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Bangladesh Terrorism: बांग्लादेश के बंदरगाह से 70 प्रशिक्षित पाकिस्तानी आतंकवादी हुए लापता! ‘हिट एंड रन’ हमलों की साजिश का हुआ खुलासा

Global Terrorism Index 2026
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Bangladesh Terrorism: जनवरी 2025 में ट्रंप के अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से पहले ही पाकिस्तान चाहता है कि बांग्लादेश को आतंकवाद का गढ़ बना कर उसे भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जाए। क्योंकि उसे पता है कि जैसे ही अमेरिका की सत्ता में डॉनल्ड ट्रंप की वापसी होगी, वैसे ही बांग्लादेश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और वह चाह कर भी बांग्लादेश की अंदरूनी राजनीति में कुछ ज्यादा हासिल नहीं कर पाएगा। इसलिए उससे पहले ही पाकिस्तान की कोशिश है कि बांग्लादेश को आतंकवाद का अड्डा बना दिया जाए, जिसका बाद में इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जाए। हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पाकिस्तान ने एक मालवाहक जहाज से 70 से ज्यादा प्रशिक्षित आतंकियों को बांग्लादेश भेजा था और ये सभी आतंकी कुछ देर बाद ही रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान, रोहिंग्या शरणार्थियों का इस्तेमाल कर बांग्लादेश में जमात-उल-मुजाहिदीन (JMB) को सक्रिय करने की कोशिशों में भी जुटा है।

Bangladesh Terrorism: 70 Pakistani Terrorists Vanish in Bangladesh; 'Hit-and-Run' Plot Exposed
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खुफिया सूत्रों ने बताया कि 13 नवंबर को कराची से आए एक कार्गो जहाज से 70 “अज्ञात पाकिस्तानी नागरिक” चटगांव बंदरगाह उतारे गए। ये सभी व्यक्ति कुछ ही घंटों में बिना किसी दस्तावेज़ और ट्रेस के गायब हो गए। इस घटना ने न केवल बांग्लादेश के सुरक्षा अधिकारियों, बल्कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को भी चिंतित कर दिया है।

Bangladesh Terrorism: चीनी नाम और पनामा का झंडा

इस जहाज का नाम “युआन जियांग फा झान” था, जो एक चीनी नाम है, और यह पनामा के झंडे के नीचे संचालित हो रहा था। इस जहाज पर 70 “अनजान पाकिस्तानी नागरिक” मौजूद थे, जिनकी मौजूदगी के बारे में न तो बांग्लादेशी सुरक्षा अधिकारियों को पहले से कोई जानकारी दी गई थी और न ही पोर्ट अधिकारियों को।

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Bangladesh Terrorism: पाकिस्तानी मिशन का हाथ

सूत्रों के अनुसार, इन पाकिस्तानी नागरिकों को बांग्लादेश में पाकिस्तानी मिशन के आदेश के बाद गायब किया गया। बांग्लादेशी कस्टम अधिकारियों ने जब इन लोगों से उनके यात्रा दस्तावेज और पहचान पूछने का प्रयास किया, तो उन्हें एक प्रभावशाली सलाहकार के आदेश पर तुरंत दूसरी जगह पर स्थानांतरित कर दिया गया। यह सलाहकार नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस से जुड़े बताए जाते हैं।

सूत्रों ने बताया कि जहाज पर मौजूद सामग्री को पाकिस्तानी कर्मियों की निगरानी में उतारा गया, और बांग्लादेशी अधिकारियों को इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी गई।

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आतंकवादी संगठन और आईएसआई का हाथ

खुफिया सूत्रों के अनुसार, गायब हुए पाकिस्तानी नागरिक विभिन्न आतंकवादी संगठनों से जुड़े हुए थे। उन्हें पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की देखरेख में प्रशिक्षित किया गया था। इन आतंकवादियों को खासतौर पर भारत में प्रवेश करने और वहां आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बांग्लादेश भेजा गया है।

रोहिंग्या का आतंकवाद में इस्तेमाल

सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान अब रोहिंग्या मुसलमानों का इस्तेमाल करके जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) को सक्रिय करने की योजना बना रहा है। खासकर उत्तर बांग्लादेश में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी (BJI) के माध्यम से इस साजिश को अंजाम देने की तैयारी है।

इस जहाज के जरिए कराची से चटगांव तक भेजे गए हथियार और आरडीएक्स का उपयोग उत्तर बांग्लादेश में ट्रेनिंग शिविर स्थापित करने के लिए किया जा सकता है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल बांग्लादेश और भारत में बड़े आतंकवादी हमलों के लिए किया जाएगा।

सूत्रों ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की आईएसआई ने बांग्लादेश के चटगांव डिवीजन के बंदरबन जिले के नाइकोंगछड़ी में रोहिंग्याओं को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, त्रिपुरा से सटे ब्राह्मणबरिया जिले और मेघालय की सीमा से सटे सिलहट जिले के खादिमनगर नेशनल पार्क के अंदर इस्लामी आतंकी समूहों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पत्रकारों और पूर्व एनएसजी अधिकारी को निशाना बनाने की साजिश

खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अंसारुल बांग्ला टीम के सदस्य भारत में आरएसएस और हिंदू नेताओं, पत्रकारों और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाकर सीमा-पार “हिट एंड रन” हमलों की योजना बना रहे हैं। लक्ष्यों में पूर्व एनएसजी अधिकारी और रिपब्लिक टीवी, ज़ी न्यूज़, और आज तक के पत्रकार शामिल बताए गए हैं।

इसके अलावा, एबीटी और जेएमबी (जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश) की सेल्स, एक्यूआईएस (अल-कायदा इन इंडियन सबकांटिनेंट) के निर्देश पर, मंदिरों, चर्चों, होटलों और औद्योगिक परियोजनाओं पर हमलों की तैयारी कर रहे हैं। इनमें अदानी समूह की परियोजनाएं भी शामिल हैं। रोहिंग्या जिहादियों की भारत में घुसपैठ इस खतरे को और बढ़ा रही है, जिसमें आईएसआई इन नेटवर्क्स का इस्तेमाल करके क्षेत्रीय अस्थिरता के अपने एजेंडे को लागू कर रहा है।

बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थी शिविर कट्टरपंथ के केंद्र बन गए हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, एक्यूआईएस और आईएसआई के ऑपरेटिव इन शिविरों से सक्रिय रूप से भर्ती कर रहे हैं, रोहिंग्या जिहादियों को हथियार और वित्तीय मदद भी दे रहे हैं। इन समूहों पर आरोप है कि वे अराकान आर्मी पर हमले करके क्षेत्र पर फिर से नियंत्रण स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस घटना से बेहद चिंतित हैं। चटगांव से इन प्रशिक्षित आतंकवादियों का गायब होना, और उनका बिना किसी कागजात के बांग्लादेश में प्रवेश करना, भारत के लिए एक गंभीर सुरक्षा खतरा बन सकता है।पाकिस्तान के आतंकी संगठन अब नए तरीके अपनाकर दक्षिण एशिया में अशांति फैलाने की योजना बना रहे हैं। आतंकवादियों को बांग्लादेश में सक्रिय करके और वहां से भारत में भेजकर, पाकिस्तान भारत की सुरक्षा को चुनौती देना चाहता है।

UPDIC: तालों के लिए प्रसिद्ध अलीगढ़ में अब बनेंगे टैंकों के लिए गोला-बारूद और हथियार, बना भारत का डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब

UPDIC: Aligarh Turns Hub for Tank Ammo and Weapons Manufacturing in India
Invest UP CEO Abhishek Prakash

UPDIC: उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) ने रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ी प्रगति की है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) ने देश की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देने के लिए छह प्रमुख नोड्स—कानपुर, झांसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट बनाए हैं। इनमें से, अलीगढ़ नोड अब 3421 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के साथ एक प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

UPDIC: Aligarh Turns Hub for Tank Ammo and Weapons Manufacturing in India
Invest UP CEO Abhishek Prakash

UPDIC: डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में अलीगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका

अलीगढ़ में 86.87 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है, जिसमें से 64.01 हेक्टेयर भूमि विभिन्न रक्षा कंपनियों को आवंटित की जा चुकी है। यह स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

इस क्षेत्र ने कई बड़ी रक्षा कंपनियों को आकर्षित किया है, जो आधुनिक तकनीक और उपकरणों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। एंकर रिसर्च लैब्स जैसी कंपनियां ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सेंसर और रेडियो डायरेक्शन फाइंडर जैसे एडवांस सिस्टम का उत्पादन कर रही हैं।

UPDIC: कानपुर बना उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर का हब, मिले 12,800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव
एंकर रिसर्च लैब्स: यह कंपनी 550 करोड़ रुपये के निवेश से ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सेंसर, रेडियो डायरेक्शन फाइंडर और परीक्षण परिसर का निर्माण कर रही है। यह परियोजना आधुनिक तकनीक और स्वदेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
एमीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड: यह अग्रणी कंपनी 330 करोड़ रुपये के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, सैटेलाइट स्पेसपोर्ट और टैक्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम का उत्पादन कर रही है। कंपनी ने उत्पादन शुरू कर दिया है और यह रक्षा क्षेत्र में बड़ा योगदान दे रही है।
ओशो कॉर्प ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड: इस कंपनी ने 250 करोड़ रुपये का निवेश कर एडवांस टेक सॉल्यूशन यूनिट स्थापित की है। यह यूनिट आधुनिक रक्षा तकनीक और समाधान प्रदान करने के लिए काम कर रही है।
प्रशांत एंटरप्राइजेज: 200 करोड़ रुपये के निवेश से यह कंपनी मीडियम-कैलिबर गोला-बारूद के लिए उपकरणों और शैल का निर्माण करेगी।
एसएमपीपी प्राइवेट लिमिटेड: यह कंपनी टैंक और तोप के गोला-बारूद के उत्पादन के लिए 200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड: यह कंपनी प्रोपल्शन गियरबॉक्स और सहायक पावर गैस टर्बाइन के निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है।
एक्सपो मशीन टूल्स प्राइवेट लिमिटेड: 100 करोड़ रुपये के निवेश के साथ यह कंपनी कार्बन कंपोजिट, सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट और मिसाइल तथा लड़ाकू विमान के लिए घटकों का निर्माण कर रही है।
जय साईं अनु ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड: यह कंपनी 100 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एक प्रिसिशन कंपोनेंट निर्माण इकाई स्थापित कर रही है।

UPDIC: Aligarh Turns Hub for Tank Ammo and Weapons Manufacturing in India

UPDIC: अन्य प्रस्तावित परियोजनाएं

होराइजन एयरोस्पेस (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड: यह कंपनी फाइटर एयरक्राफ्ट सस्टेनमेंट सेंटर और सबसिस्टम निर्माण के लिए 150 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
सक्सेना मरीन टेक प्राइवेट लिमिटेड: यह कंपनी युद्धपोत और वाहनों के निर्माण के लिए 150 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है।
सिंडिकेट इनोवेशन इंटरनेशनल लिमिटेड: यह कंपनी छोटे हथियारों और गोला-बारूद के निर्माण के लिए 150 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
स्पाइसजेट प्राइवेट लिमिटेड: यह कंपनी 125 करोड़ रुपये के निवेश से एक रक्षा रखरखाव, मरम्मत और संचालन (एमआरओ) इकाई स्थापित करने की योजना बना रही है।

इन्वेस्ट यूपी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अभिषेक प्रकाश ने कहा, “अलीगढ़ उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र है। यह उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे (यूपीडीआईसी) में एक प्रमुख नोड के रूप में उभर रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “अलीगढ़ की सफलता, क्षेत्र की अपार क्षमता को दर्शाती है। अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और अनुकूल व्यावसायिक माहौल ने इस नोड को मजबूत किया है। 3,421 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और प्रमुख कंपनियों के संचालन ने इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान दी है।”

UPDIC: यूपी डिफेंस कॉरिडोर की विशेषताएं

यूपीडीआईसी की स्थापना आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य रक्षा उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। कानपुर, झांसी, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट जैसे नोड्स ने अपनी-अपनी भूमिकाएं निभाई हैं, लेकिन अलीगढ़ का प्रदर्शन इसे सबसे अलग बनाता है। अलीगढ़ की सफलता ने अन्य नोड्स के लिए एक प्रेरणा का काम किया है। आधुनिक तकनीक, कुशल मानव संसाधन और अनुकूल नीति माहौल ने अलीगढ़ को देश का एक अग्रणी रक्षा उत्पादन केंद्र बना दिया है।

अलीगढ़ में हो रहे रक्षा निवेश से न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि यह भारत की रक्षा क्षमता को भी मजबूत कर रहा है। यह कदम उत्तर प्रदेश को देश का रक्षा विनिर्माण हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।

यूपी सरकार की अहम भूमिका

यूपी सरकार का “विकसित भारत” विज़न इस डिफेंस कॉरिडोर परियोजना का मूल आधार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में राज्य सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई पहलें की हैं। राज्य सरकार ने औद्योगिक नीति में सुधार करते हुए न केवल भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज किया, बल्कि उद्योगों के लिए टैक्स लाभ और बिजली सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी प्रदान की हैं।

वहीं भारत सरकार के “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत अलीगढ़ नोड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रक्षा उत्पादन के लिए स्वदेशीकरण पर जोर देकर, यह नोड न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम कर रहा है। अलीगढ़ नोड में स्थापित हो रही नई औद्योगिक इकाइयों से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर खुल रहे हैं। कंपनियां न केवल विशेषज्ञों को रोजगार दे रही हैं, बल्कि स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के जरिए स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित भी कर रही हैं।

Abdul Rehman Makki: मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड मक्की की हार्ट अटैक से हुई मौत, डायबिटीज का चल रहा था इलाज

Abdul Rehman Makki: Mumbai Attack Mastermind Dies of Heart Attack Amid Diabetes Treatment
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Abdul Rehman Makki: मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड और प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा (JuD) का डिप्टी चीफ हाफिज अब्दुल रहमान मक्की की शुक्रवार को लाहौर में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। मक्की लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष नेता और कमांडर था और भारत में हुईं आतंकवादी गतिविधियों में उसकी सक्रिय भूमिका थी।

Abdul Rehman Makki: Mumbai Attack Mastermind Dies of Heart Attack Amid Diabetes Treatment
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Abdul Rehman Makki: मुंबई हमलों का षड्यंत्रकारी

मक्की आतंकी हाफिज सईद का करीबी था और 2008 में मुंबई हमलों की योजना बनाने में शामिल रहा था। इन हमलों में 166 लोगों की मौत हुई थी। मक्की का नाम कई बड़े आतंकी हमलों की साजिशों में भी सामने आया था।

मक्की, जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद का बहनोई था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मक्की को आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित किया गया था। जमात-उद-दावा के एक अधिकारी ने बताया कि मक्की पिछले कुछ दिनों से बीमार था और उसे लाहौर के एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। उसका डायबिटीज का इलाज चल रहा था और आज सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई।

China in Pakistan: पाकिस्तान में CEPC प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा को लेकर चीन कर रहा बड़ी तैयारी, अपने नागरिकों पर हमले रोकने के लिए तैनात करेगा चीनी सैनिक

2020 में, एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने मक्की को आतंकवाद के फंडिंग  के आरोप में छह महीने की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह लो प्रोफाइल हो गया था और सार्वजनिक तौर पर ज्यादा सक्रिय नहीं था।

हालांकि, मक्की की आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा में सक्रिय नेतृत्व और संगठनात्मक भूमिका बनी रही। उसकी गतिविधियों के चलते पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच दबाव का माहौल बना रहा।

2023 में, संयुक्त राष्ट्र ने मक्की को एक वैश्विक आतंकवादी घोषित किया, जिसके तहत उसकी संपत्तियां फ्रीज कर दी गईं थी, और यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया था।  और हथियारों पर प्रतिबंध लागू किया गया। यह कार्रवाई उनके आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया।

पाकिस्तान मुताहिदा मुस्लिम लीग (PMML) ने मक्की को “पाकिस्तान की विचारधारा का समर्थक” बताया।

Abdul Rehman Makki: भारत में कई आतंकी हमलों में हाथ

अब्दुल रहमान मक्की का नाम भारत में कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा हुआ है। 2000 में लाल किले पर हुए हमले की साजिश में भी मक्की का हाथ माना जाता है। इसके अलावा, रामपुर आतंकी हमला, 2018 में श्रीनगर में हुए अटैक और बारामूला के हमलों में भी मक्की की भूमिका थी।

30 मई 2018 को बारामूला में हुए आतंकी हमले में तीन निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। वहीं, श्रीनगर में एक अन्य हमले के दौरान वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी और उनके दो सहयोगियों की हत्या कर दी गई थी। ये सभी हमले लश्कर-ए-तैयबा द्वारा अंजाम दिए गए थे, जिसमें मक्की की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

गौरतलब है कि लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक और मक्की का साला हाफिज सईद है, जिसने इन आतंकी गतिविधियों को संचालित करने में अहम भूमिका निभाई। मक्की लंबे समय तक लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा था और भारत में आतंक फैलाने के लिए सक्रिय रहा। ये घटनाएं उसकी आतंकी गतिविधियों और योजनाओं की स्पष्ट तस्वीर पेश करती हैं।

पाकिस्तान की आतंकवाद नीति पर सवाल

मक्की जैसे आतंकवादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और उसकी मौत से यह सवाल उठता है कि पाकिस्तान अपनी आतंकवाद नीति में कितना गंभीर है। मक्की पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद, उसका संगठन जमात-उद-दावा और उससे जुड़े समूह खुले तौर पर काम करते रहे।

China on LAC: पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन की बड़ी तैयारी; चीनी सेना के लिए बना रहा ‘किला’, रखेगा बड़े हथियारों का जखीरा

China on LAC: China Expands Underground Facility Near India Amid Border Tensions

China on LAC: सीमा विवाद को लेकर चीन और भारत के बीच डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद, लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से सटे इलाकों में चीन की गतिविधियां जारी हैं। चीन ने एलएसी से 60 किलोमीटर दूर अपने इलाके में गतिविधियों को तेज कर दिया है। सैटेलाइट इमेजरी के मुताबिक, चीन यहां अंडरग्राउंड फैसिलिटी का विस्तार कर रहा है। इस फैसिलिटी को बनााने का मकसद चीनी सेना (PLA) को रणनीतिक बढ़त देना और अपनी क्षमताओं को बढ़ाना बताया जा रहा है। इससे पहले जो सैटेलाइट इमेज सामने आई थीं, उसमें चीन पैंगोंग झील के पास फिंगर-4 से आगे बड़े स्तर पर निर्माण कार्यों को अंजाम दे रहा है।

China on LAC: China Expands Underground Facility Near India Amid Border Tensions
Credit: Damien Symon

हाल ही में जारी कई सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चीन अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में जुटा हुआ है। चीन ने भारत-चीन सीमा के पास पहले से मौजूद अंडरग्राउंड सुविधा का बड़े पैमाने पर विस्तार करना शुरू कर दिया है। यह साइट 2015-16 में बनाई गई थी, लेकिन अब इसे और मजबूत और बड़ा किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह चीन की सैन्य रणनीति और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए तैयार की जा रही है।

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China on LAC: सैटेलाइट इमेज में क्या दिखा?

सैटेलाइट इमेजरी में पूर्वी लद्दाख के पास स्थित इस अंडरग्राउंड सुविधा में नई सुरंगों और इमारतों का निर्माण साफ नजर आ रहा है। यह फैसिलिटी भारत के डेमचोक क्षेत्र से लगभग 60 किलोमीटर दूर नागरी में स्थित है। इसमें कई प्री-एग्जिस्टिंग पोर्टल और सपोर्ट बिल्डिंग्स को जोड़कर और बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किय जा रहा है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्ट्रक्चर चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लिए एक सुरक्षित स्थान यानी किले के रूप में तैयार किया जा रहा है। यहां हथियारों और सैन्य उपकरणों को सुरक्षित रखने और आवश्यकतानुसार उपयोग करने के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि यह निर्माण कार्य तेज गति से हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चीन की सैन्य रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह विवादित क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

  • मल्टीपल पोर्टल्स: साइट पर कई प्री-एग्जिस्टिंग पोर्टल्स हैं, जिन्हें और ज्यादा मजबूत किया जा रहा है।
  • नई सुरंगें: सैटेलाइट इमेजरी में नए पोर्टल्स का निर्माण दिखा है, जो अंडरग्राउंड गतिविधियों को आसान बना सकते हैं।
  • सपोर्ट बिल्डिंग्स: साइट पर सपोर्ट बिल्डिंग्स और कंस्ट्रक्शन साइट साफ नजर आ रही हैं, जो इसके लॉजिस्टिक्स को संभालने में मदद करेंगी।

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LAC पर क्या हो रहा है?

हालांकि, 2021 में पेंगोंग त्सो क्षेत्र में समझौते के बाद, कई फ्रिक्शन पॉइंट्स से सैनिकों को वापस बुलाया गया। हाल ही में डेपसांग और डेमचोक में भी सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी हुई। भारत ने उम्मीद जताई थी कि इससे सीमा पर स्थायी शांति स्थापित होगी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संसद में कहा था, “हमारी प्राथमिकता थी कि टकराव वाले इलाकों से सैनिक हटाए जाएं। यह काम पूरा हो चुका है। अब अगली प्राथमिकता है सीमा पर सेना की तैनाती को कम करना।”

हालांकि, चीन की गतिविधियां दिखाती हैं कि वह पीछे हटने के बावजूद अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है।

India-China: पैंगोंग झील में चीन की बड़ी कारस्तानी! डिसइंगेजमेंट और वार्ता के बावजूद फिंगर-4 के आगे जारी है निर्माण कार्य

India-China: Despite Disengagement, China Continues Construction Beyond Finger-4 at Pangong Lake
Source: Damien Symon

China on LAC: पेंगोंग त्सो झील के पास गतिविधियां

पेंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर चीन तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सैटेलाइट इमेज में नई इमारतें और हेलिपैड के साथ सड़कों और पुलों का निर्माण देखा गया है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भारत का हिस्सा माना जाता है, लेकिन 1959-62 के बीच चीन ने इस पर कब्जा जमा लिया था।

रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय रैना ने कहा, “चीन अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। भारत अभी भी सिरिजाप और खुर्नाक को अपना मानता है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति बदल चुकी है।”

सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि सिरिजाप और खुरनाक क्षेत्र में चीन तेजी से निर्माण कर रहा है। सिरिजाप में अस्थायी ढांचों की जगह अब बड़े और स्थायी निर्माण हो चुके हैं। खुरनाक किले में पुराने ढांचों को तोड़कर नई दीवारें और सड़कों का निर्माण किया गया है।

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देपसांग में बनाया नया ठिकाना

सैटेलाइट इमेजरी से यह भी सामने आया है कि देपसांग के पीछे की स्थिति में चीनी सेना ने नए ठिकानों का निर्माण किया है। यह स्थान चिप चाप नदी के पास स्थित है। नई सुविधाओं में बड़े पैमाने पर सैन्य शिविर और हेलिपैड शामिल हैं। यह निर्माण चीन की सेना के दक्षिणी शिंजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट द्वारा किया जा रहा है।

देपसांग क्षेत्र में PLA ने अपने पुराने स्थान से 3 किलोमीटर पीछे हटकर नया शिविर बनाया है। यह शिविर चिप चप नदी से 7 किलोमीटर दक्षिण में है। सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी पता चला है कि PLA ने एक और शिविर लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थापित किया है।

भारत-चीन वार्ता: NSA अजीत डोभाल की बैठक

हाल ही में बीजिंग में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। इसमें NSA अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भाग लिया। बैठक में सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की बात कही गई, ताकि दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य हो सकें। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, “दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना भारत-चीन संबंधों के सामान्य विकास के लिए महत्वपूर्ण है।”

चीन की रणनीतिक तैयारियां

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह निर्माण कार्य उसकी “स्लामी स्लाइसिंग” रणनीति का हिस्सा है। यह रणनीति छोटे-छोटे कदमों के जरिए विवादित क्षेत्रों पर कब्जा करने की कोशिश है। देपसांग और पेंगोंग त्सो के आसपास की गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि चीन अपनी सैन्य उपस्थिति को और मजबूत करने के प्रयास में है।

Ladakh: माइनस 10 डिग्री टेंपरेचर में भारतीय सेना ने दिखाया दमखम, 12,000 फीट पर खड़ा किया ब्रिज!

Ladakh: Indian Army Builds Bridge at 12,000 Feet in Sub-Zero Temperatures!
Credit: firefurycorps

Ladakh: लद्दाख में तैनात भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने जीरो डिग्री से कम टेंपरेचर में हाई एल्टीट्यूड 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर हाई लेवल इंजीनियरिंग ट्रेनिंग शुरू की है। इस चुनौतीपूर्ण अभ्यास में सेना के कॉम्बैट इंजीनियर्स (सैपर्स) को मुश्किल हालात में अपनी दक्षता और कुशलता को निखारने का मौका मिल रहा है।

Ladakh: Indian Army Builds Bridge at 12,000 Feet in Sub-Zero Temperatures!
Credit: firefurycorps

इस हाई लेवल ट्रेनिंग में सैपर्स को न केवल युद्धक्षेत्र की इंजीनियरिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया गया कि उनके साथ प्लांट ऑपरेटरों भी मिल काम करें और दोनों का समन्वय बना रहे। यह ट्रेनिंग बताती है कि भारतीय सेना दुर्गम इलाकों में भी किसी भी चुनौती से निपटने के लिए हमेशा तैयार है।

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Ladakh: ब्रिजिंग ऑपरेशन का अभ्यास

भारतीय सेना फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स की तरफ से अपने एक्स सोशल मीडिया अकाउंट पर की गई पोस्ट में बताया है कि इस ट्रेनिंग के दौरान, सैपर्स ने अस्थायी पुलों और अन्य महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया। इन स्ट्रक्चर्स का महत्व उन इलाकों में बढ़ जाता है जहां सैन्य गतिविधियों के लिए मोबिलिटी और रसद की सप्लाई अत्यंत आवश्यक होती है। अभ्यास में दिखाए गए ब्रिजिंग ऑपरेशन्स ने यह सुनिश्चित किया कि सेना की तैयारियां शांतिकाल और युद्धकाल दोनों स्थितियों में तेज और प्रभावी रहें।

लद्दाख की 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच फायर एंड फ्यूरी सैपर्स (इंजीनियरिंग विशेषज्ञ) संयंत्र ऑपरेटरों के साथ कॉम्बैट इंजीनियरिंग अभियानों का समन्वित प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह उच्च ऊंचाई पर होने वाला प्रशिक्षण सेना की ऑपरेशनल तैयारियों, विश्वसनीयता और आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है!

लद्दाख क्षेत्र, जो सामरिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, में यह पहल भारतीय सेना के आत्मविश्वास और रणनीतिक दक्षता को उजागर करती है। फायर एंड फ्यूरी कोर, जो देश की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, उसने एक बार फिर अपनी विश्वसनीयता साबित की है।

भारतीय सेना का यह अभ्यास उसकी तैयारियों और समर्पण को दर्शाता है। “ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया” के अपने आदर्श वाक्य को साकार करते हुए, सेना न केवल बदलती चुनौतियों के अनुकूल हो रही है, बल्कि कठिनतम परिस्थितियों में भी अपनी श्रेष्ठता बनाए रख रही है।

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लद्दाख जैसे क्षेत्रों में जहां तापमान माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, वहां ब्रिजिंग ऑपरेशन और रसद संबंधी तैयारियां सैनिकों के लिए जीवनरेखा साबित होती हैं। ऐसे अभियानों से न केवल सीमा पर तैनात जवानों की गतिशीलता सुनिश्चित होती है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्यों में भी तेजी आती है।

Ladakh: सैनिकों का मनोबल बढ़ाने की कवायद

अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण और ऑपरेशनल अभ्यास न केवल तकनीकी कौशल को बेहतर बनाता है, बल्कि सैनिकों का आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। यह सुनिश्चित करता है कि सेना के जवान हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए तैयार रहें।

Defence Ministry Report: रक्षा मंत्रालय ने जारी की सालाना रिपोर्ट; सीमा पर तैयारियों, एतिहासिक बजट और गगनयान कार्यक्रम को लेकर दी जानकारी

Defence Ministry Report: Highlights on Border Readiness, Record Budget & Gaganyaan Progress
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Defence Ministry Report: रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारतीय सेना के अभियानों, ऐतिहासिक रक्षा बजट, और महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम की जानकारी दी। यह रिपोर्ट सीमावर्ती तैयारियों, रक्षा क्षेत्र में हो रहे विकास, और भारत के अंतरिक्ष मिशन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है। इस रिपोर्ट में भारतीय सेना की बॉर्डर इलाकों में सतर्कता, रक्षा बजट में ऐतिहासिक वृद्धि, और गगनयान कार्यक्रम की सफलता को बताया गया है। सााथ ही, रक्षा मंत्रालय ने आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रीय सुरक्षा के अपने लक्ष्यों को प्राथमिकता देते हुए देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा किया है।

Defence Ministry Report: Highlights on Border Readiness, Record Budget & Gaganyaan Progress
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Defence Ministry Report: एलएसी और एलओसी पर ऑपरेशनल तैयारी

भारतीय सेना ने वर्ष 2024 में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) और लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर अपनी उच्च स्तर की ऑपरेशनल तत्परता बनाए रखी। एलएसी के साथ सीमा विवादों के समाधान और सैनिकों की तैनाती में बड़ा बदलाव देखा गया।

  • एलएसी अपडेट
    21 अक्टूबर 2024 को भारत और चीन के बीच एक व्यापक सहमति बनी, जिसके तहत एलएसी पर स्थिति को बहाल किया गया। डेपसांग और डेमचोक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सैनिकों को पीछे हटाया गया और परंपरागत गश्त दोबारा शुरू हुई। यह कदम विकसित भारत विज़न के तहत सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ जोड़ा गया।
  • एलओसी स्थिरता और आतंकवाद विरोधी अभियान
    एलओसी पर 2021 में डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) समझौते के बाद से शांति बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, हालांकि समय-समय पर हिंसा में बढ़ोतरी के मामले सामने आते हैं।
  • भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों पर भी ध्यान केंद्रित किया। सेना ने स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर तालमेल बैठाकर विकास परियोजनाओं में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
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Defence Ministry Report: वित्तीय वर्ष 2024-25 का रक्षा बजट:

त्तीय वर्ष 2024-25 के लिए रक्षा बजट ₹6.22 लाख करोड़ (लगभग 75 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 18.43% की वृद्धि है।

  • प्रमुख खर्च श्रेणियां
    बजट का 27.66% पूंजीगत व्यय के लिए आवंटित किया गया है, जिसका फोकस स्वदेशी रक्षा उद्योग से खरीदारी पर है।

    • वेतन और भत्ते: 30.66% बजट सैन्य कर्मियों के वेतन और भत्तों के लिए है।
    • पेंशन: पेंशन के लिए 22.70% आवंटित किया गया है।
  • कुल बजट का हिस्सा
    यह रक्षा बजट भारत के कुल बजट अनुमान का 12.9% है। रक्षा मंत्रालय ने घरेलू उद्योगों को प्राथमिकता देने और आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिए इन संसाधनों का उपयोग किया।

Defence Ministry Report: सामाजिक पहल और सैनिकों का कल्याण

  • वन रैंक वन पेंशन योजना (ओआरओपी)
    सरकार ने इस साल ओआरओपी के तहत पेंशन विसंगतियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए। यह योजना लगभग 25 लाख पेंशनभोगियों को लाभान्वित कर रही है।
  • शहीदों के परिवारों के लिए योजनाएं
    शहीद सैनिकों के परिवारों को आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सहायता के लिए नई योजनाएं शुरू की गईं।
  • अग्निवीर योजना
    इस योजना के तहत भर्ती हुए युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें सेना की मुख्यधारा में शामिल किया गया।

गगनयान कार्यक्रम: भारत का अंतरिक्ष में नया अध्याय

गगनयान कार्यक्रम का उद्देश्य निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं का प्रदर्शन करना है। फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायुसेना के चार अधिकारियों को ‘स्पेस विंग्स’ से सम्मानित किया। यह भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण था।

अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण:

  • समर्पित अंतरिक्ष यात्री: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को NASA में Axiom-4 मिशन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) मिशन: 2025 में होने वाले इस मिशन के जरिए भारत अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर पहुंचेगा।

बॉर्डर एरिया में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर

सरकार ने अपनी ‘विकसित भारत विज़न’ योजना के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को तेज किया है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने नई सड़कों, पुलों और सुरंगों का निर्माण किया है, जो सेना की त्वरित तैनाती और नागरिकों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करता है।

  • शिंकुन ला सुरंग परियोजना, जो दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग होगी, तेजी से प्रगति पर है। इस सुरंग के पूरा होने के बाद लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के बीच बेहतर कनेक्टिविटी होगी।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पुल और सड़कों के निर्माण ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत किया है।

सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम

भारतीय सशस्त्र बलों ने अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए नए उपकरणों और हथियार प्रणालियों की खरीद की है।

  • आत्मनिर्भरता पर जोर
    रक्षा मंत्रालय ने 2024 में 80% से अधिक खरीदारी स्वदेशी कंपनियों से की, जिसमें हल्के लड़ाकू विमान तेजस, अर्जुन टैंक और पिनाका रॉकेट सिस्टम शामिल हैं।
  • ड्रोन और एआई प्रौद्योगिकी का उपयोग
    सेना ने ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्रणालियों का उपयोग बढ़ाया है। ये प्रौद्योगिकियां निगरानी और खुफिया अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

स्थानीय रक्षा उद्योग को बढ़ावा

  • मेक इन इंडिया: घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
  • नई परियोजनाएं: तीन नई पनडुब्बियां और 26 नौसैनिक लड़ाकू विमानों के लिए अनुबंध अगले महीने तक पूरा होने की संभावना है।

नौसेना और वायुसेना की उपलब्धियां

  • नौसेना का विस्तार
    भारतीय नौसेना ने वर्ष 2024 में आईएनएस विक्रांत और आईएनएस अरिहंत जैसे प्रमुख युद्धपोतों को शामिल कर अपनी ताकत बढ़ाई। इसके अलावा, स्वदेशी तकनीक से बने पनडुब्बियों और जहाजों के निर्माण में भी तेजी लाई गई।
  • वायुसेना में नई प्रौद्योगिकियां
    भारतीय वायुसेना ने नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों, जैसे तेजस एमके1ए, और राफेल विमानों को शामिल किया। इसके साथ ही, एंटी-ड्रोन प्रणालियों और उन्नत मिसाइल तकनीकों को भी अपनाया गया।

भारत की सामरिक क्षमताओं का विस्तार

रक्षा मंत्रालय ने इस वर्ष परमाणु क्षमता वाले मिसाइलों और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (आईसीबीएम) की तैनाती पर भी ध्यान केंद्रित किया।

  • अग्नि-6 परीक्षण
    भारत ने 2024 में सफलतापूर्वक अग्नि-6 का परीक्षण किया, जो देश की सामरिक क्षमताओं को और मजबूत करता है।
  • परमाणु पनडुब्बियां
    अरिहंत वर्ग की पनडुब्बियां देश के परमाणु त्रिकोण को संतुलित और सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

Surya Kiran 2024: भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच 29 दिसंबर से सालझंडी में शुरू होगा ‘सूर्य किरण 2024’ सैन्य अभ्यास

Surya Kiran 2024: India-Nepal Joint Military Exercise Begins December 29 in Saljhandi
Credit: Indian Army

Surya Kiran 2024: भारत और नेपाल की सेनाएं 29 दिसंबर से 13 जनवरी 2024 तक नेपाल के सालझंडी में ‘सूर्य किरण’ सैन्य अभ्यास के 18वें संस्करण का आयोजन करेंगी। इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच जंगल वारफेयर, आतंकवाद विरोधी अभियानों और आपदा राहत जैसे कार्यों में सामंजस्य बनाना है।

Surya Kiran 2024: India-Nepal Joint Military Exercise Begins December 29 in Saljhandi
Credit: Indian Army

भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर इस अभ्यास के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आपसी सहयोग को बढ़ावा देना और आपदा राहत कार्यों में साझेदारी स्थापित करना है।”

Surya Kiran 2024: सैन्य सहयोग का प्रतीक

‘सूर्य किरण 2024’ भारत और नेपाल के बीच मित्रता, विश्वास और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं को एक साथ काम करने और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान करता है। भारतीय सेना ने अपने संदेश में लिखा, “हम साथ प्रशिक्षण लेते हैं, हम साथ उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं।”

Surya Kiran 2024: पिछले संस्करण की सफलता

इससे पहले ‘सूर्य किरण’ का 17वां संस्करण नवंबर-दिसंबर 2023 में उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आयोजित किया गया था। उस दौरान नेपाली सेना के 334 जवानों ने भारतीय सेना के कुमाऊं रेजिमेंट के साथ मिलकर अभ्यास किया था। इस बार भी दोनों सेनाओं के बीच टैक्टिकल प्रोसेस का आदान-प्रदान और अनुभव साझा करने पर जोर दिया जाएगा।

दोनों देशों के बीच गहरे सैन्य संबंध

भारत और नेपाल के बीच सैन्य संबंधों का इतिहास लंबा और गौरवशाली रहा है। 1950 से दोनों देशों ने एक-दूसरे के सेना प्रमुखों को मानद जनरल की उपाधि देने की परंपरा कायम रखी है।

General Upendra Dwivedi Nepal Visit: नेपाली सेना के ऑनरेरी जनरल बने भारतीय सेना प्रमुख, राष्ट्रपति रामचंद्र पाउडेल ने किया सम्मानित

नवंबर 2024 में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपनी पांच दिवसीय नेपाल यात्रा के दौरान नेपाली सेना के मानद जनरल की उपाधि प्राप्त की। उन्हें यह सम्मान नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने काठमांडू स्थित राष्ट्रपति भवन में प्रदान किया। इसी क्रम में, 12 दिसंबर 2024 को नेपाली सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सेना के मानद जनरल की उपाधि से सम्मानित किया।

Surya Kiran 2024: India-Nepal Joint Military Exercise Begins December 29 in Saljhandi
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गोरखा सैनिकों की भर्ती में रुकावट

हालांकि, दोनों देशों के सैन्य संबंधों में ‘अग्निपथ योजना’ के कारण तनाव भी देखने को मिला है। 2020 में इस योजना के लागू होने के बाद से नेपाल ने भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती पर रोक लगा दी है।

2019 से अब तक कोई भी नेपाली गोरखा भारतीय सेना में भर्ती नहीं हुआ है। इससे सक्रिय सेवा में गोरखा सैनिकों की संख्या घटती जा रही है। गोरखा रेजिमेंट को बहादुरी और साहस का प्रतीक माना जाता है, और इसके सैनिकों ने विश्वभर में अपनी वीरता का लोहा मनवाया है।

सैन्य अभ्यास का महत्व

‘सूर्य किरण’ जैसे अभ्यास भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय सैन्य संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ दोनों सेनाओं को साझा चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करते हैं। यह अभ्यास न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं और आतंकवादी खतरों से निपटने में भी मदद करता है।

‘सूर्य किरण’ जैसे अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच गहरे रिश्ते और परस्पर समझ विकसित होगी। यह सहयोग आने वाले समय में दोनों देशों की सेनाओं को क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में और सक्षम बनाएगा।

SLINEX 24: भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं ने समुद्री साझेदारी को दी नई ऊंचाई, SAGAR को मिली मजबूती

SLINEX 24: India-Sri Lanka Navies Strengthen Maritime Partnership
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SLINEX 24: भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास SLINEX 24 (Sri Lanka-India Exercise 2024) का आयोजन 17 से 20 दिसंबर, 2024 के दौरान विशाखापत्तनम में किया गया। यह अभ्यास पूर्वी नौसैनिक कमान के तहत दो चरणों में संपन्न हुआ। पहले चरण हार्बर फेज़ का आयोजन 17 से 18 दिसंबर तक हुआ, जबकि दूसरा चरण सी फेज़ 19 से 20 दिसंबर तक समुद्र में आयोजित किया गया।

SLINEX 24: India-Sri Lanka Navies Strengthen Maritime Partnership
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SLINEX 24: भारतीय और श्रीलंकाई नौसेनाओं की भागीदारी

भारतीय नौसेना की ओर से INS सुमित्रा और विशेष बल (Special Forces) की टीम ने इस अभ्यास में भाग लिया। वहीं, श्रीलंकाई नौसेना की ओर से ऑफशोर पेट्रोल वेसल SLNS सायुरा और उस पर तैनात विशेष बलों की टीम ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया। दोनों देशों की नौसेनाओं के इस सहयोग ने हिंद महासागर क्षेत्र में मैत्री और सहयोग को और मजबूत किया।

SLINEX 24: India-Sri Lanka Navies Strengthen Maritime Partnership
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हार्बर फेज़

SLINEX 24 का उद्घाटन समारोह 17 दिसंबर को आयोजित किया गया। इस अवसर पर दोनों देशों की नौसेनाओं ने आपसी संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए पेशेवर और सामाजिक गतिविधियों में भाग लिया। हार्बर फेज़ के दौरान प्रतिभागियों ने सामरिक विचार-विमर्श, आपसी प्रशिक्षण और सामाजिक आदान-प्रदान के माध्यम से एकजुटता का प्रदर्शन किया।

SLINEX 2024: विशाखापत्तनम में शुरू हुआ भारत-श्रीलंका नौसैनिक अभ्यास, समुद्री आतंकवाद का मिल करेंगे मुकाबला

सी फेज़

19 दिसंबर से शुरू हुए सी फेज़ में समुद्र में व्यावहारिक अभ्यास किए गए। इसमें विशेष बलों के संयुक्त अभ्यास, तोपों की फायरिंग, संचार प्रक्रियाओं का अभ्यास, जहाज संचालन, नौवहन, और हेलिकॉप्टर संचालन जैसे महत्वपूर्ण गतिविधियां शामिल थीं। इन अभ्यासों ने दोनों नौसेनाओं की क्षमताओं को परखा और समुद्री संचालन में उनकी दक्षता को बढ़ाया।

SLINEX का इतिहास

SLINEX अभ्यास श्रृंखला की शुरुआत 2005 में हुई थी, और तब से इसे नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है। यह अभ्यास भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सुरक्षा और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। SLINEX 24 ने दोनों देशों के बीच समुद्री मैत्री और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा किया।

क्या है SAGAR?

SLINEX 24 ने हिंद महासागर क्षेत्र में एक सुरक्षित और नियम-आधारित समुद्री डोमेन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह अभ्यास भारत सरकार की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) पहल को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत कदम है। यह न केवल भारत और श्रीलंका के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को भी बढ़ावा देता है।

भारत और श्रीलंका के इस नौसैनिक अभ्यास ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और मैत्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। विशेष बलों के आपसी प्रशिक्षण और संचालन ने यह दर्शाया कि कैसे दोनों देशों की नौसेनाएं मिलकर सामुद्रिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं। SLINEX 24 ने हिंद महासागर क्षेत्र में साझा सुरक्षा और स्थिरता की दिशा में एक नई मिसाल कायम की है।

SLINEX 24 का आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच सामरिक साझेदारी और सहयोग की एक झलक प्रस्तुत करता है। यह अभ्यास न केवल वर्तमान चुनौतियों से निपटने की तैयारी करता है, बल्कि भविष्य की समुद्री सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।

Maha Kumbh 2025: भारतीय वायुसेना और सेना की तैयारियां जोरों पर, लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार प्रयागराज

Maha Kumbh 2025: IAF and Indian Army Gear Up to Welcome Millions in Prayagraj
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Maha Kumbh 2025: प्रयागराज में अगले साल आयोजित होने वाले महाकुंभ मेला 2025 की तैयारियां ज़ोरों पर हैं। महाकुंभ का आयोजन हर 12 साल में होता है। इसे दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। अगले साल भी गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। वहीीं इस महाकुंभ को सफल बनाने के लिए भारतीय वायुसेना और भारतीय सेना भी जी जान से जुटी हुई हैं। वायुसेना और सेना का उद्देश्य इस आयोजन को न केवल सुरक्षित बल्कि एक यादगार अनुभव बनाना है।

Maha Kumbh 2025: IAF and Indian Army Gear Up to Welcome Millions in Prayagraj
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Maha Kumbh 2025: भारतीय वायुसेना ने की जबरदस्त तैयारियां

भारतीय वायुसेना ने मेले के दौरान 24 घंटे की सेवाएं देने का वादा किया है। प्रयागराज का एयरफोर्स स्टेशन बमरौली इस आयोजन का मुख्य केंद्र बनेगा, जहां 20 दिसंबर 2024 से 28 फरवरी 2025 तक नागरिक और चार्टर्ड उड़ानों का संचालन होगा। बमरौली स्टेशन पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम को CAT-II मानकों पर अपग्रेड किया गया है, ताकि कम विजिबिलिटी वाले सर्दियों के मौसम में भी उड़ानें सुचारू रूप से ऑपरेट हो सकें। इसके अलावा, वायुसेना ने प्रयागराज में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में भी अहम भूमिका निभाई है। जिसमें प्रयागराज में चार-लेन की सड़क और बेगम बाजार में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शामिल है। वायुसेना ने इस विकास कार्य के लिए अपनी जमीन भी ट्रांसफर की है और हवाई पट्टी की लंबाई को बढ़ाया है।

महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में किसी भी प्रकार की इमरजेंसी को देखते हुए वायुसेना ने मेला स्थल पर एक रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन टीम तैनात की है। यह टीम आधुनिक उपकरणों और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस होगी, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद दी जा सके। इस दौरान वायुसेना का ध्यान न केवल हवाई यातायात को सुगम बनाने पर होगा, बल्कि आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता प्रदान करने पर भी होगा। वायुसेना की प्रतिबद्धता को लेकर प्रयागराज में रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क अधिकारी ग्रुप कैप्टन समीर गंगाखेड़कर ने कहा कि भारतीय वायुसेना की राष्ट्रीय सेवा, आपदा प्रबंधन और जनता की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

Maha Kumbh 2025: भारतीय सेना ने बनाया 50-बेड का अस्पताल

भारतीय सेना ने भी महाकुंभ के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए प्रयागराज के सैन्य अस्पताल में 50-बेड की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा, पुराने छावनी क्षेत्र में आपातकालीन स्थितियों के लिए 45 अतिरिक्त बेड का प्रबंध किया गया है। सेना ने मेला स्थल पर एक क्लास-1 मेडिकल असिस्टेंस पोस्ट स्थापित की है, जो घटनास्थल पर ही प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन सेवाएं प्रदान करेगी। इसके अलावा, ऑर्डनेंस डिपो फोर्ट में एक 24 घंटे कार्यरत मोबाइल निकासी टीम भी तैनात की गई है, जिसमें पांच बेड हैं, जिनमें से दो वेंटिलेटर से लैस हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति में तीर्थयात्रियों को त्वरित और प्रभावी सहायता मिले।

Defence Ministry IAF: भारतीय वायुसेना की कमियों को दूर करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने बनाई उच्चस्तरीय समिति

महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल भारत के लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक और भक्त यहां आते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के विशेष उपाय किए हैं। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती यह सुनिश्चित करेगी कि हर तीर्थयात्री को सुरक्षित अनुभव मिले। यातायात प्रबंधन के लिए विशेष मार्ग और पार्किंग सुविधाओं की व्यवस्था की गई है, ताकि मेला क्षेत्र और आसपास के इलाकों में भीड़भाड़ न हो।

महाकुंभ मेला, जो 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी 2025 तक चलेगा, न केवल धार्मिक महत्व का आयोजन है, बल्कि यह भारत की सेवा और समर्पण का भी प्रतीक है। वायुसेना और सेना के योगदान से यह आयोजन न केवल सुरक्षित बनेगा, बल्कि यह लाखों लोगों के लिए एक अद्भुत और यादगार अनुभव भी होगा। यह मेला भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने का एक मंच बनेगा, जहां आस्था और सेवा का संगम होगा।

Indian Navy Warships: भारतीय नौसेना के लिए नया साल होगा खास, 2025 में दो वारशिप और एक पनडुब्बी होगी कमीशन

INS Tushil: Indian Navy to Commission Stealth Frigate, Destroyer Surat & Submarine Vagsheer in 2025

Indian Navy Warships: भारतीय नौसेना के लिए नए साल की शुरुआत बड़ी उपलब्धियों के साथ होने जा रहीहै। हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की बढ़ती गतिविधियों और इसके प्रभाव को संतुलित करने के लिए जनवरी में दो स्वदेशी फ्रंटलाइनर युद्धपोत और एक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी भारतीय नौसेना में कमीशन के लिए तैयार है। इसके अलावा, रूस निर्मित फ्रिगेट INS तुशील भी भारत पहुंचने की तैयारी में है।

INS Tushil: Indian Navy to Commission Stealth Frigate, Destroyer Surat & Submarine Vagsheer in 2025

Indian Navy Warships: स्वदेशी युद्धपोत ‘सूरत’ और ‘नीलगिरी’

नए कमीशन किए जाने वाले युद्धपोतों में सबसे बड़ा होगा 7,400 टन वजन वाला गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर ‘सूरत’। इसके बाद 6,670 टन वजन वाला स्टील्थ फ्रिगेट ‘नीलगिरी’ और 1,600 टन वजनी पनडुब्बी ‘वाग्शीर’। ये सभी एडवांस सेंसर और हथियारों से लैस हैं, जो  इन्हें बेहद घातक बनाते हैं। हाल ही में मुंबई स्थित मझगांव डॉक (MDL) ने सूरत और नीलगिरी को नौसेना को सौंप दिया है।

Indian Navy Project-76: क्या है भारतीय नौसेना का ये खास Project-76? समुद्र के नीचे चीन-पाकिस्तान को टक्कर देने की कर रही बड़ी तैयारी!

सूरत: पहला AI-एनेबल्ड युद्धपोत

‘सूरत’ भारतीय नौसेना का पहला ऐसा युद्धपोत है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस है। इस युद्धपोत के आने से नौसेना की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी में कई गुना इजाफा होगा। इसमें 72% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसकी लंबाई 164 मीटर है और यह 4,000 नॉटिकल मील की दूरी तक सफर कर सकता है। ‘सूरत’ को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, 76mm सुपर रैपिड गन और पनडुब्बी रोधी हथियार जैसे रॉकेट और टॉरपीडो से लैस किया गया है।

नीलगिरी: मल्टी-रोल फ्रिगेट

‘नीलगिरी’ सात मल्टी-रोल फ्रिगेट्स में से पहला है, जो प्रोजेक्ट-17ए के तहत निर्मित हो रहा है। इनमें से चार को मुंबई के मझगांव डॉक (MDL) और तीन को कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में बनाया जा रहा है। लगभग 45,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस फ्रिगेट को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि दुश्मनों के लिए खोज पाना बेहद कठिन होगा। सभी मल्टी-रोल सात फ्रिगेट्स को 2026 के अंत तक तैयार कर दिया जाएगा।

INS Tushil: New Multi-Role Stealth Guided Missile Frigate Joins the Indian Navy

Indian Navy Warships: पनडुब्बी ‘वाग्शीर’: स्कॉर्पीन श्रेणी की अंतिम पनडुब्बी

‘वाग्शीर’ फ्रांसीसी मूल की स्कॉर्पीन या कलवरी-श्रेणी की छठवीं और अंतिम पनडुब्बी है, जिसे मझगांव डॉक पर 23,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट-75 के तहत निर्मित किया गया है। भारत और फ्रांस वर्तमान में तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए समझौता वार्ता कर रहे हैं, जिनमें से पहली पनडुब्बी छह साल में तैयार होगी। पहली पनडुब्बी छह वर्षों में तैयार होगी, और उसके बाद हर साल एक नई पनडुब्बी शामिल की जाएगी।

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INS तुशील: रूस निर्मित फ्रिगेट का आगमन

रूसी निर्मित 3,900 टन वजनी फ्रिगेट INS तुशील बाल्टिक सागर, उत्तरी सागर, अटलांटिक महासागर और हिंद महासागर से होकर भारत आ रही है। इसके बाद मार्च-अप्रैल 2025 में रूस से एक और फ्रिगेट ‘तामल’ की डिलीवरी होगी। इसके बाद मार्च-अप्रैल 2025 में एक और रूसी फ्रिगेट ‘तामल’ की डिलीवरी की जाएगी।

भारतीय नौसेना वर्तमान में 251 विमानों और हेलीकॉप्टरों के साथ 130 से अधिक युद्धपोतों का संचालन कर रही है। इसके साथ ही, भारतीय शिपयार्ड में 60 युद्धपोत और जहाज निर्माणाधीन हैं। भविष्य के लिए 31 और युद्धपोतों का अप्रूवल हो चुका है, जिसमें सात नई पीढ़ी के फ्रिगेट, आठ कॉर्वेट और छह स्टील्थ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल हैं।

हालांकि, 2030 तक भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की संख्या केवल 155-160 तक पहुंच पाएगी। इसकी वजह भारतीय शिपयार्ड में निर्माण की धीमी गति और पुराने जहाजों का चरणबद्ध तरीके से हटना है।

चीन से मुकाबला: एक बड़ी चुनौती

चीन अपनी नौसैनिक ताकत को तेजी से बढ़ा रहा है और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को जारी रखे हुए है। चीन के पास वर्तमान में 370 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां हैं, जिनमें से 140 प्रमुख सरफेस फाइटर जेट हैं,, जो भारतीय नौसेना की तुलना में बहुत अधिक हैं।

वहीं, चीन नए युद्धपोतों और पनडुब्बियों को रिकॉर्ड समय में तैयार कर रहा है। इसके साथ ही, चीन ने अपनी नौसैनिक ताकत को बढ़ाने के लिए विदेशी ठिकानों की तलाश तेज कर दी है।

भारतीय नौसेना को आने वाले सालों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। आधुनिक युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण में तेजी लाना और नौसैनिक क्षमताओं को अपग्रेड करना समय की मांग है। नए युद्धपोत और पनडुब्बियां नौसेना की ताकत बढ़ाने में मदद करेंगी, लेकिन चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले यह प्रयास काफी धीमा है।

इससे यह साफ है कि भारत को अपनी समुद्री रणनीति में तेजी लानी होगी ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखा जा सके। प्रोजेक्ट-15बी और प्रोजेक्ट-17ए जैसे योजनाएं सही दिशा में कदम हैं, लेकिन इन्हें तय समय सीमा के भीतर पूरा करना भी जरूरी है।