भावना के हित में न लगाए गए हों।

क्या होगा भारत का फैसला?

शेख हसीना का प्रत्यर्पण न केवल एक कानूनी मामला है, बल्कि यह भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा भी है।कानूनी दृष्टिकोण से भारत इस मामले में प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है। वहीं, राजनीतिक दृष्टिकोण से भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके फैसले से उसके पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंध प्रभावित न हों। अब देखने वाली बात होगी कि क्या भारत अपनी पुरानी दोस्त शेख हसीना को वापस भेजेगा या उनके लिए कूटनीतिक समर्थन जारी रखेगा? यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस संवेदनशील मुद्दे को कैसे हल करता है।

Sheikh Hasina: शेख हसीना को वापस भेजें ढाका, बांग्लादेश ने की भारत से मांग

Sheikh Hasina slams ICT verdict

Sheikh Hasina: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत को एक कूटनीतिक नोट भेजकर निवर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका वापस भेजने का अनुरोध किया है। 77 वर्षीय अवामी लीग नेता शेख हसीना 5 अगस्त से भारत में रह रही हैं, जब उन्हें अपने 16 साल लंबे शासन के दौरान बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच देश छोड़ना पड़ा था।

Sheikh Hasina: Bangladesh Requests India to Send Her Back to Dhaka

Sheikh Hasina: अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण का वारंट

ढाका स्थित इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने शेख हसीना, उनके मंत्रियों, सलाहकारों और पूर्व सैन्य व सिविल अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इन सभी पर “मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार” के आरोप लगाए गए हैं।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने बताया, “हमने भारत सरकार को एक कूटनीतिक संदेश भेजा है, जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के लिए वापस लाना चाहता है।”

Sheikh Hasina: भारत से प्रत्यर्पण का अनुरोध

बांग्लादेश के गृह सलाहकार जहांगिर आलम ने कहा कि उनके कार्यालय ने भारतीय विदेश मंत्रालय को शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर पत्र भेजा है। उन्होंने मीडिया को बताया, “हमने विदेश मंत्रालय को उनके प्रत्यर्पण के लिए पत्र भेजा है। यह प्रक्रिया अभी चल रही है।”

उन्होंने यह भी बताया कि ढाका और नई दिल्ली के बीच एक प्रत्यर्पण संधि है, जिसके तहत शेख हसीना को वापस लाया जा सकता है।

भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों पर असर

शेख हसीना की वापसी का अनुरोध ऐसे समय में आया है जब भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने हाल ही में बांग्लादेश का दौरा किया है। उन्होंने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद युनुस से मुलाकात की। ढाका में संवाददाताओं से बात करते हुए, मिसरी ने कहा कि उन्होंने अपने समकक्षों के साथ ईमानदारी और रचनात्मकता से चर्चा की और “अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों” पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

मोहम्मद युनुस के कार्यालय ने कहा कि इस मुलाकात के दौरान शेख हसीना के भारत में ठहराव पर भी चर्चा हुई। मुख्य सलाहकार ने कहा था, “हमारे लोग चिंतित हैं क्योंकि वह वहां से कई बयान दे रही हैं। इससे तनाव पैदा होता है।”

शेख हसीना का आरोप

विदेश सचिव की यात्रा से पहले, शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर हमला बोला और मोहम्मद युनुस पर “तानाशाही शासन” चलाने का आरोप लगाया। लंदन में अवामी लीग समर्थकों को दिए वर्चुअल संबोधन में, उन्होंने कहा कि राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे युनुस का हाथ है, जिसने उनके शासन को समाप्त कर दिया।

शेख हसीना ने कहा, “5 अगस्त से अल्पसंख्यकों, हिंदुओं, ईसाइयों और बौद्धों के पूजा स्थलों पर हमले बढ़ गए हैं। हम इसकी निंदा करते हैं। जमात और आतंकवादी नई सरकार के तहत स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “बांग्लादेश अब एक फासीवादी शासन के चंगुल में है, जहां लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार खत्म कर दिए गए हैं। हमारे शासन के दौरान गरीबी उन्मूलन, बुनियादी ढांचे के विकास और लोकतंत्र को मजबूत करने की जो उपलब्धियां थीं, उन्हें युनुस के नेतृत्व में खत्म किया जा रहा है।”

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा भारत को भेजे गए इस डिप्लोमैटिक संदेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक संबंधों की परीक्षा करेगा।

कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचार और मानवाधिकार हनन को लेकर चिंता जता चुके हैं। शेख हसीना ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे इन हमलों के लिए अंतरिम सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और इसे “लोकतंत्र के लिए खतरा” करार दिया है।

ECHS: आयुष्मान कार्ड को लेकर ईसीएचएस ने पूर्व-सैनिकों को किया सावधान! अगर की ये गलती तो जिंदगी भर पड़ेगा पछताना

ECHS Cautions Veterans: Think Twice Before Opting for Ayushman Card!

ECHS: पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए सेंट्रल ऑर्गनाइजेशन ईसीएचएस (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme) ने 16 दिसंबर 2024 को एक महत्वपूर्ण फैसला किया है। ईसीएचएस (ECHS) की तरफ से जारी एक आधिकारिक पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि पूर्व सैनिक अब प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, इसके साथ कुछ शर्तें और चेतावनियां भी जारी की गई हैं, जो सभी पूर्व सैनिकों को ध्यान में रखनी होंगी।

ECHS Cautions Veterans: Think Twice Before Opting for Ayushman Card!

ECHS: क्या है नया आदेश?

ईसीएचएस की ओर से जारी लेटर में कहा गया है कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आयुष्मान कार्ड का विकल्प पूर्व सैनिकों के लिए खुला है। इसका मतलब यह है कि जो पूर्व सैनिक ईसीएचएस या सीजीएचएस (Central Government Health Scheme) की सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, वे आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करा सकते हैं।

लेकिन इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि यदि कोई पूर्व सैनिक ईसीएचएस छोड़कर आयुष्मान भारत के तहत इलाज का विकल्प चुनता है, तो यह प्रक्रिया अपरिवर्तनीय होगी। इसका अर्थ है कि एक बार ईसीएचएस छोड़ने के बाद, वह इसे दोबारा नहीं अपना सकता।

ECHS: और आयुष्मान भारत: क्या है अंतर?

ईसीएचएस (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme):
ईसीएचएस पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को विशेष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह योजना उन पूर्व सैनिकों की जरूरतों को ध्यान में रखती है, जो कठिन परिस्थितियों में सेना में सेवाएं दे चुके हैं। इसमें सैन्य अस्पतालों के साथ-साथ पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा भी शामिल है।

ECHS Scam: ईसीएचएस योजना में घोटालों से परेशान सेना! रोक लगाने के लिए जारी की ये नई गाइडलाइंस

आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना):
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त इलाज प्रदान करना है। इसके तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस और पेपरलेस इलाज की सुविधा मिलती है। इस योजना में सरकारी और निजी दोनों प्रकार के अस्पताल शामिल हैं।

ECHS की अहम शर्त: ‘नो रिटर्न’ का नियम

नए आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई पूर्व सैनिक ईसीएचएस छोड़कर आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने का विकल्प चुनता है, तो वह भविष्य में ईसीएचएस में वापस नहीं आ सकता।

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इस नियम से उन पूर्व सैनिकों को दिक्कत हो सकती है, जो वर्तमान में ईसीएचएस की सुविधाओं से नाखुश हैं। इसमें कहा गया है कि ईसीएचएस की किसी भी समस्या के बावजूद, इसे छोड़कर आयुष्मान कार्ड का उपयोग करने से पहले पूरी जानकारी और सावधानी बरतनी चाहिए।

ECHS Cautions Veterans: Think Twice Before Opting for Ayushman Card!

क्या हो सकते हैं फायदे और नुकसान?

फायदे:

  1. आयुष्मान योजना की व्यापकता: आयुष्मान भारत योजना के तहत देशभर में कई अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलती है। इसमें निजी अस्पताल भी शामिल हैं, जो बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
  2. कैशलेस इलाज: इस योजना के तहत मरीज को कैशलेस सुविधा मिलती है, जिससे तत्काल इलाज में आसानी होती है।
  3. गरीब परिवारों के लिए मददगार: यह योजना उन पूर्व सैनिकों के लिए लाभकारी हो सकती है, जिनके पास सीमित वित्तीय संसाधन हैं।

नुकसान:

  1. ईसीएचएस सुविधाओं का नुकसान: यदि आप ईसीएचएस छोड़ते हैं, तो आप सैन्य अस्पतालों और ईसीएचएस पैनल के अन्य लाभों से वंचित हो जाएंगे।
  2. अपरिवर्तनीय प्रक्रिया: एक बार ईसीएचएस छोड़ने के बाद, इसे दोबारा अपनाना संभव नहीं होगा।
  3. सीमित विकल्प: आयुष्मान भारत योजना के तहत केवल सूचीबद्ध अस्पतालों में ही इलाज संभव है।

आयुष्मान योजना के तहत क्या मिलेगा?

आयुष्मान भारत योजना में लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। इसमें सभी प्रकार की गंभीर बीमारियों का इलाज शामिल है, जैसे कि कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज, आदि। योजना के तहत देशभर के निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज संभव है।

पूर्व सैनिकों के लिए सलाह

1. जल्दबाजी में न लें फैसला:

यदि आप ईसीएचएस सुविधाओं से असंतुष्ट हैं, तो भी इसे छोड़ने से पहले सभी विकल्पों पर गंभीरता से विचार करें।

2. आयुष्मान योजना की जांच करें:

यह सुनिश्चित करें कि आयुष्मान भारत योजना के तहत आपके क्षेत्र में अच्छे अस्पताल उपलब्ध हैं या नहीं।

3. दूसरों से सलाह लें:

अपने साथी पूर्व सैनिकों से बात करें, जिन्होंने आयुष्मान कार्ड का उपयोग किया है, और उनकी राय जानें।

4. शिकायतें दर्ज करें: यदि ईसीएचएस से संबंधित कोई समस्या है, तो उसे संबंधित अधिकारियों के पास दर्ज कराएं।

ECHS: से जुड़े लाभार्थियों के लिए खास जानकारी

  1. मेडिसिन की उपलब्धता: ईसीएचएस में दवाओं की उपलब्धता को लेकर अक्सर शिकायतें मिलती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि यह एक आम समस्या है, जिसे समय के साथ हल किया जा सकता है।
  2. रीइंबर्समेंट प्रक्रिया: कई लाभार्थियों ने शिकायत की है कि उन्हें दवाओं और इलाज के लिए रीइंबर्समेंट में देरी का सामना करना पड़ता है।
  3. समस्याओं का समाधान: यदि आप ईसीएचएस की सुविधाओं से असंतुष्ट हैं, तो इसके लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें और अपनी समस्या दर्ज करें।

BrahMos Missile Deal: गुड न्यूज! ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को मिलने वाला है नया खरीदार, भारत-वियतनाम के बीच जल्द हो सकती है डील

Indonesia BrahMos missile deal

BrahMos Missile Deal: भारत और वियतनाम के बीच $700 मिलियन की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील पर बातचीत अपने अंतिम चरण में है। इस डील के तहत भारत, वियतनाम की सेना और नौसेना को ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति करेगा। समझौते पर हस्ताक्षर अगले कुछ महीनों में होने की उम्मीद है। इस डील के बाद भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। अगर यह सौदा होता है, तो वियतनाम भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा देश बन जाएगा। इससे पहले फिलीपींस ने भारत से यह मिसाइल खरीदी थी।

दोनों देशों के बीच इस डील को लेकर कई महीनों से चर्चा हो रही है। यह समझौता अब अपने अंतिम चरण में है और आने वाले कुछ महीनों में इस पर दस्तखत हो सकते हैं।

BrahMos Missile Deal: India-Vietnam Set to Finalize Agreement Soon!

BrahMos Missile Deal: भारत और रूस की तकनीकी साझेदारी

ब्रह्मोस मिसाइल ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की गई है, जो भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनीया का जॉइंट वेंचर है। ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर से अधिक है और यह 2.8 मैक की गति से अपने लक्ष्य को भेद सकती है। इसे जल, थल और वायु – तीनों माध्यमों से लॉन्च किया जा सकता है, जो इसे एक बहुमुखी मिसाइल प्रणाली बनाता है। वियतनाम की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए ब्रह्मोस मिसाइल उनके लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

BrahMos Aerospace: क्यों विवादों में घिरा देश के लिए अचूक मिसाइल बनाने वाला संस्थान? जानें क्या है पूरा मामला

यदि यह डील पूरी होती है, तो वियतनाम फिलीपींस के बाद ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा देश होगा। वियतनाम ने पहले रूस से बास्टियन-पी (K-300P) तटीय रक्षा मिसाइल प्रणाली भी खरीदी है।

BrahMos Missile Deal: डील की प्रक्रिया और शर्तें

वियतनाम ने इस डील के लिए लंबे समय से इंतजार किया है। यह डील ब्रह्मोस एयरोस्पेस से प्रस्तावित मसौदे, फाइनल डील राशि, डिलीवरी शेड्यूल और भुगतान शर्तों के आधार पर की जा रही है। हाल ही में वियतनाम के रक्षा मंत्रालय के साथ तकनीकी और कॉमर्शियल्स डिटेल्स  साझा की गई हैं।

हालांकि, ब्रह्मोस एयरोस्पेस की लीडरशिप में कुछ बदलाव होने के कारण डील में कुछ देरी हुई है। नए सीईओ और एमडी डॉ. जयतीर्थ राघवेंद्र जोशी की नियुक्ति को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। यह मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल, हैदराबाद में विचाराधीन है।

रक्षा सहयोग में नई ऊंचाई

भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग में लगातार वृद्धि हो रही है। हाल ही में हनोई में आयोजित वियतनाम अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनी (VIDE24) में भारत ने अपने रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री जनरल लुओंग टैम क्वांग, भारतीय रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, और भारत के वियतनाम राजदूत संदीप आर्य ने किया। इसके अलावा दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, जैसे VINBAX-2023 और MILAN-2024 में भी भाग लिया है।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस, DRDO, HAL और मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने VIDE24 में हिस्सा लिया। यह प्रदर्शनी भारत और वियतनाम के बीच रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने का माध्यम बनी।

सेना के उच्च अधिकारियों का दौरा

भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने वियतनाम का दौरा किया और VIDE24 में भाग लिया। उन्होंने हनोई में वियतनाम पीपल्स आर्मी (VPA) की 80वीं वर्षगांठ समारोह में भी हिस्सा लिया था। इस अवसर पर सेना ने कहा, “यह दौरा दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को मजबूत करता है, जो सामरिक साझेदारी और विश्वास पर आधारित है।”

भारत ने वियतनाम को दीं 12 हाई-स्पीड गार्ड बोट्स

भारत ने 2022 में वियतनाम को $100 मिलियन की रक्षा क्रेडिट लाइन के तहत 12 हाई-स्पीड गार्ड बोट्स सौंपी थीं। 2023 में भारत ने वियतनाम को स्वदेश निर्मित मिसाइल कार्वेट INS किरपान उपहार स्वरूप दिय था। दोनों देशों के बीच एक लॉजिस्टिक सपोर्ट समझौता भी है, जिससे सैन्य ठिकानों का उपयोग मरम्मत के लिए किया जा सकता है।

इसके अलावा, भारत ने वियतनामी सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया है। दिसंबर 2023 में वियतनाम में आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यास VINBAX-2023 में भारतीय सेना की 50 सदस्यीय टुकड़ी ने भाग लिया। वहीं, फरवरी 2024 में वियतनाम की नौसेना ने भारत में अंतरराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास MILAN में हिस्सा लिया।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता का उद्देश्य

भारत और वियतनाम का यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। वियतनाम के साथ इस तरह की डील न केवल भारत की सामरिक स्थिति को मजबूत करती है, बल्कि इसे आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) पहल का एक अहम हिस्सा भी बनाती है।

यह डील दोनों देशों के बीच विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है और इस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस कदम है।

Delhi Republic Day Tableau: गणतंत्र दिवस परेड में दिल्ली के झांकी विवाद पर रक्षा मंत्रालय ने दिया जवाब, बताया- ये है सच्चाई

Delhi Republic Day Tableau: Defence Ministry Clarifies Controversy

Delhi Republic Day Tableau: गणतंत्र दिवस परेड में दिल्ली की झांकी शामिल न होने के आरोपों पर रक्षा मंत्रालय ने अपनी सफाई दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल द्वारा केंद्र सरकार पर लगाए गए पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्रालय ने झांकी चयन प्रक्रिया को “पारदर्शी और निष्पक्ष” बताया। इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया है कि उसने 2025 गणतंत्र दिवस पर दिल्ली की झांकी को जानबूझकर बाहर रखा है। केजरीवाल ने इसे दिल्लीवासियों के खिलाफ “भाजपा की नाराजगी” करार दिया। उन्होंने कहा, “दिल्ली देश की राजधानी है, उसकी झांकी हर साल शामिल होनी चाहिए। ये कैसी राजनीति है? वे दिल्ली और उसके लोगों से इतनी नफरत क्यों करते हैं?”

Delhi Republic Day Tableau: Defence Ministry Clarifies Controversy

झांकी चयन प्रक्रिया: क्या है सच?

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, गणतंत्र दिवस परेड के लिए झांकी चयन का फैसला रोटेशन सिस्टम के तहत किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि हर तीन वर्षों में 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को परेड में शामिल होने का मौका मिले।

सूत्रों ने बताया, “2025 के चक्र के लिए दिल्ली को प्रारंभिक सूची में रखा गया था। दिल्ली की झांकी पिछले दो दशकों में सात बार परेड का हिस्सा रही है। लेकिन  इस बार, दिल्ली की प्रस्तावित झांकी चयन समिति के मानकों पर खरा नहीं उतर सकी।” यह भी ध्यान देने योग्य है कि कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस साल झांकी प्रस्ताव ही पेश नहीं किए।

इस प्रक्रिया को पारदर्शिता का प्रमाण देते हुए मंत्रालय ने खुलासा किया कि मिजोरम और सिक्किम ने इस वर्ष कोई प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया, जबकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप चयन बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके चलते पांच अतिरिक्त राज्यों — पंजाब, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, और उत्तर प्रदेश को मौका दिया गया।

AAP के आरोप बेबुनियाद: मंत्रालय

रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “चयन प्रक्रिया में पक्षपात के आरोप निराधार हैं। पंजाब, जहां आम आदमी पार्टी सत्ता में है, इस साल हिस्सा ले रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष है।”

अधिकारी ने यह भी बताया कि दिल्ली की झांकी पिछले दो दशकों में सात बार परेड में शामिल हो चुकी है। यह औसत अन्य राज्यों की भागीदारी के समान है। इसके अलावा, गुजरात और उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य पांच राज्यों ने हाल के वर्षों में दिल्ली से अधिक बार परेड में भाग लिया है।

राजनीतिक विवाद पर मंत्रालय का रुख

मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे चयन प्रक्रिया को राजनीति से जोड़ने के बजाय गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने वाली प्रस्तावित झांकी की क्वॉलिटी और क्रिएटिविटी पर ध्यान दें। एक अधिकारी ने कहा, “हम सभी प्रतिभागियों को इंस्पीरेशनल झांकियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं जो परेड के विषयों के अनुरूप हों।”

केजरीवाल का आरोप: दिल्ली के खिलाफ पक्षपात?

पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार दिल्ली और दिल्लीवासियों के प्रति अपनी “नाराजगी” निकाल रही है।

केजरीवाल ने कहा, “दिल्ली की झांकी हर साल गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होनी चाहिए, क्योंकि यह देश की राजधानी है। यह कैसी राजनीति है? केंद्र सरकार दिल्ली और इसके लोगों से इतनी नफरत क्यों करती है? यदि वे दिल्लीवासियों से इतना बैर रखते हैं, तो दिल्ली क्यों उन्हें वोट दे?”

गणतंत्र दिवस की तैयारियों पर विवाद

यह विवाद तब सामने आया है जब 26 जनवरी, 2025 को देश 76वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। झांकी चयन प्रक्रिया में विवाद पहली बार नहीं है। हर साल कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी झांकियों के चयन न होने पर नाराजगी व्यक्त करते हैं।

झांकी चयन प्रक्रिया: कैसे होता है चुनाव?

गणतंत्र दिवस परेड के लिए झांकी चयन प्रक्रिया में रचनात्मकता, थीम, और प्रस्तुति के कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। चयन समिति में जाने-माने कलाकार, डिजाइन विशेषज्ञ, और संस्कृति एवं इतिहास के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

झांकियों को निम्नलिखित बिंदुओं पर आंका जाता है:

  1. थीम की प्रासंगिकता: झांकी का विषय राष्ट्रीय महत्व का होना चाहिए।
  2. क्रिएटिविटी और इनोवेशन : झांकी का डिज़ाइन अनूठा और आकर्षक होना चाहिए।
  3. तकनीकी क्षमता: झांकी का निर्माण ऐसा होना चाहिए कि वह परेड के दौरान सुचारू रूप से संचालित हो सके।

दिल्ली की झांकी: पिछले प्रदर्शन

दिल्ली की झांकी ने पिछले वर्षों में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित किया है। इनमें स्वच्छ भारत अभियान, चांदनी चौक, और किला-ए-मुबारक जैसे विषयों को दिखाया गया। हाल के वर्षों में दिल्ली की झांकी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा भी हासिल की।

क्या है झांकी विवाद का भविष्य?

झांकी चयन प्रक्रिया को लेकर हर साल राजनीति और विवाद सामने आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि झांकी चयन को और अधिक पारदर्शी और सहभागी बनाने की आवश्यकता है। इससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी झांकी को निष्पक्ष रूप से परखा गया है।

गणतंत्र दिवस परेड, भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में यह जरूरी है कि झांकियों का चयन केवल उनकी गुणवत्ता और विषयवस्तु के आधार पर हो, न कि राजनीतिक दबाव या विवादों के आधार पर।

Defence Ministry IAF: भारतीय वायुसेना की कमियों को दूर करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने बनाई उच्चस्तरीय समिति

India defence indigenisation: Defence Secretary Rajesh Kumar said- Atmanirbhar Bharat in defence is a necessity, not just policy
Defence Secretary Rajesh Kumar Singh

Defence Ministry IAF: भारतीय वायुसेना (IAF) की घटती क्षमता और महत्वपूर्ण संसाधनों की कमी को देखते हुए, सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए नए रोडमैप पर काम करेगी। इस समिति की अध्यक्षता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह करेंगे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह समिति तब बनाई गई है, जब पिछले महीने राष्ट्रीय राजधानी में वायुसेना कमांडरों के सम्मेलन के दौरान भारतीय वायुसेना ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को विस्तृत प्रेजेंटेशन दी गई थी।

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Defence Secretary Rajesh Kumar Singh

समिति का उद्देश्य वायुसेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए स्वदेशी डिजाइन और विकास परियोजनाओं के साथ-साथ अधिग्रहण परियोजनाओं पर काम करना है। एक सूत्र ने बताया, “तीनों सेनाओं में, वायुसेना के पास सबसे महत्वपूर्ण क्षमता का अभाव है। समिति जनवरी के अंत तक अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।”

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Defence Ministry IAF: समिति के प्रमुख सदस्य

समिति में रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ सदस्य भी शामिल हैं, जैसे कि रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी कामत, और वायुसेना के डिप्टी चीफ एयर मार्शल टी सिंह, जो समिति के सचिव सदस्य हैं। रक्षा वित्त सचिव ने भी पिछले सप्ताह हुई समिति की पहली बैठक में भाग लिया। उम्मीद जताई जा रही है कि समिति अपनी रिपोर्ट अगले दो से तीन महीनों में रक्षा मंत्री को पेश करेगी।

भारतीय वायुसेना के पास केवल 30 फाइटर स्क्वाड्रन

भारतीय वायुसेना अब तक केवल 36 नए राफेल लड़ाकू विमान शामिल कर पाई है, जो 4.5-प्लस जेनरेशन क्षमता वाले हैं। लेकिन वायुसेना को और अधिक संख्या में ऐसे विमानों की जरूरत है ताकि चीन द्वारा पेश खतरों का सामना किया जा सके। चीन, जो पाकिस्तान वायुसेना को भी हथियार और उपकरण उपलब्ध करवा रहा है, अब बांग्लादेश वायुसेना को भी लड़ाकू विमान दे सकता है।

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चीनी वायुसेना द्वारा भारत के सामने वाले सभी हवाई अड्डों, जैसे होटन, काशगर, गारगुंसा, शिगात्से, बांगडा, न्यिंगची और होपिंग में अतिरिक्त लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों और ड्रोन की तैनाती के बाद, भारत को अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने की जरूरत महसूस हो रही है। चीन ने इन हवाई अड्डों को नई रनवे, मजबूत शेल्टर, ईंधन और गोला-बारूद स्टोरेज सुविधाओं से लैस किया है।

वर्तमान में भारतीय वायुसेना केवल 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है, जबकि चीन और पाकिस्तान से संभावित खतरों से निपटने के लिए 42.5 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है।

Defence Ministry IAF: 114 नए लड़ाकू विमानों की परियोजना पर अनिश्चितता

समिति के सामने एक बड़ा सवाल 114 नए 4.5-जनरेशन लड़ाकू विमानों की निर्माण परियोजना पर आ रही अनिश्चितता को हल करना होगा। यह परियोजना लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये की है, जिसमें विदेशी सहयोग के साथ भारत में उत्पादन किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, “कुछ विमान सीधे खरीदे जाएंगे, जबकि बाकी का उत्पादन भारत में होगा।”

हथियारों और मिसाइलों की कमी

वायुसेना के लड़ाकू विमानों में हवाई-से-हवाई और हवाई-से-भूमि मिसाइलों की कमी उत्तरी सीमा पर चीन के मुकाबले बढ़ रही है। इसके अलावा, चीनी बलों के पास लंबी दूरी के सतह-से-सतह मिसाइल सिस्टम अधिक संख्या में और लंबी रेंज के साथ उपलब्ध हैं, जबकि भारतीय बलों के पास ऐसे सिस्टम सीमित संख्या में हैं।

तेजस मार्क-1ए और मार्क-2 के निर्माण में देरी

स्वदेशी तेजस मार्क-1ए विमानों का निर्माण भी प्रमुख मुद्दा है। अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से इंजन की आपूर्ति में देरी के कारण यह प्रोजेक्ट बाधित हो गया है।

  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) वित्तीय वर्ष 2024-25 में वायुसेना को केवल 2-3 तेजस मार्क-1ए विमान की ही डिलीवरी कर सकेगा, जबकि 16 विमानों की आपूर्ति का वादा किया गया था।
  • फरवरी 2021 में 46,898 करोड़ रुपये की लागत से 83 विमानों का ऑर्डर दिया गया था।
  • 97 और तेजस मार्क-1ए विमानों के लिए ₹67,000 करोड़ की नई परियोजना भी पाइपलाइन में है।

GE ने अब मार्च 2025 तक 99 GE-F404 टर्बोफैन जेट इंजन की आपूर्ति शुरू करने का वादा किया है, जो करीब दो साल की देरी से होगा।

GE-F414 इंजन का को-प्रोडक्शन

HAL और GE भारत में GE-F414 एयरो-इंजन के सह-उत्पादन के लिए अंतिम तकनीकी-व्यावसायिक बातचीत कर रहे हैं। यह इंजन कम से कम 108 तेजस मार्क-2 विमानों के लिए आवश्यक होगा। इसमें $1 बिलियन की लागत से 80% तकनीकी हस्तांतरण की योजना है।

फोर्स-मल्टीप्लायर्स की कमी

भारतीय वायुसेना को अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए फोर्स-मल्टीप्लायर्स की आवश्यकता है।

  • वायुसेना के पास केवल 6 IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलर हैं, जो 2003-04 में शामिल किए गए थे। जबकि 18 ऐसे विमानों की जरूरत है।
  • भारत “एयर सर्विलांस” के मामले में पाकिस्तान और चीन से भी पीछे है।
  • वायुसेना के पास केवल तीन स्वदेशी ‘नेत्र’ एयरबोर्न अर्ली-वॉर्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान और तीन इजरायली फाल्कन AWACS विमान हैं।

नेत्र विमान परियोजना

स्वदेशी नेत्र विमान परियोजना में तेजी लाने की जरूरत है। योजना के अनुसार, छह मार्क-1ए और छह मार्क-2 संस्करण विकसित किए जाने हैं। यह परियोजना वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगी।